नरक बनी शहर की लाइफलाइन विकास की भेंट चढ़ीं सड़कें, रमना गेट पर ताला जड़कर प्रशासन ने जनता को दी 'दोहरी सजा' बेतिया शहर के हृदयस्थल कहे जाने वाले मीना बाजार से हॉस्पिटल रोड और रमना मुख्य द्वार की ओर जाने वाली सड़क इन दिनों आम जनता के लिए किसी दुःस्वप्न से कम नहीं है। विकास के नाम पर निर्माणाधीन छोड़ी गई यह सड़क पूरी तरह बदहाली का शिकार हो चुकी है। सड़क पर लबालब भरे गंदे पानी और कीचड़ ने इसे एक खतरनाक जलमार्ग में तब्दील कर दिया है, जहाँ से गुजरना मौत को दावत देने जैसा है। स्थिति इतनी भयावह है कि आए दिन बाइक सवार इस गंदे पानी और छिपे हुए गड्ढों का शिकार होकर चोटिल हो रहे हैं, लेकिन शासन-प्रशासन कुंभकर्णी नींद सोया हुआ है। एक तरफ सड़क का आधा हिस्सा बंद होने के कारण लोग 'वन-वे' चलने को मजबूर हैं, जिससे घंटों जाम की स्थिति बनी रहती है, वहीं दूसरी ओर रमना के मुख्य द्वार को बंद कर प्रशासन ने जलते पर घी डालने का काम किया है। इस गेट के बंद होने से नरक बनी शहर की लाइफलाइन विकास की भेंट चढ़ीं सड़कें, रमना गेट पर ताला जड़कर प्रशासन ने जनता को दी 'दोहरी सजा' बेतिया शहर के हृदयस्थल कहे जाने वाले मीना बाजार से हॉस्पिटल रोड और रमना मुख्य द्वार की ओर जाने वाली सड़क इन दिनों आम जनता के लिए किसी दुःस्वप्न से कम नहीं है। विकास के नाम पर निर्माणाधीन छोड़ी गई यह सड़क पूरी तरह बदहाली का शिकार हो चुकी है। सड़क पर लबालब भरे गंदे पानी और कीचड़ ने इसे एक खतरनाक जलमार्ग में तब्दील कर दिया है, जहाँ से गुजरना मौत को दावत देने जैसा है। स्थिति इतनी भयावह है कि आए दिन बाइक सवार इस गंदे पानी और छिपे हुए गड्ढों का शिकार होकर चोटिल हो रहे हैं, लेकिन शासन-प्रशासन कुंभकर्णी नींद सोया हुआ है। एक तरफ सड़क का आधा हिस्सा बंद होने के कारण लोग 'वन-वे' चलने को मजबूर हैं, जिससे घंटों जाम की स्थिति बनी रहती है, वहीं दूसरी ओर रमना के मुख्य द्वार को बंद कर प्रशासन ने जलते पर घी डालने का काम किया है। इस गेट के बंद होने से हॉस्पिटल मे आने जाने वाले लोग और इसी रोड से कई पंचायत के लोग आते जाते रहते और आसपास के रिहायशी इलाकों के हजारों लोगों का जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। जो रास्ता मिनटों में तय होता था,अब उसके लिए लोगों को मीलों का चक्कर लगाना पड़ रहा है। स्थानीय निवासियों में इस अव्यवस्था को लेकर भारी आक्रोश व्याप्त है, क्योंकि निर्माणाधीन सड़क पर पानी निकासी की कोई व्यवस्था न होने से संक्रमण का खतरा भी बढ़ गया है। प्रशासन की इस बेरुखी ने राहगीरों के साथ-साथ स्थानीय दुकानदारों की कमर भी तोड़ दी है, जो इस कीचड़ और अव्यवस्था के बीच अपनी आजीविका चलाने को मजबूर हैं।
नरक बनी शहर की लाइफलाइन विकास की भेंट चढ़ीं सड़कें, रमना गेट पर ताला जड़कर प्रशासन ने जनता को दी 'दोहरी सजा' बेतिया शहर के हृदयस्थल कहे जाने वाले मीना बाजार से हॉस्पिटल रोड और रमना मुख्य द्वार की ओर जाने वाली सड़क इन दिनों आम जनता के लिए किसी दुःस्वप्न से कम नहीं है। विकास के नाम पर निर्माणाधीन छोड़ी गई यह सड़क पूरी तरह बदहाली का शिकार हो चुकी है। सड़क पर लबालब भरे गंदे पानी और कीचड़ ने इसे एक खतरनाक जलमार्ग में तब्दील कर दिया है, जहाँ से गुजरना मौत को दावत देने जैसा है। स्थिति इतनी भयावह है कि आए दिन बाइक सवार इस गंदे पानी और छिपे हुए गड्ढों का शिकार होकर चोटिल हो रहे हैं, लेकिन शासन-प्रशासन कुंभकर्णी नींद सोया हुआ है। एक तरफ सड़क का आधा हिस्सा बंद होने के कारण लोग 'वन-वे' चलने को मजबूर हैं, जिससे घंटों जाम की स्थिति बनी रहती है, वहीं दूसरी ओर रमना के मुख्य द्वार को बंद कर प्रशासन ने जलते पर घी डालने का काम किया है। इस गेट के बंद होने से नरक बनी शहर की लाइफलाइन विकास की भेंट चढ़ीं सड़कें, रमना गेट पर ताला जड़कर प्रशासन ने जनता को दी 'दोहरी सजा' बेतिया शहर के हृदयस्थल कहे जाने वाले मीना बाजार से हॉस्पिटल रोड और रमना मुख्य द्वार की ओर जाने वाली सड़क इन दिनों आम जनता के लिए किसी दुःस्वप्न से कम नहीं है। विकास के नाम पर निर्माणाधीन छोड़ी गई यह सड़क पूरी तरह बदहाली का शिकार हो चुकी है। सड़क पर लबालब भरे गंदे पानी और कीचड़ ने इसे एक खतरनाक जलमार्ग में तब्दील कर दिया है, जहाँ से गुजरना मौत को दावत देने जैसा है। स्थिति इतनी भयावह है कि आए दिन बाइक सवार इस गंदे पानी और छिपे हुए गड्ढों का शिकार होकर चोटिल हो रहे हैं, लेकिन शासन-प्रशासन कुंभकर्णी नींद सोया हुआ है। एक तरफ सड़क का आधा हिस्सा बंद होने के कारण लोग 'वन-वे' चलने को मजबूर हैं, जिससे घंटों जाम की स्थिति बनी रहती है, वहीं दूसरी ओर रमना के मुख्य द्वार को बंद कर प्रशासन ने जलते पर घी डालने का काम किया है। इस गेट के बंद होने से हॉस्पिटल मे आने जाने वाले लोग और इसी रोड से कई पंचायत के लोग आते जाते रहते और आसपास के रिहायशी इलाकों के हजारों लोगों का जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। जो रास्ता मिनटों में तय होता था,अब उसके लिए लोगों को मीलों का चक्कर लगाना पड़ रहा है। स्थानीय निवासियों में इस अव्यवस्था को लेकर भारी आक्रोश व्याप्त है, क्योंकि निर्माणाधीन सड़क पर पानी निकासी की कोई व्यवस्था न होने से संक्रमण का खतरा भी बढ़ गया है। प्रशासन की इस बेरुखी ने राहगीरों के साथ-साथ स्थानीय दुकानदारों की कमर भी तोड़ दी है, जो इस कीचड़ और अव्यवस्था के बीच अपनी आजीविका चलाने को मजबूर हैं।
- बीते दिनों मोतिहारी में शराब पीकर तीन लोगों की मौत हो गई जहां परिवार के लोगों से मिले जनसुराज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती सरकार से सवाल1
- नरक बनी शहर की लाइफलाइन विकास की भेंट चढ़ीं सड़कें, रमना गेट पर ताला जड़कर प्रशासन ने जनता को दी 'दोहरी सजा' बेतिया शहर के हृदयस्थल कहे जाने वाले मीना बाजार से हॉस्पिटल रोड और रमना मुख्य द्वार की ओर जाने वाली सड़क इन दिनों आम जनता के लिए किसी दुःस्वप्न से कम नहीं है। विकास के नाम पर निर्माणाधीन छोड़ी गई यह सड़क पूरी तरह बदहाली का शिकार हो चुकी है। सड़क पर लबालब भरे गंदे पानी और कीचड़ ने इसे एक खतरनाक जलमार्ग में तब्दील कर दिया है, जहाँ से गुजरना मौत को दावत देने जैसा है। स्थिति इतनी भयावह है कि आए दिन बाइक सवार इस गंदे पानी और छिपे हुए गड्ढों का शिकार होकर चोटिल हो रहे हैं, लेकिन शासन-प्रशासन कुंभकर्णी नींद सोया हुआ है। एक तरफ सड़क का आधा हिस्सा बंद होने के कारण लोग 'वन-वे' चलने को मजबूर हैं, जिससे घंटों जाम की स्थिति बनी रहती है, वहीं दूसरी ओर रमना के मुख्य द्वार को बंद कर प्रशासन ने जलते पर घी डालने का काम किया है। इस गेट के बंद होने से हॉस्पिटल मे आने जाने वाले लोग और इसी रोड से कई पंचायत के लोग आते जाते रहते और आसपास के रिहायशी इलाकों के हजारों लोगों का जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। जो रास्ता मिनटों में तय होता था,अब उसके लिए लोगों को मीलों का चक्कर लगाना पड़ रहा है। स्थानीय निवासियों में इस अव्यवस्था को लेकर भारी आक्रोश व्याप्त है, क्योंकि निर्माणाधीन सड़क पर पानी निकासी की कोई व्यवस्था न होने से संक्रमण का खतरा भी बढ़ गया है। प्रशासन की इस बेरुखी ने राहगीरों के साथ-साथ स्थानीय दुकानदारों की कमर भी तोड़ दी है, जो इस कीचड़ और अव्यवस्था के बीच अपनी आजीविका चलाने को मजबूर हैं।1
- नीतीश कुमार के गृह जिला नालंदा में हुई घटना पर जन सुराज नेता मनीष कश्यप का बयान!!1
- शिक्षा केवल किताबी ज्ञान नहीं, चरित्र निर्माण का माध्यम: डॉ. एन.एन. शाही तीन दिवसीय कार्यशाला का समापन, मेधावी छात्र-छात्राओं को किया गया सम्मानित बेतिया। चनायन बान स्थित शाही रामलली हरि माधव सरस्वती विद्या मंदिर के प्रांगण में आयोजित तीन दिवसीय वार्षिक कार्यशाला का भव्य समापन हुआ। इस अवसर पर विद्यालय का वार्षिक परीक्षाफल घोषित किया गया तथा मेधावी छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत कर उनका उत्साहवर्धन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार एवं पूजन के साथ हुई, जिसके बाद शैक्षणिक सत्र 2026-27 का विधिवत शुभारंभ किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि प्रख्यात चिकित्सक डॉ. एन. एन. शाही रहे, जबकि अध्यक्षता उपाध्यक्ष ओम प्रकाश सिंह ने की। विद्यालय के प्रधानाचार्य संजय कुमार एवं आचार्य बंधु-भगिनी ने अतिथियों का स्वागत किया। अपने संबोधन में डॉ. एन.एन. शाही ने कहा कि शिक्षा केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह चरित्र निर्माण का सशक्त माध्यम है। उन्होंने छात्रों को पदक पहनाकर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। परीक्षाफल घोषित होते ही विद्यालय परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। विभिन्न कक्षाओं में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को मंच पर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर जिला पेट्रोलियम एसोसिएशन के अध्यक्ष अरुण ठाकुर भी मौजूद रहे। उन्होंने विद्यार्थियों को अनुशासन का महत्व बताते हुए जीवन में सफलता के लिए कड़ी मेहनत और नियमों के पालन पर बल दिया। समापन समारोह में शिक्षा, संस्कार और अनुशासन का संदेश देते हुए कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन किया गया।1
- चनयन बाँध, पश्चिम चम्पारण: स्थानीय शाही रामलली हरि माधव सरस्वती विद्या मंदिर के प्रांगण में आयोजित तीन दिवसीय वार्षिक कार्यशाला का आज भव्य समापन हुआ। इस अवसर पर विद्यालय का वार्षिक परीक्षाफल घोषित किया गया और मेधावी छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत कर उनका उत्साहवर्धन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय की परंपरा के अनुसार वैदिक मंत्रोच्चार और पूजन के साथ हुई, जिसके बाद शैक्षणिक सत्र 2026-27 का विधिवत शुभारंभ किया गया। गणमान्य अतिथियों का सानिध्य समारोह के मुख्य अतिथि विद्यालय के भूमिदाता एवं प्रख्यात चिकित्सक डॉ. एन. एन. शाही रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता उपाध्यक्ष श्री ओम प्रकाश सिंह ने की। विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री संजय कुमार और समस्त आचार्य बंधु-भगिनी ने अतिथियों का स्वागत किया। डॉ. शाही ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि चारित्रिक निर्माण का माध्यम है। उन्होंने बच्चों को पदक पहनाकर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं का सम्मान परीक्षाफल की घोषणा होते ही विद्यालय परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। विभिन्न कक्षाओं में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले भैया-बहनों को मंच पर सम्मानित किया गया। विजेताओं की सूची इस प्रकार रही: प्राथमिक विभाग: अरुण (बालाजी) वर्ग में रविकिशन कुमार ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। वर्ग 1 में जिया सिंह ने प्रथम, सनी कुमार ने द्वितीय और अविनाश कुमार ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। प्रभात वर्ग में यश कुमार प्रथम, रोहित कुमार द्वितीय और सक्षम शांतनु तृतीय स्थान पर रहे। मध्यम विभाग: वर्ग 2 में आराध्य ने प्रथम और अंकुश कुमार ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। वर्ग 2 और 3 के सम्मिलित परिणामों में अभिराज कुमार ने भी श्रेष्ठ प्रदर्शन किया। वर्ग 3 में शिवानी कुमारी, राजनंदनी कुमारी, पलक कुमारी और नितेश कुमार ने अपनी मेधा का परिचय दिया। वर्ग 4 में सौरभ कुमार और अंकिता कुमारी ने अपनी श्रेणियों में सफलता हासिल की। उच्च विभाग: वर्ग 5 में शौर्य कुमार ने प्रथम, पंकज कुमार ने द्वितीय और राधेश्याम ने तृतीय स्थान प्राप्त कर विद्यालय का मान बढ़ाया। वर्ग 6 में छतीश कुमार प्रथम, आराध्य कुमारी द्वितीय और सत्यम कुमार तृतीय रहे। वर्ग 7 की मेधावी छात्राओं में सुंदरम कुमारी ने प्रथम, अभ्या रसमी ने द्वितीय और रिया राज ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। अंततः वर्ग 8 में सुमित कुमार ने प्रथम, पवन कुमार ने द्वितीय और अंकित कुमार ने तृतीय स्थान हासिल कर अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की। संस्कार और आधुनिकता का संगम पुरस्कार वितरण के पश्चात विद्यालय की विशेष व्यवस्था के अंतर्गत सामूहिक हवन-पूजन का आयोजन किया गया। पवित्र अग्नि में आहुतियां देकर नए शैक्षणिक सत्र की सफलता की प्रार्थना की गई। प्रधानाचार्य श्री संजय कुमार ने बताया कि तीन दिवसीय कार्यशाला के दौरान बच्चों को न केवल विषयों की गहराई समझाई गई, बल्कि उन्हें योग, अनुशासन और नैतिक मूल्यों की शिक्षा भी दी गई। भविष्य की नई राह समारोह के अंत में सभी आचार्य बंधु-भगिनी द्वारा बच्चों को मिठाई बांटी गई। विद्यालय प्रबंधन ने संकल्प लिया कि आगामी सत्र में शिक्षा की गुणवत्ता को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा। इस आयोजन ने न केवल बच्चों में प्रतिस्पर्धा की भावना जगाई, बल्कि उन्हें अपने लक्ष्यों के प्रति और अधिक सजग भी बनाया।4
- मुंबई में मजदूरी करने गए बिहार के मजदूरबिहार के मजदूर की हत्या ना हत्यारा अपने ही बगल का निक1
- जगदीशपुर थाना क्षेत्र के झखरा पंचायत के वार्ड संख्या दो में उस समय मातम और आक्रोश का माहौल फैल गया, जब 21 वर्षीय विनायक चौधरी का शव मुंबई से उसके पैतृक गाँव लाया गया। बालेश्वर चौधरी के इकलौते पुत्र विनायक की 31 मार्च को मुंबई में एक साजिश के तहत निर्मम हत्या कर दी गई थी। इस हृदयविदारक घटना की खबर जैसे ही गाँव पहुंची, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार, विनायक चौधरी करीब पांच महीने पहले गाँव के ही ठेकेदार नागेंद्र चौधरी के साथ रोज़गार की तलाश में मुंबई गया था। परिवार को उम्मीद थी कि वह मेहनत कर घर की जिम्मेदारियों को संभालेगा, लेकिन किसे पता था कि यह सफर उसकी जिंदगी का आखिरी पड़ाव बन जाएगा। मुंबई में संदिग्ध परिस्थितियों में उसकी हत्या कर दी गई। हालांकि मुंबई पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए हत्यारोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, लेकिन इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। शुक्रवार को पुलिस के सहयोग से जैसे ही विनायक का शव गाँव पहुंचा, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। चार बहनों के इकलौते भाई की असमय मौत ने पूरे परिवार को तोड़ कर रख दिया। माँ-बाप के करुण क्रंदन और बहनों की चीत्कार से माहौल गमगीन हो गया। शव को देखने के लिए गाँव में भारी भीड़ उमड़ पड़ी और हर कोई इस दर्दनाक घटना से स्तब्ध नजर आया। घटना ने उस समय और भी भावनात्मक मोड़ ले लिया जब परिजनों और ग्रामीणों ने न्याय की मांग को लेकर शव को ठेकेदार नागेंद्र चौधरी के दरवाजे पर रखकर हंगामा शुरू कर दिया। लोगों का आरोप था कि विनायक को काम के नाम पर बाहर ले जाया गया और वहीं उसकी जान चली गई, इसलिए इस मामले में ठेकेदार की भूमिका की भी गहन जांच होनी चाहिए। घंटों तक चले इस प्रदर्शन के दौरान माहौल तनावपूर्ण बना रहा। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जगदीशपुर थानाध्यक्ष निशी कुमारी और नौतन थाना प्रभारी प्रमोद कुमार पासवान अपने दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे और लोगों को समझा-बुझाकर स्थिति को नियंत्रित किया। स्थानीय जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप के बाद किसी तरह शव को वहां से हटवाया गया और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू कराई गई। बताया जा रहा है कि विनायक की शादी आगामी 21 जून को मोतिहारी के लखौरा में तय हुई थी। घर में शादी की तैयारियां चल रही थीं, लेकिन अब वही घर मातम में डूबा हुआ है। एक हंसते-खेलते युवक की इस तरह साजिशन हत्या ने न सिर्फ एक परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि पूरे गाँव को झकझोर कर रख दिया है। ग्रामीणों की एक ही मांग है—विनायक को न्याय मिले और इस साजिश में शामिल हर व्यक्ति पर सख्त कार्रवाई1
- पूर्णिया सांसद पप्पू यादव पहुंचे नालंदा के नूरसराय जहां बीते दिन हुवे महिला से दुर्व्यवहार के बाद मिले पीड़ित परिवार से सरकार पे गंभीर सवाल1