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हिंदू प्रीमियर लीग चैम्पियंस ट्रॉफी -2 का आयोजन शाहपुरा भैरू लाल लक्षकार कस्बे में पहली बार हो रहे हिंदू प्रीमियर लीग का आयोजन श्री प्रताप सिंह बारहठ राजकीय महाविद्यालय के खेल प्रांगण में दिनांक 19 मार्च 2026 से किया जा रहा है। शाहपुरा स्पोर्ट्स क्लब से अवधेश शर्मा (राधे) ने बताया कि शाहपुरा स्पोर्ट्स क्लब के तत्वाधान में आयोजित हो रहे पहली बार हिंदू प्रीमियर लीग को लेकर लोगों में खुशी एवं उत्साह का माहौल है। हिंदू प्रीमियर लीग के तहत आवेदन प्रक्रिया जारी है, इस टूर्नामेंट में भीलवाड़ा जिले के लगभग 150 खिलाड़ी भाग लेने जा रहे हैं । प्रत्येक लीग मैच 12 ओवर का होगा, सेमीफाइनल व फाइनल मुकाबले 15 ओवर के होंगे। विजेता को 51 000 रुपए एवं उपविजेता को 31000 रुपए एवं ट्रॉफी के साथ सम्मानित किया जाएगा। प्रत्येक मैच में मैन ऑफ द मैच। टूर्नामेंट में मैन ऑफ द सीरीज ओर भी कही आकर्षक इनाम दिये जायेंगे।इस भव्य आयोजन में कही धर्म गुरुओं ओर संतो का भी आशीर्वाद प्राप्त होगा ।

13 hrs ago
user_Bheru lal luxkar
Bheru lal luxkar
Local News Reporter शाहपुरा, भीलवाड़ा, राजस्थान•
13 hrs ago

हिंदू प्रीमियर लीग चैम्पियंस ट्रॉफी -2 का आयोजन शाहपुरा भैरू लाल लक्षकार कस्बे में पहली बार हो रहे हिंदू प्रीमियर लीग का आयोजन श्री प्रताप सिंह बारहठ राजकीय महाविद्यालय के खेल प्रांगण में दिनांक 19 मार्च 2026 से किया जा रहा है। शाहपुरा स्पोर्ट्स क्लब से अवधेश शर्मा (राधे) ने बताया कि शाहपुरा स्पोर्ट्स क्लब के तत्वाधान में आयोजित हो रहे पहली बार हिंदू प्रीमियर लीग को लेकर लोगों में खुशी एवं उत्साह का माहौल है। हिंदू प्रीमियर लीग के तहत आवेदन प्रक्रिया जारी है, इस टूर्नामेंट में भीलवाड़ा जिले के लगभग 150 खिलाड़ी भाग लेने जा रहे हैं । प्रत्येक लीग मैच 12 ओवर का होगा, सेमीफाइनल व फाइनल मुकाबले 15 ओवर के होंगे। विजेता को 51 000 रुपए एवं उपविजेता को 31000 रुपए एवं ट्रॉफी के साथ सम्मानित किया जाएगा। प्रत्येक मैच में मैन ऑफ द मैच। टूर्नामेंट में मैन ऑफ द सीरीज ओर भी कही आकर्षक इनाम दिये जायेंगे।इस भव्य आयोजन में कही धर्म गुरुओं ओर संतो का भी आशीर्वाद प्राप्त होगा ।

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  • हिंदू प्रीमियर लीग चैम्पियंस ट्रॉफी -2 का आयोजन शाहपुरा भैरू लाल लक्षकार कस्बे में पहली बार हो रहे हिंदू प्रीमियर लीग का आयोजन श्री प्रताप सिंह बारहठ राजकीय महाविद्यालय के खेल प्रांगण में दिनांक 19 मार्च 2026 से किया जा रहा है। शाहपुरा स्पोर्ट्स क्लब से अवधेश शर्मा (राधे) ने बताया कि शाहपुरा स्पोर्ट्स क्लब के तत्वाधान में आयोजित हो रहे पहली बार हिंदू प्रीमियर लीग को लेकर लोगों में खुशी एवं उत्साह का माहौल है। हिंदू प्रीमियर लीग के तहत आवेदन प्रक्रिया जारी है, इस टूर्नामेंट में भीलवाड़ा जिले के लगभग 150 खिलाड़ी भाग लेने जा रहे हैं । प्रत्येक लीग मैच 12 ओवर का होगा, सेमीफाइनल व फाइनल मुकाबले 15 ओवर के होंगे। विजेता को 51 000 रुपए एवं उपविजेता को 31000 रुपए एवं ट्रॉफी के साथ सम्मानित किया जाएगा। प्रत्येक मैच में मैन ऑफ द मैच। टूर्नामेंट में मैन ऑफ द सीरीज ओर भी कही आकर्षक इनाम दिये जायेंगे।इस भव्य आयोजन में कही धर्म गुरुओं ओर संतो का भी आशीर्वाद प्राप्त होगा ।
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    हिंदू प्रीमियर लीग चैम्पियंस ट्रॉफी -2 का आयोजन 
शाहपुरा भैरू लाल लक्षकार 
कस्बे में पहली बार हो रहे हिंदू प्रीमियर लीग का आयोजन श्री प्रताप सिंह बारहठ राजकीय महाविद्यालय के खेल प्रांगण में  दिनांक 19 मार्च 2026 से किया जा रहा है।
शाहपुरा स्पोर्ट्स क्लब से अवधेश शर्मा (राधे) ने बताया कि शाहपुरा स्पोर्ट्स क्लब के तत्वाधान में आयोजित हो रहे पहली बार हिंदू प्रीमियर लीग  को लेकर लोगों में खुशी एवं उत्साह का माहौल है। हिंदू प्रीमियर लीग के तहत आवेदन प्रक्रिया जारी है, इस टूर्नामेंट में भीलवाड़ा जिले के लगभग 150 खिलाड़ी भाग लेने जा रहे हैं । प्रत्येक लीग मैच 12 ओवर का होगा, सेमीफाइनल व फाइनल मुकाबले 15 ओवर के होंगे।  विजेता को 51 000 रुपए एवं उपविजेता को 31000 रुपए एवं ट्रॉफी के साथ सम्मानित किया जाएगा। प्रत्येक मैच में मैन ऑफ द मैच।   टूर्नामेंट में मैन ऑफ द सीरीज ओर भी कही आकर्षक इनाम दिये जायेंगे।इस भव्य आयोजन में कही धर्म गुरुओं ओर संतो का भी आशीर्वाद प्राप्त होगा ।
    user_Bheru lal luxkar
    Bheru lal luxkar
    Local News Reporter शाहपुरा, भीलवाड़ा, राजस्थान•
    13 hrs ago
  • हिन्दुस्तान जिंक माइनस रामपुरा Aagucha भीलवाड़ा
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    हिन्दुस्तान जिंक माइनस रामपुरा Aagucha  भीलवाड़ा
    user_Ashok Kumar Regar
    Ashok Kumar Regar
    Auto market फूलिया कलां, भीलवाड़ा, राजस्थान•
    8 hrs ago
  • Post by Narendra kumar Regar
    1
    Post by Narendra kumar Regar
    user_Narendra kumar Regar
    Narendra kumar Regar
    Physiotherapist भीलवाड़ा, भीलवाड़ा, राजस्थान•
    6 hrs ago
  • भीलवाड़ा = राजस्थान विधानसभा में पंचायतीराज एवं ग्रामीण विकास विषय पर चर्चा के दौरान भीलवाड़ा विधायक अशोक कोठारी ने राज्य में चरागाह एवं शमलात भूमि के संरक्षण, पुनर्जीवन और समग्र विकास को लेकर विस्तृत प्रस्ताव प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि राजस्थान तभी प्रगतिशील बनेगा जब किसान और पशुधन समृद्ध होंगे, और इसकी आधारशिला मजबूत चरागाह व्यवस्था है। विधायक कोठारी ने कहा कि रियासत काल में गोचर भूमि गौवंश संरक्षण के उद्देश्य से आरक्षित की गई थी, ताकि प्रत्येक गांव का पशुधन चारे और पानी की उपलब्धता से सुरक्षित रह सके। किंतु वर्तमान में अनेक स्थानों पर अतिक्रमण, जल संकट तथा अंग्रेजी बबूल और लेन्टाना जैसी विदेशी प्रजातियों के फैलाव के कारण चरागाह भूमि बंजर होती जा रही है, जिससे पशुपालकों और किसानों की आय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा बजट में की गई घोषणाओं का स्वागत करते हुए कहा कि चरागाह, बंजर, बीहड़, श्मशान एवं अन्य सरकारी भूमि के सीमांकन और अतिक्रमण मुक्ति हेतु जीआईएस (GIS) आधारित डिजिटल रिकॉर्ड तैयार कर “मरुधरा राजभूमि डिजिटल एटलस” बनाने की घोषणा सराहनीय कदम है। साथ ही लगभग 5 हजार करोड़ रुपये की राशि से पर्यावरण संरक्षण, वर्षा जल संचयन एवं चरागाह विकास जैसे कार्यों को बढ़ावा देने की योजना ग्रामीण विकास की दिशा में महत्वपूर्ण सिद्ध होगी। विधायक कोठारी ने सदन को अवगत कराया कि प्रदेश में 20 लाख हेक्टेयर से अधिक शमलात भूमि उपलब्ध है, जिसमें गोचर, नाड़ी, तालाबों की पाल, ओरण, देवबनी, चारणोट आदि क्षेत्र शामिल हैं। लंबे समय से उपेक्षा और अतिक्रमण के कारण इन क्षेत्रों की उत्पादकता घटती गई है, जिसका सीधा प्रभाव पशुधन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। उन्होंने बताया कि अब सरकार के प्रयासों से सकारात्मक परिवर्तन दिखाई देने लगे हैं। बीज बैंक की पहल के माध्यम से गांव-गांव में देशी घास एवं पौधों के बीज एकत्र कर वर्षा ऋतु में चरागाहों और जल स्रोतों के आसपास रोपण किया जा रहा है। ग्राम पंचायतों, स्थानीय समुदायों और युवाओं की सक्रिय भागीदारी से कई स्थानों पर हरियाली लौटने लगी है। उन्होंने कहा कि भीलवाडा में लगभग 200 चरागाह विकास कार्य पंचायतों और सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से प्रगति पर हैं। जिले के मांडलगढ़ तहसील के अमरतिया गांव का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा की वहा पर भूमिगत जलस्तर, जो पहले 100 फीट से नीचे चला गया था, अब 20-25 फीट पर स्थिर है। पिछले 25 वर्षों से गांव में नई बोरिंग की आवश्यकता नहीं पड़ी है। इससे न केवल जल संकट कम हुआ है, बल्कि पशुपालकों की आय और दुग्ध उत्पादन में भी वृद्धि हुई है। विधायक कोठारी ने मांग की कि चरागाह विकास एवं जल संरक्षण कार्यों को ग्रामीण पारिस्थितिकी आधारभूत संरचना के रूप में मान्यता दी जाए तथा इन्हें राज्य स्तरीय अभियान का रूप दिया जाए। इसी संदर्भ में उन्होंने “दीनदयाल चरागाह विकास योजना” प्रारंभ करने का प्रस्ताव रखा। योजना के अंतर्गत गोचर एवं शमलात भूमि का संरक्षण, देशी चारा प्रजातियों का संवर्धन, नाड़ी-तालाब-बावड़ी संरक्षण, वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण तथा ग्रामीण समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करने का सुझाव दिया गया। प्रथम चरण में राज्य के 10 हजार गांवों का चयन कर चरणबद्ध कार्ययोजना लागू करने की मांग की गई। उन्होंने कहा कि यह पहल केवल भूमि सुधार का विषय नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ पर्यावरण, सुरक्षित जल स्रोत और सशक्त ग्रामीण अर्थव्यवस्था का संकल्प है। यदि संगठित और निरंतर प्रयास किए जाएं तो राजस्थान की भूमि पुनः हरी-भरी हो सकती है और किसान-पशुपालकों की आय में स्थायी वृद्धि की जा सकती है।
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    भीलवाड़ा = राजस्थान विधानसभा में  पंचायतीराज एवं ग्रामीण विकास विषय पर चर्चा के दौरान भीलवाड़ा विधायक अशोक कोठारी ने राज्य में चरागाह एवं शमलात भूमि के संरक्षण, पुनर्जीवन और समग्र विकास को लेकर विस्तृत प्रस्ताव प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि राजस्थान तभी प्रगतिशील बनेगा जब किसान और पशुधन समृद्ध होंगे, और इसकी आधारशिला मजबूत चरागाह व्यवस्था है।
विधायक कोठारी ने कहा कि रियासत काल में गोचर भूमि गौवंश संरक्षण के उद्देश्य से आरक्षित की गई थी, ताकि प्रत्येक गांव का पशुधन चारे और पानी की उपलब्धता से सुरक्षित रह सके। किंतु वर्तमान में अनेक स्थानों पर अतिक्रमण, जल संकट तथा अंग्रेजी बबूल और लेन्टाना जैसी विदेशी प्रजातियों के फैलाव के कारण चरागाह भूमि बंजर होती जा रही है, जिससे पशुपालकों और किसानों की आय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
उन्होंने राज्य सरकार द्वारा बजट में की गई घोषणाओं का स्वागत करते हुए कहा कि चरागाह, बंजर, बीहड़, श्मशान एवं अन्य सरकारी भूमि के सीमांकन और अतिक्रमण मुक्ति हेतु जीआईएस (GIS) आधारित डिजिटल रिकॉर्ड तैयार कर “मरुधरा राजभूमि डिजिटल एटलस” बनाने की घोषणा सराहनीय कदम है। साथ ही लगभग 5 हजार करोड़ रुपये की राशि से पर्यावरण संरक्षण, वर्षा जल संचयन एवं चरागाह विकास जैसे कार्यों को बढ़ावा देने की योजना ग्रामीण विकास की दिशा में महत्वपूर्ण सिद्ध होगी।
विधायक कोठारी ने सदन को अवगत कराया कि प्रदेश में 20 लाख हेक्टेयर से अधिक शमलात भूमि उपलब्ध है, जिसमें गोचर, नाड़ी, तालाबों की पाल, ओरण, देवबनी, चारणोट आदि क्षेत्र शामिल हैं। लंबे समय से उपेक्षा और अतिक्रमण के कारण इन क्षेत्रों की उत्पादकता घटती गई है, जिसका सीधा प्रभाव पशुधन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ा है।
उन्होंने बताया कि अब सरकार के प्रयासों से सकारात्मक परिवर्तन दिखाई देने लगे हैं। बीज बैंक की पहल के माध्यम से गांव-गांव में देशी घास एवं पौधों के बीज एकत्र कर वर्षा ऋतु में चरागाहों और जल स्रोतों के आसपास रोपण किया जा रहा है। ग्राम पंचायतों, स्थानीय समुदायों और युवाओं की सक्रिय भागीदारी से कई स्थानों पर हरियाली लौटने लगी है।
उन्होंने कहा कि भीलवाडा में  लगभग 200 चरागाह विकास कार्य पंचायतों और सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से प्रगति पर हैं।  जिले  के मांडलगढ़ तहसील  के अमरतिया गांव का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा की वहा पर  भूमिगत जलस्तर, जो पहले 100 फीट से नीचे चला गया था, अब 20-25 फीट पर स्थिर है। पिछले 25 वर्षों से गांव में नई बोरिंग की आवश्यकता नहीं पड़ी है। इससे न केवल जल संकट कम हुआ है, बल्कि पशुपालकों की आय और दुग्ध उत्पादन में भी वृद्धि हुई है।
विधायक कोठारी ने मांग की कि चरागाह विकास एवं जल संरक्षण कार्यों को ग्रामीण पारिस्थितिकी आधारभूत संरचना के रूप में मान्यता दी जाए तथा इन्हें राज्य स्तरीय अभियान का रूप दिया जाए।
इसी संदर्भ में उन्होंने “दीनदयाल चरागाह विकास योजना” प्रारंभ करने का प्रस्ताव रखा। योजना के अंतर्गत गोचर एवं शमलात भूमि का संरक्षण, देशी चारा प्रजातियों का संवर्धन, नाड़ी-तालाब-बावड़ी संरक्षण, वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण तथा ग्रामीण समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करने का सुझाव दिया गया। प्रथम चरण में राज्य के 10 हजार गांवों का चयन कर चरणबद्ध कार्ययोजना लागू करने की मांग की गई।
उन्होंने कहा कि यह पहल केवल भूमि सुधार का विषय नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ पर्यावरण, सुरक्षित जल स्रोत और सशक्त ग्रामीण अर्थव्यवस्था का संकल्प है। यदि संगठित और निरंतर प्रयास किए जाएं तो राजस्थान की भूमि पुनः हरी-भरी हो सकती है और किसान-पशुपालकों की आय में स्थायी वृद्धि की जा सकती है।
    user_Dev karan Mali
    Dev karan Mali
    भीलवाड़ा, भीलवाड़ा, राजस्थान•
    7 hrs ago
  • Post by KHABRON KA SAFAR NEWS
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    Post by KHABRON KA SAFAR NEWS
    user_KHABRON KA SAFAR NEWS
    KHABRON KA SAFAR NEWS
    पत्रकार Sarwar, Ajmer•
    7 hrs ago
  • *जिला सीमा बदलने के प्रस्ताव पर उठा विवाद, क्षेत्राधिकार विवाद को लेकर केकड़ी में अस्मिता की लड़ाई, अधिवक्ताओं ने दी आंदोलन की चेतावनी* *केकड़ी 26 फरवरी (पब्लिक बोलेगी न्यूज़ नेटवर्क )* *भिनाय उपखण्ड के दीवानी एवं फौजदारी प्रकरणों का क्षेत्राधिकार केकड़ी में ही यथावत रखने की मांग को लेकर बार एसोसिएशन केकड़ी ने महामहिम राज्यपाल के नाम ज्ञापन प्रेषित किया है। ज्ञापन उपखण्ड अधिकारी, केकड़ी के माध्यम से भेजा गया।* *ज्ञापन में बताया गया कि केकड़ी में वर्तमान में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश के दो न्यायालय संचालित हैं, जिनके अंतर्गत केकड़ी, सावर, सरवाड़ एवं भिनाय थाना क्षेत्रों का संपूर्ण न्यायिक क्षेत्राधिकार आता है। केकड़ी में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश के प्रथम न्यायालय की स्थापना वर्ष 1989-90 में कैंप न्यायालय के रूप में हुई थी, जिसे वर्ष 1997 के आसपास स्थायी न्यायालय का दर्जा दिया गया। इसके बाद प्रकरणों की बढ़ती संख्या को देखते हुए वर्ष 2013-14 में द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश न्यायालय की स्थापना की गई। तब से दोनों न्यायालयों में नियमित रूप से कार्य संचालित हो रहा है।* *बार एसोसिएशन के अनुसार, वर्तमान में बिजयनगर क्षेत्र में अपर जिला एवं सत्र न्यायालय की स्थापना का प्रस्ताव राज्य सरकार एवं माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय स्तर पर विचाराधीन है। इस दौरान बिजयनगर के अधिवक्ताओं द्वारा भिनाय क्षेत्र का न्यायिक क्षेत्राधिकार प्रस्तावित बिजयनगर न्यायालय को सौंपे जाने की मांग की जा रही है।* *अधिवक्ताओं का कहना है कि भिनाय उपखण्ड का न्यायिक क्षेत्राधिकार पिछले 50 वर्षों से अधिक समय से केकड़ी में ही रहा है। *वर्तमान में भिनाय क्षेत्र के सभी दीवानी एवं फौजदारी प्रकरण केकड़ी न्यायालयों में विचाराधीन हैं तथा भिनाय क्षेत्र के अधिवक्ता भी नियमित रूप से केकड़ी में ही प्रैक्टिस करते हैं। भिनाय उपखण्ड क्षेत्र की दूरी केकड़ी से 10 किलोमीटर से प्रारंभ होकर अधिकतम 35-40 किलोमीटर तक है, जिससे आमजन को सुविधा रहती है।* *ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि भिनाय उपखण्ड वर्तमान में अजमेर जिले में आता है, जबकि बिजयनगर क्षेत्र ब्यावर जिले के अंतर्गत है। ऐसे में एक जिले के अपीलीय क्षेत्राधिकार को दूसरे जिले में स्थानांतरित करना न्यायोचित नहीं होगा। पूर्व में एडीएम न्यायालय में भी भिनाय संबंधी मामलों की सुनवाई का अधिकार केकड़ी में ही था।* *बार एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि भिनाय उपखण्ड को बिजयनगर न्यायालय के क्षेत्राधिकार में जोड़े जाने का कोई निर्णय लिया जाता है, तो यह क्षेत्र के नागरिकों एवं अधिवक्ताओं के साथ अन्याय होगा। ऐसी स्थिति में बार एसोसिएशन केकड़ी आंदोलन का रास्ता अपनाने को बाध्य होगी।* *बार एसोसिएशन केकड़ी के अध्यक्ष सीताराम कुमावत के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने यह ज्ञापन सौंपा।*
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    *जिला सीमा बदलने के प्रस्ताव पर उठा विवाद, क्षेत्राधिकार विवाद को लेकर केकड़ी में अस्मिता की लड़ाई, अधिवक्ताओं ने दी आंदोलन की चेतावनी*
*केकड़ी 26 फरवरी (पब्लिक बोलेगी न्यूज़ नेटवर्क )*
*भिनाय उपखण्ड के दीवानी एवं फौजदारी प्रकरणों का क्षेत्राधिकार केकड़ी में ही यथावत रखने की मांग को लेकर बार एसोसिएशन केकड़ी ने महामहिम राज्यपाल के नाम ज्ञापन प्रेषित किया है। ज्ञापन उपखण्ड अधिकारी, केकड़ी के माध्यम से भेजा गया।*
*ज्ञापन में बताया गया कि केकड़ी में वर्तमान में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश के दो न्यायालय संचालित हैं, जिनके अंतर्गत केकड़ी, सावर, सरवाड़ एवं भिनाय थाना क्षेत्रों का संपूर्ण न्यायिक क्षेत्राधिकार आता है। केकड़ी में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश के प्रथम न्यायालय की स्थापना वर्ष 1989-90 में कैंप न्यायालय के रूप में हुई थी, जिसे वर्ष 1997 के आसपास स्थायी न्यायालय का दर्जा दिया गया। इसके बाद प्रकरणों की बढ़ती संख्या को देखते हुए वर्ष 2013-14 में द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश न्यायालय की स्थापना की गई। तब से दोनों न्यायालयों में नियमित रूप से कार्य संचालित हो रहा है।*
*बार एसोसिएशन के अनुसार, वर्तमान में बिजयनगर क्षेत्र में अपर जिला एवं सत्र न्यायालय की स्थापना का प्रस्ताव राज्य सरकार एवं माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय स्तर पर विचाराधीन है। इस दौरान बिजयनगर के अधिवक्ताओं द्वारा भिनाय क्षेत्र का न्यायिक क्षेत्राधिकार प्रस्तावित बिजयनगर न्यायालय को सौंपे जाने की मांग की जा रही है।*
*अधिवक्ताओं का कहना है कि भिनाय उपखण्ड का न्यायिक क्षेत्राधिकार पिछले 50 वर्षों से अधिक समय से केकड़ी में ही रहा है। *वर्तमान में भिनाय क्षेत्र के सभी दीवानी एवं फौजदारी प्रकरण केकड़ी न्यायालयों में विचाराधीन हैं तथा भिनाय क्षेत्र के अधिवक्ता भी नियमित रूप से केकड़ी में ही प्रैक्टिस करते हैं। भिनाय उपखण्ड क्षेत्र की दूरी केकड़ी से 10 किलोमीटर से प्रारंभ होकर अधिकतम 35-40 किलोमीटर तक है, जिससे आमजन को सुविधा रहती है।*
*ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि भिनाय उपखण्ड वर्तमान में अजमेर जिले में आता है, जबकि बिजयनगर क्षेत्र ब्यावर जिले के अंतर्गत है। ऐसे में एक जिले के अपीलीय क्षेत्राधिकार को दूसरे जिले में स्थानांतरित करना न्यायोचित नहीं होगा। पूर्व में एडीएम न्यायालय में भी भिनाय संबंधी मामलों की सुनवाई का अधिकार केकड़ी में ही था।*
*बार एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि भिनाय उपखण्ड को बिजयनगर न्यायालय के क्षेत्राधिकार में जोड़े जाने का कोई निर्णय लिया जाता है, तो यह क्षेत्र के नागरिकों एवं अधिवक्ताओं के साथ अन्याय होगा। ऐसी स्थिति में बार एसोसिएशन केकड़ी आंदोलन का रास्ता अपनाने को बाध्य होगी।*
*बार एसोसिएशन केकड़ी के अध्यक्ष सीताराम कुमावत के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने यह ज्ञापन सौंपा।*
    user_Pawan kumar Rathi
    Pawan kumar Rathi
    केकड़ी, अजमेर, राजस्थान•
    10 hrs ago
  • Post by Ramniwas Jatoliya
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    Post by Ramniwas Jatoliya
    user_Ramniwas Jatoliya
    Ramniwas Jatoliya
    मसूदा, अजमेर, राजस्थान•
    7 hrs ago
  • 9 साल का बच्चा हुआ गोली का शिकार
    1
    9 साल का बच्चा हुआ गोली का शिकार
    user_Ashok Kumar Regar
    Ashok Kumar Regar
    Auto market फूलिया कलां, भीलवाड़ा, राजस्थान•
    17 hrs ago
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