बिहार के चरपोखरी थाना क्षेत्र के ढेड़ा गांव से एक मामला सामने आया है, जहाँ बुधवार शाम करीब 4:00 बजे एक पशु चिकित्सक की घोर लापरवाही के कारण एक मवेशी की हालत बेहद गंभीर हो गई है। यह घटना सरकार द्वारा पशुपालकों की सुविधा के लिए प्रखंड से पंचायत स्तर तक पशु अस्पताल और डॉक्टरों की व्यवस्था के दावों की जमीनी हकीकत को उजागर करती है। पशुपालक राम अयोध्या सिंह ने बताया कि उनकी भैंस कई दिनों से बीमार थी। उन्होंने ढेड़ा में पदस्थापित पशु चिकित्सक डॉ. अंशु कुमार को इलाज के लिए कई बार फोन किया, लेकिन डॉक्टर ने हर बार टालमटोल जवाब दिए और मौके पर नहीं पहुंचे। आरोप है कि डॉ. अंशु कुमार ने स्वयं आने के बजाय अस्पताल के चपरासी को मवेशी देखने भेज दिया, जिससे स्थिति और भी बिगड़ गई। ग्रामीणों में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर पंचायत स्तर पर पशु अस्पताल तो बनवा रही है, लेकिन डॉक्टर केवल औपचारिकता निभाते हैं, जैसे झंडा फहराना, और नियमित रूप से अस्पताल नहीं पहुंचते। इस लापरवाही के कारण पशुपालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। डॉक्टर के लगातार कॉल के बावजूद मौके पर न पहुंचने से मवेशी की हालत इतनी गंभीर हो चुकी है कि उसे बचाना मुश्किल लग रहा है। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग से लापरवाह डॉक्टर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। इस घटना ने एक बार फिर सरकारी व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है और यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर जिम्मेदार अधिकारी कब जागेंगे।
बिहार के चरपोखरी थाना क्षेत्र के ढेड़ा गांव से एक मामला सामने आया है, जहाँ बुधवार शाम करीब 4:00 बजे एक पशु चिकित्सक की घोर लापरवाही के कारण एक मवेशी की हालत बेहद गंभीर हो गई है। यह घटना सरकार द्वारा पशुपालकों की सुविधा के लिए प्रखंड से पंचायत स्तर तक पशु अस्पताल और डॉक्टरों की व्यवस्था के दावों की जमीनी हकीकत को उजागर करती है। पशुपालक राम अयोध्या सिंह ने बताया कि उनकी भैंस कई दिनों से बीमार थी। उन्होंने ढेड़ा में पदस्थापित पशु चिकित्सक डॉ. अंशु कुमार को इलाज के लिए कई बार फोन किया, लेकिन डॉक्टर ने हर बार टालमटोल जवाब दिए और मौके पर नहीं पहुंचे। आरोप है कि डॉ. अंशु कुमार ने स्वयं आने के बजाय अस्पताल के चपरासी को मवेशी देखने भेज दिया, जिससे स्थिति और भी बिगड़ गई। ग्रामीणों में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर पंचायत स्तर पर पशु अस्पताल तो बनवा रही है, लेकिन डॉक्टर केवल औपचारिकता निभाते हैं, जैसे झंडा फहराना, और नियमित रूप से अस्पताल नहीं पहुंचते। इस लापरवाही के कारण पशुपालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। डॉक्टर के लगातार कॉल के बावजूद मौके पर न पहुंचने से मवेशी की हालत इतनी गंभीर हो चुकी है कि उसे बचाना मुश्किल लग रहा है। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग से लापरवाह डॉक्टर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। इस घटना ने एक बार फिर सरकारी व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है और यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर जिम्मेदार अधिकारी कब जागेंगे।
- चांदी मठीया पर सुबह के समय एक भक्तिमय आयोजन हुआ। यह आयोजन महाराज श्री राघवाचार्य जी महाराज के सान्निध्य में संपन्न हुआ, जिससे वहाँ का माहौल पूरी तरह से भक्तिमय हो गया।1
- भारतीय रेलवे में सीट को लेकर एक दूसरे में ‘खूनी जंग’ का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो को अभिषेक कुमार ई-मीडिया ने साझा किया है।1
- सहरसा के कोसी चौक स्थित पंचमुखी महादेव और श्रम न्यायालय क्षेत्र से मजदूरों के लिए एक "सुनहरा अवसर" सामने आया है। इस घोषणा में कहा गया है कि यह कोई कार्यालय नहीं है, लेकिन इसके माध्यम से सभी मजदूरों को ओवरटाइम से "छुटकारा" मिलेगा और बिहार में "बढ़ोत्तरी" होगी। सहरसा के "माफिया किंग" ने कोसी चौक और कचहरी क्षेत्र में मजदूरों के लिए "बंपर जॉब" का "खेला" शुरू किया है, जिसके साथ सभी के मंगलमय दिन की कामना की गई है।1
- रोहतास जिले के पंचायत लिलवांछ वार्ड नंबर 7 में सड़क का निर्माण कार्य अभी तक शुरू नहीं हो पाया है, जबकि यह परियोजना 2023 में ही स्वीकृत हो चुकी थी। वर्तमान में यह सड़क पूरी तरह से टूट चुकी है और जगह-जगह गहरे गड्ढे बन गए हैं, जिससे आवागमन में परेशानी हो रही है। यह सड़क लिलवांछ मोड़ से होते हुए तेतरहर गांव से डेहरी मोड़ तक जाती है और पथ प्रमंडल विक्रमगंज के अंतर्गत आती है। इस मामले को लेकर अधिकारियों से जांच की मांग की गई है। निवेदन किया गया है कि इस कथित 'घोटाले' की गहनता से पड़ताल की जाए और इसमें शामिल सभी जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।1
- बिहार के चरपोखरी थाना क्षेत्र के ढेड़ा गांव से एक मामला सामने आया है, जहाँ बुधवार शाम करीब 4:00 बजे एक पशु चिकित्सक की घोर लापरवाही के कारण एक मवेशी की हालत बेहद गंभीर हो गई है। यह घटना सरकार द्वारा पशुपालकों की सुविधा के लिए प्रखंड से पंचायत स्तर तक पशु अस्पताल और डॉक्टरों की व्यवस्था के दावों की जमीनी हकीकत को उजागर करती है। पशुपालक राम अयोध्या सिंह ने बताया कि उनकी भैंस कई दिनों से बीमार थी। उन्होंने ढेड़ा में पदस्थापित पशु चिकित्सक डॉ. अंशु कुमार को इलाज के लिए कई बार फोन किया, लेकिन डॉक्टर ने हर बार टालमटोल जवाब दिए और मौके पर नहीं पहुंचे। आरोप है कि डॉ. अंशु कुमार ने स्वयं आने के बजाय अस्पताल के चपरासी को मवेशी देखने भेज दिया, जिससे स्थिति और भी बिगड़ गई। ग्रामीणों में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर पंचायत स्तर पर पशु अस्पताल तो बनवा रही है, लेकिन डॉक्टर केवल औपचारिकता निभाते हैं, जैसे झंडा फहराना, और नियमित रूप से अस्पताल नहीं पहुंचते। इस लापरवाही के कारण पशुपालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। डॉक्टर के लगातार कॉल के बावजूद मौके पर न पहुंचने से मवेशी की हालत इतनी गंभीर हो चुकी है कि उसे बचाना मुश्किल लग रहा है। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग से लापरवाह डॉक्टर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। इस घटना ने एक बार फिर सरकारी व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है और यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर जिम्मेदार अधिकारी कब जागेंगे।1
- स्वास्थ्य विभाग से संबंधित एक खबर के अनुसार, एक बीमार पति और पत्नी को एंबुलेंस की सफाई करने के लिए मजबूर किया गया।1
- बिहार के नवादा में एक नई नवेली दुल्हन का “हाई वोल्टेज ड्रामा” सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है। सात फेरे लेकर ससुराल पहुंची इस दुल्हन का शादी के कुछ ही दिन बाद गाली-गलौज और हंगामे का एक वीडियो सामने आया है, जो इंटरनेट पर छाया हुआ है। इस वायरल वीडियो को देखकर लोग हैरान हैं और यह सवाल पूछ रहे हैं कि “इतना गुस्सा आखिर किस बात का?” दुल्हन के इस नाटकीय हंगामे ने सोशल मीडिया पर खूब चर्चा बटोरी है।1
- मुजफ्फरपुर के प्रसाद हॉस्पिटल में लगी भीषण आग ने पूरे बिहार को झकझोर दिया है। अस्पताल के आईसीयू वार्ड में अचानक आग लगने से वहाँ अफरा-तफरी मच गई। इस भयावह घटना में कई मरीज गंभीर रूप से झुलस गए हैं, वहीं कई लोगों की मौत की खबर भी सामने आ रही है। आग लगने के बाद स्थानीय लोगों ने अपनी जान जोखिम में डालकर मरीजों को अस्पताल से बाहर निकाला। रिपोर्टर रौशन पटेल के अनुसार, इस अग्निकांड के कारण मुजफ्फरपुर का यह अस्पताल अब 'मौत का मंजर' बन चुका है।1