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बिहार के मुख्यमंत्री माननीय नीतीश कुमार के शासनकाल में पासवान समाज को न्याय मिल ही नहीं सकता है। अनिल पासवान राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ भीमराव अंबेडकर संघर्ष विचार मंच
Anil Paswan
बिहार के मुख्यमंत्री माननीय नीतीश कुमार के शासनकाल में पासवान समाज को न्याय मिल ही नहीं सकता है। अनिल पासवान राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ भीमराव अंबेडकर संघर्ष विचार मंच
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- यूजीसी रेगुलेशन एक्ट बहाल करो संघर्ष समिति का गठन, 11 मार्च को निकलेगा मार्च बिहारशरीफ (नालंदा)। यूजीसी रेगुलेशन एक्ट को बहाल करने की मांग को लेकर शहर के श्रम कल्याण केंद्र मैदान में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में राजनीतिक एवं सामाजिक क्षेत्र के कई बुद्धिजीवियों ने भाग लिया और सर्वसम्मति से “यूजीसी रेगुलेशन एक्ट बहाल करो संघर्ष समिति” का गठन किया गया। बैठक में समिति के पदाधिकारियों की घोषणा करते हुए नालंदा जिला संयोजक के रूप में चंद्रशेखर बाबू तथा सह–संयोजक के रूप में प्रो. शिवकुमार यादव को मनोनीत किया गया। उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि यूजीसी रेगुलेशन में बदलाव से उच्च शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है, जिसे पुनः बहाल किया जाना आवश्यक है। वक्ताओं ने शिक्षकों, छात्रों एवं अभिभावकों से इस मुहिम में सक्रिय भागीदारी की अपील की। निर्णय लिया गया कि 11 मार्च को एक विशाल मार्च निकाला जाएगा, जिसमें सभी वर्गों के लोग स्वेच्छा से शामिल होकर समर्थन दे सकते हैं। बैठक में कई शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों ने अपने विचार रखे तथा आंदोलन को व्यापक बनाने की रणनीति पर चर्चा की। संघर्ष समिति ने कहा कि यदि मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।1
- यूजीसी रेगुलेशन एक्ट बहाल करो संघर्ष समिति का गठन, 11 मार्च को निकलेगा मार्च बिहारशरीफ (नालंदा)।1
- यूजीसी समर्थन के लिए रोड पर उतरे बहुजन समाज1
- 108 कन्याओं के कलश से गूंज उठा दोसुत, संगत उदासीन आश्रम में भक्ति का महासागर एंकर, नालंदा जिला अंतर्गत रहुई प्रखंड के दोसुत पंचायत स्थित संगत उदासीन आश्रम में उदासीन आचार्य चंद्र महाराज जी की मूर्ति के प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव को लेकर भव्य कलश शोभा यात्रा निकाली गई। 108 कुमारी कन्याओं एवं महिलाओं ने माथे पर कलश रखकर पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना दिया। भक्ति गीतों और जयकारों से पूरा वातावरण गूंज उठा। दोसुत पंचायत स्थित संगत उदासीन आश्रम में चार दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान का भव्य आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम की शुरुआत 25 फरवरी को 108 कुमारी कन्याओं एवं महिलाओं द्वारा भव्य कलश यात्रा से हुई। डीजे पर बजते भक्ति गीतों पर श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। गांव से लेकर धमौली बाजार तक भक्ति की लहर दौड़ पड़ी। आयोजन कार्यकर्ता जयवर्धन, चंदन एवं निर्मल स्वामी ने बताया कि 25 फरवरी को कलश यात्रा एवं रात्रि में वेदी पूजन का आयोजन हुआ। 26 फरवरी को अधिवास एवं प्राण प्रतिष्ठा पूजन के साथ 24 घंटे का अखंड कीर्तन प्रारंभ किया जाएगा। 27 फरवरी को पूर्णाहुति, हवन, कुमारी पूजन, प्रसाद वितरण एवं रात्रि में विशाल भंडारे का आयोजन होगा। 28 फरवरी को कलश विसर्जन के साथ कार्यक्रम का समापन किया जाएगा। प्रतिदिन शाम से प्रवचन एवं कीर्तन-भजन का आयोजन भी किया जाएगा। आयोजन समिति ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव को सफल बनाएं।1
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- परिषद के प्रशिक्षण में नालंदा में पूर्वोत्तर के किसानों ने सीखी वैज्ञानिक मत्स्य बीज उत्पादन तकनीक 27 किसानों ने लिया भाग, मोहनपुर मत्स्य हैचरी (नालंदा) में मिला व्यावहारिक प्रशिक्षण पूर्वोत्तर के 5 राज्यों के 27 प्रगतिशील किसानों की सहभागिता मोहनपुर मत्स्य हैचरी उत्पादन केंद्र (नालंदा) में प्रायोगिक प्रशिक्षण जल गुणवत्ता, रोग प्रबंधन व तालाब प्रबंधन पर विशेषज्ञ मार्गदर्शन पटना/नालंदा। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा पूर्वोत्तर राज्यों के किसानों के लिए आयोजित चार दिवसीय क्षमता निर्माण एवं आदान सहायता कार्यक्रम के तहत नालंदा जिले स्थित मोहनपुर मत्स्य हैचरी उत्पादन केंद्र का प्रक्षेत्र भ्रमण कराया गया। यह कार्यक्रम संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ। इसमें असम, सिक्किम, त्रिपुरा, मेघालय तथा नागालैंड के 27 प्रगतिशील किसान एवं उद्यमी शामिल हुए। कार्यक्रम का उद्देश्य पूर्वोत्तर क्षेत्र में वैज्ञानिक मत्स्य पालन तकनीकों का प्रसार कर उत्पादन एवं आय में वृद्धि सुनिश्चित करना है। प्रक्षेत्र भ्रमण के दौरान मोहनपुर मत्स्य हैचरी उत्पादन केंद्र के संचालक श्री शिवजी ने मत्स्य बीज उत्पादन की संपूर्ण वैज्ञानिक प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कतला, रोहू, मृगल एवं ग्रास कार्प जैसी प्रमुख प्रजातियों के कृत्रिम प्रजनन, हैचिंग, फ्राई तथा फिंगरलिंग उत्पादन की विधियों का प्रदर्शन किया। किसानों को जल गुणवत्ता प्रबंधन, संतुलित आहार, रोग नियंत्रण एवं तालाब प्रबंधन से संबंधित तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि वैज्ञानिक पद्धति अपनाने से मत्स्य उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। इस अवसर पर डॉ. विश्वजीत देवनाथ (वरिष्ठ वैज्ञानिक), डॉ. तारकेश्वर कुमार (वैज्ञानिक) एवं श्री अमरेंद्र कुमार (तकनीकी अधिकारी) उपस्थित रहे और प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया। कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी एवं प्रेरणादायक बताया तथा अपने-अपने राज्यों में आधुनिक मत्स्य तकनीकों को अपनाने का संकल्प लिया।1