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*थाना क्षेत्र बखिरा अन्तर्गत एचपी गैस एजेंसी रमवापुर बिहारे में गैस की समस्या को लेकर कुछ लोगों द्वारा रोड़ जाम करने की कोशिश करने व कृत कार्यवाही के सम्बन्ध में क्षेत्राधिकारी मेंहदावल द्वारा दी गयी बाईट* ।
Ashwini Kumar Pandey
*थाना क्षेत्र बखिरा अन्तर्गत एचपी गैस एजेंसी रमवापुर बिहारे में गैस की समस्या को लेकर कुछ लोगों द्वारा रोड़ जाम करने की कोशिश करने व कृत कार्यवाही के सम्बन्ध में क्षेत्राधिकारी मेंहदावल द्वारा दी गयी बाईट* ।
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- गोरखपुर: लेडी डॉन अंशिका सिंह का बॉयफ्रेंड गिरफ्तार गोरखपुर पुलिस ने ‘लेडी डॉन’ अंशिका सिंह के फरार बॉयफ्रेंड आकाश उर्फ बंटी वर्मा को नंदानगर रेलवे लाइन के पास से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। यह मामला 20 जनवरी का है, जब अंशिका ने अस्पताल मैनेजर विशाल मिश्रा से रंगदारी मांगी थी। पैसे न मिलने पर उसने अपने साथियों अर्जुन और बंटी के साथ फायरिंग की। गोली विशाल को नहीं लगी, लेकिन उसके ड्राइवर अमिताभ निषाद के पेट में लगी थी। घटना के बाद भीड़ की मदद से अंशिका मौके पर ही पकड़ी गई और जेल भेज दी गई। अर्जुन पहले ही गिरफ्तार हो चुका था, जबकि बंटी फरार था। अब उसकी गिरफ्तारी के साथ पूरा गिरोह पुलिस की पकड़ में है। अंशिका पर ब्लैकमेलिंग और वीडियो कॉल के जरिए वसूली के भी आरोप हैं। पुलिस गैंगस्टर एक्ट के तहत पूरे मामले की जांच आगे बढ़ा रही है।1
- अजीत मिश्रा (खोजी) ब्यूरो, बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश। बस्ती जिले की सड़कों पर इन दिनों वाहनों का शोर नहीं, बल्कि पेट्रोल पंपों पर चीख-पुकार सुनाई दे रही है। जिले में डीजल-पेट्रोल का ऐसा 'कृत्रिम' संकट खड़ा किया गया है कि आम आदमी की जिंदगी की रफ्तार पर ब्रेक लग गया है। छोटे पंपों पर ताले लटके हैं, और जो बड़े पंप खुले हैं, वहाँ मंजर किसी युद्ध क्षेत्र जैसा नजर आ रहा है। सवाल यह है कि क्या वाकई तेल खत्म हो गया है, या फिर यह आने वाली कीमतों में उछाल से पहले का कोई बड़ा 'खेलो' (म्युचुअल गेम) है? पंपों पर 'नो स्टॉक' का बोर्ड, जनता के सब्र का बांध टूटा जिले के अधिकांश पंपों पर कर्मचारी एक ही रटा-रटाया जवाब दे रहे हैं— "तेल नहीं है।" घंटों कतार में खड़े रहने के बाद जब उपभोक्ता नोजल के पास पहुँचता है, तो उसे खाली हाथ लौटा दिया जाता है। इस बेरुखी ने जनता के गुस्से में घी डालने का काम किया है। पंप कर्मियों और उपभोक्ताओं के बीच तीखी नोकझोंक और गाली-गलौज अब आम बात हो गई है। हालात इतने तनावपूर्ण हैं कि कभी भी बड़ी हिंसा भड़क सकती है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी चैन की नींद सो रहे हैं। सप्लाई की कमी या मुनाफाखोरी की साजिश? एक तरफ कर्मचारी दावा कर रहे हैं कि सप्लाई पूरी तरह बाधित है, वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण इलाकों में चर्चा आम है कि यह 'आर्टिफिशियल स्कैरसिटी' (कृत्रिम कमी) पैदा की जा रही है। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि तेल की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी का फायदा उठाने के लिए स्टॉक को डंप किया जा रहा है। बड़ा सवाल: अगर सप्लाई नहीं है, तो क्या प्रशासन ने इसकी जांच की? क्या डिपो से आने वाले टैंकरों का मिलान सेल रजिस्टर से किया गया? आखिर 'सस्पेंस' की यह चादर क्यों तानी गई है? गायब प्रशासन और ठप होता जनजीवन हैरानी की बात यह है कि जिले में हाहाकार मचा है, जरूरी काम ठप हो गए हैं, किसान खेतों में परेशान है और एम्बुलेंस तक को तेल के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है, लेकिन जिला प्रशासन पूरी तरह से नदारद है। रसद विभाग (Supply Department) की चुप्पी कई संदेहों को जन्म दे रही है। क्या अधिकारियों को इस कालाबाजारी की भनक नहीं है, या फिर 'साहब' मौन रहकर इस खेल को शह दे रहे हैं? हालात बेकाबू, कभी भी फूट सकता है जनाक्रोश बस्ती की जनता अब सड़कों पर उतरने को मजबूर है। लोगों का कहना है कि अगर अगले 24 घंटों में स्थिति सामान्य नहीं हुई और प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया, तो उग्र आंदोलन तय है। जब तेल की कोई आधिकारिक कमी नहीं है, तो फिर यह किल्लत क्यों? सच्चाई पर से पर्दा उठना जरूरी है, वरना बस्ती की ये लंबी कतारें किसी बड़े बवाल की वजह बन सकती हैं।1
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