बस्ती में 'तेल' का खेल या जनता से 'जेल'? हाहाकार के बीच प्रशासन मौन! अजीत मिश्रा (खोजी) ब्यूरो, बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश। बस्ती जिले की सड़कों पर इन दिनों वाहनों का शोर नहीं, बल्कि पेट्रोल पंपों पर चीख-पुकार सुनाई दे रही है। जिले में डीजल-पेट्रोल का ऐसा 'कृत्रिम' संकट खड़ा किया गया है कि आम आदमी की जिंदगी की रफ्तार पर ब्रेक लग गया है। छोटे पंपों पर ताले लटके हैं, और जो बड़े पंप खुले हैं, वहाँ मंजर किसी युद्ध क्षेत्र जैसा नजर आ रहा है। सवाल यह है कि क्या वाकई तेल खत्म हो गया है, या फिर यह आने वाली कीमतों में उछाल से पहले का कोई बड़ा 'खेलो' (म्युचुअल गेम) है? पंपों पर 'नो स्टॉक' का बोर्ड, जनता के सब्र का बांध टूटा जिले के अधिकांश पंपों पर कर्मचारी एक ही रटा-रटाया जवाब दे रहे हैं— "तेल नहीं है।" घंटों कतार में खड़े रहने के बाद जब उपभोक्ता नोजल के पास पहुँचता है, तो उसे खाली हाथ लौटा दिया जाता है। इस बेरुखी ने जनता के गुस्से में घी डालने का काम किया है। पंप कर्मियों और उपभोक्ताओं के बीच तीखी नोकझोंक और गाली-गलौज अब आम बात हो गई है। हालात इतने तनावपूर्ण हैं कि कभी भी बड़ी हिंसा भड़क सकती है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी चैन की नींद सो रहे हैं। सप्लाई की कमी या मुनाफाखोरी की साजिश? एक तरफ कर्मचारी दावा कर रहे हैं कि सप्लाई पूरी तरह बाधित है, वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण इलाकों में चर्चा आम है कि यह 'आर्टिफिशियल स्कैरसिटी' (कृत्रिम कमी) पैदा की जा रही है। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि तेल की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी का फायदा उठाने के लिए स्टॉक को डंप किया जा रहा है। बड़ा सवाल: अगर सप्लाई नहीं है, तो क्या प्रशासन ने इसकी जांच की? क्या डिपो से आने वाले टैंकरों का मिलान सेल रजिस्टर से किया गया? आखिर 'सस्पेंस' की यह चादर क्यों तानी गई है? गायब प्रशासन और ठप होता जनजीवन हैरानी की बात यह है कि जिले में हाहाकार मचा है, जरूरी काम ठप हो गए हैं, किसान खेतों में परेशान है और एम्बुलेंस तक को तेल के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है, लेकिन जिला प्रशासन पूरी तरह से नदारद है। रसद विभाग (Supply Department) की चुप्पी कई संदेहों को जन्म दे रही है। क्या अधिकारियों को इस कालाबाजारी की भनक नहीं है, या फिर 'साहब' मौन रहकर इस खेल को शह दे रहे हैं? हालात बेकाबू, कभी भी फूट सकता है जनाक्रोश बस्ती की जनता अब सड़कों पर उतरने को मजबूर है। लोगों का कहना है कि अगर अगले 24 घंटों में स्थिति सामान्य नहीं हुई और प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया, तो उग्र आंदोलन तय है। जब तेल की कोई आधिकारिक कमी नहीं है, तो फिर यह किल्लत क्यों? सच्चाई पर से पर्दा उठना जरूरी है, वरना बस्ती की ये लंबी कतारें किसी बड़े बवाल की वजह बन सकती हैं।
बस्ती में 'तेल' का खेल या जनता से 'जेल'? हाहाकार के बीच प्रशासन मौन! अजीत मिश्रा (खोजी) ब्यूरो, बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश। बस्ती जिले की सड़कों पर इन दिनों वाहनों का शोर नहीं, बल्कि पेट्रोल पंपों पर चीख-पुकार सुनाई दे रही है। जिले में डीजल-पेट्रोल का ऐसा 'कृत्रिम' संकट खड़ा किया गया है कि आम आदमी की जिंदगी की रफ्तार पर ब्रेक लग गया है। छोटे पंपों पर ताले लटके हैं, और जो बड़े पंप खुले हैं, वहाँ मंजर किसी युद्ध क्षेत्र जैसा नजर आ रहा है। सवाल यह है कि क्या वाकई तेल खत्म हो गया है, या फिर यह आने वाली कीमतों में उछाल से पहले का कोई बड़ा 'खेलो' (म्युचुअल गेम) है? पंपों पर 'नो स्टॉक' का बोर्ड, जनता के सब्र का बांध टूटा जिले के अधिकांश पंपों पर कर्मचारी एक ही रटा-रटाया जवाब दे रहे हैं— "तेल नहीं है।" घंटों कतार में खड़े रहने के बाद जब उपभोक्ता नोजल के पास पहुँचता है, तो उसे खाली हाथ लौटा दिया जाता है। इस बेरुखी ने जनता के गुस्से में घी डालने का काम किया है। पंप कर्मियों और उपभोक्ताओं के बीच तीखी नोकझोंक और गाली-गलौज अब आम बात हो गई है। हालात इतने तनावपूर्ण हैं कि कभी भी बड़ी हिंसा भड़क सकती है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी चैन की नींद सो रहे हैं। सप्लाई की कमी या मुनाफाखोरी की साजिश? एक तरफ कर्मचारी दावा कर रहे हैं कि सप्लाई पूरी तरह बाधित है, वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण इलाकों में चर्चा आम है कि यह 'आर्टिफिशियल स्कैरसिटी' (कृत्रिम कमी) पैदा की जा रही है। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि तेल की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी का फायदा उठाने के लिए स्टॉक को डंप किया जा रहा है। बड़ा सवाल: अगर सप्लाई नहीं है, तो क्या प्रशासन ने इसकी जांच की? क्या डिपो से आने वाले टैंकरों का मिलान सेल रजिस्टर से किया गया? आखिर 'सस्पेंस' की यह चादर क्यों तानी गई है? गायब प्रशासन और ठप होता जनजीवन हैरानी की बात यह है कि जिले में हाहाकार मचा है, जरूरी काम ठप हो गए हैं, किसान खेतों में परेशान है और एम्बुलेंस तक को तेल के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है, लेकिन जिला प्रशासन पूरी तरह से नदारद है। रसद विभाग (Supply Department) की चुप्पी कई संदेहों को जन्म दे रही है। क्या अधिकारियों को इस कालाबाजारी की भनक नहीं है, या फिर 'साहब' मौन रहकर इस खेल को शह दे रहे हैं? हालात बेकाबू, कभी भी फूट सकता है जनाक्रोश बस्ती की जनता अब सड़कों पर उतरने को मजबूर है। लोगों का कहना है कि अगर अगले 24 घंटों में स्थिति सामान्य नहीं हुई और प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया, तो उग्र आंदोलन तय है। जब तेल की कोई आधिकारिक कमी नहीं है, तो फिर यह किल्लत क्यों? सच्चाई पर से पर्दा उठना जरूरी है, वरना बस्ती की ये लंबी कतारें किसी बड़े बवाल की वजह बन सकती हैं।
- अफवाहों का ‘ईंधन’ और खौफ की ‘रफ़्तार’: सिद्धार्थनगर में तेल के लिए त्राहि-त्राहि अजीत मिश्रा (खोजी), ब्यूरो चीफ - बस्ती मंडल सिद्धार्थनगर। सात समंदर पार ईरान और इजराइल के बीच युद्ध की आहट क्या हुई, सरहदी जिले सिद्धार्थनगर की सड़कों पर पैनिक का ‘विस्फोट’ हो गया। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज बंद होने की एक अफवाह ने जिले के पेट्रोल पंपों पर वो मंजर पैदा कर दिया, जिसे देखकर लगा कि शायद कल से पहिए थम जाएंगे। आलम यह है कि लोग अपनी गाड़ियों की टंकी ही नहीं, बल्कि बड़े-बड़े गैलनों में भी तेल भरकर घर ले जाने की होड़ में लगे हैं। बढ़नी और शोहरतगढ़ में बिगड़े हालात, पुलिस ने संभाला मोर्चा अफवाह की आग सबसे ज्यादा बढ़नी और शोहरतगढ़ के इलाकों में भड़की। देखते ही देखते पेट्रोल पंपों पर हजारों की भीड़ उमड़ पड़ी। धक्का-मुक्की और अफरा-तफरी के बीच शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा। पैनिक बाइंग (घबराहट में खरीदारी) का नतीजा यह हुआ कि कई पंपों पर चंद घंटों में ही 'नो स्टॉक' के बोर्ड लटक गए, जिससे जनता में डर और गहरा गया। मैदान में उतरे SDM और CO: दी कड़ी चेतावनी हालात की गंभीरता को देखते हुए SDM विवेकानंद मिश्र और CO मयंक द्विवेदी ने खुद मोर्चा संभाला। एसडीएम ने मालगहिया और बढ़नी के पेट्रोल पंपों का औचक निरीक्षण किया और सप्लाई चेन की हकीकत जांची। SDM विवेकानंद मिश्र ने दो टूक शब्दों में कहा: "जिले में तेल की रत्ती भर भी कमी नहीं है। स्टॉक पर्याप्त है। तेल की किल्लत की खबरें महज कोरी अफवाह हैं। जो भी सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से भ्रम फैलाएगा, प्रशासन उसके खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई करेगा। लोग अनावश्यक रूप से स्टॉक जमा न करें।" पंपों पर 'पहरा', शांति की अपील क्षेत्राधिकारी मयंक द्विवेदी ने खुद पंपों पर खड़े होकर व्यवस्था को सुचारू कराया। उन्होंने निर्देश दिया कि लोग कतारबद्ध होकर अपनी जरूरत के मुताबिक ही ईंधन लें। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस बल को इसलिए तैनात किया गया है ताकि कानून-व्यवस्था और यातायात में कोई बाधा न आए। हकीकत: सप्लाई सुरक्षित, डर बेवजह प्रशासन ने साफ कर दिया है कि तेल की सप्लाई चेन पूरी तरह सुरक्षित है। युद्ध की खबरों का स्थानीय आपूर्ति पर फिलहाल कोई असर नहीं है। अधिकारियों की सक्रियता के बाद बढ़नी क्षेत्र में स्थिति अब नियंत्रण में है, लेकिन प्रशासन अभी भी 'वेट एंड वॉच' की स्थिति में है।1
- महुली। पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर संदीप कुमार मीना के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर सुशील कुमार सिंह के मार्गदर्शन व क्षेत्राधिकारी धनघटा अभयनाथ मिश्रा के पर्यवेक्षण में थानाध्यक्ष महुली दुर्गेश कुमार पाण्डेय के नेतृत्व में गठित टीम द्वारा गुमशुदा महिला को 24 घंटे के अन्दर बरामद कर परिजनों को सुपुर्द किया गया । दिनाँक 24.03.2026 को थाना महुली क्षेत्र निवासी एक महिला द्वारा द्वारा सूचना दी गयी कि उनकी पुत्री उम्र करीब 25 वर्ष मुकदमें की तारीख देखने खलीलाबाद न्यायालय गयी थी, जिसके बाद वह घर नही लौटी है । प्राप्त सूचना के आधार पर थाना महुली पुलिस द्वारा तत्काल गुमशुदगी दर्ज कर जांच प्रारंभ कर दी गयी । थाना महुली पुलिस द्वारा संभावित स्थानों पर तलाश की गयी तथा आवश्यक पूछताछ की गयी । पुलिस की सतर्कता एवं प्रयासों के फलस्वरूप गुमशुदा महिला को सकुशल बरामद कर लिया गया तथा उसे उसके परिजनों के सुपुर्द किया गया ।4
- सिटी पब्लिक स्कूल में प्रतिभा सम्मान समारोह आयोजित, 80 मेधावी छात्र-छात्राओं का हुआ सम्मान जनपद न्यायाधीश रणधीर सिंह की मौजूदगी में कार्यक्रम संपन्न, कक्षा 5 के कुशाग्र पांडे बने स्कूल टॉपर संतकबीरनगर। नगर के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान सिटी पब्लिक स्कूल में प्रतिभा सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में लगभग 80 मेधावी छात्र-छात्राओं को उनके उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जनपद न्यायाधीश रणधीर सिंह रहे। उनके साथ सिविल जज सीनियर डिवीजन संजय पांडे, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट चेतना त्यागी, न्यायिक मजिस्ट्रेट अशोक कुमार कसौधन, सिविल जज जूनियर डिवीजन (एफटीसी द्वितीय) कुमारी निधि मिश्रा तथा एफटीसी प्रथम के अभिनव त्रिपाठी सहित न्याय विभाग के अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इसके पश्चात छात्र-छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की आकर्षक प्रस्तुतियां देकर उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। इस अवसर पर विद्यालय के मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। कक्षा 5 के छात्र कुशाग्र पांडे ने विद्यालय में सर्वोच्च अंक प्राप्त कर स्कूल टॉपर का स्थान हासिल किया। मुख्य अतिथि ने उन्हें सम्मानित कर उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। विभिन्न कक्षाओं में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले छात्रों को भी पुरस्कृत किया गया। प्रमुख रूप से पूर्णिमा यादव, आकांक्षा कसौधन, अंशु कुमारी, प्रत्यूषा मिश्रा, अक्षय कुमार, सरस्वती, परी, नुमान अहमद सहित अन्य छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय परिवार से प्रदीप सिसोदिया, गौरव रुंगटा सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। समारोह के अंत में विद्यालय के प्रधानाचार्य शंभू पांडे ने सभी अतिथियों, अभिभावकों एवं छात्रों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने विद्यालय की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि संस्थान में बच्चों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान दिया जाता है, जहां शिक्षा के साथ संस्कार, नैतिकता और आध्यात्मिक मूल्यों का भी समावेश किया जाता है। उन्होंने अभिभावकों के सहयोग की अपेक्षा जताते हुए छात्रों को निरंतर प्रगति के लिए प्रेरित किया।1
- Post by Vipin Rai Journalist1
- आकाशवाणी, 24 3 2026 ई0', आज की ताजा कहानी;1
- रिपोर्टर विंध्यवासिनी यादव संत कबीर नगर संचालक मनोज यादव पर लगा धोखाधड़ी का आरोप; बैंक मैनेजर की भूमिका पर उठे सवाल। हैसर बाजार (संत कबीर नगर): स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की हैसर बाजार मुख्य शाखा के ठीक बगल में स्थित 'टाइनी' (CSP) शाखा में एक सनसनीखेज धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। टाइनी शाखा के संचालक मनोज यादव पर आरोप है कि उन्होंने कई खातेदारों के बैंक खातों से जालसाजी कर लाखों रुपए पार कर दिए हैं। मामले का खुलासा तब हुआ जब पीड़ित खातेदार अपने खाते की जमा-निकासी की जानकारी लेने टाइनी शाखा पहुंचे। बैलेंस कम देख जब उन्होंने संचालक मनोज यादव से पूछताछ की, तो वह संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। आरोप है कि जैसे ही मामला गहराया और लोगों की भीड़ जमा होने लगी, संचालक मनोज यादव मौके से फरार हो गए। वर्तमान में टाइनी शाखा बंद है और संचालक का कहीं पता नहीं है। धोखाधड़ी का शिकार हुए ग्रामीणों और छोटे जमाकर्ताओं का कहना है कि उनकी मेहनत की कमाई पर डाका डाला गया है। पीड़ित खातेदारों ने दो टूक शब्दों में कहा है— "हमारा पैसा वापस दिलाया जाए, वरना हम थाने में तहरीर देकर कानूनी कार्रवाई करेंगे।" अब सबकी नजरें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की मुख्य शाखा के मैनेजर पर टिकी हैं। सवाल यह उठ रहा है कि मुख्य शाखा के ठीक बगल में चल रही टाइनी शाखा में इतनी बड़ी धांधली कैसे हो गई? क्या मैनेजर इस मामले की जिम्मेदारी लेंगे या खातेदारों को अपने हाल पर छोड़ देंगे? फिलहाल बैंक प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। #HaisarBazar #SBI #BankingFraud #SantKabirNagar #BreakingNews FinancialCrime PoliceUP StateBankOfIndia PublicProtest JusticeForAccountHolders DigitalIndiaCrime1
- धनघटा के हकीमपुर विद्यालय में वार्षिकोत्सव धूमधाम से सम्पन्न रिपोर्ट -दुर्गेश मिश्र संतकबीरनगर। धनघटा विधानसभा क्षेत्र के ब्लॉक हैसर बाजार स्थित ग्राम पंचायत हकीमपुर के उच्च माध्यमिक विद्यालय में वार्षिकोत्सव एवं खेलकूद पुरस्कार सम्मान समारोह का आयोजन बड़े उत्साह के साथ किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ग्राम प्रधान प्रतिनिधि राणा प्रताप सिंह ने मेधावी एवं उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाध्यापक सुमित सहित समस्त विद्यालय परिवार की सराहना करते हुए मुख्य अतिथि ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और खेलकूद प्रतियोगिताओं ने सभी का मन मोह लिया। इस कार्यक्रम पर कृष्ण चंद्र यादव, अवधेश यादव, घनश्याम यादव,नागेंद्र नाथ,पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य राजेश राजभर,जय प्रताप सिंह,चंद्रभान, सूरज राजभर, महातम राजभर ,अंबिका राजभर ,राजाराम राजभर, आदि लोग उपस्थित रहे सफल आयोजन के लिए हार्दिक शुभकामनाएं दी गईं।4
- अजीत मिश्रा (खोजी) ब्यूरो, बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश। बस्ती जिले की सड़कों पर इन दिनों वाहनों का शोर नहीं, बल्कि पेट्रोल पंपों पर चीख-पुकार सुनाई दे रही है। जिले में डीजल-पेट्रोल का ऐसा 'कृत्रिम' संकट खड़ा किया गया है कि आम आदमी की जिंदगी की रफ्तार पर ब्रेक लग गया है। छोटे पंपों पर ताले लटके हैं, और जो बड़े पंप खुले हैं, वहाँ मंजर किसी युद्ध क्षेत्र जैसा नजर आ रहा है। सवाल यह है कि क्या वाकई तेल खत्म हो गया है, या फिर यह आने वाली कीमतों में उछाल से पहले का कोई बड़ा 'खेलो' (म्युचुअल गेम) है? पंपों पर 'नो स्टॉक' का बोर्ड, जनता के सब्र का बांध टूटा जिले के अधिकांश पंपों पर कर्मचारी एक ही रटा-रटाया जवाब दे रहे हैं— "तेल नहीं है।" घंटों कतार में खड़े रहने के बाद जब उपभोक्ता नोजल के पास पहुँचता है, तो उसे खाली हाथ लौटा दिया जाता है। इस बेरुखी ने जनता के गुस्से में घी डालने का काम किया है। पंप कर्मियों और उपभोक्ताओं के बीच तीखी नोकझोंक और गाली-गलौज अब आम बात हो गई है। हालात इतने तनावपूर्ण हैं कि कभी भी बड़ी हिंसा भड़क सकती है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी चैन की नींद सो रहे हैं। सप्लाई की कमी या मुनाफाखोरी की साजिश? एक तरफ कर्मचारी दावा कर रहे हैं कि सप्लाई पूरी तरह बाधित है, वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण इलाकों में चर्चा आम है कि यह 'आर्टिफिशियल स्कैरसिटी' (कृत्रिम कमी) पैदा की जा रही है। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि तेल की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी का फायदा उठाने के लिए स्टॉक को डंप किया जा रहा है। बड़ा सवाल: अगर सप्लाई नहीं है, तो क्या प्रशासन ने इसकी जांच की? क्या डिपो से आने वाले टैंकरों का मिलान सेल रजिस्टर से किया गया? आखिर 'सस्पेंस' की यह चादर क्यों तानी गई है? गायब प्रशासन और ठप होता जनजीवन हैरानी की बात यह है कि जिले में हाहाकार मचा है, जरूरी काम ठप हो गए हैं, किसान खेतों में परेशान है और एम्बुलेंस तक को तेल के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है, लेकिन जिला प्रशासन पूरी तरह से नदारद है। रसद विभाग (Supply Department) की चुप्पी कई संदेहों को जन्म दे रही है। क्या अधिकारियों को इस कालाबाजारी की भनक नहीं है, या फिर 'साहब' मौन रहकर इस खेल को शह दे रहे हैं? हालात बेकाबू, कभी भी फूट सकता है जनाक्रोश बस्ती की जनता अब सड़कों पर उतरने को मजबूर है। लोगों का कहना है कि अगर अगले 24 घंटों में स्थिति सामान्य नहीं हुई और प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया, तो उग्र आंदोलन तय है। जब तेल की कोई आधिकारिक कमी नहीं है, तो फिर यह किल्लत क्यों? सच्चाई पर से पर्दा उठना जरूरी है, वरना बस्ती की ये लंबी कतारें किसी बड़े बवाल की वजह बन सकती हैं।1