मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद, डिंडोरी जिले के मार्गदर्शन में जनजीवन कल्याण समिति बिछिया द्वारा डिंडोरी के शंकर घाट में "मां रेवा सेवा समागम" कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। यह कार्यक्रम अब से प्रत्येक माह की पूर्णिमा को आयोजित किया जाएगा, जिसका मुख्य उद्देश्य मां नर्मदा के प्रति जनआस्था, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम का शुभारंभ जिला समन्वयक धर्मेंद्र चौहान के मार्गदर्शन और विकासखंड समन्वयक गणेश राजपूत की उपस्थिति में हुआ। इस अवसर पर शिव घाट परिसर में एक विशेष स्वच्छता अभियान चलाकर घाट की साफ-सफाई की गई, जिसके बाद विधि-विधान से मां नर्मदा का पूजन-अर्चन और आरती संपन्न हुई। इसके पश्चात "नर्मदा अनुभूति कार्यक्रम" का आयोजन किया गया, जिसमें उपस्थित सदस्यों ने मां नर्मदा की अविरल एवं निर्मल धारा, उनके आध्यात्मिक महत्व और जीवनदायिनी स्वरूप का स्मरण किया। गणेश राजपूत ने इस दौरान कहा कि मां नर्मदा केवल एक नदी नहीं, बल्कि जनजीवन की आधारशिला हैं और उनकी शांत, पवित्र एवं सतत प्रवाहित धारा हमें संयम, सेवा, समर्पण और प्रकृति संरक्षण का संदेश देती है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि मां नर्मदा के तट पर मिलने वाली आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा मानव जीवन को नई दिशा प्रदान करती है। इस दौरान सभी उपस्थित लोगों ने मां नर्मदा को स्वच्छ एवं प्रदूषण मुक्त बनाए रखने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के अंतर्गत नर्मदा घाट पर आकर्षक रंगोली भी बनाई गई, जिसने घाट की सुंदरता को और बढ़ाया तथा जनजागरूकता का संदेश प्रसारित किया। इस अवसर पर नवांकुर संस्था से अजय ठाकुर, अरुण चंदेल, मेंटर बृजमोहन, हनुमंत, ललित उद्दे, रघुनाथ चंदेल राठौर, रितु सेन सहित कई सदस्य उपस्थित रहे।
मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद, डिंडोरी जिले के मार्गदर्शन में जनजीवन कल्याण समिति बिछिया द्वारा डिंडोरी के शंकर घाट में "मां रेवा सेवा समागम" कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। यह कार्यक्रम अब से प्रत्येक माह की पूर्णिमा को आयोजित किया जाएगा, जिसका मुख्य उद्देश्य मां नर्मदा के प्रति जनआस्था, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम का शुभारंभ जिला समन्वयक धर्मेंद्र चौहान के मार्गदर्शन और विकासखंड समन्वयक गणेश राजपूत की उपस्थिति में हुआ। इस अवसर पर शिव घाट परिसर में एक विशेष स्वच्छता अभियान चलाकर घाट की साफ-सफाई की गई, जिसके बाद विधि-विधान से मां नर्मदा का पूजन-अर्चन और आरती संपन्न हुई। इसके पश्चात "नर्मदा अनुभूति कार्यक्रम" का आयोजन किया गया, जिसमें उपस्थित सदस्यों ने मां नर्मदा की अविरल एवं निर्मल धारा, उनके आध्यात्मिक महत्व और जीवनदायिनी स्वरूप
का स्मरण किया। गणेश राजपूत ने इस दौरान कहा कि मां नर्मदा केवल एक नदी नहीं, बल्कि जनजीवन की आधारशिला हैं और उनकी शांत, पवित्र एवं सतत प्रवाहित धारा हमें संयम, सेवा, समर्पण और प्रकृति संरक्षण का संदेश देती है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि मां नर्मदा के तट पर मिलने वाली आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा मानव जीवन को नई दिशा प्रदान करती है। इस दौरान सभी उपस्थित लोगों ने मां नर्मदा को स्वच्छ एवं प्रदूषण मुक्त बनाए रखने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के अंतर्गत नर्मदा घाट पर आकर्षक रंगोली भी बनाई गई, जिसने घाट की सुंदरता को और बढ़ाया तथा जनजागरूकता का संदेश प्रसारित किया। इस अवसर पर नवांकुर संस्था से अजय ठाकुर, अरुण चंदेल, मेंटर बृजमोहन, हनुमंत, ललित उद्दे, रघुनाथ चंदेल राठौर, रितु सेन सहित कई सदस्य उपस्थित रहे।
- डिंडोरी के नर्मदा डैम घाट पर आयोजित ग्रीष्मकालीन खेल प्रशिक्षण शिविर में बच्चों को राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की टीम ने आपदा प्रबंधन और तैराकी का गहन प्रशिक्षण प्रदान किया। टीम लीडर सब इंस्पेक्टर शिवराज पेंद्रो के नेतृत्व में, बच्चों को लाइफ जैकेट पहनने का सही तरीका सिखाया गया और नदी में सुरक्षित तैराकी का अभ्यास कराया गया। प्रशिक्षण के दौरान, प्रतिभागियों को बाढ़ और जल दुर्घटनाओं के समय बचाव के उपाय, डूबते हुए व्यक्ति की मदद करने के तरीके, और रस्सी की सहायता से लोगों को सुरक्षित निकालने की विभिन्न तकनीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। खेल प्रशिक्षक चेतराम अहिरवार ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह का प्रशिक्षण बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाता है और उन्हें आपातकालीन परिस्थितियों का सामना करने के लिए तैयार करता है। इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान एसडीआरएफ और खेल विभाग के कई अधिकारी-कर्मचारी भी उपस्थित रहे।1
- डिंडौरी जिले की कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने ग्राम पंचायत घुसिया माल के ढीमरटोला में पेयजल की लंबी समस्या का त्वरित समाधान कर प्रशासनिक संवेदनशीलता का एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया। यह कार्रवाई तब हुई जब कुछ दिन पूर्व ढीमरटोला के ग्रामीण पेयजल संकट को लेकर जनसुनवाई में कलेक्टर के पास पहुँचे थे। समस्या की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को दो दिनों के भीतर व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए थे और इन्हीं निर्देशों के क्रियान्वयन का जायजा लेने वे स्वयं गांव पहुँचीं। ग्रामीणों ने बताया कि पानी की कमी के कारण उन्हें कुओं में उतरकर पानी भरना पड़ रहा था। स्थिति का प्रत्यक्ष अवलोकन करने के बाद, कलेक्टर ने खराब पड़े बोरवेल में अपने समक्ष एक नया पंप लगवाकर उसे चालू कराया और घर-घर पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं भी करवाईं। उन्होंने स्वयं बोरवेल का पानी पीकर उसकी गुणवत्ता जाँची और बच्चों को भी पानी पिलाया। ग्रामीणों की सुविधा के लिए दो-दो हजार लीटर क्षमता की दो पानी टंकियां भी स्थापित की गईं और कम वोल्टेज की समस्या सामने आने पर तत्काल स्टेबलाइजर लगाने के निर्देश देकर व्यवस्था को सुचारु बनाया गया। इस दौरान उन्होंने जल जीवन मिशन के अंतर्गत किए गए कार्यों का निरीक्षण भी किया। कलेक्टर की इस मौजूदगी और त्वरित निर्णयों से गांव में उत्साह का माहौल बन गया, जहाँ ग्रामीणों ने पहली बार किसी वरिष्ठ अधिकारी को मौके पर खड़े होकर समस्या का समाधान करते देखा। ग्रामीणों को संबोधित करते हुए, कलेक्टर ने गर्मी के मौसम में पानी के सदुपयोग की अपील की और मोटर संचालन की जिम्मेदारी किसी जिम्मेदार व्यक्ति को सौंपने का सुझाव दिया ताकि पूरे गांव को समय पर पर्याप्त पानी मिल सके। निरीक्षण के दौरान, कलेक्टर ने जल संरक्षण का संदेश भी दिया। उन्होंने ग्रामीणों को सोखता टैंक निर्माण की जानकारी दी और उन्हें घरों में ऐसे टैंक बनाने के लिए प्रेरित किया, यह समझाते हुए कि इससे भूजल स्तर संरक्षित रहेगा और वर्षा जल संचयन को भी बढ़ावा मिलेगा। इस अवसर पर रामबाबू देवांगन, सुंदरलाल यादव, चेतराम अहिरवार, प्रमोद उपाध्याय सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। कलेक्टर की इस पहल ने न केवल पेयजल संकट का समाधान किया, बल्कि प्रशासन और ग्रामीणों के बीच विश्वास की एक नई मिसाल भी कायम की है।2
- समनापुर क्षेत्र में नौतपा के दौरान हुई बारिश ने गर्मी का असर काफी कम कर दिया है। इस बारिश के बाद तापमान में गिरावट दर्ज की गई, जिससे लोगों ने राहत की सांस ली है। किसान भी इस बारिश को फायदेमंद मान रहे हैं, क्योंकि इससे खेतों में नमी बढ़ी है और आगामी खरीफ सीजन की तैयारियों में भी मदद मिलेगी।1
- डिंडोरी जिले में नौतपा के दौरान पड़ रही भीषण गर्मी और उमस के बीच, शनिवार शाम करीब 5:00 बजे मौसम ने अचानक करवट बदली। मोहदा छांटा क्षेत्र में तेज आंधी-तूफान के साथ जोरदार बारिश शुरू हो गई, जिससे कुछ समय के लिए जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। दिनभर तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो रहा था, और तापमान लगातार ऊंचे स्तर पर बना हुआ था, जिससे आमजन गर्मी से काफी परेशान थे। शाम को अचानक आसमान में काले बादल छा गए और तेज हवाओं के साथ बारिश होने लगी। इस दौरान कई स्थानों पर लोगों को सुरक्षित जगहों पर भागना पड़ा, जबकि बाजारों और सड़कों पर आवाजाही प्रभावित हुई। तेज हवा के कारण पेड़ों की डालियां झूमने लगीं और कुछ क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति भी बाधित होने की सूचना मिली। हालांकि, इस अचानक हुई बारिश से लोगों को भीषण गर्मी से बड़ी राहत मिली है। बारिश के बाद तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई, जिससे मौसम सुहावना हो गया, और किसानों व ग्रामीणों ने भी इस बारिश को गर्मी से राहत देने वाला बताया।2
- एक बिजली के खंभे का तार नीचे झूल रहा है, जिसके कारण उसके सुधार कार्य की आवश्यकता है।1
- डिंडोरी जिले की सीमा क्षेत्र में बसे ग्राम बुढ़न के ग्रामवासी भीषण जल संकट का सामना कर रहे हैं। ग्रामीणों ने अनेकों बार पंचायत के समक्ष अपनी परेशानी रखी है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने उनकी समस्या पर ध्यान देना जरूरी नहीं समझा है। बताया गया है कि आवास टोला में निवासरत बैगा जनजाति के लोग पानी की एक-एक बूंद के लिए परेशान हैं। ग्राम वासियों ने जानकारी दी कि उनके यहां नल जल योजना के तहत पाइपलाइन बिछाने का काम अधूरा छोड़कर दिया गया है। इस वजह से बैगा जनजाति को पानी लाने के लिए एक से दो किलोमीटर तक का सफर तय करना पड़ता है। इस भीषण जल संकट का सामना कर रही बैगा जनजाति ने अब कलेक्टर डिंडोरी से गुहार लगाई है। उनकी मांग है कि कलेक्टर नल जल योजना का काम पूरा कराएं, जिससे ग्राम वासियों को पानी मिल सके।1
- डिंडोरी जिले के आनाखेड़ा में दोपहर लगभग एक बजे एक 13 वर्षीय बालक किस्मत मरावी जामुन खाने के लिए पेड़ पर चढ़ा था, तभी वह बिजली के करंट की चपेट में आकर गंभीर रूप से झुलस गया। जानकारी के अनुसार, तेज हवाओं के कारण जामुन के पेड़ के पास से गुजर रही ग्रामीण सप्लाई लाइन का बिजली का तार पेड़ की शाखाओं को छू गया, जिससे किस्मत मरावी झुलस गया। घटना की सूचना मिलते ही परिवारजन तुरंत पीड़ित बच्चे को जिला अस्पताल ले गए, जहां उसकी गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। इस दौरान, पीड़ित परिवार ने 108 एम्बुलेंस सेवा पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि लगभग 2 बजे 108 को कॉल किया गया था, लेकिन कॉल सेंटर से एम्बुलेंस उपलब्ध न होने की जानकारी दी गई और लगभग डेढ़ घंटे बाद संपर्क करने को कहा गया। परिवार ने लगभग एक घंटे बाद दोबारा 108 कॉल सेंटर पर कॉल किया, जहाँ उन्हें फिर से डेढ़ घंटे बाद कॉल करने का जवाब मिला, क्योंकि गाड़ी उपलब्ध नहीं थी। पीड़ित परिवार ने यह सवाल उठाया है कि यदि समय पर 108 इमरजेंसी वाहन उपलब्ध नहीं होंगे, तो गंभीर मरीजों को समय पर बेहतर उपचार के लिए बड़े अस्पतालों तक कैसे पहुंचाया जाएगा।1