3.62 करोड़ की पानी की टंकी भरभराकर गिरी, 5 ग्रामीण मलबे में दबे जल जीवन मिशन में बड़ा भ्रष्टाचार ? साल भर में ढही करोड़ों की टंकी, उठे गंभीर सवाल रिपोर्ट : आदित्य भारद्वाज आंवला। सरकार गांव-गांव शुद्ध पानी पहुंचाने के दावे कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत ने सोमवार शाम उन दावों की पोल खोल दी। विकासखंड आलमपुर जाफराबाद की ग्राम पंचायत सरदारनगर में जल जीवन मिशन के तहत करीब 3 करोड़ 62 लाख 87 हजार रुपये की लागत से बनी ओवरहेड पानी की टंकी अचानक भरभराकर गिर गई। टंकी गिरते ही मौके पर अफरा-तफरी मच गई और मलबे में दबकर 5 ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों में वीरपाल, डोरीलाल, वेदपाल, अर्जुन और रविंद्र शामिल हैं, जिन्हें पुलिस-प्रशासन ने तत्काल मलबे से निकलवाकर अस्पताल भिजवाया। ग्रामीणों के मुताबिक टंकी का गिरना किसी साधारण हादसे जैसा नहीं, बल्कि भ्रष्ट निर्माण और घटिया सामग्री की खुली गवाही है। करीब एक साल पहले बनी यह टंकी इतनी जल्दी जमींदोज हो जाएगी, इसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन में हड़कंप मच गया। जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने अस्पताल पहुंचकर घायलों का हाल जाना और फिर घटनास्थल का निरीक्षण किया। मौके पर एडीएम पूर्णिमा सिंह, एसडीएम आंवला विदुषी सिंह, सीओ आंवला नितिन कुमार, एसएचओ भमोरा पवन कुमार समेत भारी पुलिस बल और एसडीआरएफ टीम ने राहत एवं बचाव कार्य चलाया। इस हादसे के बाद ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। लोगों ने साफ आरोप लगाया कि जल जीवन मिशन भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि पूरे आलमपुर जाफराबाद ब्लॉक में करोड़ों खर्च कर बनाई गईं पानी की टंकियां आज तक सुचारू रूप से चालू नहीं हो सकीं। कहीं पाइपलाइन अधूरी है, कहीं मोटर खराब है, तो कहीं टंकी खड़ी है लेकिन पानी नहीं पहुंच रहा। अब सरदारनगर की टंकी गिरने के बाद लोगों का आरोप है कि कागजों में विकास, जमीन पर विनाश किया गया। ग्रामीणों का कहना है कि अगर टंकी पूरी तरह चालू हालत में होती और उस वक्त आसपास ज्यादा लोग मौजूद होते, तो यह हादसा कई जिंदगियां लील सकता था। सवाल यह है कि 3.62 करोड़ की सरकारी परियोजना आखिर एक साल भी क्यों नहीं टिक सकी, क्या निर्माण में मानकों की अनदेखी हुई, क्या घटिया सामग्री लगाई गई और सबसे बड़ा सवाल क्या इस पूरे खेल में जिम्मेदार अफसरों और ठेकेदारों की मिलीभगत थी। आलमपुर जाफराबाद ब्लॉक प्रमुख वेद प्रकाश यादव भी मौके पर पहुंचे और घायलों का हाल जाना। उन्होंने अधिकारियों से बात कर सभी घायलों के समुचित इलाज की मांग की। वहीं देर रात इस मामले में अधिशासी अभियंता कुमकुम गंगवार की ओर से थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सिर्फ मुकदमा दर्ज कर जिम्मेदारी पूरी मान ली जाएगी, या फिर करोड़ों के इस भ्रष्टाचार पर सच में कार्रवाई होगी। सरदारनगर में गिरी यह पानी की टंकी सिर्फ एक ढांचा नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं में कमीशनखोरी, लापरवाही और भ्रष्टाचार के उस तंत्र का मलबा है, जिसके नीचे आम जनता हर रोज दब रही है।
3.62 करोड़ की पानी की टंकी भरभराकर गिरी, 5 ग्रामीण मलबे में दबे जल जीवन मिशन में बड़ा भ्रष्टाचार ? साल भर में ढही करोड़ों की टंकी, उठे गंभीर सवाल रिपोर्ट : आदित्य भारद्वाज आंवला। सरकार गांव-गांव शुद्ध पानी पहुंचाने के दावे कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत ने सोमवार शाम उन दावों की पोल खोल दी। विकासखंड आलमपुर जाफराबाद की ग्राम पंचायत सरदारनगर में जल जीवन मिशन के तहत करीब 3 करोड़ 62 लाख 87 हजार रुपये की लागत से बनी ओवरहेड पानी की टंकी अचानक भरभराकर गिर गई। टंकी गिरते ही मौके पर अफरा-तफरी मच गई और मलबे में दबकर 5 ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों में वीरपाल, डोरीलाल, वेदपाल, अर्जुन और रविंद्र शामिल हैं, जिन्हें पुलिस-प्रशासन ने तत्काल मलबे से निकलवाकर अस्पताल भिजवाया। ग्रामीणों के मुताबिक टंकी का गिरना किसी साधारण हादसे जैसा नहीं, बल्कि भ्रष्ट निर्माण और घटिया सामग्री की खुली गवाही है। करीब एक साल पहले बनी यह टंकी इतनी जल्दी जमींदोज हो जाएगी, इसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन में हड़कंप मच गया। जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने अस्पताल पहुंचकर घायलों का हाल जाना और फिर घटनास्थल का निरीक्षण किया। मौके पर एडीएम पूर्णिमा सिंह, एसडीएम आंवला विदुषी सिंह, सीओ आंवला नितिन कुमार, एसएचओ भमोरा पवन कुमार समेत भारी पुलिस बल और एसडीआरएफ टीम ने राहत एवं बचाव कार्य चलाया। इस हादसे के बाद ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। लोगों ने साफ आरोप लगाया कि जल जीवन मिशन भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि पूरे आलमपुर जाफराबाद ब्लॉक में करोड़ों खर्च कर बनाई गईं पानी की टंकियां आज तक सुचारू रूप से चालू नहीं हो सकीं। कहीं पाइपलाइन अधूरी है, कहीं मोटर खराब है, तो कहीं टंकी खड़ी है लेकिन पानी नहीं पहुंच रहा। अब सरदारनगर की टंकी गिरने के बाद लोगों का आरोप है कि कागजों में विकास, जमीन पर विनाश किया गया। ग्रामीणों का कहना है कि अगर टंकी पूरी तरह चालू हालत में होती और उस वक्त आसपास ज्यादा लोग मौजूद होते, तो यह हादसा कई जिंदगियां लील सकता था। सवाल यह है कि 3.62 करोड़ की सरकारी परियोजना आखिर एक साल भी क्यों नहीं टिक सकी, क्या निर्माण में मानकों की अनदेखी हुई, क्या घटिया सामग्री लगाई गई और सबसे बड़ा सवाल क्या इस पूरे खेल में जिम्मेदार अफसरों और ठेकेदारों की मिलीभगत थी। आलमपुर जाफराबाद ब्लॉक प्रमुख वेद प्रकाश यादव भी मौके पर पहुंचे और घायलों का हाल जाना। उन्होंने अधिकारियों से बात कर सभी घायलों के समुचित इलाज की मांग की। वहीं देर रात इस मामले में अधिशासी अभियंता कुमकुम गंगवार की ओर से थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सिर्फ मुकदमा दर्ज कर जिम्मेदारी पूरी मान ली जाएगी, या फिर करोड़ों के इस भ्रष्टाचार पर सच में कार्रवाई होगी। सरदारनगर में गिरी यह पानी की टंकी सिर्फ एक ढांचा नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं में कमीशनखोरी, लापरवाही और भ्रष्टाचार के उस तंत्र का मलबा है, जिसके नीचे आम जनता हर रोज दब रही है।
- अधिवक्ताओं की समस्याओं को लेकर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट से मिला प्रतिनिधिमंडल1
- हावड़ा में सियासी हिंसा: TMC नेता की पिटाई का दावा, सोशल मीडिया पर वायरल हावड़ा में TMC के वरिष्ठ नेता श्यामलाल मित्रा के साथ कथित मारपीट का मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। दावा किया जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी के समर्थकों ने उन्हें घेरकर पीटा। हालांकि, इस घटना की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। यह जानकारी मुख्य रूप से सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट्स और दावों पर आधारित है, जिनकी सत्यता की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है। वायरल हो रहे बयान में राजनीतिक प्रतिशोध और सत्ता परिवर्तन को लेकर तीखी टिप्पणी भी की जा रही है, जिससे माहौल और गरमा गया है। फिलहाल दोनों दलों की ओर से कोई स्पष्ट आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, और प्रशासन की ओर से भी पुष्टि का इंतजार है।1
- Post by रवि मौर्या राज वंश1
- बरेली बार एसोसिएशन की संबद्धता को लेकर सांकेतिक धरना जारी, हस्ताक्षर अभियान तेज बरेली, 5 मई 2026। बरेली बार एसोसिएशन की बार काउंसिल उत्तर प्रदेश से संबद्धता बहाली की मांग को लेकर चल रहा सांकेतिक धरना मंगलवार को भी जारी रहा। ट्रेज़री रोड स्थित न्यायालय के पश्चिमी द्वार के सामने बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने धरने में भाग लिया और हस्ताक्षर अभियान को आगे बढ़ाया। ज्ञात हो कि यह आंदोलन 4 मई से 8 मई 2026 तक प्रतिदिन अपराह्न 1:30 बजे से 2:30 बजे तक एक घंटे के सांकेतिक धरने के रूप में चल रहा है, जिसकी अगुवाई अधिवक्ता अंतरिक्ष सक्सेना कर रहे हैं। मंगलवार को निर्धारित समय पर धरना शुरू हुआ, जिसमें लगातार अधिवक्ता जुड़ते रहे और हस्ताक्षर कर समर्थन जताया। धरने के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने अपने विचार रखते हुए बार काउंसिल से संबद्धता बहाल करने की मांग को दोहराया। इस दौरान विजय प्रकाश, समीर बिसारिया, रामाश्रय, राजा मोहम्मद असलम, विशेष पाल सिंह, सुभाष चौधरी, इकबाल खान, पुनीत मिश्रा, मध्यम सक्सेना, प्रेरणा, विवेक सहगल और पूजा जगवानी सहित कई अधिवक्ता मौजूद रहे। धरने के अंतिम चरण में बरेली बार एसोसिएशन के सचिव मौके पर पहुंचे और अधिवक्ताओं के साथ करीब 45 मिनट तक वार्ता हुई। इस दौरान सैकड़ों अधिवक्ता धरना स्थल पर एकत्र हो गए और विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। हालांकि, सचिव द्वारा कई बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट करने के बावजूद धरने पर बैठे अधिवक्ता बार काउंसिल से संबद्धता बहाली और इस विषय पर आम सभा बुलाने की मांग पर अड़े रहे। सचिव ने 10 मई 2026 को कार्यकारिणी की बैठक में इस मुद्दे को रखकर आम सभा बुलाने पर विचार करने का आश्वासन दिया, लेकिन अधिवक्ताओं ने तय तिथि घोषित किए बिना धरना समाप्त करने से इनकार कर दिया। धरना निर्धारित समय 2:30 बजे समाप्त हुआ, जिसके बाद अधिवक्ताओं ने बुधवार को भी इसी समय पर धरना जारी रखने की घोषणा की। इस मौके पर विनीत सक्सेना, अमरदीप सक्सेना, हुलासीराम, ज्वाला प्रसाद गंगवार, मुख्तार वसीम, अजीत कुमार, धर्मेश, प्यारेलाल मौर्य, रामपाल सिंह, जितेंद्र गुप्ता, वासुदेव, अहमद हुसैन, भगवत शरण, सोमेंद्र यादव, श्रवण सिंह, रीना सिंह, सुमित कुमार, एम.आर. मलिक, अमन सक्सेना, अवधेश सक्सेना, श्यामवीर यादव, राहुल प्रताप सिंह, एजाज अहमद, अना वाजिद, ओंकार सिंह, प्रदीप कुमार सिंह सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित रहे।1
- बरेली | थाना कैंट क्षेत्र क्रिकेट खेलकर लौट रहे कुछ युवकों द्वारा “पाकिस्तान जिंदाबाद” के नारे लगाने का मामला सामने आने के बाद पुलिस ने सख्त कार्रवाई करते हुए एक नामजद आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। क्या है पूरा मामला? 3 मई 2026 को थाना कैंट क्षेत्र में कुछ युवक बाइक/स्कूटी से लौटते समय बाजार और गलियों में नारेबाजी कर रहे थे। इस दौरान “पाकिस्तान जिंदाबाद” और “हमारा नेता कैसा हो, कासिफ भाई जैसा हो” जैसे नारे लगाए गए। इस मामले में वादी विकास की तहरीर पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया। पुलिस की कार्रवाई CCTV फुटेज के आधार पर 14 आरोपियों की पहचान 10 नाबालिगों को संरक्षण में लेकर पूछताछ 3 स्कूटी और 1 बाइक कब्जे में मुख्य आरोपी इमरान अहमद (19 वर्ष) गिरफ्तार पूछताछ में क्या सामने आया? गिरफ्तार आरोपी इमरान ने बताया कि क्रिकेट मैच के बाद कासिफ नाम के युवक ने सभी को नाश्ता कराया और नारे लगाने के लिए उकसाया। पहले “कासिफ भाई जिंदाबाद” जैसे नारे लगे, लेकिन बाद में जोश में आकर “पाकिस्तान जिंदाबाद” के नारे लगाए गए। आरोपी ने इसे अपनी गलती बताया। आगे की कार्रवाई पुलिस ने आरोपी को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया है और बाकी आरोपियों के खिलाफ भी कार्रवाई जारी है।1
- #वीडियो बनाकर किया ब्लैकमेल, लाखों की वसूली का आरोप जिम संचालक और उसका भाई गिरफ्तार, पुलिस ने की बरामदगी सीओ सिटी-1 आशुतोष शिवम ने दी कार्रवाई की जानकारी#1
- Post by रवि मौर्या राज वंश1
- पुलिस मुठभेड़ में शातिर गौकश घायल, अवैध असलाह बरामद थाना बारादरी का मामला1
- उसावां–गूरा बरेला मार्ग बना हादसों का हॉटस्पॉट, जलकल मिशन पर गंभीर सवाल संवाददाता मुनेन्द्र शर्मा पत्रकार बदायूँ बदायूँ जनपद के उसावां से गूरा बरेला PWD मार्ग पर लापरवाही का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां ग्राम नगरिया अभय के पास जलकल मिशन द्वारा डाली गई पाइपलाइन लोगों के लिए खतरा बन चुकी है। सड़क के किनारे-किनारे लगभग दो-दो फीट गहरे गड्ढे खोदकर छोड़ दिए गए हैं, जो किसी भी समय बड़े हादसे को न्योता दे सकते हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पाइपलाइन डालने का कार्य बिना किसी सुरक्षा व्यवस्था के अधूरा छोड़ दिया गया है। न तो गड्ढों को भरा गया और न ही किसी प्रकार के चेतावनी संकेत लगाए गए हैं। इससे राहगीरों, बाइक सवारों और वाहन चालकों को हर समय दुर्घटना का खतरा बना हुआ है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या जलकल मिशन ने इस कार्य के लिए PWD विभाग से आवश्यक NOC (अनापत्ति प्रमाण पत्र) लिया था या नहीं? अगर बिना अनुमति के सड़क किनारे खुदाई की गई है, तो यह सीधा नियमों का उल्लंघन है और संबंधित विभाग के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि भविष्य में कोई दुर्घटना होती है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी जलकल मिशन और PWD विभाग दोनों की संयुक्त रूप से तय की जानी चाहिए। यही नहीं, लोगों में यह भी नाराजगी है कि जलकल मिशन अब “जलकल मिशन” कम और “सड़क बर्बाद मिशन” ज्यादा बन चुका है। कई गांवों में सीसी रोड को तोड़कर पाइपलाइन डाली गई, लेकिन उसके बाद मरम्मत नहीं करवाई गई। इससे गांवों की सड़कें बदहाल हो चुकी हैं और आम जनता परेशान है। अब सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यही है — अगर सड़क तोड़ी गई है, तो उसकी मरम्मत कौन करेगा? प्रशासन से मांग की जा रही है कि इस पूरे मामले की जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए और जल्द से जल्द सड़क व गड्ढों की मरम्मत कराकर जनता को राहत दी जाए।2