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बिहार के गोपालगंज जिले में ई-रिक्शा और रिक्शा चालकों ने सड़कों पर जाम लगा दिया। यह जाम स्टैंड चार्ज की वसूली को लेकर किया गया था।
Dhananjay Kumar Yadav
बिहार के गोपालगंज जिले में ई-रिक्शा और रिक्शा चालकों ने सड़कों पर जाम लगा दिया। यह जाम स्टैंड चार्ज की वसूली को लेकर किया गया था।
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- गोपालगंज जिले में आपसी रंजिश ने एक बार फिर खूनी रूप ले लिया, जहाँ पूर्व के विवाद को लेकर एक 40 वर्षीय युवक की चाकू से गोदकर निर्मम हत्या कर दी गई। मृतक की पहचान कुचायकोट थाना क्षेत्र के रामपुर माधो बलुआ टोला निवासी हरकेश यादव के पुत्र मोहन यादव के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार, मोहन यादव रविवार की शाम को मठिया नंदलाल बाजार में घरेलू सामान खरीदने गए थे, जिसके बाद कथित तौर पर पहले से घात लगाए बैठे लोगों ने उन्हें जबरन अपने साथ ले लिया और फिर उनका कोई पता नहीं चला। सोमवार की सुबह मोहन यादव की पत्नी लीलावती देवी ने कुचायकोट थाने में अपने पति के अचानक गायब होने को लेकर एक आवेदन दिया, जिसमें उन्होंने किसी अनहोनी की आशंका जताते हुए पुलिस प्रशासन से जल्द से जल्द पति को सकुशल बरामद करने की गुहार लगाई थी। इसी बीच, परिजनों ने रामदेव यादव के पुत्र संदीप यादव और बाबूलाल यादव के पुत्र रवि यादव पर मोहन यादव का अपहरण कर सुनसान दियारा क्षेत्र में ले जाकर चाकू से गोदकर हत्या करने और शव को गुमनिया दियारा स्थित विजयपुर चंवर में फेंकने का आरोप लगाया है। सोमवार देर शाम को बिशम्भरपुर थाना क्षेत्र में शव मिलने की सूचना से इलाके में सनसनी फैल गई। स्थानीय लोगों की सूचना पर मौके पर पहुँची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया। घटनास्थल पर एफएसएल की टीम भी बुलाई गई, जिसने कई महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए। पुलिस की प्रारंभिक जाँच में हत्या के पीछे पुरानी रंजिश की आशंका जताई जा रही है, और मामले के सभी पहलुओं से गहनता से जाँच की जा रही है। घटना के बाद से मृतक के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, और वे आरोपियों की अविलंब गिरफ्तारी तथा कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। पुलिस भी मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है।1
- बिहार के गोपालगंज जिले में ई-रिक्शा और रिक्शा चालकों ने सड़कों पर जाम लगा दिया। यह जाम स्टैंड चार्ज की वसूली को लेकर किया गया था।1
- यह वीडियो पीएच स्केल से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर विस्तारपूर्वक जानकारी प्रदान करेगा, जिसमें अम्ल, क्षार और लवण की जाँच के तरीके भी शामिल हैं। दर्शक जानेंगे कि पीएच स्केल क्या होता है, इसके मुख्य उपयोग क्या हैं, और इसे किसने तथा कब खोजा था। वीडियो में पीएच स्केल के आवश्यक गुणधर्मों, पीएच मान की परिभाषा और पीएच मान की गणना कैसे की जाती है, जैसे विषयों पर भी चर्चा की जाएगी। यह शैक्षिक सामग्री विशेष रूप से पीएच स्केल की अवधारणा को गहराई से समझने के लिए तैयार की गई है।1
- यह वीडियो पीएच स्केल के विस्तृत विश्लेषण पर केंद्रित है, जिसमें दर्शक इसके विभिन्न पहलुओं को विस्तार से जान पाएंगे। वीडियो में यह बताया जाएगा कि पीएच स्केल क्या है, इसके प्रमुख उपयोग क्या हैं, और इसकी खोज किसने तथा कब की थी। इसके अतिरिक्त, यह वीडियो इस बात पर भी प्रकाश डालेगा कि पीएच स्केल का उपयोग करके अम्ल, क्षार और लवण की पहचान कैसे की जाती है। इसमें पीएच स्केल में आवश्यक गुणों, पीएच मान की परिभाषा, और पीएच मान की गणना कैसे की जाती है, इन सभी विषयों पर भी चर्चा की जाएगी।1
- नौतन प्रखंड के मंगलपुर गुदरिया पंचायत में स्थित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 152 पर जीविका द्वारा तैयार किए गए पोशाक का वितरण किया गया। केंद्र की सेविका अनीता देवी ने 40 बच्चों के बीच इन पोशाकों का वितरण किया। नए कपड़े पाकर बच्चे काफी खुश नजर आए और खुशी से झूम उठे। जीविका की इस पहल से आंगनबाड़ी के बच्चों के चेहरे खिल उठे। इस दौरान सहायिका, अभिभावक और स्थानीय लोग भी उपस्थित रहे।1
- बेतिया मेडिकल कॉलेज अस्पताल में कुत्ता काटने के बाद लगने वाली एंटी-रेबीज वैक्सीन के लिए एक नई व्यवस्था शुरू की जा रही है। इस आधुनिक पद्धति के लागू होने के बाद, बेतिया मेडिकल कॉलेज बिहार का दूसरा ऐसा सरकारी अस्पताल बन जाएगा जहाँ इस नई तकनीक से मरीजों का उपचार किया जाएगा। इस नई वैक्सीन की मुख्य विशेषता यह है कि इसमें पुरानी पद्धति की तुलना में कम मात्रा में इंजेक्शन देना होगा। जहाँ पहले कई खुराकें और एक अलग प्रक्रिया अपनाई जाती थी, वहीं नई व्यवस्था में वैक्सीन को सीधे त्वचा (इंट्राडर्मल) में दिया जाएगा। इससे वैक्सीन की खपत कम होगी और अधिक से अधिक मरीजों को इस सुविधा का लाभ मिल सकेगा। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, मरीज केवल अपने आधार कार्ड के साथ अस्पताल पहुँचकर इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं। पूरी वैक्सीनेशन प्रक्रिया डॉक्टरों की निगरानी में संचालित की जाएगी। चिकित्सकों का कहना है कि यह नई व्यवस्था मरीजों को अनावश्यक परेशानी से राहत देगी और रेबीज जैसी गंभीर बीमारी की रोकथाम में अधिक प्रभावी साबित होगी। अस्पताल प्रशासन का लक्ष्य है कि यह सुविधा आम जनता तक सुचारू रूप से पहुँचे, ताकि किसी भी मरीज को इलाज के लिए भटकना न पड़े और उन्हें समय पर तथा बेहतर उपचार उपलब्ध हो सके।1
- राजस्थान के कोटा में भारतीय रेलवे के वरिष्ठ सेक्शन इंजीनियर संजय कुमार झा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले के धमोरा गांव निवासी संजय कुमार झा, जो वर्तमान में राजस्थान के रामगंज मंडी में पदस्थापित थे, की मृत्यु के बाद उनके परिजनों ने इसे महज एक दुर्घटना मानने से इनकार करते हुए हत्या का आरोप लगाया है और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से पूरे मामले की जांच की मांग की है। घटना कोटा के दरा अंडरपास क्षेत्र में किसी कार्य के दौरान बताई जा रही है, जिसके बाद संजय कुमार झा को कोटा के सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। मृतक के भाई रमन कुमार झा ने बताया कि परिवार को शुरुआत में मिट्टी में दबने और गंभीर स्थिति में इलाज व सर्जरी की तैयारी की सूचना दी गई थी, लेकिन जब उन्होंने डॉक्टर से सीधी बात कराने की मांग की तो फोन काट दिया गया। इसके बाद उन्हें स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई और काफी देर बाद उनकी मृत्यु की सूचना दी गई। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल पहुंचने पर उन्हें शव केवल एक बार दिखाया गया और लगभग 12 घंटे तक शव अस्पताल में ही रखा गया, जिस पर उन्होंने पारदर्शिता की कमी को लेकर सवाल उठाए हैं। मृतक की मां ने सीधे तौर पर बेटे की हत्या का आरोप लगाया है और CBI जांच की मांग करते हुए इसे किसी बड़ी साजिश का परिणाम बताया है, न कि साधारण हादसा। उनके भाई रमन कुमार झा ने भी इस संदेह को बल दिया है, यह दावा करते हुए कि कुछ समय पहले संजय कुमार झा का कुछ मजदूर संगठनों से विवाद हुआ था और उन संगठनों द्वारा उनके खिलाफ धरना-प्रदर्शन भी किया गया था, जिससे परिवार को यह एक सुनियोजित साजिश का परिणाम होने की आशंका है। परिजनों ने चिकित्सा व्यवस्था में भी गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि संजय कुमार झा घटनास्थल से अस्पताल ले जाते समय जीवित थे, लेकिन एंबुलेंस में आवश्यक चिकित्सकीय सुविधाएं, ऑक्सीजन और अन्य जीवनरक्षक उपकरण उपलब्ध नहीं थे। साथ ही, अस्पताल पहुंचने में भी काफी विलंब हुआ। परिवार का आरोप है कि यदि समय पर समुचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाती तो उनकी जान बच सकती थी। एक अनुभवी और प्रतिभाशाली सिविल इंजीनियर के रूप में भारतीय रेलवे में उनके कार्यों की सराहना की जाती थी, और उनकी असामयिक मौत को परिवार के साथ-साथ रेलवे के लिए भी बड़ी क्षति बताया गया है। अब मृतक के परिजन केंद्र सरकार, भारतीय रेलवे और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से इस मामले में निष्पक्ष न्यायिक जांच कराने की मांग कर रहे हैं। वे पूरे मामले को CBI को सौंपकर हत्या की आशंका, कथित लापरवाही, चिकित्सा व्यवस्था में हुई देरी और घटना के सभी पहलुओं की गहन जांच की मांग कर रहे हैं, ताकि सच्चाई सामने आ सके और परिवार को न्याय मिल सके।1
- यह वीडियो प्राचीन भारत के इतिहास की एक 'अनकही सच्चाई' को उजागर करने का वादा करता है, जहाँ यह सवाल उठाया गया है कि क्या प्राचीन भारत में महिलाएँ पुरुषों की तुलना में अधिक पढ़ी-लिखी थीं। वीडियो में विस्तार से बताया जाएगा कि 'ब्राह्मण काल' में नारियों को किस प्रकार शिक्षा प्रदान की जाती थी और उस समय महिलाओं की शिक्षा व्यवस्था कैसी थी। इसके अतिरिक्त, इसमें आधुनिक युग और प्राचीन काल की महिलाओं की शिक्षा व्यवस्था के बीच के अंतर पर भी गहराई से चर्चा की जाएगी।1