जर्जर आंगनबाड़ी भवन से प्रभावित हो रहा आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन पन्ना जिले के शाहनगर परियोजना अंतर्गत ग्राम ककरा का मामला, नौनिहालों की सुरक्षा पर सवाल रैपुरा। पन्ना जिले की परियोजना शाहनगर अंतर्गत ग्राम ककरा में आंगनबाड़ी केंद्र का भवन जर्जर और क्षतिग्रस्त होने के कारण केंद्र का संचालन प्रभावित हो रहा है। भवन की खराब हालत को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में नाराजगी है और उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों से तत्काल ध्यान देने की मांग की है। ग्रामीणों के अनुसार, आंगनबाड़ी भवन लंबे समय से बदहाल स्थिति में है। भवन की दीवारों और अन्य हिस्सों में क्षति होने के कारण यहां आने वाले छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। ऐसी स्थिति में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी बच्चों के नियमित संचालन, पोषण आहार वितरण एवं अन्य गतिविधियों में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा की महत्वपूर्ण कड़ी है। इसके बावजूद यदि नौनिहालों को सुरक्षित भवन उपलब्ध नहीं हो पा रहा है, तो शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ग्रामीणों ने मांग की है कि संबंधित विभाग के अधिकारी ग्राम ककरा स्थित आंगनबाड़ी भवन का तत्काल निरीक्षण कर उसकी वास्तविक स्थिति का जायजा लें तथा आवश्यकतानुसार भवन की मरम्मत अथवा नए भवन का निर्माण कराया जाए, ताकि बच्चों को सुरक्षित वातावरण मिल सके और केंद्र का संचालन सुचारु रूप से हो सके। ग्रामीणों का कहना है कि जब देश को विश्वगुरु बनाने का सपना देखा जा रहा है, तब भविष्य की पीढ़ी यानी नौनिहालों के लिए सुरक्षित आंगनबाड़ी भवन उपलब्ध कराना भी विकास की प्राथमिकता होनी चाहिए। सवाल यह है कि जर्जर भवनों की अनदेखी के बीच आखिर किस विकास के दम पर भारत विश्वगुरु बनेगा? अब देखना यह है कि ग्राम ककरा की इस समस्या पर जिम्मेदार विभाग कब तक कार्रवाई करता है।
जर्जर आंगनबाड़ी भवन से प्रभावित हो रहा आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन पन्ना जिले के शाहनगर परियोजना अंतर्गत ग्राम ककरा का मामला, नौनिहालों की सुरक्षा पर सवाल रैपुरा। पन्ना जिले की परियोजना शाहनगर अंतर्गत ग्राम ककरा में आंगनबाड़ी केंद्र का भवन जर्जर और क्षतिग्रस्त होने के कारण केंद्र का संचालन प्रभावित हो रहा है। भवन की खराब हालत को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में नाराजगी है और उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों से तत्काल ध्यान देने की मांग की
है। ग्रामीणों के अनुसार, आंगनबाड़ी भवन लंबे समय से बदहाल स्थिति में है। भवन की दीवारों और अन्य हिस्सों में क्षति होने के कारण यहां आने वाले छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। ऐसी स्थिति में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी बच्चों के नियमित संचालन, पोषण आहार वितरण एवं अन्य गतिविधियों में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा की महत्वपूर्ण कड़ी है।
इसके बावजूद यदि नौनिहालों को सुरक्षित भवन उपलब्ध नहीं हो पा रहा है, तो शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ग्रामीणों ने मांग की है कि संबंधित विभाग के अधिकारी ग्राम ककरा स्थित आंगनबाड़ी भवन का तत्काल निरीक्षण कर उसकी वास्तविक स्थिति का जायजा लें तथा आवश्यकतानुसार भवन की मरम्मत अथवा नए भवन का निर्माण कराया जाए, ताकि बच्चों को सुरक्षित वातावरण मिल सके और केंद्र का संचालन सुचारु रूप
से हो सके। ग्रामीणों का कहना है कि जब देश को विश्वगुरु बनाने का सपना देखा जा रहा है, तब भविष्य की पीढ़ी यानी नौनिहालों के लिए सुरक्षित आंगनबाड़ी भवन उपलब्ध कराना भी विकास की प्राथमिकता होनी चाहिए। सवाल यह है कि जर्जर भवनों की अनदेखी के बीच आखिर किस विकास के दम पर भारत विश्वगुरु बनेगा? अब देखना यह है कि ग्राम ककरा की इस समस्या पर जिम्मेदार विभाग कब तक कार्रवाई करता है।
- अतुल दहिया की नेतृत्व में दिया गया ज्ञापन मांग जल्दी नहीं पूरी होती तो करेंगे बड़ा आंदोलन मिढासन नदी पर पुल नहीं तो संपर्क टूटा: बारिश में टापू बना बड़ागाँव, कलेक्टर से पक्के पुल की गुहार पन्ना। जिले की देवेन्द्रनगर तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत बड़ागाँव में मिढासन नदी पर पुल नहीं होने से ग्रामीणों की मुश्किलें हर बारिश में बढ़ जाती हैं। नदी का जलस्तर बढ़ते ही गांव का तहसील और जिला मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह कट जाता है और बड़ागाँव टापू में तब्दील हो जाता है। ग्रामीणों के अनुसार, बारिश के दिनों में सबसे अधिक परेशानी मरीजों, स्कूली बच्चों और किसानों को उठानी पड़ती है। नदी में पानी बढ़ने के कारण मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना मुश्किल हो जाता है, वहीं बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। किसानों के सामने फसल को मंडी तक पहुंचाने की भी बड़ी समस्या खड़ी हो जाती है। स्थानीय स्तर पर कई बार समस्या से प्रशासन को अवगत कराने के बावजूद स्थायी समाधान नहीं होने पर ग्रामीणों ने अब एकजुट होकर पक्के पुल की मांग उठाई है। गुरुवार 20 अगस्त को शाम 5 बजे समस्त ग्रामवासी जिला कलेक्टर पन्ना को ज्ञापन सौंपेंगे। ग्रामीणों ने कलेक्टर से मांग की है कि मिढासन नदी पर बने रास्ते का तत्काल प्रशासनिक निरीक्षण कराया जाए और आवागमन की समस्या के स्थायी समाधान के लिए पक्के पुल के निर्माण की स्वीकृति जल्द प्रदान की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि पुल का निर्माण केवल आवागमन की सुविधा नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि से जुड़ी उनकी बुनियादी जरूरतों के लिए बेहद जरूरी है।4
- प्रतिबंध के बावजूद सिल्वर फाल पर उमड़ी भीड़, जान जोखिम में डालकर ले रहे सेल्फी पवई। नगर से करीब 12 किलोमीटर दूर पन्ना-कटनी मुख्य मार्ग पर स्थित चांदा घाटी का प्रसिद्ध सिल्वर फाल लगातार हो रही बारिश के बाद पूरे उफान पर है। पहाड़ों से गिरता दूधिया जलप्रपात इन दिनों पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। झरने का मनमोहक नजारा देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंच रहे हैं। हालांकि, प्राकृतिक सुंदरता के बीच लापरवाही का भी चिंताजनक नजारा देखने को मिल रहा है। प्रशासन द्वारा झरने के समीप जाने पर प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद कई लोग फिसलन भरी चट्टानों पर चढ़कर सेल्फी और वीडियो बनाने में जुटे हैं। वायरल हो रहे वीडियो और तस्वीरों में लोग गहरी खाई के किनारे खड़े होकर फोटो खिंचवाते नजर आ रहे हैं, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के मौसम में सिल्वर फाल का जलप्रवाह अत्यधिक तेज हो जाता है और चट्टानें पूरी तरह फिसलन भरी रहती हैं। ऐसे में जरा-सी चूक भी जानलेवा साबित हो सकती है। इसके बावजूद लोग सुरक्षा नियमों की अनदेखी कर जोखिम उठाने से नहीं चूक रहे हैं। जानकारी के अनुसार जिला प्रशासन ने पहले ही झरने के पास जाने पर रोक लगा रखी है। बावजूद इसके मौके पर प्रभावी निगरानी और पर्याप्त चेतावनी बोर्ड नहीं होने के कारण लोग प्रतिबंधित क्षेत्र तक पहुंच जा रहे हैं। बुधवार को भी बड़ी संख्या में पर्यटक, जिनमें छोटे बच्चे भी शामिल थे, झरना देखने पहुंचे। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि सिल्वर फाल पर अतिरिक्त पुलिस बल और होमगार्ड की तैनाती की जाए। साथ ही चेतावनी बोर्ड लगाकर सख्ती से निगरानी रखी जाए, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।2
- *ब्रेकिंग न्यूज पन्ना मप्र* *पीएम श्री शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के प्रांगण से लेकर क्लास रूमों तक पानी ही पानी* *ग्राम के ही एक सोशल मीडिया ब्लॉगर ने वीडियो बनाकर इंस्टाग्राम फेसबुक पर किया वीडियो अपलोड* *लगातार हो रही बारिश से पीएम श्री विद्यालय के हाल बेहाल* जी हां हम बात कर रहे हैं पन्ना जिले के पवई तहसील अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत कृष्णगढ़ के पीएम श्री शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की यहा के प्रांगण एवं क्लास रुमो में लबालब पानी भर गया है जिसके चलते विद्यार्थियों की पढ़ाई भी स्थगित हुई है *पानी निकासी की नहीं विद्यालय में कोई व्यवस्था* *ऐसे में विद्यार्थियों का भविष्य कहां है आप खुद अंदाजा लगा सकते हैं* *ब्रेकिंग न्यूज पन्ना मप्र* *पीएम श्री शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के प्रांगण से लेकर क्लास रूमों तक पानी ही पानी* *ग्राम के ही एक सोशल मीडिया ब्लॉगर ने वीडियो बनाकर इंस्टाग्राम फेसबुक पर किया वीडियो अपलोड* *लगातार हो रही बारिश से पीएम श्री विद्यालय के हाल बेहाल* जी हां हम बात कर रहे हैं पन्ना जिले के पवई तहसील अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत कृष्णगढ़ के पीएम श्री शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की यहा के प्रांगण एवं क्लास रुमो में लबालब पानी भर गया है जिसके चलते विद्यार्थियों की पढ़ाई भी स्थगित हुई है *पानी निकासी की नहीं विद्यालय में कोई व्यवस्था* *ऐसे में विद्यार्थियों का भविष्य कहां है आप खुद अंदाजा लगा सकते हैं*1
- मुख्यमंत्री जन विश्वास शिविर गुनौर में दिखा शिकायतों का अम्बर कलेक्टर ने दिया निराकरण का भरोसा*1
- बृहस्पति कुंड का भोकाल पन्ना जिला मध्य प्रदेश दैनिक भास्कर से रूपेश जैन बृहस्पति कुंड का भोकाल1
- झुमटा के पुराने स्कूल भवन में विद्यालय संचालन की मांग को लेकर कलेक्टर से मिले सैकड़ो ग्रामीण *झुमटा के पुराने स्कूल भवन में विद्यालय संचालन की मांग को लेकर कलेक्टर से मिले सैकड़ों ग्रामीण* झूमटा गांव की शासकीय माध्यमिक शाला को पुनः गांव के पुराने विद्यालय भवन में संचालित किए जाने की मांग को लेकर बुधवार को झूमटा के सरपंच सहित सैकड़ों ग्रामीण गुनौर पहुंचे। ग्रामीणों ने पन्ना कलेक्टर उषा परमार से मुलाकात कर पूरे मामले से अवगत कराया और बच्चों के भविष्य एवं सुरक्षा को देखते हुए विद्यालय को झूमटा में ही पुराने भवन में पुनः संचालित कराने की मांग रखी। ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2021 से विद्यालय गांव से दूर पाली में अस्थाई रूप से संचालित हो रहा है, जिसके कारण विद्यार्थियों को प्रतिदिन काफी दूरी तय करनी पड़ रही है। कई बच्चे पैदल विद्यालय जाने को मजबूर हैं। वहीं जिस मार्ग से विद्यार्थी आवागमन करते हैं, उस पर जेके सीमेंट के ट्रकों की लगातार आवाजाही बनी रहती है। ऐसे में अभिभावकों को बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी रहती है। गैस रिसाव के बाद पाली में किया गया था विद्यालय स्थानांतरित ग्रामीणों के अनुसार 21 अक्टूबर 2021 को झूमटा में संचालित शासकीय माध्यमिक शाला के परिसर में बोरवेल से गैस रिसाव की घटना सामने आई थी। इसके बाद सुरक्षा की दृष्टि से विद्यालय को ग्राम पाली में अस्थाई रूप से संचालित किए जाने के आदेश दिए गए थे। ग्रामीणों का कहना है कि घटना के बाद विद्यालय को पाली में स्थानांतरित कर दिया गया, लेकिन कई वर्ष बीत जाने के बाद भी उसे वापस झूमटा के पुराने विद्यालय भवन में संचालित नहीं किया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान में विद्यालय भवन को लेकर आवश्यक जांच कराई जा सकती है। यदि जांच में यह पाया जाता है कि अब किसी प्रकार का गैस रिसाव या अन्य सुरक्षा संबंधी खतरा नहीं है, तो बच्चों की सुविधा और भविष्य को ध्यान में रखते हुए विद्यालय को पुनः झूमटा में संचालित किया जाना चाहिए। मंत्री के निर्देश के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई ग्रामीणों ने बताया कि पूर्व में समीक्षा बैठक के दौरान पन्ना जिले के प्रभारी मंत्री इंदर सिंह परमार द्वारा भी झूमटा के विद्यालय को पूर्व स्थान पर संचालित किए जाने के संबंध में निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद आज दिनांक तक विद्यालय की स्थिति जस की तस बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि इस मामले को लेकर पूर्व में गुनौर एसडीएम, जिला पंचायत सीईओ एवं गुनौर विधायक को भी आवेदन देकर विद्यालय को पुराने भवन में संचालित किए जाने की मांग की जा चुकी है, लेकिन अभी तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। दूरी बढ़ने से घट रही विद्यार्थियों की संख्या ग्रामीणों ने कलेक्टर को बताया कि विद्यालय गांव से दूर संचालित होने के कारण विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति प्रभावित हो रही है। कई बच्चे दूरी अधिक होने के कारण प्रतिदिन स्कूल नहीं पहुंच पाते। इससे विद्यालय में छात्र-छात्राओं की संख्या भी लगातार घटने की बात ग्रामीणों ने कही। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में विद्यालय होने से बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने में सुविधा होगी और अभिभावक भी अपने बच्चों को सुरक्षित तरीके से स्कूल भेज सकेंगे। वहीं मुख्य मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही के कारण दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है। ग्रामीणों ने की जांच कराकर विद्यालय वापस शुरू कराने की मांग झूमटा के सरपंच सहित ग्रामीणों ने कलेक्टर उषा परमार से मांग की कि पुराने विद्यालय भवन की तकनीकी एवं सुरक्षा संबंधी जांच कराई जाए। यदि जांच में भवन सुरक्षित पाया जाता है और वर्तमान में किसी प्रकार का गैस रिसाव नहीं हो रहा है, तो शासकीय माध्यमिक शाला को पुनः ग्राम झूमटा के पुराने विद्यालय भवन में संचालित किया जाए। ग्रामीणों ने कहा कि यह केवल भवन का मामला नहीं, बल्कि गांव के बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और भविष्य से जुड़ा विषय है। कई वर्षों से लंबित इस मांग पर अब प्रशासन द्वारा गंभीरता से कार्रवाई किए जाने की उम्मीद ग्रामीणों ने जताई है। कलेक्टर से मुलाकात के बाद ग्रामीणों को उम्मीद है कि जल्द ही विद्यालय की जांच कराकर समस्या का स्थायी समाधान किया जाएगा। सरपंच भूरी बाई सहित दर्जनों ग्रामीण पहुंचे थे अपनी शिकायत लेकर2
- बड़ी खबर **बृहस्पति कुंड में खतरा** लगातार बारिश से जलस्तर बढ़ा, पर्यटकों पर रोक। 🚫 अगले 2–4 दिन यात्रा टालें और उफनते पानी से दूर रहें। सावधान रहें, सुरक्षित रहें।1
- जर्जर आंगनबाड़ी भवन से प्रभावित हो रहा आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन पन्ना जिले के शाहनगर परियोजना अंतर्गत ग्राम ककरा का मामला, नौनिहालों की सुरक्षा पर सवाल रैपुरा। पन्ना जिले की परियोजना शाहनगर अंतर्गत ग्राम ककरा में आंगनबाड़ी केंद्र का भवन जर्जर और क्षतिग्रस्त होने के कारण केंद्र का संचालन प्रभावित हो रहा है। भवन की खराब हालत को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में नाराजगी है और उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों से तत्काल ध्यान देने की मांग की है। ग्रामीणों के अनुसार, आंगनबाड़ी भवन लंबे समय से बदहाल स्थिति में है। भवन की दीवारों और अन्य हिस्सों में क्षति होने के कारण यहां आने वाले छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। ऐसी स्थिति में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी बच्चों के नियमित संचालन, पोषण आहार वितरण एवं अन्य गतिविधियों में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा की महत्वपूर्ण कड़ी है। इसके बावजूद यदि नौनिहालों को सुरक्षित भवन उपलब्ध नहीं हो पा रहा है, तो शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ग्रामीणों ने मांग की है कि संबंधित विभाग के अधिकारी ग्राम ककरा स्थित आंगनबाड़ी भवन का तत्काल निरीक्षण कर उसकी वास्तविक स्थिति का जायजा लें तथा आवश्यकतानुसार भवन की मरम्मत अथवा नए भवन का निर्माण कराया जाए, ताकि बच्चों को सुरक्षित वातावरण मिल सके और केंद्र का संचालन सुचारु रूप से हो सके। ग्रामीणों का कहना है कि जब देश को विश्वगुरु बनाने का सपना देखा जा रहा है, तब भविष्य की पीढ़ी यानी नौनिहालों के लिए सुरक्षित आंगनबाड़ी भवन उपलब्ध कराना भी विकास की प्राथमिकता होनी चाहिए। सवाल यह है कि जर्जर भवनों की अनदेखी के बीच आखिर किस विकास के दम पर भारत विश्वगुरु बनेगा? अब देखना यह है कि ग्राम ककरा की इस समस्या पर जिम्मेदार विभाग कब तक कार्रवाई करता है।4