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shaadi mein 2026 ka Chatra jila Gram koshiyara pratappur
Golu Golakr
shaadi mein 2026 ka Chatra jila Gram koshiyara pratappur
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- Post by Golu Golakr1
- चतरा जिले के सिंघानी गांव में ईद की खुशिया बदली मातम में महुआ चुनने के क्रम में एक महिला की हुई वज्रपात से मौत, दो अन्य हुए घायल।1
- चतरा जिले के हंटरगंज प्रखंड अंतर्गत गेजना पंचायत के इमली टोला और समधनजोत गांव में सड़क की बदहाल स्थिति को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। करमा मुख्य मार्ग से क्लोई नदी तक लगभग 3 किलोमीटर लंबी सड़क पूरी तरह जर्जर हो चुकी है, जिससे करीब 50 घरों और लगभग 300 की आबादी वाले पांच टोलों के लोग परेशान हैं। ग्रामीणों—प्रदीप कुमार, अजय कुमार, सूरज यादव, गौतम कुमार, बंगाली यादव, रौशन भारती, सतेंद्र भुइयां, शोभा देवी, मालती देवी, गीता देवी सहित अन्य—ने बताया कि इस सड़क का निर्माण लगभग 20 वर्ष पहले मिट्टी-मोरम से कराया गया था, लेकिन उसके बाद आज तक न तो मरम्मत हुई और न ही पक्की सड़क बनाई गई। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की खराब स्थिति के कारण आपात स्थिति में बड़ी परेशानी होती है। प्रसव पीड़ा या गंभीर बीमारी की स्थिति में एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती, जिससे मरीजों की जान पर बन आती है। इसके अलावा गांव में आंगनबाड़ी केंद्र और स्कूल का भी अभाव है, जिससे बच्चों की शिक्षा और पोषण व्यवस्था प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों ने बताया कि इस समस्या को लेकर कई बार विधायक और सांसद से शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है। इससे लोगों में निराशा और गुस्सा दोनों बढ़ता जा रहा है। इस संबंध में गेजना पंचायत के मुखिया पति प्रभु भारती ने बताया कि पंचायत के पास इतनी राशि नहीं है कि इस सड़क का निर्माण कराया जा सके। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को कई बार जिला प्रशासन, उपायुक्त, सांसद और विधायक के समक्ष रखा गया है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि एक बार फिर संबंधित अधिकारियों का ध्यान इस ओर आकर्षित कराया जाएगा। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सड़क निर्माण की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो वे आंदोलन के लिए बाध्य1
- लोकतंत्र की आवाज़ निशांत तिवारी प्रभारी झारखंड चतरा (झारखंड):-चतरा जिले के हंटरगंज प्रखंड अंतर्गत डुमरी कला पंचायत के ग्राम बेला में बीते कई महीनों से क्रेशर एवं माइंस संचालकों द्वारा की जा रही अनियंत्रित और भयावह ब्लास्टिंग ने आम जनजीवन को गहरे संकट में डाल दिया है। आज दिनांक 20 मार्च 2026 को हुए एक अत्यंत खतरनाक और जोरदार विस्फोट (ब्लास्ट) ने पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। यह घटना कोई एक दिन की नहीं, बल्कि लगातार हो रही अवैध गतिविधियों का परिणाम है, जिससे ग्राम बेला के सैकड़ों परिवार भय, असुरक्षा और प्रशासनिक उपेक्षा के बीच जीवन जीने को मजबूर हैं। आज हुए इस भीषण ब्लास्टिंग के कारण ग्राम बेला निवासी श्री उमेश कुमार यादव के कच्चे (मिट्टी के) घर को गंभीर क्षति पहुँची है। उनके घर की दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई हैं, जिससे उनका परिवार खुले आसमान के नीचे जीवन जीने को विवश हो सकता है। इतना ही नहीं, विस्फोट के कारण पत्थरों के बड़े-बड़े टुकड़े उछलकर उनके घर के आंगन और छत पर गिरे, जिससे जान-माल की भारी क्षति होते-होते बची। यदि यह पत्थर सीधे घर के अंदर गिरते, तो किसी भी बड़ी दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता था। स्थिति की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विस्फोट के पहले डुमरी कला पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि जो स्वयं को संचालनकर्ता के रूप में प्रस्तुत करते हैं,ग्राम बेला में घुसकर आए और उमेश यादव के परिवार सहित अन्य ग्रामीणों को धमकी भरे लहजे में घर खाली करने को कहा। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि "ब्लास्ट होने वाला है, तुम लोग घर से बाहर निकल जाओ। अगर घर दब गया या कोई नुकसान हुआ तो इसकी जिम्मेदारी हम लोग नहीं लेंगे।" यह कथन न केवल अमानवीय है, बल्कि यह दर्शाता है कि किस प्रकार प्रशासनिक संरक्षण में अवैध खनन और ब्लास्टिंग को खुलेआम अंजाम दिया जा रहा है। एक ओर ग्रामीणों की सुरक्षा की कोई चिंता नहीं, वहीं दूसरी ओर अधिक से अधिक पत्थर निकालकर मुनाफा कमाने की होड़ ने मानव जीवन को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया है। ग्रामीणों के अनुसार, यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कई बार इसी प्रकार की ब्लास्टिंग की गई है, जिससे घरों में दरारें पड़ चुकी हैं, दीवारें कमजोर हो गई हैं और लोग मानसिक तनाव में जी रहे हैं। बच्चों में भय और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं, जैसे दस्त (डायरिया) जैसी बीमारियाँ भी बढ़ने लगी हैं, जो इस प्रदूषित और असुरक्षित वातावरण का परिणाम है। ग्राम बेला के गरीब और असहाय ग्रामीणों ने कई बार इसका विरोध किया, लेकिन हर बार उन्हें दबाने और शांत कराने का प्रयास किया गया। मौके पर कुछ तथाकथित "मैनेजिंग करने वाले लोग" पहुँचते हैं और मामले को दबाने का प्रयास करते हैं, जिससे सच्चाई सामने नहीं आ पाती। यह पूरी व्यवस्था एक संगठित तरीके से काम कर रही है, जिसमें स्थानीय प्रभावशाली लोग, क्रेशर संचालक और माइंस संचालक शामिल हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि डुमरी कला पंचायत के ही निवासी श्री श्रीराम पांडेय जी द्वारा इस गंभीर मुद्दे को लेकर कई बार लिखित आवेदन जिला प्रशासन, उपायुक्त (डीसी) तथा संबंधित पदाधिकारियों को दिए जा चुके हैं। ईमेल के माध्यम से भी लगातार शिकायतें भेजी गई हैं, लेकिन अब तक किसी भी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। यह प्रशासनिक उदासीनता और निष्क्रियता को उजागर करता है, जो सीधे-सीधे आम जनता के जीवन को खतरे में डाल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि मुखिया प्रतिनिधि द्वारा खुलेआम यह कहा जाता है कि "जो करना है कर लो, जो उखाड़ना है उखाड़ लो, यहां ब्लास्टिंग होगा और तुम लोगों को कहीं और जाना है तो जाओ, हमें कोई फर्क नहीं पड़ता।" यह बयान न केवल कानून व्यवस्था को चुनौती देता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि उन्हें किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई का भय नहीं है। यह पूरा मामला कई गंभीर सवाल खड़े करता है— क्या इन क्रेशर और माइंस संचालकों के पास वैध लाइसेंस और पर्यावरणीय अनुमति (Environment Clearance) है? क्या ब्लास्टिंग के लिए निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा है? क्या स्थानीय प्रशासन और खनन विभाग इस अवैध गतिविधि से अनभिज्ञ है या जानबूझकर आंखें मूंदे हुए है? क्या ग्रामीणों के जीवन और संपत्ति की कोई कीमत नहीं है? यह स्पष्ट है कि ग्राम बेला और डुमरी कला पंचायत में जो कुछ भी हो रहा है, वह पूरी तरह से कानून और मानवाधिकारों का उल्लंघन है। भारत के संविधान में प्रत्येक नागरिक को सुरक्षित जीवन जीने का अधिकार दिया गया है, लेकिन यहां के ग्रामीणों को यह मूल अधिकार भी नहीं मिल पा रहा है। अतः इस प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से हम जिला प्रशासन, राज्य सरकार तथा संबंधित विभागों से निम्नलिखित मांगें करते हैं— 1. ग्राम बेला में चल रहे सभी अवैध क्रेशर और माइंस संचालन की तत्काल उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। 2. ब्लास्टिंग की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए जब तक कि सभी सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित न हो जाए। 3. जिन अधिकारियों ने अब तक शिकायतों पर कार्रवाई नहीं की, उनके खिलाफ भी विभागीय जांच कर कठोर कार्रवाई की जाए। 4. प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा (compensation) दिया जाए और उनके घरों की मरम्मत या पुनर्निर्माण कराया जाए। 5. ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्थायी समाधान निकाला जाए। 6. दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए। यदि शीघ्र ही इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो ग्राम बेला और आसपास के ग्रामीण व्यापक जन आंदोलन के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। यह केवल एक गांव की समस्या नहीं है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र में फैल रही अवैध खनन माफिया की समस्या है, जो धीरे-धीरे ग्रामीण जीवन, पर्यावरण और सामाजिक व्यवस्था को नष्ट कर रही है। आज जरूरत है कि प्रशासन जागे, कानून का पालन सुनिश्चित करे और गरीब एवं असहाय जनता को न्याय दिलाए।2
- kamlesh Kumar1
- Post by M.Haque Bharti1
- कलम की धार और सच की आवाज़... आज रांची प्रेस क्लब की इन्ही सीढ़ियों से एक नया आगाज़। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का हिस्सा होना अपने आप में एक गौरव है। हाथ में माइक हो तो हर आवाज़ में एक नई उड़ान होती है। प्रेस क्लब रांची की सीढ़ियों से, सच्चाई के एक और सफर की ओर...1
- Post by Golu Golakr1