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महिलाओं ने शराब की दुकान को लेकर डीएम को सौपा पत्रक, बोली बिहारी से डर गाजीपुर जिले के भांवरकोल ग्राम पंचायत पलिया बुजुर्ग में प्रस्तावित शराब की दुकान को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है। गांव की दर्जनों महिलाओं और गांव के लोग गुरुवार को जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर जिलाधिकारी अविनाश कुमार को पत्रक सोप और दुकान को अन्यत्र स्थानांतरित करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस स्थान पर शराब की दुकान खोली जा रही है, वह आबादी क्षेत्र के बीच स्थित है और पास में मंदिर भी है। इसके अलावा प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय करीब 250 से 300 मीटर की दूरी पर स्थित हैं, जहां रोजाना बच्चे पढ़ने जाते हैं। ग्रामीणों के अनुसार, दुकान खुलने से बच्चों के वातावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और क्षेत्र में असामाजिक गतिविधियों के बढ़ने की आशंका है। यह गांव सीमावर्ती क्षेत्र में स्थित है, जहां पहले से ही अवैध गतिविधियों की संभावना बनी रहती है। ग्रामीण महिलाओं ने बताया कि शराब की दुकान खुलने से मारपीट और विवाद और महिलाओं और छात्रों के साथ आप बदलता और दुर्घटना का डर सता रहा है क्योंकि जिस जगह पर दुकान खुल रहा है वहीं से गंगा पार बिहार आता है और बिहार के लोग भी दारू पीने के लिए आएंगे जिसकी वजह से और माहौल खराब होगा और घटनाएं बढ़ सकती हैं। जिससे गांव की शांति व्यवस्था प्रभावित होगी। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जनहित को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित शराब की दुकान को किसी अन्य स्थान पर स्थापित किया जा रहा। "गांव के बीच और स्कूल-मंदिर के पास शराब दुकान खुलने से बच्चों और समाज पर बुरा असर पड़ेगा। प्रशासन को इसे तुरंत हटाना चाहिए।

3 hrs ago
user_Anubha tiwari
Anubha tiwari
गाजीपुर, गाजीपुर, उत्तर प्रदेश•
3 hrs ago

महिलाओं ने शराब की दुकान को लेकर डीएम को सौपा पत्रक, बोली बिहारी से डर गाजीपुर जिले के भांवरकोल ग्राम पंचायत पलिया बुजुर्ग में प्रस्तावित शराब की दुकान को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है। गांव की दर्जनों महिलाओं और गांव के लोग गुरुवार को जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर जिलाधिकारी अविनाश कुमार को पत्रक सोप और दुकान को अन्यत्र स्थानांतरित करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस स्थान पर शराब की दुकान खोली जा रही है, वह आबादी क्षेत्र के बीच स्थित है और पास में मंदिर भी है। इसके अलावा प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय करीब 250 से 300 मीटर की दूरी पर स्थित हैं, जहां रोजाना बच्चे पढ़ने जाते हैं। ग्रामीणों के अनुसार, दुकान खुलने से बच्चों के वातावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और क्षेत्र में असामाजिक गतिविधियों के बढ़ने की आशंका है। यह गांव सीमावर्ती क्षेत्र में स्थित है, जहां पहले से ही अवैध गतिविधियों की संभावना बनी रहती है। ग्रामीण महिलाओं ने बताया कि शराब की दुकान खुलने से मारपीट और विवाद और महिलाओं और छात्रों के साथ आप बदलता और दुर्घटना का डर सता रहा है क्योंकि जिस जगह पर दुकान खुल रहा है वहीं से गंगा पार बिहार आता है और बिहार के लोग भी दारू पीने के लिए आएंगे जिसकी वजह से और माहौल खराब होगा और घटनाएं बढ़ सकती हैं। जिससे गांव की शांति व्यवस्था प्रभावित होगी। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जनहित को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित शराब की दुकान को किसी अन्य स्थान पर स्थापित किया जा रहा। "गांव के बीच और स्कूल-मंदिर के पास शराब दुकान खुलने से बच्चों और समाज पर बुरा असर पड़ेगा। प्रशासन को इसे तुरंत हटाना चाहिए।

More news from उत्तर प्रदेश and nearby areas
  • Post by Sadik Ahmad Journalist
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    Post by Sadik Ahmad Journalist
    user_Sadik Ahmad Journalist
    Sadik Ahmad Journalist
    Local News Reporter रसड़ा, बलिया, उत्तर प्रदेश•
    23 hrs ago
  • Post by Rahul chauhan
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    Post by Rahul chauhan
    user_Rahul chauhan
    Rahul chauhan
    घोसी, मऊ, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • 15 तारीख की शाम बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर जी की रैली व झांकी बड़े उत्साह के साथ निकाली गई। यह झांकी दामोदर दास पोखरे से शुरू होकर मानसरोवर तालाब तक पहुंची। झांकी में सैकड़ों की संख्या में लोग शामिल हुए और पूरे रास्ते “जय भीम” व “बाबा साहेब अमर रहें” जैसे नारों से माहौल गूंजता रहा। लोगों ने श्रद्धा और उत्साह के साथ बाबा साहेब को याद किया।
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    15 तारीख की शाम बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर जी की रैली व झांकी बड़े उत्साह के साथ निकाली गई। यह झांकी दामोदर दास पोखरे से शुरू होकर मानसरोवर तालाब तक पहुंची।
झांकी में सैकड़ों की संख्या में लोग शामिल हुए और पूरे रास्ते “जय भीम” व “बाबा साहेब अमर रहें” जैसे नारों से माहौल गूंजता रहा। लोगों ने श्रद्धा और उत्साह के साथ बाबा साहेब को याद किया।
    user_Shrikant Sagar
    Shrikant Sagar
    Media house मुगलसराय, चंदौली, उत्तर प्रदेश•
    6 hrs ago
  • Post by SONI DEVI
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    Post by SONI DEVI
    user_SONI DEVI
    SONI DEVI
    Voice of people घोसी, मऊ, उत्तर प्रदेश•
    9 hrs ago
  • देश में “सबसे ज्यादा रेप” दो तरह से देखा जाता है: 1) कुल मामलों (Total Cases) के हिसाब से: राजस्थान अक्सर सबसे ज्यादा रेप केस दर्ज करने वाला राज्य रहा है (NCRB रिपोर्ट के अनुसार)। इसके बाद उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्यों का नंबर आता है। 2) प्रति लाख आबादी (Rate) के हिसाब से: इसमें साल के हिसाब से बदलाव होता है, लेकिन राजस्थान और मध्य प्रदेश कई बार ऊपर रहते हैं। महत्वपूर्ण बातें: - बड़े राज्यों में आबादी ज्यादा होने से केस की संख्या भी ज्यादा दिखती है। - NCRB डेटा में सिर्फ दर्ज (reported) मामलों की गिनती होती है। - असली संख्या इससे ज्यादा भी हो सकती है क्योंकि हर मामला रिपोर्ट नहीं होता। निष्कर्ष: कुल संख्या में राजस्थान आगे रहता है, लेकिन यह समस्या पूरे देश की है, सिर्फ एक राज्य की नहीं।
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    देश में “सबसे ज्यादा रेप” दो तरह से देखा जाता है:
1) कुल मामलों (Total Cases) के हिसाब से:
राजस्थान अक्सर सबसे ज्यादा रेप केस दर्ज करने वाला राज्य रहा है (NCRB रिपोर्ट के अनुसार)।
इसके बाद उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्यों का नंबर आता है।
2) प्रति लाख आबादी (Rate) के हिसाब से:
इसमें साल के हिसाब से बदलाव होता है, लेकिन राजस्थान और मध्य प्रदेश कई बार ऊपर रहते हैं।
महत्वपूर्ण बातें:
- बड़े राज्यों में आबादी ज्यादा होने से केस की संख्या भी ज्यादा दिखती है।
- NCRB डेटा में सिर्फ दर्ज (reported) मामलों की गिनती होती है।
- असली संख्या इससे ज्यादा भी हो सकती है क्योंकि हर मामला रिपोर्ट नहीं होता।
निष्कर्ष:
कुल संख्या में राजस्थान आगे रहता है, लेकिन यह समस्या पूरे देश की है, सिर्फ एक राज्य की नहीं।
    user_Awaaz -e-Bharat
    Awaaz -e-Bharat
    Chand, Kaimur (Bhabua)•
    14 hrs ago
  • कैमूर। खबर कैमूर जिले मोहनियां प्रखंड क्षेत्र का है। जहां हाई कोर्ट के फैसले के बावजूद स्थानीय अधिकारियों की कथित लापरवाही और मिलीभगत के कारण एक गरीब किसान की मेहनत पर पानी फिर गया। मामला कैमूर जिले के कुदरा प्रखंड अंतर्गत घटांव पंचायत के पट्टी मौजा से जुड़ा है, जहां लगभग दो बीघा भूमि पर लगी गेहूं की फसल जलकर पूरी तरह खाक हो गई। वही पीड़ित किसान रामायण पासवान ने आरोप लगाया है कि प्रशासनिक उदासीनता के चलते उनकी फसल समय पर नहीं कट पाई, जिससे यह घटना घटी। जानकारी के अनुसार, खाता संख्या-7, प्लॉट संख्या-187 की यह भूमि वर्ष 1995 में बभनगांवा निवासी एनामुल हक एवं अन्य से विधिवत खरीदी गई थी। तब से उक्त भूमि पर कब्जा और खेती रामायण पासवान व अन्य द्वारा ही की जा रही थी। हालांकि, लगभग 9 वर्ष बाद पड़ोसी हजामुद्दीन उर्फ शामु द्वारा इस भूमि पर दावा किया गया और मामला प्रशासनिक एवं न्यायिक स्तर तक पहुंचा। मोहनियां उप समाहर्ता से लेकर अपर समाहर्ता और कमिश्नर तक यह मामला चला, जहां अलग-अलग स्तर पर निर्णय आए। अंततः बिहार भूमि विशेष न्यायाधिकरण ने पटना उच्च न्यायालय एवं राज्यपाल के आदेशों का अनुपालन करते हुए फैसला रामायण पासवान के पक्ष में सुनाया। इसके बावजूद, पीड़ित का आरोप है कि दूसरे पक्ष ने स्थानीय अधिकारियों से मिलीभगत कर हाल के दिनों में लगान रसीद हासिल कर ली और भूमि पर अपना दावा जताने लगे। जब फसल कटाई का समय आया, तो प्रशासन द्वारा बार-बार रोक लगाए जाने से फसल खेत में ही खड़ी रह गई। वही स्थानीय किसानों, ट्रैक्टर चालकों एवं मजदूरों ने भी पुष्टि की कि उक्त भूमि पर खेती रामायण पासवान द्वारा ही की गई थी। पीड़ित का आरोप है कि अंततः दूसरे पक्ष ने जानबूझकर गेहूं की फसल में आग लगा दी, जिससे पूरी फसल जलकर नष्ट हो गई। घटना की सूचना मिलने पर थाना पुलिस एवं प्रभारी अंचल अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने जांच कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन पीड़ित किसान को न्याय दिला पाएगा या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
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    कैमूर। खबर कैमूर जिले मोहनियां प्रखंड क्षेत्र का है। जहां हाई कोर्ट के फैसले के बावजूद स्थानीय अधिकारियों की कथित लापरवाही और मिलीभगत के कारण एक गरीब किसान की मेहनत पर पानी फिर गया। मामला कैमूर जिले के कुदरा प्रखंड अंतर्गत घटांव पंचायत के पट्टी मौजा से जुड़ा है, जहां लगभग दो बीघा भूमि पर लगी गेहूं की फसल जलकर पूरी तरह खाक हो गई। वही पीड़ित किसान रामायण पासवान ने आरोप लगाया है कि प्रशासनिक उदासीनता के चलते उनकी फसल समय पर नहीं कट पाई, जिससे यह घटना घटी। जानकारी के अनुसार, खाता संख्या-7, प्लॉट संख्या-187 की यह भूमि वर्ष 1995 में बभनगांवा निवासी एनामुल हक एवं अन्य से विधिवत खरीदी गई थी। तब से उक्त भूमि पर कब्जा और खेती रामायण पासवान व अन्य द्वारा ही की जा रही थी। हालांकि, लगभग 9 वर्ष बाद पड़ोसी हजामुद्दीन उर्फ शामु द्वारा इस भूमि पर दावा किया गया और मामला प्रशासनिक एवं न्यायिक स्तर तक पहुंचा। मोहनियां उप समाहर्ता से लेकर अपर समाहर्ता और कमिश्नर तक यह मामला चला, जहां अलग-अलग स्तर पर निर्णय आए। अंततः बिहार भूमि विशेष न्यायाधिकरण ने पटना उच्च न्यायालय एवं राज्यपाल के आदेशों का अनुपालन करते हुए फैसला रामायण पासवान के पक्ष में सुनाया। इसके बावजूद, पीड़ित का आरोप है कि दूसरे पक्ष ने स्थानीय अधिकारियों से मिलीभगत कर हाल के दिनों में लगान रसीद हासिल कर ली और भूमि पर अपना दावा जताने लगे। जब फसल कटाई का समय आया, तो प्रशासन द्वारा बार-बार रोक लगाए जाने से फसल खेत में ही खड़ी रह गई। वही स्थानीय किसानों, ट्रैक्टर चालकों एवं मजदूरों ने भी पुष्टि की कि उक्त भूमि पर खेती रामायण पासवान द्वारा ही की गई थी। पीड़ित का आरोप है कि अंततः दूसरे पक्ष ने जानबूझकर गेहूं की फसल में आग लगा दी, जिससे पूरी फसल जलकर नष्ट हो गई। घटना की सूचना मिलने पर थाना पुलिस एवं प्रभारी अंचल अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने जांच कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन पीड़ित किसान को न्याय दिला पाएगा या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
    user_Satyam Kumar Upadhyay
    Satyam Kumar Upadhyay
    Local News Reporter Bhabua, Patna•
    19 min ago
  • Post by SONI DEVI
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    Post by SONI DEVI
    user_SONI DEVI
    SONI DEVI
    Voice of people घोसी, मऊ, उत्तर प्रदेश•
    14 hrs ago
  • 🔴 क्या सम्राट चौधरी पर हत्या का आरोप है? ➡️ सच्चाई: - सम्राट चौधरी पर हत्या का आरोप साबित नहीं हुआ है। - लेकिन राजनीतिक आरोप जरूर लगे थे। ➡️ आरोप किसने लगाया? - प्रशांत किशोर ने 2025 में आरोप लगाया था। - एक पुराने केस का जिक्र किया गया था। ➡️ सम्राट चौधरी का जवाब: - उन्होंने आरोप को पूरी तरह गलत बताया। - कहा कि कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया है। 🟢 वर्तमान स्थिति (2026): - सम्राट चौधरी बिहार के मुख्यमंत्री बन चुके हैं। - नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद उन्हें चुना गया। ⚠️ ध्यान देने वाली बात: - सोशल मीडिया पर चल रही कई बातें अधूरी या गलत हो सकती हैं। - आरोप लगना और दोषी साबित होना अलग बात है। 🧠 आसान भाषा में: - आरोप ≠ दोषी - कोर्ट का फैसला ही अंतिम माना जाता है।
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    🔴 क्या सम्राट चौधरी पर हत्या का आरोप है?
➡️ सच्चाई:
- सम्राट चौधरी पर हत्या का आरोप साबित नहीं हुआ है।
- लेकिन राजनीतिक आरोप जरूर लगे थे।
➡️ आरोप किसने लगाया?
- प्रशांत किशोर ने 2025 में आरोप लगाया था।
- एक पुराने केस का जिक्र किया गया था।
➡️ सम्राट चौधरी का जवाब:
- उन्होंने आरोप को पूरी तरह गलत बताया।
- कहा कि कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया है।
🟢 वर्तमान स्थिति (2026):
- सम्राट चौधरी बिहार के मुख्यमंत्री बन चुके हैं।
- नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद उन्हें चुना गया।
⚠️ ध्यान देने वाली बात:
- सोशल मीडिया पर चल रही कई बातें अधूरी या गलत हो सकती हैं।
- आरोप लगना और दोषी साबित होना अलग बात है।
🧠 आसान भाषा में:
- आरोप ≠ दोषी
- कोर्ट का फैसला ही अंतिम माना जाता है।
    user_Awaaz -e-Bharat
    Awaaz -e-Bharat
    Chand, Kaimur (Bhabua)•
    14 hrs ago
  • कैमूर /भभुआ(आस से) सरकारी निर्देशों की अनदेखी कर हड़ताल जारी रखने और अन्य कर्मचारियों को भी काम पर लौटने से रोकने के आरोप में कैमूर जिले के चार राजस्व कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई जिलाधिकारी नितिन कुमार सिंह के निर्देश पर की गई है। निलंबित कर्मचारियों में सोनू कुमार (अंचल कार्यालय रामगढ़, जिला अध्यक्ष कर्मचारी संघ), पंकज कुमार (अंचल कार्यालय रामपुर, जिला सचिव), हरीश कुमार कुशवाहा (अंचल कार्यालय अधौरा, पदेन सचिव) और अमन राज (अंचल कार्यालय मोहनिया, महासचिव) शामिल हैं। सरकार के निर्देश के बाद कार्रवाई: राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, पटना के अपर सचिव ने 11 अप्रैल को हड़ताली कर्मचारियों को 13 अप्रैल तक काम पर लौटने का निर्देश दिया था। साथ ही यह भी कहा गया था कि निर्देश नहीं मानने पर कार्रवाई की जाएगी। तय समय तक काम पर नहीं लौटने पर जिला प्रशासन ने यह कदम उठाया। गुमराह करने का आरोप: निलंबित कर्मचारियों पर आरोप है कि वे अन्य राजस्व कर्मियों को हड़ताल जारी रखने के लिए प्रेरित कर रहे थे और उन्हें काम पर लौटने से रोक रहे थे। विभाग की ओर से बार-बार चेतावनी दिए जाने के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ। दो महीने से जारी है हड़ताल: राज्य भर के राजस्व कर्मचारी 11 फरवरी से अपनी 17 सूत्री मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं। इस कारण अंचल कार्यालयों का कामकाज काफी प्रभावित हुआ है। कई स्थानों पर काम लगभग ठप हो गया है। आगे की कार्रवाई: निलंबित कर्मचारियों को फिलहाल जिला मुख्यालय भभुआ स्थित राजस्व शाखा से संबद्ध किया गया है। संबंधित अंचलाधिकारी को उनके खिलाफ आरोप पत्र तैयार कर साक्ष्य सहित जिला कार्यालय को सौंपने का निर्देश दिया गया है। पहले भी हुई है कार्रवाई: इससे पहले कैमूर जिले के चांद अंचलाधिकारी सतीश कुमार गुप्ता सहित राज्य के 41 अंचलाधिकारियों को भी निलंबित किया जा चुका है। उन पर सरकारी कार्यक्रमों में भाग नहीं लेने और कार्य में बाधा डालने का आरोप था। जिले में हड़ताल के चलते अधिकांश अंचलों का काम प्रभावित है, जिससे आम लोगों को काफी परेशानी हो रही है। रिपोर्ट ---: ओम प्रकाश तिवारी
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    कैमूर /भभुआ(आस से)
सरकारी निर्देशों की अनदेखी कर हड़ताल जारी रखने और अन्य कर्मचारियों को भी काम पर लौटने से रोकने के आरोप में कैमूर जिले के चार राजस्व कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई जिलाधिकारी नितिन कुमार सिंह के निर्देश पर की गई है।
निलंबित कर्मचारियों में सोनू कुमार (अंचल कार्यालय रामगढ़, जिला अध्यक्ष कर्मचारी संघ), पंकज कुमार (अंचल कार्यालय रामपुर, जिला सचिव), हरीश कुमार कुशवाहा (अंचल कार्यालय अधौरा, पदेन सचिव) और अमन राज (अंचल कार्यालय मोहनिया, महासचिव) शामिल हैं।
सरकार के निर्देश के बाद कार्रवाई:
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, पटना के अपर सचिव ने 11 अप्रैल को हड़ताली कर्मचारियों को 13 अप्रैल तक काम पर लौटने का निर्देश दिया था। साथ ही यह भी कहा गया था कि निर्देश नहीं मानने पर कार्रवाई की जाएगी। तय समय तक काम पर नहीं लौटने पर जिला प्रशासन ने यह कदम उठाया।
गुमराह करने का आरोप:
निलंबित कर्मचारियों पर आरोप है कि वे अन्य राजस्व कर्मियों को हड़ताल जारी रखने के लिए प्रेरित कर रहे थे और उन्हें काम पर लौटने से रोक रहे थे। विभाग की ओर से बार-बार चेतावनी दिए जाने के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ।
दो महीने से जारी है हड़ताल:
राज्य भर के राजस्व कर्मचारी 11 फरवरी से अपनी 17 सूत्री मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं। इस कारण अंचल कार्यालयों का कामकाज काफी प्रभावित हुआ है। कई स्थानों पर काम लगभग ठप हो गया है।
आगे की कार्रवाई:
निलंबित कर्मचारियों को फिलहाल जिला मुख्यालय भभुआ स्थित राजस्व शाखा से संबद्ध किया गया है। संबंधित अंचलाधिकारी को उनके खिलाफ आरोप पत्र तैयार कर साक्ष्य सहित जिला कार्यालय को सौंपने का निर्देश दिया गया है।
पहले भी हुई है कार्रवाई:
इससे पहले कैमूर जिले के चांद अंचलाधिकारी सतीश कुमार गुप्ता सहित राज्य के 41 अंचलाधिकारियों को भी निलंबित किया जा चुका है। उन पर सरकारी कार्यक्रमों में भाग नहीं लेने और कार्य में बाधा डालने का आरोप था।
जिले में हड़ताल के चलते अधिकांश अंचलों का काम प्रभावित है, जिससे आम लोगों को काफी परेशानी हो रही है।
रिपोर्ट ---: ओम प्रकाश तिवारी
    user_Om Prakash Tiwari
    Om Prakash Tiwari
    Newspaper advertising department Bhabua, Kaimur (Bhabua)•
    52 min ago
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