सिद्धार्थनगर जिले के विकास खंड मिठवल के ग्राम पाली में चकबंदी विभाग की टीम को ग्रामीणों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों ने रेलवे परियोजना का मुआवजा मिलने तक कब्जा परिवर्तन कराने से स्पष्ट इनकार कर दिया, जिसके चलते टीम को बिना कार्रवाई किए वापस लौटना पड़ा। ग्रामीणों का कहना है कि उनके गांव के दक्षिणी सीवान से बहराइच-खलीलाबाद रेलवे लाइन प्रस्तावित है, जिससे उनकी जमीन प्रभावित होगी। उन्होंने आशंका जताई कि यदि अभी कब्जा परिवर्तन कर दिया गया तो कई किसान अपने मुआवजे से वंचित रह सकते हैं। कब्जा परिवर्तन कराने पहुंचे एसीओ सुनील कुमार गुप्ता ने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे अपनी मांग पर अड़े रहे। ग्रामीणों की दृढ़ता के सामने चकबंदी लेखपाल बब्बन सिंह और कानूनगो को बिना कार्रवाई के वापस लौटना पड़ा। मिथुन चौधरी, लाल बिहारी चौरसिया, अकरम सेठ, मो. इस्माइल, रामफल, राम अजोरे, मनिराम, मोहर अली, शुभम शुक्ला, साहेब रजा, दीना नाथ, आनंद स्वरूप चौरसिया और उम्मत अली सहित सैकड़ों ग्रामीणों ने बताया कि वे पिछले तीन वर्षों से इस संबंध में जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र दे रहे हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि चकबंदी विभाग मुआवजा मिलने से पहले जबरन कब्जा परिवर्तन की कार्रवाई करता है, तो वे आंदोलन और अनशन करने को मजबूर होंगे। उन्होंने साफ किया कि ऐसी स्थिति में इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
सिद्धार्थनगर जिले के विकास खंड मिठवल के ग्राम पाली में चकबंदी विभाग की टीम को ग्रामीणों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों ने रेलवे परियोजना का मुआवजा मिलने तक कब्जा परिवर्तन कराने से स्पष्ट इनकार कर दिया, जिसके चलते टीम को बिना कार्रवाई किए वापस लौटना पड़ा। ग्रामीणों का कहना है कि उनके गांव के दक्षिणी सीवान से बहराइच-खलीलाबाद रेलवे लाइन प्रस्तावित है, जिससे उनकी जमीन प्रभावित होगी। उन्होंने आशंका जताई कि यदि अभी कब्जा परिवर्तन कर दिया गया तो कई किसान अपने मुआवजे से वंचित रह सकते हैं। कब्जा परिवर्तन कराने पहुंचे एसीओ सुनील कुमार गुप्ता ने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे अपनी मांग पर अड़े रहे। ग्रामीणों की दृढ़ता के सामने चकबंदी लेखपाल बब्बन सिंह और कानूनगो को बिना कार्रवाई के वापस लौटना पड़ा। मिथुन चौधरी, लाल बिहारी चौरसिया, अकरम सेठ, मो. इस्माइल, रामफल, राम अजोरे, मनिराम, मोहर अली, शुभम शुक्ला, साहेब रजा, दीना नाथ, आनंद स्वरूप चौरसिया और उम्मत अली सहित सैकड़ों ग्रामीणों ने बताया कि वे पिछले तीन वर्षों से इस संबंध में जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र दे रहे हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि चकबंदी विभाग मुआवजा मिलने से पहले जबरन कब्जा परिवर्तन की कार्रवाई करता है, तो वे आंदोलन और अनशन करने को मजबूर होंगे। उन्होंने साफ किया कि ऐसी स्थिति में इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
- सिद्धार्थनगर जिले के विकास खंड मिठवल के ग्राम पाली में चकबंदी विभाग की टीम को ग्रामीणों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों ने रेलवे परियोजना का मुआवजा मिलने तक कब्जा परिवर्तन कराने से स्पष्ट इनकार कर दिया, जिसके चलते टीम को बिना कार्रवाई किए वापस लौटना पड़ा। ग्रामीणों का कहना है कि उनके गांव के दक्षिणी सीवान से बहराइच-खलीलाबाद रेलवे लाइन प्रस्तावित है, जिससे उनकी जमीन प्रभावित होगी। उन्होंने आशंका जताई कि यदि अभी कब्जा परिवर्तन कर दिया गया तो कई किसान अपने मुआवजे से वंचित रह सकते हैं। कब्जा परिवर्तन कराने पहुंचे एसीओ सुनील कुमार गुप्ता ने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे अपनी मांग पर अड़े रहे। ग्रामीणों की दृढ़ता के सामने चकबंदी लेखपाल बब्बन सिंह और कानूनगो को बिना कार्रवाई के वापस लौटना पड़ा। मिथुन चौधरी, लाल बिहारी चौरसिया, अकरम सेठ, मो. इस्माइल, रामफल, राम अजोरे, मनिराम, मोहर अली, शुभम शुक्ला, साहेब रजा, दीना नाथ, आनंद स्वरूप चौरसिया और उम्मत अली सहित सैकड़ों ग्रामीणों ने बताया कि वे पिछले तीन वर्षों से इस संबंध में जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र दे रहे हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि चकबंदी विभाग मुआवजा मिलने से पहले जबरन कब्जा परिवर्तन की कार्रवाई करता है, तो वे आंदोलन और अनशन करने को मजबूर होंगे। उन्होंने साफ किया कि ऐसी स्थिति में इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।1
- स्कूल और कॉलेजों में एक विशिष्ट ड्रेस कोड होता है, जहाँ किसी विशेष धर्म या जाति के आधार पर कोई मूल्यांकन नहीं किया जाता। विद्यालयों को शिक्षा और नैतिक ज्ञान का सागर कहा जाता है, और इन संस्थानों में जाति या धर्म के आधार पर ज्ञान की प्राप्ति नहीं होती। यदि किसी को पढ़ाई करनी है, तो उसे विद्यालय के मानकों के अनुसार ही करनी होगी। सवाल उठता है कि क्या धर्म के नाम पर अज्ञानी बनना ज़रूरी है? स्कूल और कॉलेजों में सभी बच्चे समान माने जाते हैं, किसी विशेष जाति के आधार पर नहीं।1
- आगामी त्यौहार ईद-उल-जुहा (बकरीद) के मद्देनज़र सिद्धार्थनगर में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने हेतु जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जी.एन. और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिषेक महाजन ने पैदल गश्त किया। यह गश्त थाना क्षेत्र सिद्धार्थनगर के कस्बा सिद्धार्थनगर में की गई, जिसमें विश्वजीत सौरयान (आईपीएस) क्षेत्राधिकारी सदर और प्रभारी निरीक्षक सिद्धार्थनगर भी पुलिस बल के साथ शामिल थे। इस दौरान कस्बा सिद्धार्थनगर सहित अन्य भीड़-भाड़ वाले इलाकों में पुलिस बल के साथ गश्त करते हुए, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने व्यापारियों, संभ्रांत व्यक्तियों और आमजन से सीधे संवाद स्थापित किया, जिससे लोगों में सुरक्षा का एहसास कराया जा सके। उन्होंने आमजन से आगामी त्यौहार ईद-उल-जुहा (बकरीद) को शांतिपूर्वक मनाने की अपील भी की। यह जानकारी सिद्धार्थनगर से 25 मई, 2026 को जारी हुई।1
- संतकबीरनगर के विकास खंड बेलहर कला सभागार में सोमवार को क्षेत्र पंचायत की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ₹9 करोड़ 75 लाख रुपये के अनुमानित बजट को सर्वसम्मति से स्वीकृति प्रदान की गई। बैठक की अध्यक्षता ब्लॉक प्रमुख डॉ. भूपेंद्र सिंह ने की, जिसमें क्षेत्र के चहुंमुखी विकास के लिए पेयजल, खड़ंजा निर्माण, नाली और इंटरलॉकिंग सड़कों के निर्माण को प्राथमिकता दी गई। एडीओ पंचायत पंकज सिंह ने एजेंडा पढ़कर सुनाया, जिस पर सभी सदस्यों ने अपनी सहमति व्यक्त की। ब्लॉक प्रमुख डॉ. भूपेंद्र सिंह ने इस अवसर पर कहा कि क्षेत्र का समग्र और संतुलित विकास उनकी मुख्य प्राथमिकता है। उन्होंने शासन की मंशा के अनुरूप प्रत्येक गांव तक विकास योजनाओं का लाभ पहुंचाने का संकल्प दोहराया और बताया कि स्वीकृत बजट से सड़क, पानी और स्वच्छता से जुड़े कार्यों को युद्धस्तर पर कराया जाएगा, ताकि ग्रामीणों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। उन्होंने विभिन्न विभागों के अधिकारियों को निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से कोई समझौता न करने के सख्त निर्देश दिए, साथ ही क्षेत्र पंचायत सदस्यों और ग्राम प्रधानों से तालमेल बिठाकर विकास कार्यों में पूरी पारदर्शिता बरतने की अपील भी की। ब्लॉक प्रमुख ने यह भी रेखांकित किया कि केंद्र और प्रदेश सरकारें ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के लिए धन उपलब्ध करा रही हैं, लेकिन प्रधानों के हकों को काटा जा रहा है। इस मुद्दे पर रणनीति तैयार करने के लिए एक अलग बैठक आयोजित की जाएगी। इस दौरान पिछली बैठक के कार्यवृत्त की पुष्टि के साथ-साथ क्षेत्र में चल रही अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं की भी समीक्षा की गई। बैठक में एमएलसी प्रतिनिधि सुरेंद्र नाथ चौबे, बीडीओ श्वेता वर्मा, एडीओ पंचायत पंकज सिंह, एकाउंटेंट प्रवीण कुमार यादव, बेलहर सीडीपीओ रीमा चौधरी, खंड शिक्षा अधिकारी अनीता त्रिपाठी, एडीओ एजी सुभाष चंद्र, एडीओ एसबी सुनीता मिश्रा, बीपीएम अन्नाद कुमार मौर्या, पशु चिकित्सा अधिकारी दिनकर, अवधेश कुमार, मंडल अध्यक्ष लालबहादुर चौहान, ग्राम प्रधान एवं प्रतिनिधि विश्वनाथ मौर्या, श्याम जी यादव, राजनारायण सिंह उर्फ डिंपल सिंह, राजेश्वर उर्फ राजू चौधरी, महेश लोधी, बीपीन सिंह, रजनीश यादव, डिंपल सिंह, विनय दूबे, लालचन्द्र चौहान, राजिन्द्र यादव, क्षेत्र पंचायत सदस्य नरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, सत्यनारायण, रिंकू पासवान, सचिन कुमार सहित तमाम क्षेत्र पंचायत सदस्य, ग्राम प्रधान और कर्मचारी उपस्थित रहे।1
- संतकबीरनगर जिले के मेंहदावल स्थित बेलहरकला ब्लॉक सभागार में सोमवार को क्षेत्र पंचायत की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता ब्लॉक प्रमुख भूपेंद्र सिंह ने की। इस बैठक में उपस्थित क्षेत्र पंचायत सदस्यों और ग्राम प्रधानों ने अपने-अपने ग्रामों के विकास की विभिन्न योजनाओं पर विस्तृत चर्चा की और ग्रामीण समस्याओं को मुखरता से उठाया। बैठक के दौरान, बीडीओ डॉ. श्वेता वर्मा ने सभी योजनाओं के त्वरित क्रियान्वयन और जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाई गई समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर दूर करने का आश्वासन दिया। उन्होंने बताया कि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों के समुचित विकास के लिए पूरी तत्परता से कार्य कर रही है। मुख्य रूप से सड़क, नाली और खड़ंजा जैसे विकास कार्यों पर गंभीरता से विमर्श किया गया। ब्लॉक प्रमुख भूपेंद्र सिंह ने भी सभी जनप्रतिनिधियों को भरोसा दिलाया कि उनके विकास कार्यों को प्राथमिकता से निस्तारित किया जाएगा। इसी कड़ी में, बैठक में लगभग 9.75 करोड़ रुपये के विकास कार्यों के लिए अनुमोदन किया गया, जिससे क्षेत्र में विभिन्न महत्वपूर्ण विकास कार्य किए जाएंगे। प्रधान संघ अध्यक्ष विश्वनाथ मौर्य ने भी ग्राम प्रधानों की समस्याओं को बैठक में रखा। इस बैठक में ब्लॉक प्रमुख भूपेंद्र सिंह, एडीओ पंचायत पंकज सिंह, बीडीओ डॉ. श्वेता वर्मा, सचिव सौरभ चौधरी, उग्रसेन सिंह, राजेश्वर चौधरी, श्यामजी यादव, मो0दानिश, राधेश्याम चौरसिया, रमेश यादव, सुनील कुमार और दर्जनों अन्य प्रधान व बीडीसी सदस्य उपस्थित रहे।3
- पुरंदरपुर थाना क्षेत्र से जुड़े बाइक चोरी के मामले में एक युवक ने पुलिस अधीक्षक से शिकायत की है।1
- उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के हरैया कस्बे से कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ाने वाली बेहद शर्मनाक तस्वीर सामने आई है। हरैया रजिस्ट्री ऑफिस के सामने की मुख्य सड़क को अतिक्रमणकारियों ने पूरी तरह से सब्जी की दुकानों से घेर लिया है, जिससे आम राहगीरों का चलना-फिरना मुश्किल हो गया है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि ये दुकानदार अपनी अवैध चौधराहट के चलते अक्सर आपस में ही भिड़ जाते हैं। इसका एक ताजा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें दो सब्जी विक्रेता सड़क के बीचों-बीच लाठी-डंडों से लड़ते नजर आ रहे हैं। इस 'अखाड़े' के कारण न सिर्फ यातायात बाधित हुआ, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन की ढिलाई के कारण ही ऐसी घटनाएं लगातार हो रही हैं। इस स्थिति पर सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर स्थानीय पुलिस प्रशासन और नगर पंचायत के जिम्मेदार अधिकारी क्या कर रहे हैं, जब सरेआम सड़क पर अतिक्रमण और गुंडागर्दी हो रही है? प्रशासन मूकदर्शक बना बैठा है, जिससे ऐसा लगता है जैसे वह किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा हो, या फिर इन अतिक्रमणकारियों को किसी का संरक्षण प्राप्त है। हरैया की सड़कों पर व्याप्त अराजकता यह बताने के लिए काफी है कि यहां कानून का डर समाप्त हो चुका है। यदि तत्काल प्रभाव से अतिक्रमण नहीं हटाया गया और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो यह अराजकता किसी और बड़ी घटना को जन्म दे सकती है। यह देखना बाकी है कि बस्ती प्रशासन इस मामले में कोई ठोस कदम उठाएगा, या हरैया की जनता को इसी तरह गुंडागर्दी के बीच रहने पर मजबूर होना पड़ेगा।2
- संत कबीर नगर जिले के एक बड़े निजी विद्यालय, ब्लूमिंग बर्ड में अभिभावकों को मनमानी तरीके से परेशान किया जा रहा है। विशेषकर गरीब बच्चों और उनके माता-पिता को स्कूल प्रशासन की ओर से अनुचित व्यवहार का सामना करना पड़ रहा है, जिससे वे त्रस्त हैं। इस उत्पीड़न से परेशान होकर अभिभावकों ने जिलाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा है। यह घटना निजी स्कूलों की बढ़ती मनमानी और शिक्षा के नाम पर 'शिक्षा माफियाओं' के कायम वर्चस्व पर गंभीर सवाल उठाती है, जिससे यह प्रश्न उठता है कि आखिर निजी विद्यालयों की यह मनमानी कब तक चलेगी।1