मधेपुरा जिले में अब खेती का नया अध्याय लिखा जा रहा है, जहाँ किसान पारंपरिक फसलों के साथ-साथ शकरकंद की खेती अपनाकर अपनी आमदनी बढ़ा रहे हैं। इसी क्रम में, जिले की प्रभारी मंत्री शीला कुमारी ने सीधे किसानों के खेतों में पहुँचकर उनकी समस्याएँ सुनीं, शकरकंद खरीदा और हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया। बिहार सरकार की विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री शीला कुमारी, जो मधेपुरा की प्रभारी मंत्री भी हैं, इन दिनों जिले के दौरे पर हैं। उन्होंने प्रशासनिक बैठकों और जनसमस्याओं की समीक्षा के अलावा बेलारी क्षेत्र के शकरकंद उत्पादक किसानों से सीधा संवाद किया, ताकि उनकी खेती और आजीविका की वास्तविक स्थिति को समझ सकें। किसानों ने मंत्री को बताया कि शकरकंद की खेती से उन्हें अच्छी आमदनी तो हो रही है, लेकिन बढ़ती लागत, बाजार की समस्या और फसल संरक्षण से जुड़े मुद्दे चुनौतियाँ पेश करते हैं। विशेष रूप से, बाजार और भंडारण की उचित सुविधा न मिलने के कारण कई बार उन्हें अपनी उपज का सही दाम नहीं मिल पाता। मधेपुरा में अब बड़ी संख्या में किसान धान, गेहूं और मक्का के साथ शकरकंद की खेती भी अपना रहे हैं। किसानों की समस्याएँ सुनने के बाद मंत्री शीला कुमारी ने जिला प्रशासन को तत्काल आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि किसानों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाए, ताकि उन्हें अपनी उपज का उचित लाभ मिल सके। इस दौरान मंत्री ने किसानों के खेतों से शकरकंद भी खरीदा और उनकी कड़ी मेहनत की सराहना की, जिससे किसानों में काफी उत्साह देखा गया। किसानों ने इसे किसी जनप्रतिनिधि का उनके खेत तक पहुँचकर बात सुनना उनके लिए सम्मान और भरोसे की बात बताया। विशेषज्ञों के अनुसार, शकरकंद केवल एक फसल नहीं, बल्कि विटामिन-ए, विटामिन-सी, फाइबर, पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर एक महत्वपूर्ण पोषण स्रोत भी है, जिसकी मांग स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों के बीच लगातार बढ़ रही है। शकरकंद की खेती, जिसे कम लागत, कम सिंचाई और बेहतर बाजार मूल्य के कारण किसानों के लिए फायदे का सौदा माना जा रहा है, ने कई किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की है। किसानों का मानना है कि यदि सरकार उन्हें बाजार, भंडारण और तकनीकी सहायता जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराए, तो यह खेती जिले में रोजगार और आय का एक बड़ा माध्यम बन सकती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार इस दिशा में विशेष योजनाएँ लागू करेगी। मधेपुरा में शकरकंद की खेती अब केवल एक वैकल्पिक फसल न रहकर किसानों की आर्थिक मजबूती का नया आधार बन रही है, और मंत्री का किसानों के बीच पहुँचकर उनकी समस्याएँ सुनना तथा समाधान का भरोसा देना निश्चित रूप से कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने की एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
मधेपुरा जिले में अब खेती का नया अध्याय लिखा जा रहा है, जहाँ किसान पारंपरिक फसलों के साथ-साथ शकरकंद की खेती अपनाकर अपनी आमदनी बढ़ा रहे हैं। इसी क्रम में, जिले की प्रभारी मंत्री शीला कुमारी ने सीधे किसानों के खेतों में पहुँचकर उनकी समस्याएँ सुनीं, शकरकंद खरीदा और हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया। बिहार सरकार की विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री शीला कुमारी, जो मधेपुरा की प्रभारी मंत्री भी हैं, इन दिनों जिले के दौरे पर हैं। उन्होंने प्रशासनिक बैठकों और जनसमस्याओं की समीक्षा के अलावा बेलारी क्षेत्र के शकरकंद उत्पादक किसानों से सीधा संवाद किया, ताकि उनकी खेती और आजीविका की वास्तविक स्थिति को समझ सकें। किसानों ने मंत्री
को बताया कि शकरकंद की खेती से उन्हें अच्छी आमदनी तो हो रही है, लेकिन बढ़ती लागत, बाजार की समस्या और फसल संरक्षण से जुड़े मुद्दे चुनौतियाँ पेश करते हैं। विशेष रूप से, बाजार और भंडारण की उचित सुविधा न मिलने के कारण कई बार उन्हें अपनी उपज का सही दाम नहीं मिल पाता। मधेपुरा में अब बड़ी संख्या में किसान धान, गेहूं और मक्का के साथ शकरकंद की खेती भी अपना रहे हैं। किसानों की समस्याएँ सुनने के बाद मंत्री शीला कुमारी ने जिला प्रशासन को तत्काल आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि किसानों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाए, ताकि उन्हें
अपनी उपज का उचित लाभ मिल सके। इस दौरान मंत्री ने किसानों के खेतों से शकरकंद भी खरीदा और उनकी कड़ी मेहनत की सराहना की, जिससे किसानों में काफी उत्साह देखा गया। किसानों ने इसे किसी जनप्रतिनिधि का उनके खेत तक पहुँचकर बात सुनना उनके लिए सम्मान और भरोसे की बात बताया। विशेषज्ञों के अनुसार, शकरकंद केवल एक फसल नहीं, बल्कि विटामिन-ए, विटामिन-सी, फाइबर, पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर एक महत्वपूर्ण पोषण स्रोत भी है, जिसकी मांग स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों के बीच लगातार बढ़ रही है। शकरकंद की खेती, जिसे कम लागत, कम सिंचाई और बेहतर बाजार मूल्य के कारण किसानों के लिए फायदे का सौदा माना जा रहा है,
ने कई किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की है। किसानों का मानना है कि यदि सरकार उन्हें बाजार, भंडारण और तकनीकी सहायता जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराए, तो यह खेती जिले में रोजगार और आय का एक बड़ा माध्यम बन सकती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार इस दिशा में विशेष योजनाएँ लागू करेगी। मधेपुरा में शकरकंद की खेती अब केवल एक वैकल्पिक फसल न रहकर किसानों की आर्थिक मजबूती का नया आधार बन रही है, और मंत्री का किसानों के बीच पहुँचकर उनकी समस्याएँ सुनना तथा समाधान का भरोसा देना निश्चित रूप से कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने की एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
- मधेपुरा जिले में अब खेती का नया अध्याय लिखा जा रहा है, जहाँ किसान पारंपरिक फसलों के साथ-साथ शकरकंद की खेती अपनाकर अपनी आमदनी बढ़ा रहे हैं। इसी क्रम में, जिले की प्रभारी मंत्री शीला कुमारी ने सीधे किसानों के खेतों में पहुँचकर उनकी समस्याएँ सुनीं, शकरकंद खरीदा और हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया। बिहार सरकार की विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री शीला कुमारी, जो मधेपुरा की प्रभारी मंत्री भी हैं, इन दिनों जिले के दौरे पर हैं। उन्होंने प्रशासनिक बैठकों और जनसमस्याओं की समीक्षा के अलावा बेलारी क्षेत्र के शकरकंद उत्पादक किसानों से सीधा संवाद किया, ताकि उनकी खेती और आजीविका की वास्तविक स्थिति को समझ सकें। किसानों ने मंत्री को बताया कि शकरकंद की खेती से उन्हें अच्छी आमदनी तो हो रही है, लेकिन बढ़ती लागत, बाजार की समस्या और फसल संरक्षण से जुड़े मुद्दे चुनौतियाँ पेश करते हैं। विशेष रूप से, बाजार और भंडारण की उचित सुविधा न मिलने के कारण कई बार उन्हें अपनी उपज का सही दाम नहीं मिल पाता। मधेपुरा में अब बड़ी संख्या में किसान धान, गेहूं और मक्का के साथ शकरकंद की खेती भी अपना रहे हैं। किसानों की समस्याएँ सुनने के बाद मंत्री शीला कुमारी ने जिला प्रशासन को तत्काल आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि किसानों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाए, ताकि उन्हें अपनी उपज का उचित लाभ मिल सके। इस दौरान मंत्री ने किसानों के खेतों से शकरकंद भी खरीदा और उनकी कड़ी मेहनत की सराहना की, जिससे किसानों में काफी उत्साह देखा गया। किसानों ने इसे किसी जनप्रतिनिधि का उनके खेत तक पहुँचकर बात सुनना उनके लिए सम्मान और भरोसे की बात बताया। विशेषज्ञों के अनुसार, शकरकंद केवल एक फसल नहीं, बल्कि विटामिन-ए, विटामिन-सी, फाइबर, पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर एक महत्वपूर्ण पोषण स्रोत भी है, जिसकी मांग स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों के बीच लगातार बढ़ रही है। शकरकंद की खेती, जिसे कम लागत, कम सिंचाई और बेहतर बाजार मूल्य के कारण किसानों के लिए फायदे का सौदा माना जा रहा है, ने कई किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की है। किसानों का मानना है कि यदि सरकार उन्हें बाजार, भंडारण और तकनीकी सहायता जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराए, तो यह खेती जिले में रोजगार और आय का एक बड़ा माध्यम बन सकती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार इस दिशा में विशेष योजनाएँ लागू करेगी। मधेपुरा में शकरकंद की खेती अब केवल एक वैकल्पिक फसल न रहकर किसानों की आर्थिक मजबूती का नया आधार बन रही है, और मंत्री का किसानों के बीच पहुँचकर उनकी समस्याएँ सुनना तथा समाधान का भरोसा देना निश्चित रूप से कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने की एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।4
- सहरसा के पंचवटी चौक स्थित आशा क्लिनिक ने सोमवार को अपनी प्रथम वर्षगांठ बड़े धूमधाम से मनाई। इस समारोह का विधिवत उद्घाटन लोक सभा सांसद दिनेशचन्द्र यादव, सहरसा विधायक आई पी गुप्ता, महिषी विधायक डॉक्टर गौतम कृष्ण, राजद नेता रंजीत यादव, सीपीआईएम नेता ओमप्रकाश नारायण यादव, जिला परिषद उपाध्यक्ष धीरेन्द्र यादव, तथा अवकाश प्राप्त शिक्षक कमलेश्वरी प्रसाद यादव सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों का फूल माला और पाग-चादर भेंट कर भव्य स्वागत किया गया। जाप नेता उमेश यादव द्वारा संचालित इस कार्यक्रम में, उपस्थित सभी गणमान्य लोगों ने सहरसा में स्वास्थ्य सेवाओं के बढ़ते दायरे पर प्रकाश डाला, जिसके कारण अब गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए लोगों को बाहर नहीं जाना पड़ता। उन्होंने आशा क्लिनिक के डॉक्टर आनंद कुमार और डॉक्टर मेघा कुमारी लाड द्वारा सबसे कम खर्च पर दिए जा रहे इलाज की विशेष सराहना की। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि जहाँ कई डॉक्टर चिकित्सा को व्यवसाय मानते हैं, वहीं यह दंपति सबसे कम दर वाली दवाइयां मरीजों को लिखते हैं, जो उनकी सच्ची सेवा को दर्शाता है और लोग उन्हें भगवान का रूप मानते हैं। सभी वक्ताओं ने दंपति डॉक्टर को आशीर्वाद प्रदान करते हुए ईश्वर से प्रार्थना की कि आशा क्लिनिक अपनी सेवा भावना के साथ इसी तरह आगे भी सफल होता रहे। उनकी इच्छा थी कि सहरसा और आस-पास के अन्य जिलों के लोग भी यहाँ आकर अपना इलाज करा सकें और पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने घर लौटें। इस मौके पर जिले के सैकड़ों गणमान्य लोग और विभिन्न राजनीतिक दलों के सदस्य मौजूद थे।1
- मधेपुरा जिले के मोरकाही गाँव निवासी पुरुषोत्तम कुमार लापता हो गए हैं। उनके पिता का नाम राम यादव है।1
- मधेपुरा अनुमंडल अंतर्गत श्रीपुर चकला निवासी तथा पटना विश्वविद्यालय, पी.जी. हॉस्टल के सीनियर अंजनी कुमार, जो एक ऑडिट ऑफिसर हैं, की पूज्य माताजी अनिता देवी के निधन की अत्यंत दुःखद खबर मिली है। इस दुखद समाचार के बाद, जन:संवाददाता प्रतिनिधि, बिहार उनके आवास पर पहुँचे। उन्होंने शोकाकुल परिवारजनों से मिलकर गहरी संवेदना व्यक्त की और दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की। Advocate of Jsd Council की ओर से ईश्वर से प्रार्थना की गई है कि वे दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें और शोक-संतप्त परिवार को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति, धैर्य तथा संबल दें। जन:संवाददाता ऑफ जेएसडी और ADVOCATE OF JSD COUNCIL (N.P.O.) ने भी अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः का जाप किया।1
- बांकीपुर से उपचुनाव लड़ने के सवाल पर प्रशांत किशोर ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यह उपचुनाव मौजूदा सरकार के छह महीने के कार्यकाल का रेफरेंडम होगा। किशोर ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि विधानसभा चुनाव में बड़े-बड़े वादे किए गए थे, लेकिन अब उन्हें पूरा करने के बजाय सरकार 'लाल-हरा गमझा' की बात कर रही है। राबड़ी देवी के बंगला मामले पर पूछे गए सवाल के जवाब में प्रशांत किशोर ने कहा कि यह राबड़ी जी और सरकार के बीच का मामला है। हालांकि, उन्होंने सीधे मुख्यमंत्री से पूछा कि 8 एकड़ का बंगला होने के बावजूद देश रत्न मार्ग के बंगले को मुख्यमंत्री आवास में क्यों मिलाया गया है।1
- सुपौल जिले के पिपरा प्रखंड अंतर्गत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक पैरा मेडिकल कर्मी (PMW) की फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बहाली का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता कामेश्वर यादव ने इस संबंध में जिलाधिकारी और लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी को लिखित आवेदन देकर मामले की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। आवेदन में बताया गया है कि श्रीमती शकुंतला देवी वर्ष 2018 से पिपरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में PMW के पद पर कार्यरत हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि PMW की बहाली के लिए एक वर्ष का ट्रेनिंग प्रमाण पत्र और तीन वर्ष का अनुभव प्रमाण पत्र अनिवार्य था। हालांकि, शकुंतला देवी ने सिर्फ 6 माह का ट्रेनिंग प्रमाण पत्र और 12 दिन का अनुभव प्रमाण पत्र लगाकर पदभार ग्रहण कर लिया। यह सरकारी दिशानिर्देशों और कानून का स्पष्ट उल्लंघन है। आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि यह बहाली किसी 'मोटी रकम' के लेनदेन के बिना संभव नहीं हुई होगी। इस पूरे मामले पर सिविल सर्जन बाबू साहेब झा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें इस प्रकरण की जानकारी नहीं थी। उन्होंने आश्वस्त किया कि लिखित शिकायत प्राप्त होने पर दस्तावेजों की गहन जांच कराई जाएगी और जांच के बाद जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी और लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी से जांच उपरांत कानूनी कार्रवाई की मांग दोहराई है।2
- एक चौंकाने वाले खुलासे में, एक आरोपी ने यह स्वीकार किया है कि उसने बच्चे को इसलिए नहीं मारा क्योंकि उसकी बच्चे से कोई व्यक्तिगत दुश्मनी थी, बल्कि उसकी दुश्मनी बच्चे की माँ से थी। आरोपी ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि उसका मकसद बच्चे को नुकसान पहुँचाना नहीं था, बल्कि माँ से उसकी पुरानी व्यक्तिगत दुश्मनी ही इस कृत्य का कारण बनी।1
- पिपरा (सुपौल) थाना क्षेत्र में कुछ स्थानीय दबंगों ने हिमालय से निकलने वाली तिलावे नदी की धारा को रोककर आधा दर्जन से अधिक छोटे-बड़े पोखर खोद लिए हैं। यह घटना प्रखंड मुख्यालय और थाना से महज दो सौ मीटर की दूरी पर पिपरा एन एच 106 कमलपुर पुल के दोनों ओर हुई है। इन पोखरों को जेसीबी और पापलेन मशीन का इस्तेमाल करके बनाया गया है, जिससे मछली उत्पादन कर लाखों रुपए का मुनाफा कमाया जा रहा है। तिलावे नदी, जो बरसात के मौसम में कोशी के प्रवाह को भी झेलती है, उसकी धारा इस अवैध गतिविधि के कारण पूर्ण रूप से बाधित हो गई है। नदी का प्रवाह रुकने से बरसात के मौसम में पानी निकासी की गंभीर समस्या उत्पन्न होने की आशंका है, जिसका खामियाजा नदी किनारे बसे लोगों को भुगतना पड़ सकता है। इस स्थिति के बावजूद, अब तक न तो किसी प्रशासनिक अधिकारी ने इस पर ध्यान दिया और न ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इस अवैध कार्य को रोकने का प्रयास किया। इस मामले पर अंचलाधिकारी उमा कुमारी ने बताया कि जब यह पोखर बनाए गए थे, तब वे हड़ताल पर थीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि नदी के प्रवाह को बाधित कर पोखर बनाना गैर-कानूनी है। अंचलाधिकारी ने यह भी बताया कि ऐसे लोगों को चिन्हित कर नोटिस भेजा गया है। नोटिस का जवाब आने के बाद, वरीय अधिकारियों को सूचित करते हुए उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी।2