“फाइलों में शेर जिंदा हैं… जंगल में क्यों नहीं?”......... “फाइलों में शेर जिंदा हैं… जंगल में क्यों नहीं?” Kanha National Park—जिसे देश-विदेश में टाइगर लैंड के नाम से जाना जाता है—आज वही अपनी पहचान बचाने के लिए जूझ रहा है। सिर्फ 15 दिनों में 6 बाघों की मौत, और ताज्जुब ये कि सिस्टम अब भी “जांच जारी है” के भरोसे चल रहा है। 📄 कुछ दिन पहले ही पत्रकारों ने कलेक्टर कार्यालय में ज्ञापन सौंपा, उम्मीद थी कि जिम्मेदार जागेंगे… लेकिन लगता है फाइलों की नींद, बाघों की जिंदगी से ज्यादा गहरी है। 🐅 हर नई मौत के साथ एक सवाल और बड़ा होता जा रहा है— क्या कान्हा में बाघ सुरक्षित हैं या सिर्फ आंकड़ों में जिंदा रखे गए हैं? ⚠️ प्रशासन की खामोशी अब सवालों के घेरे में है— क्या ये सिर्फ लापरवाही है, या फिर जिम्मेदारी से बचने का आसान तरीका? ✊ अब जिले के वरिष्ठ पत्रकार चुप नहीं बैठेंगे— कल से अनिश्चितकालीन धरना शुरू होगा। ये धरना सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि उस सिस्टम को जगाने की कोशिश है जो हर घटना के बाद “जांच” के पीछे छिप जाता है। 🛑 जब तक वन विभाग और प्रशासन ठोस और सख्त कार्रवाई नहीं करता, ये आंदोलन जारी रहेगा। 🐾 कान्हा सिर्फ एक नेशनल पार्क नहीं, मंडला की पहचान है यहां के बाघ सिर्फ वन्यजीव नहीं, बल्कि इस क्षेत्र की शान, पर्यटन और अस्तित्व हैं। 👉 अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो इतिहास में ये दर्ज होगा कि— “बाघ मरते रहे… और सिस्टम नोटिंग करता रहा।” अब वक्त है— जवाबदेही का, कार्रवाई का, और सच्ची संरक्षण नीति का।
“फाइलों में शेर जिंदा हैं… जंगल में क्यों नहीं?”......... “फाइलों में शेर जिंदा हैं… जंगल में क्यों नहीं?” Kanha National Park—जिसे देश-विदेश में टाइगर लैंड के नाम से जाना जाता है—आज वही अपनी पहचान बचाने के लिए जूझ रहा है। सिर्फ 15 दिनों में 6 बाघों की मौत, और ताज्जुब ये कि सिस्टम अब भी “जांच जारी है” के भरोसे चल रहा है। 📄 कुछ दिन पहले ही पत्रकारों ने कलेक्टर कार्यालय में ज्ञापन सौंपा, उम्मीद थी कि जिम्मेदार जागेंगे… लेकिन लगता है फाइलों की नींद, बाघों की जिंदगी से ज्यादा गहरी है। 🐅 हर नई मौत के साथ एक सवाल और बड़ा होता जा रहा है— क्या कान्हा में बाघ सुरक्षित हैं या सिर्फ आंकड़ों में जिंदा रखे गए हैं? ⚠️ प्रशासन की खामोशी अब सवालों के घेरे में है— क्या ये सिर्फ लापरवाही है, या फिर जिम्मेदारी से बचने का आसान तरीका? ✊ अब जिले के वरिष्ठ पत्रकार चुप नहीं बैठेंगे— कल से अनिश्चितकालीन धरना शुरू होगा। ये धरना सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि उस सिस्टम को जगाने की कोशिश है जो हर घटना के बाद “जांच” के पीछे छिप जाता है। 🛑 जब तक वन विभाग और प्रशासन ठोस और सख्त कार्रवाई नहीं करता, ये आंदोलन जारी रहेगा। 🐾 कान्हा सिर्फ एक नेशनल पार्क नहीं, मंडला की पहचान है यहां के बाघ सिर्फ वन्यजीव नहीं, बल्कि इस क्षेत्र की शान, पर्यटन और अस्तित्व हैं। 👉 अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो इतिहास में ये दर्ज होगा कि— “बाघ मरते रहे… और सिस्टम नोटिंग करता रहा।” अब वक्त है— जवाबदेही का, कार्रवाई का, और सच्ची संरक्षण नीति का।
- Post by Govardhan kushwaha1
- अवैध शराब का खेल जारी, कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति1
- सरही गेट प्रांगण में सोमवार को दोपहर 3:30 बजे सहायक संचालक सिझौरा. परिक्षेत्र अधिकारी सरही, परिक्षेत्र अधिकारी सिझौरा बफर, कान्हा टायगर रिजर्व मण्डला द्वारा ग्राम पंचायत कटंगा के सरपंच, पंच, ईको विकास समिति सरही के सदस्य, अध्यक्ष, एवम् सरही गेट के गाईड, होटल मालिक / प्रबंधक, वाहन मालिक, वाहन चालकों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में सभी ने सर्वसहमति से प्रस्ताव पारित किया गया कि, हम सभी मिलकर पालतू/आवारा कुत्तों से वन्यजीवों में फैलने वाली बिमारियों की रोकथाम हेतु वनक्षेत्रों में किसी भी प्रकार से कुत्ते प्रवेश न करें इसका सम्पूर्ण प्रयास करेगें। वन विभाग द्वारा कराये जा रहे आवारा एवं पालतू कुत्तों वेक्सिनेशन में पूर्ण जन सहयोग प्रदाय किया जायेगा। होटल मालिकों को समझाईस दिया गया कि, होटल में बचे अवशिष्ट पदार्थों का डिस्पोज उचित ढंग से किया जावे। कान्हा प्रबंधन द्वारा सतर्कता बावत् अमाही वनमार्ग कुछ दिनों के लिए पर्यटन हेतु बंद किया गया है। वन विभाग द्वारा ग्रामीणों को अवगत कराया गया कि, यदि जंगल या आसपास में किसी भी वन्यजीव असामन्य व्यवहार या बीमारी पाये जाने पर तत्काल इसकी सूचना वन विभाग कान्हा टायगर रिजर्व को दी जाय। सभी सदस्यों ने सर्वसहमति से एकजुट स्वर में कहा कि, बाघों की सुरक्षा के लिए हम सभी तैयार है तथा वन विभाग द्वारा जो भी प्रयास किया जा रहा है हम उसमें पूर्णतः सहमत है तथा वन विभाग को पूर्ण सहयोग करेगे ।1
- Post by Rajju Bhartiya1
- खेलों के जरिए निखरेगी प्रतिभा, मोबाइल से दूर रहेंगे बच्चे टिकरिया में ग्रीष्मकालीन खेल प्रशिक्षण शिविर शुरू मंडला। नारायणगंज में ग्रीष्मकालीन खेल प्रशिक्षण शिविर आरोह का शुभारंभ किया गया है। जिला खेल एवं युवा कल्याण अधिकारी विकास खराड़कर के मार्गदर्शन में आयोजित यह शिविर सीएम राइज स्कूल टिकरिया और शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल बबलिया के प्रांगण में संचालित किया जा रहा है। विकासखंड समन्वयक करुणा मर्सकोले ने बताया कि शिविर में प्रशिक्षकों द्वारा बालक, बालिकाओं को सुबह 6 से 7.30 बजे तक और शाम 5.30 से 7 बजे तक विभिन्न खेलों का अभ्यास कराया जा रहा है। इसी तरह बबलिया में कबड्डी प्रशिक्षक नंदिनी उइके, टिकरिया में हॉकी प्रशिक्षक सुजीता यादव और पड़रिया में क्रिकेट का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। समर कैंप आरोह का मुख्य उद्देश्य बच्चों और युवाओं को पढ़ाई के साथ फिटनेस, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और सांस्कृतिक गतिविधियों से जोडऩा है। इसके साथ ही उन्हें साइबर क्राइम के प्रति जागरूक करने और क्षेत्र की छिपी हुई प्रतिभाओं को निखारकर राज्य व राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। विकासखंड समन्वयक करुणा मर्सकोले ने बच्चों को मोबाइल गेम से दूर रहने की सलाह देते हुए नियमित खेल प्रशिक्षण प्राप्त करने पर जोर दिया है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों को इस शिविर में भाग लेने के लिए प्रेरित करें और स्वयं भी इसमें सहभागिता निभाएं ताकि शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य सुदृढ़ हो सके। बताया गया कि इच्छुक प्रतिभागी उपलब्ध कराई गई लिंक के माध्यम से अपना ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। यह शिविर स्थानीय युवाओं के लिए अपनी खेल प्रतिभा को पहचानने और फिटनेस सुधारने का एक बेहतरीन अवसर है। 00000000000000000000000000000000001
- घुघरी देवगांव नर्मदा नदी और- बुडनेर संगम पर दर्दनाक घटना- अपनी बच्चियों को बचाते हुए- नदी में डूबा आरक्षक- शिव परस्ते- आरक्षक कि मौत- बच्चियों को मौके पर मौजूद लोगों ने बचा लिया किंतू मोहगांव थाना में पदस्थ आरक्षक शिव परस्ते कि मौत1
- गर्मी से निपटने जनपद की तैयारी, जल संकट पर बनी रणनीति घंसौर, 4 मई 2026 भीषण गर्मी के बीच जल संकट की स्थिति से निपटने के लिए घंसौर जनपद पंचायत में आज एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में पंचायत सचिवों के साथ जल निगम एवं पीएचई विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में ग्राम पौड़ी सहित अन्य प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। अधिकारियों ने हैंडपंपों की त्वरित मरम्मत, जरूरत पड़ने पर टैंकरों के माध्यम से पानी आपूर्ति और जल संकट वाले इलाकों में प्राथमिकता के आधार पर पेयजल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। जनपद प्रशासन ने स्पष्ट किया कि गर्मी के दौरान किसी भी गांव में पेयजल की समस्या न हो, इसके लिए सभी विभाग समन्वय के साथ कार्य करें और स्थिति पर लगातार निगरानी रखें।1
- “फाइलों में शेर जिंदा हैं… जंगल में क्यों नहीं?” Kanha National Park—जिसे देश-विदेश में टाइगर लैंड के नाम से जाना जाता है—आज वही अपनी पहचान बचाने के लिए जूझ रहा है। सिर्फ 15 दिनों में 6 बाघों की मौत, और ताज्जुब ये कि सिस्टम अब भी “जांच जारी है” के भरोसे चल रहा है। 📄 कुछ दिन पहले ही पत्रकारों ने कलेक्टर कार्यालय में ज्ञापन सौंपा, उम्मीद थी कि जिम्मेदार जागेंगे… लेकिन लगता है फाइलों की नींद, बाघों की जिंदगी से ज्यादा गहरी है। 🐅 हर नई मौत के साथ एक सवाल और बड़ा होता जा रहा है— क्या कान्हा में बाघ सुरक्षित हैं या सिर्फ आंकड़ों में जिंदा रखे गए हैं? ⚠️ प्रशासन की खामोशी अब सवालों के घेरे में है— क्या ये सिर्फ लापरवाही है, या फिर जिम्मेदारी से बचने का आसान तरीका? ✊ अब जिले के वरिष्ठ पत्रकार चुप नहीं बैठेंगे— कल से अनिश्चितकालीन धरना शुरू होगा। ये धरना सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि उस सिस्टम को जगाने की कोशिश है जो हर घटना के बाद “जांच” के पीछे छिप जाता है। 🛑 जब तक वन विभाग और प्रशासन ठोस और सख्त कार्रवाई नहीं करता, ये आंदोलन जारी रहेगा। 🐾 कान्हा सिर्फ एक नेशनल पार्क नहीं, मंडला की पहचान है यहां के बाघ सिर्फ वन्यजीव नहीं, बल्कि इस क्षेत्र की शान, पर्यटन और अस्तित्व हैं। 👉 अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो इतिहास में ये दर्ज होगा कि— “बाघ मरते रहे… और सिस्टम नोटिंग करता रहा।” अब वक्त है— जवाबदेही का, कार्रवाई का, और सच्ची संरक्षण नीति का।1