महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के खालापुर तालुका स्थित दूरदराज के उमरनेवाड़ी गांव से मानवता को झकझोर देने वाली एक बेहद शर्मनाक तस्वीर सामने आई है। यहां पक्की सड़क न होने के कारण एक गर्भवती महिला को इलाज के लिए झोली में उठाकर कई किलोमीटर तक पैदल अस्पताल ले जाना पड़ा। पहाड़ों और नदी घाटी के बीच बसे इस गांव में आज भी लोगों को बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने के लिए अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ती है। इस घटना के बाद से ग्रामीणों में प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि प्रशासन द्वारा वर्षों से विकास के दावे तो किए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत में आज तक गांव तक एक पक्की सड़क भी नहीं पहुंच पाई है। ऐसे में यह बड़ा सवाल खड़ा होता है कि आखिर विकास के ये दावे कब तक सिर्फ कागजों तक ही सीमित रहेंगे और ग्रामीणों को बुनियादी सुविधाओं के लिए इस तरह की पीड़ा झेलनी पड़ेगी।
महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के खालापुर तालुका स्थित दूरदराज के उमरनेवाड़ी गांव से मानवता को झकझोर देने वाली एक बेहद शर्मनाक तस्वीर सामने आई है। यहां पक्की सड़क न होने के कारण एक गर्भवती महिला को इलाज के लिए झोली में उठाकर कई किलोमीटर तक पैदल अस्पताल ले जाना पड़ा। पहाड़ों और नदी घाटी के बीच बसे इस गांव में आज भी लोगों को बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने के लिए अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ती है। इस घटना के बाद से ग्रामीणों में प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि प्रशासन द्वारा वर्षों से विकास के दावे तो किए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत में आज तक गांव तक एक पक्की सड़क भी नहीं पहुंच पाई है। ऐसे में यह बड़ा सवाल खड़ा होता है कि आखिर विकास के ये दावे कब तक सिर्फ कागजों तक ही सीमित रहेंगे और ग्रामीणों को बुनियादी सुविधाओं के लिए इस तरह की पीड़ा झेलनी पड़ेगी।
- महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के खालापुर तालुका स्थित दूरदराज के उमरनेवाड़ी गांव से मानवता को झकझोर देने वाली एक बेहद शर्मनाक तस्वीर सामने आई है। यहां पक्की सड़क न होने के कारण एक गर्भवती महिला को इलाज के लिए झोली में उठाकर कई किलोमीटर तक पैदल अस्पताल ले जाना पड़ा। पहाड़ों और नदी घाटी के बीच बसे इस गांव में आज भी लोगों को बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने के लिए अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ती है। इस घटना के बाद से ग्रामीणों में प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि प्रशासन द्वारा वर्षों से विकास के दावे तो किए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत में आज तक गांव तक एक पक्की सड़क भी नहीं पहुंच पाई है। ऐसे में यह बड़ा सवाल खड़ा होता है कि आखिर विकास के ये दावे कब तक सिर्फ कागजों तक ही सीमित रहेंगे और ग्रामीणों को बुनियादी सुविधाओं के लिए इस तरह की पीड़ा झेलनी पड़ेगी।1
- ब्रेकिंग न्यूज1
- मध्य प्रदेश के सीधी जिले के बहरी ब्लॉक अंतर्गत अमरपुर गांव के राकेश भाई को चेन्नई में काम करने के लिए दो ऑपरेटरों की आवश्यकता है। इस काम के लिए ऑपरेटरों को ₹30,000 सैलरी दी जाएगी। इसके साथ ही खाने-पीने की सुविधा कैंटीन में रहेगी, जबकि रहने के लिए रूम की व्यवस्था खुद ही करनी होगी।1
- मध्य प्रदेश के रीवा जिला अंतर्गत हनुमना में पानी की समस्या बनी हुई है, जिसे लेकर सुरेंद्र बसोर ने चापाकल में बोरिंग डलवाने की मांग की है। सुरेंद्र बसोर ने चापाकल में बोर डलवाने की कृपा करने की अपील की है ताकि पानी की इस समस्या का समाधान किया जा सके।2
- सिंगरौली जिला अस्पताल की कार्यप्रणाली एक बार फिर गंभीर चर्चा के केंद्र में आ गई है। अस्पताल में आपातकालीन ड्यूटी के बीच से डॉक्टर के अनुपस्थित रहने का आरोप लगाया गया है। इस घटना के बाद जिला अस्पताल की कार्यशैली और वहां की व्यवस्थाओं को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं।1
- प्रयागराज की बारा तहसील अंतर्गत चिल्ला गौहानी गांव में सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान के विलय के प्रस्ताव को लेकर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिससे गांव में हड़कंप मच गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम विकास अधिकारी ने नए जीओ का हवाला देकर, बिना उनकी सहमति के दो कोटे की दुकानों को एक में विलय करने का प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। ग्राम विकास अधिकारी ने सर्वे के नाम पर कागजों में दोनों दुकानों को एक ही स्थान पर और लाभार्थियों की संख्या कम दर्शाया है, जबकि हकीकत में ये दुकानें गांव के अलग-अलग छोर पर स्थित हैं। इनमें से एक दुकान बबुरी मौजे की तरफ और दूसरी मुख्य चिल्ला में है, जिससे दुकानों का विलय होने पर सैकड़ों लाभार्थियों को राशन लेने के लिए 4-5 किलोमीटर दूर जाना पड़ेगा। ग्रामीण दिनेश और प्रधान प्रतिनिधि शनि यादव का आरोप है कि अधिकारी जीओ लोकेशन के नाम पर रात में जाकर फोटो खींच रहे हैं ताकि दुकानें बंद दिखें और यह पूरा खेल सिर्फ कमीशन के लिए किया जा रहा है। गांव की महिलाओं ने भी इस पर नाराजगी जताते हुए कहा है कि पहले ही राशन समय पर नहीं मिलता और यदि दुकानें एक हो गईं, तो उन्हें दिनभर लाइनों में खड़ा रहना पड़ेगा, जिससे बुजुर्गों और दिव्यांगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। इस फर्जीवाड़े की खबर फैलते ही सैकड़ों ग्रामीणों ने बारा तहसील पहुंचकर एसडीएम को ज्ञापन सौंपा और इस प्रस्ताव को तुरंत निरस्त करने की मांग की। इसके साथ ही ग्रामीणों ने ग्राम विकास अधिकारी और कोटेदार बृजेश कुमार यादव, जो कि एडवोकेट और जिला पंचायत सदस्य भी हैं, की भूमिका की जांच कराने की मांग उठाई है। इस मामले पर एसडीएम बारा ने आश्वासन दिया है कि बिना ग्राम सभा की सहमति के कोई विलय नहीं होगा और जांच में फर्जीवाड़ा मिलने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। खाद्य विभाग के नियमों के अनुसार भी किसी भी दुकान के विलय या निरस्तीकरण के लिए ग्राम सभा में प्रस्ताव पास होना और डीएसओ की अनुमति जरूरी है, जिसके चलते फिलहाल ग्रामीण तहसील प्रशासन के लिखित जवाब का इंतजार कर रहे हैं।1
- प्रयागराज जिले के घूरपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत सारीपुर स्थित मां शीतला धाम मेले में सोमवार को एक दर्दनाक हादसा हो गया, जहां यमुना नदी में स्नान के दौरान डूबने से 14 वर्षीय किशोर रितिक की मौत हो गई। नैनी थाना क्षेत्र के डांडी गांव निवासी पूर्णवासी भारतीय अपनी पत्नी गीता और इकलौते बेटे रितिक के साथ सोमवार सुबह मां शीतला धाम में दर्शन-पूजन के लिए आए थे। इसी दौरान रितिक खेलते-खेलते किनारे लगी एक नाव पर चढ़ गया और यमुना में कूदकर नहाने लगा। तैरना न आने और बरसात के कारण नदी का जलस्तर बढ़ा होने से वह पानी की गहराई का अंदाजा नहीं लगा पाया और गहरे पानी में समा गया। घटना के बाद मौके पर मची अफरा-तफरी के बीच स्थानीय लोगों और गोताखोरों ने करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद रितिक को बाहर निकाला। मौके पर घूरपुर पुलिस भी पहुंच गई, लेकिन मेले में भारी भीड़ और घूरपुर चौराहे से दो किलोमीटर दूर मेले के रास्ते में लगे भीषण जाम के कारण उसे इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चाका ले जाने में काफी देर हो गई। अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों के अनुसार, पानी में डूबने के कारण उसकी पहले ही मौत हो चुकी थी। रितिक अपनी चार बड़ी बहनों का इकलौता भाई और कक्षा सात का छात्र था। होनहार बेटे की मौत की खबर सुनते ही मां गीता और पिता पूर्णवासी बेसुध हो गए और पूरे परिवार में कोहराम मच गया। स्वजनों ने शव का पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया, जिसके बाद आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर पुलिस ने शव परिजनों को सौंप दिया। इस हादसे ने शीतला देवी धाम मेले में सुरक्षा व्यवस्था की स्थानीय प्रशासन द्वारा की जा रही भारी अनदेखी को उजागर किया है। आषाढ़ मास में हर सोमवार और शुक्रवार को हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहाँ पहुंचते हैं, लेकिन सुरक्षा के नाम पर पुलिस या जल पुलिस तो दूर, एक चौकीदार तक की तैनाती नहीं की जाती। इसी प्रशासनिक उदासीनता और मेले के रास्तों में लगे लंबे जाम के कारण डूबे किशोर को अस्पताल पहुंचाने में एक घंटा लग गया, जिससे समय पर इलाज न मिलने के कारण उसकी जान चली गई।4