मेरठ: तलाक के बाद बेटी का 'जश्न' के साथ स्वागत; रिटायर्ड जज पिता ने पेश की मिसाल आमतौर पर हमारे समाज में बेटी की विदाई को "खुशी" और उसके तलाक होकर घर लौटने को "मातम या शर्म" का विषय माना जाता है। लेकिन मेरठ के एक रिटायर्ड जज ने इस रूढ़िवादी सोच को सिरे से खारिज कर दिया है। जब उनकी बेटी का तलाक हुआ, तो वे उसे गमगीन माहौल में नहीं, बल्कि ढोल-नगाड़ों और आतिशबाजी के साथ वापस अपने घर लाए। "बेटी का सम्मान और खुशी सबसे पहले" रिटायर्ड जज का कहना है कि उनकी बेटी का सम्मान उनके लिए किसी भी सामाजिक लोक-लाज से बढ़कर है। उन्होंने इस कदम के जरिए समाज को यह संदेश दिया है कि "बेटियां बोझ नहीं होतीं और न ही एक गलत शादी उनकी जिंदगी का अंत है।" उनका मानना है कि अगर कोई रिश्ता दुख और प्रताड़ना का कारण बन जाए, तो उसे ढोने के बजाय उससे बाहर निकलना ही बेहतर है। उन्होंने कहा: "मेरी बेटी का आत्मसम्मान और उसकी खुशी मेरे लिए सर्वोच्च है। उसे घर वापस लाना कोई शर्म की बात नहीं, बल्कि उसके नए जीवन की शुरुआत का उत्सव है।" इस कदम के मायने: समाज को बड़ा संदेश इस घटना ने कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर ध्यान आकर्षित किया है: मानसिक स्वास्थ्य का महत्व: अक्सर महिलाएं समाज के डर से जहरीले रिश्तों में फंसी रहती हैं। पिता के इस समर्थन से बेटियों को यह विश्वास मिलता है कि उनका घर हमेशा उनके लिए खुला है। रूढ़ियों पर चोट: तलाक को 'कलंक' मानने वाली सोच पर यह एक कड़ा प्रहार है। अभिभावकों की भूमिका: यह मामला दिखाता है कि एक पिता का सहारा किसी भी महिला के लिए उसकी सबसे बड़ी ताकत होता है। सोशल मीडिया पर सराहना जैसे ही ढोल-नगाड़ों के साथ बेटी के गृह प्रवेश का वीडियो और खबर वायरल हुई, लोगों ने जज साहब की जमकर तारीफ की। नेटिजन्स का कहना है कि अगर हर पिता अपनी बेटी के पीछे इसी तरह ढाल बनकर खड़ा हो जाए, तो किसी भी बेटी को अपनी ससुराल में अत्याचार सहने की जरूरत नहीं पड़ेगी। मेरठ की यह घटना केवल एक परिवार की कहानी नहीं है, बल्कि यह बदलते भारत की एक सुखद तस्वीर है। यह याद दिलाती है कि बेटियां घर की लक्ष्मी होती हैं, और उनकी विदाई के साथ उनके अधिकार और पिता का प्यार खत्म नहीं हो जाता। जब घर के दरवाजे और पिता का दिल बड़ा हो, तो कोई भी मुश्किल बेटी के हौसले को नहीं तोड़ सकती।
मेरठ: तलाक के बाद बेटी का 'जश्न' के साथ स्वागत; रिटायर्ड जज पिता ने पेश की मिसाल आमतौर पर हमारे समाज में बेटी की विदाई को "खुशी" और उसके तलाक होकर घर लौटने को "मातम या शर्म" का विषय माना जाता है। लेकिन मेरठ के एक रिटायर्ड जज ने इस रूढ़िवादी सोच को सिरे से खारिज कर दिया है। जब उनकी बेटी का तलाक हुआ, तो वे उसे गमगीन माहौल में नहीं, बल्कि ढोल-नगाड़ों और आतिशबाजी के साथ वापस अपने घर लाए। "बेटी का सम्मान और खुशी सबसे पहले" रिटायर्ड जज का कहना है कि उनकी बेटी का सम्मान उनके लिए किसी भी सामाजिक लोक-लाज से बढ़कर है। उन्होंने इस कदम के जरिए समाज को यह संदेश दिया है कि "बेटियां बोझ नहीं होतीं और न ही एक गलत शादी उनकी जिंदगी का अंत है।" उनका मानना है कि अगर कोई रिश्ता दुख और प्रताड़ना का कारण बन जाए, तो उसे ढोने के बजाय उससे बाहर निकलना ही बेहतर है। उन्होंने कहा: "मेरी बेटी का आत्मसम्मान और उसकी खुशी मेरे लिए सर्वोच्च है। उसे घर वापस लाना कोई शर्म की बात नहीं, बल्कि उसके नए जीवन की शुरुआत का उत्सव है।" इस कदम के मायने: समाज को बड़ा संदेश इस घटना ने कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर ध्यान आकर्षित किया है: मानसिक स्वास्थ्य का महत्व: अक्सर महिलाएं समाज के डर से जहरीले रिश्तों में फंसी रहती हैं। पिता के इस समर्थन से बेटियों को यह विश्वास मिलता है कि उनका घर हमेशा उनके लिए खुला है। रूढ़ियों पर चोट: तलाक को 'कलंक' मानने वाली सोच पर यह एक कड़ा प्रहार है। अभिभावकों की भूमिका: यह मामला दिखाता है कि एक पिता का सहारा किसी भी महिला के लिए उसकी सबसे बड़ी ताकत होता है। सोशल मीडिया पर सराहना जैसे ही ढोल-नगाड़ों के साथ बेटी के गृह प्रवेश का वीडियो और खबर वायरल हुई, लोगों ने जज साहब की जमकर तारीफ की। नेटिजन्स का कहना है कि अगर हर पिता अपनी बेटी के पीछे इसी तरह ढाल बनकर खड़ा हो जाए, तो किसी भी बेटी को अपनी ससुराल में अत्याचार सहने की जरूरत नहीं पड़ेगी। मेरठ की यह घटना केवल एक परिवार की कहानी नहीं है, बल्कि यह बदलते भारत की एक सुखद तस्वीर है। यह याद दिलाती है कि बेटियां घर की लक्ष्मी होती हैं, और उनकी विदाई के साथ उनके अधिकार और पिता का प्यार खत्म नहीं हो जाता। जब घर के दरवाजे और पिता का दिल बड़ा हो, तो कोई भी मुश्किल बेटी के हौसले को नहीं तोड़ सकती।
- मथुरा 05 अप्रैल 2026 जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह द्वारा जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में क्षतिग्रस्त फसलों का निरीक्षण किया गया। जनपद में हाल ही में आई तेज़ आंधी, बारिश एवं ओलावृष्टि के कारण किसानों की फसलों को हुए नुकसान के दृष्टिगत जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने प्रभावित ग्रामों का स्थलीय निरीक्षण किया। जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने तहसील छाता के ग्राम चौमुंहा एवं पसौली तथा तहसील सदर के ग्राम देवी आटस का निरीक्षण किया। निरीक्षण में जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने उप जिलाधिकारी छाता वैभव गुप्ता को निर्देश दिए कि सभी किसानों के फसलों का सर्वे का कार्य सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि उक्त कार्य को प्राथमिकता के आधार पर करते हुए किसानों को मुआवजा देने की कार्यवाही को समयबद्धता के साथ किया जाए। उन्होंने कहा कि सर्वे के कार्यों को पूर्ण पारदर्शिता से करे तथा किसानों को किसी भी प्रकार की समस्या नहीं आनी चाहिए। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने खेतों में जाकर फसलों की वास्तविक स्थिति का जायजा लिया तथा किसानों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं। किसानों द्वारा बारी-बारी से अपनी समस्याओं से जिलाधिकारी महोदय को अवगत कराया गया। जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि क्षति का आकलन शीघ्रता से पारदर्शी ढंग से किया जाए, ताकि प्रभावित किसानों को शासन द्वारा निर्धारित राहत सहायता समयबद्ध रूप से उपलब्ध कराई जा सके। जिलाधिकारी ने कहा कि प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों को हर संभव सहायता प्रदान करना प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने कृषि एवं राजस्व विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि सर्वे कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए और वास्तविक नुकसान का सही आंकलन प्रस्तुत किया जाए।4
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- Post by RPR NEWS TV1
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- Post by ATV INDIA HD (Ajeet chauhan)1
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- मथुरा में भारतीय जनता पार्टी के पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान का रविवार को भव्य समापन हो गया। शिविर के दूसरे दिन चार महत्वपूर्ण सत्रों में कार्यकर्ताओं को पार्टी की कार्यपद्धति, सोशल मीडिया के कुशल प्रबंधन और सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने का मंत्र दिया गया। समापन सत्र में महापौर विनोद अग्रवाल ने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे सरकार की उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाएं। इस कार्यक्रम का कुशल संचालन मंडल महामंत्री कृष्णमणि सूबेदार और नितिन चतुर्वेदी ने किया। मंडल अध्यक्ष लोकेश तायल ने विश्वास जताया कि इस प्रशिक्षण से संगठन की नींव और मजबूत होगी। इस दौरान महानगर और मंडल स्तर के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और भारी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे, जिन्होंने एक जुट होकर आगामी चुनौतियों का सामना करने का संकल्प लिया। निश्चित रूप से मथुरा भाजपा के इस प्रशिक्षण महाअभियान ने कार्यकर्ताओं को न केवल वैचारिक रूप से और भी धारदार बनाया है, बल्कि चुनावी और संगठनात्मक चुनौतियों के लिए पूरी तरह से तैयार भी कर दिया हे। इस प्रशिक्षण महाअभियान में मुख्य रूप से महामंत्री कुंज बिहारी चतुर्वेदी, महानगर उपाध्यक्ष रामकिशन पाठक व संजय शर्मा, पूर्व उपाध्यक्ष योगेश आवा, महानगर कार्यवाहक राष्ट्रीय स्वयं संघ विजय बंटा, बाल संरक्षण आयोग के पूर्व अध्यक्ष देवेंद्र शर्मा, महानगर मंत्री कल्पना गर्ग, ब्रज क्षेत्र के संयोजक राघव अग्रवाल, मंडल महामंत्री कृष्णमणि सूबेदार, नितिन चतुर्वेदी, मंडल उपाध्यक्ष कुंज बिहारी भारद्वाज, मीडिया प्रभारी बृजवासी लाल,हेमंत खंदोली,नरेश शर्मा, गौरव अग्रवाल, छोटेलाल सैनी, ज्योति चतुर्वेदी और अनिल गोला सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।4