जालौन के उरई स्थित जिला महिला अस्पताल में शुक्रवार को एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया, जब अस्पताल परिसर के ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन विद्युत लाइन का तार टूटकर सीधे 108 एंबुलेंस कंट्रोल रूम की केबिन पर जा गिरा। इस घटना के कारण परिसर में अफरा-तफरी और हड़कंप मच गया। दरअसल, हाईटेंशन लाइन में अचानक शॉर्ट सर्किट हुआ, जिसके बाद तेज धमाके के साथ तार टूटकर एंबुलेंस कंट्रोल रूम पर गिर पड़ा। तार गिरने से कंट्रोल रूम में आग लग गई, जिससे अस्पताल में मौजूद मरीजों, तीमारदारों और कर्मचारियों में दहशत फैल गई। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि धमाका इतना जोरदार था कि पूरे अस्पताल परिसर में कुछ देर के लिए डर का माहौल बन गया। हालांकि, अस्पताल स्टाफ ने तुरंत सूझबूझ दिखाते हुए फायर सेफ्टी सिलेंडर की मदद से आग पर काबू पा लिया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। सूचना मिलते ही संबंधित विभाग के अधिकारी और बिजली विभाग की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति को संभालने में जुट गई। गनीमत रही कि इस घटना में किसी के हताहत होने की कोई सूचना नहीं है। फिलहाल, आग लगने और हाईटेंशन लाइन टूटने के कारणों की जांच की जा रही है।
जालौन के उरई स्थित जिला महिला अस्पताल में शुक्रवार को एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया, जब अस्पताल परिसर के ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन विद्युत लाइन का तार टूटकर सीधे 108 एंबुलेंस कंट्रोल रूम की केबिन पर जा गिरा। इस घटना के कारण परिसर में अफरा-तफरी और हड़कंप मच गया। दरअसल, हाईटेंशन लाइन में अचानक शॉर्ट सर्किट हुआ, जिसके बाद तेज धमाके के साथ तार टूटकर एंबुलेंस कंट्रोल रूम पर गिर पड़ा। तार गिरने से कंट्रोल रूम में आग लग गई, जिससे अस्पताल में मौजूद मरीजों, तीमारदारों और कर्मचारियों में दहशत फैल गई। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि धमाका इतना जोरदार था कि पूरे अस्पताल परिसर में कुछ देर के लिए डर का माहौल बन गया। हालांकि, अस्पताल स्टाफ ने तुरंत सूझबूझ दिखाते हुए फायर सेफ्टी सिलेंडर की मदद से आग पर काबू पा लिया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। सूचना मिलते ही संबंधित विभाग के अधिकारी और बिजली विभाग की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति को संभालने में जुट गई। गनीमत रही कि इस घटना में किसी के हताहत होने की कोई सूचना नहीं है। फिलहाल, आग लगने और हाईटेंशन लाइन टूटने के कारणों की जांच की जा रही है।
- शासन की मंशा एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी के निर्देशों का पालन करते हुए, शनिवार को जालौन स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में एक फायर सेफ्टी मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। इस मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य अस्पताल परिसर में आग जैसी आपातकालीन परिस्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए चिकित्सकों, स्वास्थ्य कर्मियों और अन्य कर्मचारियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करना था। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कपिल कुमार गुप्ता ने बताया कि यह मॉक ड्रिल शासन की मंशा और जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी के आदेशों के अनुरूप आयोजित की गई। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अस्पताल जैसे संवेदनशील संस्थानों में कार्यरत प्रत्येक अधिकारी एवं कर्मचारी के लिए अग्नि सुरक्षा और आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण प्राप्त करना अत्यंत आवश्यक है, ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में मरीजों और कर्मचारियों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। मॉक ड्रिल के दौरान, कर्मचारियों को आग लगने पर तत्काल सूचना देने, मरीजों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने, अग्निशमन यंत्रों का सही ढंग से उपयोग करने और आपातकालीन परिस्थितियों में संयम तथा सतर्कता बनाए रखने के संबंध में गहन व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इस महत्वपूर्ण अवसर पर डॉ. सहन बिहारी गुप्ता, डॉ. विनोद राजपूत, डॉ. योगेश आर्य, राजीव दुबे, डॉ. रंजीत, डॉ. प्रियांशु, डॉ. प्रियम यादव सहित अनेक अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। साथ ही, फार्मासिस्ट पी.एन. शर्मा, अवधेश राजपूत, अरविंद राठौर, हाशिम, राहुल, एल.टी. राज नारायण वर्मा, सचिन गुप्ता, लोकेन्द्र पाल एवं जितेंद्र राठौर ने भी सक्रिय रूप से सहभागिता की। सुरक्षा व्यवस्था में सिक्योरिटी कर्मी अवधेश, दीपक और परशुराम भी मौजूद रहे। कार्यक्रम के समापन पर, चिकित्सा अधीक्षक ने सभी कर्मचारियों से अपील की कि वे नियमित रूप से सुरक्षा मानकों का पालन करें और किसी भी आपात स्थिति में घबराए बिना निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार ही कार्य करें।1
- राष्ट्रीय पल्स पोलियो महाअभियान के तहत 28 जून को आयोजित होने वाले पोलियो बूथ दिवस की सफलता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शनिवार को जालौन के उरई स्थित जिला पुरुष चिकित्सालय से एक भव्य जन जागरूकता रैली निकाली गई। इस रैली को जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. घनश्याम अनुरागी, सदर विधायक गौरीशंकर वर्मा, जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय और मुख्य विकास अधिकारी के.के. सिंह ने संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। रैली में स्वास्थ्य, शिक्षा, पुलिस विभागों के साथ-साथ नगर क्षेत्र की आंगनबाड़ी व आशा कार्यकत्रियों, स्वयंसेवी संस्थाओं, मेडिकल एवं नर्सिंग विद्यार्थियों तथा बड़ी संख्या में आमजन ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की। जिला पुरुष चिकित्सालय से शुरू होकर शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरी यह रैली वापस चिकित्सालय परिसर में संपन्न हुई। पूरे रास्ते प्रतिभागियों ने "दो बूंद जिंदगी की" और "पोलियो मुक्त भारत" जैसे नारों के जरिए लोगों को अपने बच्चों को पोलियो की खुराक अवश्य पिलाने का संदेश दिया। जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. घनश्याम अनुरागी ने जोर देकर कहा कि पोलियो जैसी गंभीर बीमारी से बच्चों की सुरक्षा केवल दो बूंद दवा से संभव है और उन्होंने सभी नागरिकों से अपने बच्चों के साथ-साथ आसपास के बच्चों को भी पोलियो बूथ तक लाने का आह्वान किया। सदर विधायक गौरीशंकर वर्मा ने 'पोलियो मुक्त भारत' के संकल्प को दोहराते हुए इसे स्वस्थ भविष्य के लिए प्रत्येक बच्चे तक खुराक पहुँचाने का सामूहिक दायित्व बताया। जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने 28 जून को 0 से 5 वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे को निकटतम पोलियो बूथ पर दवा पिलाने की अपील करते हुए चेतावनी दी कि एक भी बच्चा छूटने पर अभियान की सफलता प्रभावित हो सकती है, इसलिए हर अभिभावक अपनी जिम्मेदारी निभाए। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरिनंदन प्रसाद और अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. वीरेंद्र सिंह ने बताया कि जनपद में अभियान के लिए व्यापक तैयारियां पूरी हो चुकी हैं, जिसके तहत 1188 पोलियो बूथों और 590 टीमों के माध्यम से 2,16,833 लक्षित बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाई जाएगी। उन्होंने सामाजिक, धार्मिक एवं स्वयंसेवी संगठनों से भी अभियान को जन-जन तक पहुँचाने में सहयोग की अपील की।1
- शुक्रवार देर रात जालौन के उरई स्थित गोहन थाना क्षेत्र में एसओजी, सर्विलांस टीम और गोहन थाना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई के दौरान बदमाशों के साथ मुठभेड़ हो गई। पुलिस टीम पर फायरिंग करने वाले एक बदमाश आशिफ के पैर में जवाबी कार्रवाई के दौरान गोली लग गई, जबकि उसके साथी उदल को पुलिस ने पीछा कर दबोच लिया। डॉ. ईशान सोनी ने बताया कि मुखबिर से सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम ने घेराबंदी की, जिसके बाद बदमाशों ने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। आत्मरक्षा में की गई पुलिस की जवाबी कार्रवाई में आशिफ घायल हो गया, जिसे उपचार के लिए जिला अस्पताल भेजा गया है। आशिफ का साथी उदल मौके से भागने का प्रयास कर रहा था, जिसे पुलिस टीम ने पीछा कर गिरफ्तार कर लिया। एएसपी के अनुसार, घायल आरोपी आशिफ पूर्व में गो-तस्करी के मामले में जेल जा चुका है। कुछ दिन पहले उसने अपने तीन अन्य साथियों के साथ मिलकर गोहन थाना क्षेत्र में एक पशुपालक के साथ मारपीट की थी और उसकी तीन बकरियां वाहन से चोरी कर ली थीं। जांच में इस घटना में आशिफ और उदल दोनों की संलिप्तता सामने आई थी। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, और उनके दो अन्य साथियों की तलाश में दबिश दी जा रही है। इस मुठभेड़ में एसओजी प्रभारी रिंकू चौधरी, गोहन थाना प्रभारी सतीश कुमार कुशवाहा और उनकी टीम शामिल रही।2
- जालौन के कालपी में मोहर्रम का पर्व गहरे गम, अकीदत और धार्मिक परंपराओं के साथ संपन्न हुआ। आशूरा के अवसर पर शुक्रवार सुबह अकीदतमंदों ने मस्जिदों में नमाज अदा की। इसके बाद शाम होते ही नगर के विभिन्न इमाम चौकों से ताजियों का भव्य जुलूस निकला। हजारों लोग मातमी धुनों और नौहाख्वानी के बीच ताजियों के साथ प्राचीन कर्बला मैदान पहुंचे। धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार, कालपी नगर के 11 ताजियों को पूरे सम्मान और अकीदत के साथ सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए मातम किया। कर्बला परिसर में जगह-जगह लंगर और शर्बत का प्रबंध किया गया, जिसे अकीदतमंदों और आम लोगों ने प्रसाद स्वरूप ग्रहण किया। स्थानीय सामाजिक संगठनों और युवाओं ने भी इस सेवा कार्य में बढ़-चढ़कर भाग लिया। पूरे आयोजन के दौरान हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की मिसाल भी देखने को मिली। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा; पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार पूरे कार्यक्रम पर नजर बनाए रहे, जिसके चलते सभी धार्मिक कार्यक्रम शांतिपूर्ण और सकुशल संपन्न हुए। पूरे शहर में मातम, नौहाख्वानी और 'या हुसैन' की सदाओं से माहौल गमगीन बना रहा।4
- जनपद जालौन के कस्बा कोटरा में मोहर्रम के अवसर पर भव्य ताजिये निकाले गए। पूरे भारत में अपनी असाधारण लंबाई के लिए प्रसिद्ध ये ताजिए नगर के ही ख्याति प्राप्त कारीगरों द्वारा तैयार किए जाते हैं, जिनकी लंबाई 60 से 65 फुट तक होती है। नगर में छोटे-बड़े सभी ताजियों को मिलाकर कुल लगभग एक दर्जन ताजिए निकाले गए, जिनमें से 8 से 10 छोटे ताजिए नगर के प्रमुख रास्तों से होते हुए कर्बला की ओर ले जाए गए। विशेष रूप से, कोटरा के नारेघाट और मियां पुरा नामक दो वार्डों में एक-एक ताजिया बनाया जाता है, जो अपनी असाधारण लंबाई के कारण पूरे भारत में विख्यात हैं। इन विशालकाय ताजियों को कर्बला तक ले जाने के लिए लगभग 150 लोगों की टीम लगाई जाती है, जो इन्हें ढलान भरे कच्चे और दुर्गम रास्तों से होकर कर्बला तक पहुंचाती है। इस अद्वितीय आयोजन को देखने के लिए मुंबई, अहमदाबाद, दिल्ली और कानपुर जैसे महानगरों से भी बड़ी संख्या में लोग कोटरा पहुंचते हैं, और कर्बला में ताजिया देखने वालों की भारी भीड़ मौजूद रही। ताजिया के इस जुलूस के दौरान, कोटरा नगर पंचायत अध्यक्ष द्वारा स्वच्छ पेयजल और साफ-सफाई की व्यवस्था की गई, वहीं सुरक्षा की दृष्टि से कोटरा थाना प्रभारी विमलेश कुमार अपने पुलिस बल के साथ मौके पर मुस्तैद रहे।1
- उत्तर प्रदेश के चंदौली जनपद से बताया जा रहा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक पत्रकार और एक सप्लाई इंस्पेक्टर के बीच तीखी बहस और नोकझोंक दिखाई दे रही है। विवाद का मुख्य कारण 'दलाल' शब्द को लेकर बताया जा रहा है। वीडियो में मौके पर मौजूद एक एसडीएम भी नजर आ रहे हैं, जिनकी उपस्थिति चर्चा का विषय बनी हुई है। हालांकि, खबर जारी करने वाले चैनल ने इस वायरल वीडियो की सत्यता, स्थान, समय या उसमें किए गए दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है। यह जानकारी केवल सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे वीडियो के आधार पर दी गई है। किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले संबंधित प्रशासनिक जांच या आधिकारिक बयान का इंतजार करने की सलाह दी गई है।1
- 15 साल से गरीबी और बीमारी से जूझ रहे प्रमोद चौरसिया को आखिरकार इलाज मिल सका है, जिनका पैर आर्थिक तंगी के कारण पूरी तरह सड़ चुका था। उनकी पत्नी संतोषी घरों में रोटियां बनाकर और सड़क पर ठेला लगाकर प्रतिदिन 14 घंटे की कड़ी मेहनत से किसी तरह घर का खर्च चलाती हैं। लगभग पाँच दिन पहले, संतोषी ने 'इंसानियत ग्रुप' से मदद की गुहार लगाई थी, क्योंकि उनके पास इलाज के लिए पाँच रुपये भी नहीं थे। इस मदद की अपील पर 'इंसानियत ग्रुप' ने तत्काल कार्रवाई की और आज इस कार्य को अंजाम देते हुए, ग्रुप के सदस्यों ने स्वयं प्रमोद चौरसिया को कानपुर के डेल्टा हॉस्पिटल में भर्ती कराया। उरई से शैलेंद्र तिवारी जी अपनी गाड़ी से इस परिवार को कानपुर लेकर आए, जहाँ मुन्ना चौहान जी भी उपस्थित थे। मुन्ना चौहान जी ने तुरंत डॉक्टर को दिखाया, और डॉक्टर ने अपने निजी अस्पताल में प्रमोद का पूरा इलाज निःशुल्क करने का आश्वासन दिया है। इसी कारण डॉक्टरों को ईश्वर का दर्जा दिया गया है। डॉ. शैलेश राठौर जी और डॉ. हिमांशु बाजपेई जी के प्रयासों से यह सब संभव हो पाया। डिप्टी कमिश्नर श्री रामेंद्र सिंह जी और शिव वर्मा जी का भी इस पूरे प्रकरण में बड़ा सहयोग रहा है। इन सभी के सहयोग से आज एक असहाय परिवार चैन की सांस लेकर अस्पताल में अपना इलाज करा पा रहा है। इस परिवार के लिए कानपुर में भोजन और अन्य जरूरतों के लिए आर्थिक मदद की अपील की गई है। इच्छुक लोग सीधे प्रमोद की पत्नी या बेटी से बात करके, संतुष्ट होने के बाद अपनी क्षमतानुसार सहायता कर सकते हैं, ताकि परिवार को पेट भर भोजन मिल सके।1