logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…
  • Latest News
  • News
  • Politics
  • Elections
  • Viral
  • Astrology
  • Horoscope in Hindi
  • Horoscope in English
  • Latest Political News
logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…

बड़वानी कृषि उपज मंडी में किसानों को बुनियादी सुविधाएं नहीं भोजन, पानी, विश्राम और सफाई व्यवस्था बदहाल बड़वानी के राजघाट रोड स्थित कृषि उपज मंडी इन दिनों अव्यवस्थाओं से घिरी है। यहां क्षेत्र के साथ-साथ धार, खरगोन, खंडवा, झाबुआ और आलीराजपुर जिलों के सीमावर्ती गांवों से बड़ी संख्या में किसान अपनी उपज बेचने आते हैं, लेकिन उन्हें बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। किसानों के लिए बनाई गई कई व्यवस्थाएं सिर्फ कागजों तक सीमित हैं। मंडी में इन दिनों सौंफ और गेहूं की आवक बढ़ने लगी है। सैकड़ों किसान अपनी उपज लेकर शनिवार शाम से ही परिसर में पहुंच जाते हैं ताकि अगले दिन बोली लग सके। हालांकि, उनके लिए न तो भोजन की व्यवस्था है और न ही पीने के लिए ठंडा पानी। किसानों को भोजन और नाश्ते के लिए एक किलोमीटर दूर शहर जाना पड़ता है। गर्मी शुरू होने के बावजूद मंडी परिसर में टंकी से गर्म पानी ही मिल रहा है। किसानों के आराम के लिए बना कृषक विश्राम भवन अधिकतर समय बंद रहता है। मजबूरन किसानों को मंडी परिसर में ही रात गुजारनी पड़ती है। परिसर में बने शौचालयों की स्थिति भी बेहद खराब है। साफ-सफाई के अभाव में वहां गंदगी फैली है, जिसके कारण कई किसानों को खुले में शौच के लिए जाना पड़ रहा है। धार जिले के बाग टांडा के पास ग्राम भमोरी निवासी किसान जगदीश ने बताया कि वे सुबह चार बजे आए थे और उनके साथ करीब 20 से ज्यादा किसान शनिवार शाम को ही सौंफ लेकर मंडी पहुंचे थे। रहने की कोई व्यवस्था नहीं होने से उन्हें मंडी परिसर में ही सोना पड़ा। उन्होंने पीने के पानी की व्यवस्था न होने और मंडी प्रशासन द्वारा सुनवाई न करने की शिकायत की। धार जिले के टांडा निवासी जितेंद्र ने शौचालयों में गंदगी और खुले में शौच जाने की मजबूरी बताई। उन्होंने भोजन और रहने की व्यवस्था न होने को मंडी की बड़ी लापरवाही करार दिया। किसान करम सिंह ने भी मंडी में टंकी का गर्म पानी पीने और सफाई व्यवस्था की कमी पर चिंता जताई। किसानों ने बताया कि बड़वानी प्रदेश की एकमात्र दर्जा प्राप्त सौंफ मंडी है, जहां धार, अलीराजपुर, खरगोन और खण्डवा सहित आसपास से किसान सौंफ बेचने आते हैं. यहां बड़े बड़े व्यापारी खरीदी करते हैं। मंडी में रविवार को सौंफ की बंपर आवक हुई, लेकिन 170 से 200 रुपये की जगह में 60 से 120 रुपये तक ही भाव दिया जा रहा है।

12 hrs ago
user_पत्रकार आदित्य शर्मा बड़वानी
पत्रकार आदित्य शर्मा बड़वानी
पत्रकार बड़वानी, बड़वानी, मध्य प्रदेश•
12 hrs ago

बड़वानी कृषि उपज मंडी में किसानों को बुनियादी सुविधाएं नहीं भोजन, पानी, विश्राम और सफाई व्यवस्था बदहाल बड़वानी के राजघाट रोड स्थित कृषि उपज मंडी इन दिनों अव्यवस्थाओं से घिरी है। यहां क्षेत्र के साथ-साथ धार, खरगोन, खंडवा, झाबुआ और आलीराजपुर जिलों के सीमावर्ती गांवों से बड़ी संख्या में किसान अपनी उपज बेचने आते हैं, लेकिन उन्हें बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। किसानों के लिए बनाई गई कई व्यवस्थाएं सिर्फ कागजों तक सीमित हैं। मंडी में इन दिनों सौंफ और गेहूं की आवक बढ़ने लगी है। सैकड़ों किसान अपनी उपज लेकर शनिवार शाम से ही परिसर में पहुंच जाते हैं ताकि अगले दिन बोली लग सके। हालांकि, उनके लिए न तो भोजन की व्यवस्था है और न ही पीने के लिए ठंडा पानी। किसानों को भोजन और नाश्ते के लिए एक किलोमीटर दूर शहर जाना पड़ता है। गर्मी शुरू होने के बावजूद मंडी परिसर में टंकी से गर्म पानी ही मिल रहा है। किसानों के आराम के लिए बना कृषक विश्राम भवन अधिकतर समय बंद रहता है। मजबूरन किसानों को मंडी परिसर में ही रात गुजारनी पड़ती है। परिसर में बने शौचालयों की स्थिति भी बेहद खराब है। साफ-सफाई के अभाव में वहां गंदगी फैली है, जिसके कारण कई किसानों को खुले में शौच के लिए जाना पड़ रहा है। धार जिले के बाग टांडा के पास ग्राम भमोरी निवासी किसान जगदीश ने बताया कि वे सुबह चार बजे आए थे और उनके साथ करीब 20 से ज्यादा किसान शनिवार शाम को ही सौंफ लेकर मंडी पहुंचे थे। रहने की कोई व्यवस्था नहीं होने से उन्हें मंडी परिसर में ही सोना पड़ा। उन्होंने पीने के पानी की व्यवस्था न होने और मंडी प्रशासन द्वारा सुनवाई न करने की शिकायत की। धार जिले के टांडा निवासी जितेंद्र ने शौचालयों में गंदगी और खुले में शौच जाने की मजबूरी बताई। उन्होंने भोजन और रहने की व्यवस्था न होने को मंडी की बड़ी लापरवाही करार दिया। किसान करम सिंह ने भी मंडी में टंकी का गर्म पानी पीने और सफाई व्यवस्था की कमी पर चिंता जताई। किसानों ने बताया कि बड़वानी प्रदेश की एकमात्र दर्जा प्राप्त सौंफ मंडी है, जहां धार, अलीराजपुर, खरगोन और खण्डवा सहित आसपास से किसान सौंफ बेचने आते हैं. यहां बड़े बड़े व्यापारी खरीदी करते हैं। मंडी में रविवार को सौंफ की बंपर आवक हुई, लेकिन 170 से 200 रुपये की जगह में 60 से 120 रुपये तक ही भाव दिया जा रहा है।

More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
  • (​सेंधवा) बड़वानी, 29 मार्च 2026। निमाड़ दस्तक न्यूज़ (ब्यूरो रिपोर्ट) ✍️ . ​बड़वानी जिले के हज यात्रियों के लिए आगामी 04 अप्रैल 2026 को सेंधवा में एक विशेष 'हज ओरिएंटेशन ट्रेनिंग प्रोग्राम' का आयोजन किया जाएगा। यह कार्यक्रम सुबह 10 बजे से स्थानीय मेकेनिक नगर स्थित गौसिया मस्जिद में संपन्न होगा। ​🕋 प्रशिक्षण में दी जाएगी यात्रा की बारीकियां ​जिला हज कमेटी के अध्यक्ष श्री आदिल तिगाले ने जानकारी देते हुए बताया कि इस वर्ष हज कमेटी और प्राइवेट टूर से जाने वाले सभी हाजियों के लिए यह प्रशिक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण है। हज कमेटी द्वारा नियुक्त ट्रेनर हाजी जाबिर खान द्वारा हाजियों को हज, उमराह, मदीना यात्रा, हज हाउस की प्रक्रिया और एयरपोर्ट पर होने वाली सभी आवश्यक औपचारिकताओं की विस्तृत जानकारी दी जाएगी। ​📝 हाजियों के लिए आवश्यक निर्देश ​आयोजन समिति ने स्पष्ट किया है कि सभी हज यात्रियों की उपस्थिति अनिवार्य है। हाजियों को अपने साथ निम्नलिखित दस्तावेजों की फोटोकॉपी का एक सेट साथ लाना होगा: ​एक पासपोर्ट साइज फोटो ​पासपोर्ट की फोटोकॉपी ​वैक्सीन सर्टिफिकेट ​अन्य आवश्यक यात्रा दस्तावेज ​प्रशिक्षण स्थल पर स्थानीय जिम्मेदारों द्वारा हाजियों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई है। साथ ही, सभी प्रतिभागियों को मेडिकल डायरी और मेडिकल किट (दवाइयां) भी उपलब्ध कराई जाएगी। ​👥 गरिमामयी उपस्थिति ​कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला हज कमेटी बड़वानी के जिला अध्यक्ष श्री आदिल तिगाले करेंगे। कार्यक्रम में जिला मुस्लिम कमेटी के जिला सदर श्री इदरीस खान मुख्य अतिथि के रूप में, और श्री अब्दुल रशीद पटेल सरपरस्त के रूप में शामिल होंगे। इसके अलावा हाजी अब्दुल रहीम तिगाले, हाजी असलम शेख, हाजी गफ्फार खत्री, समाजसेवी अब्दुल सादिक चंदेरी, आरिफ अहमद शेख, इक़रा डॉ. हाजी सफी एवं समीर आशना सहित अनेक विशिष्ट अतिथि अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे।
    1
    (​सेंधवा) बड़वानी, 29 मार्च 2026। निमाड़ दस्तक न्यूज़ (ब्यूरो रिपोर्ट) ✍️
.
​बड़वानी जिले के हज यात्रियों के लिए आगामी 04 अप्रैल 2026 को सेंधवा में एक विशेष 'हज ओरिएंटेशन ट्रेनिंग प्रोग्राम' का आयोजन किया जाएगा। यह कार्यक्रम सुबह 10 बजे से स्थानीय मेकेनिक नगर स्थित गौसिया मस्जिद में संपन्न होगा।
​🕋 प्रशिक्षण में दी जाएगी यात्रा की बारीकियां
​जिला हज कमेटी के अध्यक्ष श्री आदिल तिगाले ने जानकारी देते हुए बताया कि इस वर्ष हज कमेटी और प्राइवेट टूर से जाने वाले सभी हाजियों के लिए यह प्रशिक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण है। हज कमेटी द्वारा नियुक्त ट्रेनर हाजी जाबिर खान द्वारा हाजियों को हज, उमराह, मदीना यात्रा, हज हाउस की प्रक्रिया और एयरपोर्ट पर होने वाली सभी आवश्यक औपचारिकताओं की विस्तृत जानकारी दी जाएगी।
​📝 हाजियों के लिए आवश्यक निर्देश
​आयोजन समिति ने स्पष्ट किया है कि सभी हज यात्रियों की उपस्थिति अनिवार्य है। हाजियों को अपने साथ निम्नलिखित दस्तावेजों की फोटोकॉपी का एक सेट साथ लाना होगा:
​एक पासपोर्ट साइज फोटो
​पासपोर्ट की फोटोकॉपी
​वैक्सीन सर्टिफिकेट
​अन्य आवश्यक यात्रा दस्तावेज
​प्रशिक्षण स्थल पर स्थानीय जिम्मेदारों द्वारा हाजियों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई है। साथ ही, सभी प्रतिभागियों को मेडिकल डायरी और मेडिकल किट (दवाइयां) भी उपलब्ध कराई जाएगी।
​👥 गरिमामयी उपस्थिति
​कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला हज कमेटी बड़वानी के जिला अध्यक्ष श्री आदिल तिगाले करेंगे। कार्यक्रम में जिला मुस्लिम कमेटी के जिला सदर श्री इदरीस खान मुख्य अतिथि के रूप में, और श्री अब्दुल रशीद पटेल सरपरस्त के रूप में शामिल होंगे। इसके अलावा हाजी अब्दुल रहीम तिगाले, हाजी असलम शेख, हाजी गफ्फार खत्री, समाजसेवी अब्दुल सादिक चंदेरी, आरिफ अहमद शेख, इक़रा डॉ. हाजी सफी एवं समीर आशना सहित अनेक विशिष्ट अतिथि अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे।
    user_Asif memon patrakar
    Asif memon patrakar
    Local News Reporter बड़वानी, बड़वानी, मध्य प्रदेश•
    11 hrs ago
  • बड़वानी। मुख्यमंत्री तीर्थ योजना के तहत आए यात्रियों को अव्यवस्थाओं के कारण पूरी रात परेशानियों के बीच बितानी पड़ी। पानसेमल से बड़ी संख्या में पहुंचे यात्रियों ने आरोप लगाया कि उन्हें बड़वानी नगर पालिका परिसर के बाहर ही रुकना पड़ा, जहां न तो सोने की समुचित व्यवस्था थी और न ही भोजन व पीने के पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। पानसेमल निवासी नारायण ने बताया कि वे योजना के तहत यहां पहुंचे, लेकिन उन्हें खुले में रात गुजारनी पड़ी। उन्होंने कहा कि “यहां ना खाने की व्यवस्था है, ना पानी की और ना ही सोने की सुविधा। गर्मी में भी कोई ध्यान नहीं दे रहा, जिससे बात करो वही भगा देता है।” वहीं राजेंद्र गुप्ता ने बताया कि उनका नाम सूची में 153 नंबर पर होने के बावजूद उन्हें मौके पर वापस जाने के लिए कहा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि “हम अपने खर्चे से यहां आए हैं, लेकिन यहां न बैठने की व्यवस्था है, न पानी और न ही भोजन की सुविधा। केवल महिलाओं के लिए एक कमरा दिया गया है, बाकी लोगों के लिए कोई इंतजाम नहीं है।” यात्रियों ने यह भी बताया कि अधिकारियों से संपर्क करने पर सिर्फ आश्वासन ही मिला। एसडीएम से बात करने पर भी “व्यवस्था हो जाएगी” कहकर टाल दिया गया, लेकिन देर रात तक कोई ठोस इंतजाम नहीं किया गया। कुछ यात्रियों ने यह भी आरोप लगाया कि एक बुजुर्ग के साथ रहने वाले व्यक्ति को भी साथ ले जाने की अनुमति नहीं दी जा रही, जो मानवीय दृष्टिकोण से गलत है। स्थिति तब बदली जब मीडिया मौके पर पहुंची। मीडिया के पहुंचते ही प्रशासन सक्रिय हुआ और यात्रियों के लिए ठहरने, पानी और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था शुरू की गई, जिससे कुछ हद तक राहत मिली। इधर डिप्टी कलेक्टर शक्ति सिंह चौहान ने बताया कि ऊपर से मिले निर्देशों के अनुसार व्यवस्थाएं की गई हैं। वहीं जब नगर पालिका में बंद पड़े पंखों को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने इस संबंध में नगर पालिका से बात करने की बात कही।
    1
    बड़वानी। मुख्यमंत्री तीर्थ योजना के तहत आए यात्रियों को अव्यवस्थाओं के कारण पूरी रात परेशानियों के बीच बितानी पड़ी। पानसेमल से बड़ी संख्या में पहुंचे यात्रियों ने आरोप लगाया कि उन्हें बड़वानी नगर पालिका परिसर के बाहर ही रुकना पड़ा, जहां न तो सोने की समुचित व्यवस्था थी और न ही भोजन व पीने के पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।
पानसेमल निवासी नारायण ने बताया कि वे योजना के तहत यहां पहुंचे, लेकिन उन्हें खुले में रात गुजारनी पड़ी। उन्होंने कहा कि “यहां ना खाने की व्यवस्था है, ना पानी की और ना ही सोने की सुविधा। गर्मी में भी कोई ध्यान नहीं दे रहा, जिससे बात करो वही भगा देता है।”
वहीं राजेंद्र गुप्ता ने बताया कि उनका नाम सूची में 153 नंबर पर होने के बावजूद उन्हें मौके पर वापस जाने के लिए कहा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि “हम अपने खर्चे से यहां आए हैं, लेकिन यहां न बैठने की व्यवस्था है, न पानी और न ही भोजन की सुविधा। केवल महिलाओं के लिए एक कमरा दिया गया है, बाकी लोगों के लिए कोई इंतजाम नहीं है।”
यात्रियों ने यह भी बताया कि अधिकारियों से संपर्क करने पर सिर्फ आश्वासन ही मिला। एसडीएम से बात करने पर भी “व्यवस्था हो जाएगी” कहकर टाल दिया गया, लेकिन देर रात तक कोई ठोस इंतजाम नहीं किया गया। कुछ यात्रियों ने यह भी आरोप लगाया कि एक बुजुर्ग के साथ रहने वाले व्यक्ति को भी साथ ले जाने की अनुमति नहीं दी जा रही, जो मानवीय दृष्टिकोण से गलत है।
स्थिति तब बदली जब मीडिया मौके पर पहुंची। मीडिया के पहुंचते ही प्रशासन सक्रिय हुआ और यात्रियों के लिए ठहरने, पानी और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था शुरू की गई, जिससे कुछ हद तक राहत मिली।
इधर डिप्टी कलेक्टर शक्ति सिंह चौहान ने बताया कि ऊपर से मिले निर्देशों के अनुसार व्यवस्थाएं की गई हैं। वहीं जब नगर पालिका में बंद पड़े पंखों को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने इस संबंध में नगर पालिका से बात करने की बात कही।
    user_पत्रकार आदित्य शर्मा बड़वानी
    पत्रकार आदित्य शर्मा बड़वानी
    पत्रकार बड़वानी, बड़वानी, मध्य प्रदेश•
    12 hrs ago
  • Post by Lucky Gole (Aditya)
    1
    Post by Lucky Gole (Aditya)
    user_Lucky Gole (Aditya)
    Lucky Gole (Aditya)
    Media and information sciences faculty पाटी, बड़वानी, मध्य प्रदेश•
    17 hrs ago
  • नगरीय क्षेत्र होने के बाबजूद ग्रामीण क्षेत्र की एजेंसी होने से 25 दिन के बजाय 45 दिन में हो रही है गैस टँकी की बुकिंग, नगरवासियों में भय का माहौल जल्द निराकरण नही हुआ तो बिगड़ेगी स्थिति* (सुनील सोनी स्वतंत्र पत्रकार) निवाली 29 मार्च रविवार बड़वानी जिले के निवाली नगर में गैस की बनी थी ग्राम पंचायत थी जिससे ग्रामीण एेसी के नियमों के तहत् 45 दिन में हो रही है अब 4 वर्ष पहले नगर पंचायत बन जाने से नगरीय क्षेत्र हो जाने से 25 दिन में बुकींग होना चाहिये ग्रामीण और नगरीय क्षेत्र का अंतर के कारण नगर वासी अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहे हैं जबकी इस ओर गैस कंपनी ने ध्यान देकर ग्रामीण एजेंसी को नगरीय एजेंसी में बदलना था इस अंतर से यह न ई समस्या खड़ी हो गई है इस समस्या के चलते बुकिंग को लेकर नगरवासियों को काफी मशक्कत करना पड़ रही है यू कहने को तो निवाली नगर परिषद के चलते शहरी क्षेत्र में आने लग गया है लेकिन निवाली नगर की भारत गैस एजेंसी ग्रामीण वितरक में आ रही है जिसमे कुल 12 हजार से अधिक गेस कनेक्शनधारी है वही शासन के दिशा निर्देश के चलते अब बुकिंग 25 के बजाय 45 से पहले नही हो पा रही है वही नगर में ज्यादातर सयुक्त परिवार (8 से 10 व्यक्ति) रहते है जिनमे उनकी घरेलू गैस टँकी 20 से 25 दिन ही चल पाती है ऐसे में अगर समय पर गैस टँकी की बुकिंग नही हुई तो स्थित बिगड़ सकती है जिससे स्थिति भयानक हो सकती है वही इस सम्बंध में हमारे विशेष संवाददाता सुनील सोनी द्वारा JSO, DSO, डिपो प्रभारी राहुल चंदेल सहित अन्य अधिकारियों से चर्चा की गई लेकिन अभी तक कोई हल नही निकल पाया अब देखना ये है कि आने वाले समय मे स्थिति में सुधार होता है या ओर विकट परिस्थिति हो सकती है समस्या का शीघ्र निराकरण करने की मांग भारत गैस कंपनी से करने की मांग नगरवासियों ने की है नगरवासियों का यह भी कहना है कि पंचायत से नगरीय क्षेत्र में आने के बाद गैस एजेंसी संचालक को भी इस ओर ध्यान देना चाहीये था और अपनी एजेंसी को ग्रामीण से नगरीय योजना में परवर्तित करवाना चाहीये था
    4
    नगरीय क्षेत्र होने के बाबजूद ग्रामीण क्षेत्र की एजेंसी होने से 25 दिन के बजाय 45 दिन में हो रही है गैस टँकी की बुकिंग, नगरवासियों में भय का माहौल जल्द निराकरण नही हुआ तो बिगड़ेगी स्थिति*
(सुनील सोनी स्वतंत्र पत्रकार) 
निवाली 29 मार्च रविवार बड़वानी जिले के निवाली नगर में गैस की बनी थी ग्राम पंचायत थी जिससे ग्रामीण एेसी के नियमों के तहत् 45 दिन में हो रही है अब 4 वर्ष पहले नगर पंचायत बन जाने से नगरीय क्षेत्र हो जाने से 25 दिन में बुकींग होना चाहिये ग्रामीण और नगरीय क्षेत्र का अंतर के कारण  नगर वासी अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहे हैं जबकी इस ओर गैस कंपनी ने ध्यान देकर ग्रामीण एजेंसी को नगरीय एजेंसी में बदलना था इस अंतर से यह न ई समस्या खड़ी हो गई है इस समस्या के चलते बुकिंग को लेकर नगरवासियों को काफी मशक्कत करना पड़ रही है यू कहने को तो निवाली नगर परिषद के चलते शहरी क्षेत्र में आने लग गया है लेकिन निवाली नगर की भारत गैस एजेंसी ग्रामीण वितरक में आ रही है जिसमे कुल 12 हजार से अधिक गेस कनेक्शनधारी है वही शासन के दिशा निर्देश के चलते अब बुकिंग 25 के बजाय 45 से पहले नही हो पा रही है वही नगर में ज्यादातर सयुक्त परिवार (8 से 10 व्यक्ति) रहते है जिनमे उनकी घरेलू गैस टँकी 20 से 25 दिन ही चल पाती है ऐसे में अगर समय पर गैस टँकी की बुकिंग नही हुई तो स्थित बिगड़ सकती है जिससे स्थिति भयानक हो सकती है वही इस सम्बंध में हमारे विशेष संवाददाता सुनील सोनी   द्वारा JSO, DSO, डिपो प्रभारी राहुल चंदेल सहित अन्य अधिकारियों से चर्चा की गई लेकिन अभी तक कोई हल नही निकल पाया अब देखना ये है कि आने वाले समय मे स्थिति में सुधार होता है या ओर विकट परिस्थिति हो सकती है समस्या का शीघ्र निराकरण करने की मांग भारत गैस कंपनी से करने की मांग नगरवासियों ने की है
नगरवासियों का यह भी कहना है कि पंचायत से नगरीय क्षेत्र में आने के बाद गैस एजेंसी संचालक को भी इस ओर ध्यान देना चाहीये था और अपनी एजेंसी को ग्रामीण से नगरीय योजना में परवर्तित करवाना चाहीये था
    user_Sunil Soni
    Sunil Soni
    Niwali, Barwani•
    12 hrs ago
  • *चित्रकूट- धारकुण्डी आश्रम मार्ग में सड़क किनारे बैठा दिखा तेंदुआ, आश्रम के संत ने वीडियो में किया कैद।*
    1
    *चित्रकूट- धारकुण्डी आश्रम मार्ग  में सड़क किनारे बैठा दिखा तेंदुआ, आश्रम के संत ने वीडियो में किया कैद।*
    user_Shiv Singh rajput dahiya journalist MP
    Shiv Singh rajput dahiya journalist MP
    Court reporter Segaon, Khargone•
    10 hrs ago
  • रविवार शाम करीब साढ़े चार बजे सेंधवा सहित आसपास के क्षेत्रों में चमक धमक के साथ तेज बारिश का दौर शुरू हुआ, एक तरफ जहां भीषण गर्मी में बारिश ने मौसम में ठंडक घोली वही दूसरी और किसानों की चिंताएं दुगनी कर दी हैं
    1
    रविवार शाम करीब साढ़े चार बजे सेंधवा सहित आसपास के क्षेत्रों में चमक धमक के साथ तेज बारिश का दौर शुरू हुआ, एक तरफ जहां भीषण गर्मी में बारिश ने मौसम में ठंडक घोली वही दूसरी और किसानों की चिंताएं दुगनी कर दी हैं
    user_Panth bhatia
    Panth bhatia
    Sendhwa, Barwani•
    15 hrs ago
  • *​आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का बड़ा फैसला: 1 अप्रैल से 'पोषण ट्रैकर' ऐप का बहिष्कार, अब केवल ऑफलाइन होगा काम* *मुस्तकीम मुगल* ​आलीराजपुर /प्रदेश: देश की लाखों आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। अखिल भारतीय आंगनवाड़ी कार्यकर्ता महासंघ के राष्ट्रीय आह्वान पर, आगामी 1 अप्रैल से देशभर के सभी जिलों में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने 'पोषण ट्रैकर' ऐप पर काम पूरी तरह बंद करने का निर्णय लिया है। *​सेवाएं जारी रहेंगी, पर डिजिटल माध्यम से नहीं* ​कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि वे काम बंद नहीं कर रही हैं, बल्कि 'संपर्क ऐप' और 'ऑफलाइन' माध्यम से अपनी सेवाएं देंगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गांव की महिलाओं और बच्चों को आंगनवाड़ी की योजनाओं और प्रदेश सरकार के लाभ मिलते रहें, लेकिन केंद्र के डिजिटल पोर्टल पर कोई डेटा दर्ज नहीं किया जाएगा। *​प्रमुख मांगें और आक्रोश* ​प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य मंजुला लोहार ने सरकार की नीतियों पर कड़े सवाल उठाते हुए कार्यकर्ताओं का पक्ष रखा: *1.​नियमितीकरण की मांग:* पिछले 50 वर्षों से आंगनवाड़ी कार्यकर्ता केवल अल्प 'मानदेय' पर काम कर रही हैं। मांग है कि उन्हें अन्य सरकारी कर्मचारियों की तरह नियमित किया जाए और सभी सरकारी सुविधाएं दी जाएं। *​2018 के बाद से कोई बढ़ोतरी नहीं:* केंद्र सरकार ने आखिरी बार 2018 में मानदेय बढ़ाया था। तब से आज तक महंगाई आसमान छू रही है, लेकिन कार्यकर्ताओं की सुध लेने वाला कोई नहीं है। *3.​अन्य विभागों का काम:* आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से केवल अपने विभाग का ही नहीं, बल्कि अन्य सरकारी विभागों के सर्वे और ड्यूटी भी करवाई जाती है। *​"सरकार कर रही है सौतेला व्यवहार"* — *मंजुला लोहार* ​मंजुला लोहार ने तीखे शब्दों में कहा कि सरकार कार्यकर्ताओं के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। उन्होंने तर्क दिया: ​"जब सरकार हमसे हर विभाग का पूरा काम ले रही है, तो हमें 'कर्मचारी' का दर्जा देने में इतनी देरी क्यों? मानदेय के नाम पर यह शोषण अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हम काम बराबर कर रहे हैं, तो अधिकार भी बराबर चाहिए।" *​क्या होगा असर?* ​1 अप्रैल से पोषण ट्रैकर ऐप बंद होने से केंद्र सरकार की डिजिटल मॉनिटरिंग पूरी तरह ठप हो सकती है। महासंघ का यह कदम सरकार पर दबाव बनाने की एक सोची-समझी रणनीति है ताकि 50 वर्षों से लंबित मांगों पर ठोस निर्णय लिया जा सके। ​अब गेंद सरकार के पाले में है—क्या वह 'डिजिटल इंडिया' का सपना देखने वाली इन जमीनी कार्यकर्ताओं की सुध लेगी या यह आंदोलन और उग्र होगा?
    1
    *​आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का बड़ा फैसला: 1 अप्रैल से 'पोषण ट्रैकर' ऐप का बहिष्कार, अब केवल ऑफलाइन होगा काम*
*मुस्तकीम मुगल*
​आलीराजपुर /प्रदेश: देश की लाखों आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। अखिल भारतीय आंगनवाड़ी कार्यकर्ता महासंघ के राष्ट्रीय आह्वान पर, आगामी 1 अप्रैल से देशभर के सभी जिलों में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने 'पोषण ट्रैकर' ऐप पर काम पूरी तरह बंद करने का निर्णय लिया है।
*​सेवाएं जारी रहेंगी, पर डिजिटल माध्यम से नहीं*
​कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि वे काम बंद नहीं कर रही हैं, बल्कि 'संपर्क ऐप' और 'ऑफलाइन' माध्यम से अपनी सेवाएं देंगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गांव की महिलाओं और बच्चों को आंगनवाड़ी की योजनाओं और प्रदेश सरकार के लाभ मिलते रहें, लेकिन केंद्र के डिजिटल पोर्टल पर कोई डेटा दर्ज नहीं किया जाएगा।
*​प्रमुख मांगें और आक्रोश*
​प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य मंजुला लोहार ने सरकार की नीतियों पर कड़े सवाल उठाते हुए कार्यकर्ताओं का पक्ष रखा:
*1.​नियमितीकरण की मांग:* 
पिछले 50 वर्षों से आंगनवाड़ी कार्यकर्ता केवल अल्प 'मानदेय' पर काम कर रही हैं। मांग है कि उन्हें अन्य सरकारी कर्मचारियों की तरह नियमित किया जाए और सभी सरकारी सुविधाएं दी जाएं।
*​2018 के बाद से कोई बढ़ोतरी नहीं:* 
केंद्र सरकार ने आखिरी बार 2018 में मानदेय बढ़ाया था। तब से आज तक महंगाई आसमान छू रही है, लेकिन कार्यकर्ताओं की सुध लेने वाला कोई नहीं है।
*3.​अन्य विभागों का काम:* 
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से केवल अपने विभाग का ही नहीं, बल्कि अन्य सरकारी विभागों के सर्वे और ड्यूटी भी करवाई जाती है।
*​"सरकार कर रही है सौतेला व्यवहार"* — *मंजुला लोहार*
​मंजुला लोहार ने तीखे शब्दों में कहा कि सरकार कार्यकर्ताओं के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। उन्होंने तर्क दिया:
​"जब सरकार हमसे हर विभाग का पूरा काम ले रही है, तो हमें 'कर्मचारी' का दर्जा देने में इतनी देरी क्यों? मानदेय के नाम पर यह शोषण अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हम काम बराबर कर रहे हैं, तो अधिकार भी बराबर चाहिए।"
*​क्या होगा असर?*
​1 अप्रैल से पोषण ट्रैकर ऐप बंद होने से केंद्र सरकार की डिजिटल मॉनिटरिंग पूरी तरह ठप हो सकती है। महासंघ का यह कदम सरकार पर दबाव बनाने की एक सोची-समझी रणनीति है ताकि 50 वर्षों से लंबित मांगों पर ठोस निर्णय लिया जा सके।
​अब गेंद सरकार के पाले में है—क्या वह 'डिजिटल इंडिया' का सपना देखने वाली इन जमीनी कार्यकर्ताओं की सुध लेगी या यह आंदोलन और उग्र होगा?
    user_आलीराजपुर समाचार
    आलीराजपुर समाचार
    Local News Reporter अलीराजपुर, अलीराजपुर, मध्य प्रदेश•
    17 hrs ago
  • बड़वानी के राजघाट रोड स्थित कृषि उपज मंडी इन दिनों अव्यवस्थाओं से घिरी है। यहां क्षेत्र के साथ-साथ धार, खरगोन, खंडवा, झाबुआ और आलीराजपुर जिलों के सीमावर्ती गांवों से बड़ी संख्या में किसान अपनी उपज बेचने आते हैं, लेकिन उन्हें बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। किसानों के लिए बनाई गई कई व्यवस्थाएं सिर्फ कागजों तक सीमित हैं। मंडी में इन दिनों सौंफ और गेहूं की आवक बढ़ने लगी है। सैकड़ों किसान अपनी उपज लेकर शनिवार शाम से ही परिसर में पहुंच जाते हैं ताकि अगले दिन बोली लग सके। हालांकि, उनके लिए न तो भोजन की व्यवस्था है और न ही पीने के लिए ठंडा पानी। किसानों को भोजन और नाश्ते के लिए एक किलोमीटर दूर शहर जाना पड़ता है। गर्मी शुरू होने के बावजूद मंडी परिसर में टंकी से गर्म पानी ही मिल रहा है। किसानों के आराम के लिए बना कृषक विश्राम भवन अधिकतर समय बंद रहता है। मजबूरन किसानों को मंडी परिसर में ही रात गुजारनी पड़ती है। परिसर में बने शौचालयों की स्थिति भी बेहद खराब है। साफ-सफाई के अभाव में वहां गंदगी फैली है, जिसके कारण कई किसानों को खुले में शौच के लिए जाना पड़ रहा है। धार जिले के बाग टांडा के पास ग्राम भमोरी निवासी किसान जगदीश ने बताया कि वे सुबह चार बजे आए थे और उनके साथ करीब 20 से ज्यादा किसान शनिवार शाम को ही सौंफ लेकर मंडी पहुंचे थे। रहने की कोई व्यवस्था नहीं होने से उन्हें मंडी परिसर में ही सोना पड़ा। उन्होंने पीने के पानी की व्यवस्था न होने और मंडी प्रशासन द्वारा सुनवाई न करने की शिकायत की। धार जिले के टांडा निवासी जितेंद्र ने शौचालयों में गंदगी और खुले में शौच जाने की मजबूरी बताई। उन्होंने भोजन और रहने की व्यवस्था न होने को मंडी की बड़ी लापरवाही करार दिया। किसान करम सिंह ने भी मंडी में टंकी का गर्म पानी पीने और सफाई व्यवस्था की कमी पर चिंता जताई। किसानों ने बताया कि बड़वानी प्रदेश की एकमात्र दर्जा प्राप्त सौंफ मंडी है, जहां धार, अलीराजपुर, खरगोन और खण्डवा सहित आसपास से किसान सौंफ बेचने आते हैं. यहां बड़े बड़े व्यापारी खरीदी करते हैं। मंडी में रविवार को सौंफ की बंपर आवक हुई, लेकिन 170 से 200 रुपये की जगह में 60 से 120 रुपये तक ही भाव दिया जा रहा है।
    1
    बड़वानी के राजघाट रोड स्थित कृषि उपज मंडी इन दिनों अव्यवस्थाओं से घिरी है। यहां क्षेत्र के साथ-साथ धार, खरगोन, खंडवा, झाबुआ और आलीराजपुर जिलों के सीमावर्ती गांवों से बड़ी संख्या में किसान अपनी उपज बेचने आते हैं, लेकिन उन्हें बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। किसानों के लिए बनाई गई कई व्यवस्थाएं सिर्फ कागजों तक सीमित हैं। मंडी में इन दिनों सौंफ और गेहूं की आवक बढ़ने लगी है। सैकड़ों किसान अपनी उपज लेकर शनिवार शाम से ही परिसर में पहुंच जाते हैं ताकि अगले दिन बोली लग सके। हालांकि, उनके लिए न तो भोजन की व्यवस्था है और न ही पीने के लिए ठंडा पानी। किसानों को भोजन और नाश्ते के लिए एक किलोमीटर दूर शहर जाना पड़ता है। गर्मी शुरू होने के बावजूद मंडी परिसर में टंकी से गर्म पानी ही मिल रहा है। किसानों के आराम के लिए बना कृषक विश्राम भवन अधिकतर समय बंद रहता है। मजबूरन किसानों को मंडी परिसर में ही रात गुजारनी पड़ती है। परिसर में बने शौचालयों की स्थिति भी बेहद खराब है। साफ-सफाई के अभाव में वहां गंदगी फैली है, जिसके कारण कई किसानों को खुले में शौच के लिए जाना पड़ रहा है। धार जिले के बाग टांडा के पास ग्राम भमोरी निवासी किसान जगदीश ने बताया कि वे सुबह चार बजे आए थे और उनके साथ करीब 20 से ज्यादा किसान शनिवार शाम को ही सौंफ लेकर मंडी पहुंचे थे। रहने की कोई व्यवस्था नहीं होने से उन्हें मंडी परिसर में ही सोना पड़ा। उन्होंने पीने के पानी की व्यवस्था न होने और मंडी प्रशासन द्वारा सुनवाई न करने की शिकायत की। धार जिले के टांडा निवासी जितेंद्र ने शौचालयों में गंदगी और खुले में शौच जाने की मजबूरी बताई। उन्होंने भोजन और रहने की व्यवस्था न होने को मंडी की बड़ी लापरवाही करार दिया। किसान करम सिंह ने भी मंडी में टंकी का गर्म पानी पीने और सफाई व्यवस्था की कमी पर चिंता जताई। किसानों ने बताया कि बड़वानी  प्रदेश की एकमात्र दर्जा प्राप्त सौंफ मंडी है, जहां धार, अलीराजपुर, खरगोन और खण्डवा सहित आसपास से किसान सौंफ बेचने आते हैं. यहां बड़े बड़े व्यापारी खरीदी करते हैं। मंडी में रविवार को सौंफ की बंपर आवक हुई, लेकिन 170 से 200 रुपये की जगह में 60 से 120 रुपये तक ही भाव दिया जा रहा है।
    user_पत्रकार आदित्य शर्मा बड़वानी
    पत्रकार आदित्य शर्मा बड़वानी
    पत्रकार बड़वानी, बड़वानी, मध्य प्रदेश•
    12 hrs ago
View latest news on Shuru App
Download_Android
  • Terms & Conditions
  • Career
  • Privacy Policy
  • Blogs
Shuru, a product of Close App Private Limited.