राज्य कैबिनेट द्वारा पोलपोल में जयगीर एवं कुजरूम ग्राम के पुनर्वासितों को रैयती भूमि प्रदान किये जाने की स्वीकृति। लातेहार जिले में अवस्थित पलामू टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में बसे गाँव जयगीर एवं कुजरूम के ग्रामीणों के पुनर्वास के उपरांत पलामू के पोलपोल में रैयती भूमि प्रदान करने की स्वीकृति राज्य कैबिनेट द्वारा दी गई है। 25 अगस्त को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह निर्णय लिया गया। गारू प्रखंड़ के 3000 फीट से अधिक ऊंचाई पर बसे जयगीर गांव के ग्रामीणों को तथा बूढ़ा पहाड़ के समीप स्थित कुजरूम गांव के परिवारों को पीटी0आर प्रबंधन द्वारा वर्ष 2024 में पोलपोल में बसाया गया। पुनर्वास के उपरांत विभाग एवं ग्रामीणों के सम्मिलित प्रयास से पक्के घरों का निर्माण किया गया। ग्रामीणों को बिजली, पानी आदि बुनियादी सुविधाएं दी गई। नए स्थल पर ग्रामीणों द्वारा कृषि कार्य भी प्रारंभ कर दिया गया है। डिप्टी डायरेक्टर, कुमार आशीष द्वारा बताया गया कि पुनर्वास के लिए ऐसे गांव को चुना गया जहाँ बुनियादी सुविधाओं का अभाव था। जयगीर के ग्रामीणों को छोटी-छोटी आवश्यकताओं के लिए पहाड़ पर 2 घंटे की चढ़ाई पैदल करनी पड़ती थी। इसी प्रकार कुजरूम के ग्रामीणों को बारेसॉढ़ से घने जंगलों के बीच कच्ची सड़क से 16 कि0मी0 की लम्बी यात्रा करनी होती थी। गांव में सड़क, बिजली आदि बुनियादी सुविधाएं मौजूद नहीं थी। शिक्षा और स्वास्थ्य की सुविधाएं ग्रामीणों को नहीं मिल रही थी। वर्ष 2019 में कुजरूम तथा 2023 में जयगीर के ग्रामीणों को पुनर्वास योजना की जानकारी दी गई। ग्रामीणों की सहमति प्राप्त होने के बाद प्रस्ताव राज्य सरकार एवं केन्द्र सरकार को भेजा गया। वर्ष 2024 में ग्रामीणों को पोलपोल में बसाया गया। पुनर्वास स्थल डालटनगंज-राँची राष्ट्रीय राज्यमार्ग तथा दुबियाखाड़-बेतला- महुआडांड़ राज्यपथ पर स्थित है। केचकी रेलवे स्टेशन की दूरी लगभग 2 कि0मी0 है। डालटनगंज के समीप होने से ग्रामीणों को शिक्षा-स्वास्थ्य की समुचित सुविधा उपलबध है। उनके द्वारा यह भी बताया गया कि शुरुआत में ग्रामीणों को विभाग पर पूर्ण विश्वास नहीं था। कुछ लोगों द्वारा अफवाह फैलाया जा रहा था। कई वर्षों के मेहनत के बाद ग्रामीणों को भरोसा हुआ। पुनर्वास की योजना पूर्ण रूप से स्वैच्छिक है एवं ग्रामीण अपनी इच्छा से इस योजना का लाभ ले सकते हैं। कुजरूम के ग्राम प्रधान लल्लु उरांव द्वारा बताया गया कि ग्रामीणों के बीच हर्षोल्लास का माहौल है। कुजरूम वनग्राम है। वहाँ के सभी ग्रामीण भूमिहीन हैं। वर्ष 1980 से ही हमें पुनर्वास के बारे में जानकारी दी जा रही थी, परन्तु 2019 में श्री कुमार आशीष के डिप्टी डायरेक्टर बनने के बाद यह प्रक्रिया प्रारंभ हुई। हमें खुशी है कि हम लोग भूमिहीन पैदा हुए थे, परन्तु अपनी आने वाली पीढ़ी के लिए इतनी रैयती भूमि छोड़कर जाएंगे जो आम आदमी के सोच से बाहर है। श्री लल्लु उरॉव द्वारा इसके लिए माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन एवं श्री कुमार आशीष, डिप्टी डायरेक्टर, पी0टी0आर0 को जोहार व्यक्त किया गया। कुजरूम के श्रीमती अनुपा देवी ने बताया कि शुरुआत में थोड़ा भय भी था कि पैसा मिलेगा या नहीं रैयती भूमि मिलेगा या नहीं पर डिप्टी डायरेक्टर, कुमार आशीष पिछले 7 वर्ष से हमारे साथ काम कर रहे हैं। उनके द्वारा हमेशा भरोसा दिया गया कि सरकारी प्रक्रिया में थोड़ा विलंब होता है, परन्तु एक दिन हम अपनी जमीन के मालिक बनेंगे। अपनी आने वाली पीढ़ी के लिए एक बेहतर भविष्य का निर्माण करेंगे। आज हमें खुशी है कि हमलोगों ने उन पर भरोसा किया। जयगीर के श्री सुरेन्द्र उरॉव द्वारा बताया गया कि हमने कभी कल्पना नहीं की थी कि हमें एक दिन नया जीवन मिलेगा। पहले छोटी-छोटी जरूरतों की पूर्ति नहीं हो पाती थी। आज हमलोग बेहतर जीवन जी रहे हैं। जयगीर के श्री रैमल वृजिया ने बताया कि पहले जहाँ रह रहे थे वहाँ जमीन की कीमत प्रति एकड़ एक लाख रुपए भी नहीं थी। पोलपोल में जमीन की कीमत 20 लाख प्रति एकड़ से अधिक है। यहाँ हर तरह की सुविधाएं उपलबध हैं। हमलोग वन विभाग का आभार व्यक्त करते हैं। पलामू टाइगर रिजर्व की सीमा में ऐसे कई गाँव बसे हैं जहाँ बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है। कुछ गाँव में बारिस के समय आना-जाना संभव नहीं हो पाता है। आज लोगों की प्राथमिकताएं अलग है। लोग अच्छे स्वास्थ्य की सुविधाएं चाहते हैं। अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए अच्छी शिक्षा की व्यवस्था चाहते हैं। रोजगार के नए अवसर और बेहतर जीवन लोगों की प्राथमिकताएं हैं। ऐसे में पुनर्वास की योजना एक बेहतर विकल्प के रूप में उपलबध है जिसका लाभ ग्रामीण अपनी इच्छा से ले सकते हैं।
राज्य कैबिनेट द्वारा पोलपोल में जयगीर एवं कुजरूम ग्राम के पुनर्वासितों को रैयती भूमि प्रदान किये जाने की स्वीकृति। लातेहार जिले में अवस्थित पलामू टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में बसे गाँव जयगीर एवं कुजरूम के ग्रामीणों के पुनर्वास के उपरांत पलामू के पोलपोल में रैयती भूमि प्रदान करने की स्वीकृति राज्य कैबिनेट द्वारा दी गई है। 25 अगस्त को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह निर्णय लिया गया। गारू प्रखंड़ के 3000 फीट से अधिक ऊंचाई पर बसे जयगीर गांव के ग्रामीणों को तथा बूढ़ा पहाड़ के समीप स्थित कुजरूम गांव के परिवारों को पीटी0आर प्रबंधन द्वारा वर्ष 2024 में पोलपोल में बसाया गया। पुनर्वास के उपरांत विभाग एवं ग्रामीणों के सम्मिलित प्रयास से पक्के घरों का निर्माण किया गया। ग्रामीणों को बिजली, पानी आदि बुनियादी सुविधाएं दी गई। नए स्थल पर ग्रामीणों द्वारा कृषि कार्य भी प्रारंभ कर दिया गया है। डिप्टी डायरेक्टर, कुमार आशीष द्वारा बताया गया कि पुनर्वास के लिए ऐसे गांव को चुना गया जहाँ बुनियादी सुविधाओं का अभाव था। जयगीर के ग्रामीणों को छोटी-छोटी आवश्यकताओं के लिए पहाड़ पर 2 घंटे की चढ़ाई पैदल करनी पड़ती थी। इसी प्रकार कुजरूम के ग्रामीणों को बारेसॉढ़ से घने जंगलों के बीच कच्ची सड़क से 16 कि0मी0 की लम्बी यात्रा करनी होती थी। गांव में सड़क, बिजली आदि बुनियादी सुविधाएं मौजूद नहीं थी। शिक्षा और स्वास्थ्य की सुविधाएं ग्रामीणों को नहीं मिल रही थी। वर्ष 2019 में कुजरूम तथा 2023 में जयगीर के ग्रामीणों को पुनर्वास योजना की जानकारी दी गई। ग्रामीणों की सहमति प्राप्त होने के बाद प्रस्ताव राज्य सरकार एवं केन्द्र सरकार को भेजा गया। वर्ष 2024 में ग्रामीणों को पोलपोल में बसाया गया। पुनर्वास स्थल डालटनगंज-राँची राष्ट्रीय राज्यमार्ग तथा दुबियाखाड़-बेतला- महुआडांड़ राज्यपथ पर स्थित है। केचकी रेलवे स्टेशन की दूरी लगभग 2 कि0मी0 है। डालटनगंज के समीप होने से ग्रामीणों को शिक्षा-स्वास्थ्य की समुचित सुविधा उपलबध है। उनके द्वारा यह भी बताया गया कि शुरुआत में ग्रामीणों को विभाग पर पूर्ण विश्वास नहीं था। कुछ लोगों द्वारा अफवाह फैलाया जा रहा था। कई वर्षों के मेहनत के बाद ग्रामीणों को भरोसा हुआ। पुनर्वास की योजना पूर्ण रूप से स्वैच्छिक है एवं ग्रामीण अपनी इच्छा से इस योजना का लाभ ले सकते हैं। कुजरूम के ग्राम प्रधान लल्लु उरांव द्वारा बताया गया कि ग्रामीणों के बीच हर्षोल्लास का माहौल है। कुजरूम वनग्राम है। वहाँ के सभी ग्रामीण भूमिहीन हैं। वर्ष 1980 से ही हमें पुनर्वास के बारे में जानकारी दी जा रही थी, परन्तु 2019 में श्री कुमार आशीष के डिप्टी डायरेक्टर बनने के बाद यह प्रक्रिया प्रारंभ हुई। हमें खुशी है कि हम लोग भूमिहीन पैदा हुए थे, परन्तु अपनी आने वाली पीढ़ी के लिए इतनी रैयती भूमि छोड़कर जाएंगे जो आम आदमी के सोच से बाहर है। श्री लल्लु उरॉव द्वारा इसके लिए माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन एवं श्री कुमार आशीष, डिप्टी डायरेक्टर, पी0टी0आर0 को जोहार व्यक्त किया गया। कुजरूम के श्रीमती अनुपा देवी ने बताया कि शुरुआत में थोड़ा भय भी था कि पैसा मिलेगा या नहीं रैयती भूमि मिलेगा या नहीं पर डिप्टी डायरेक्टर, कुमार आशीष पिछले 7 वर्ष से हमारे साथ काम कर रहे हैं। उनके द्वारा हमेशा भरोसा दिया गया कि सरकारी प्रक्रिया में थोड़ा विलंब होता है, परन्तु एक दिन हम अपनी जमीन के मालिक बनेंगे। अपनी आने वाली पीढ़ी के लिए एक बेहतर भविष्य का निर्माण करेंगे। आज हमें खुशी है कि हमलोगों ने उन पर भरोसा किया। जयगीर के श्री सुरेन्द्र उरॉव द्वारा बताया गया कि हमने कभी कल्पना नहीं की थी कि हमें एक दिन नया जीवन मिलेगा। पहले छोटी-छोटी जरूरतों की पूर्ति नहीं हो पाती थी। आज हमलोग बेहतर जीवन जी रहे हैं। जयगीर के श्री रैमल वृजिया ने बताया कि पहले जहाँ रह रहे थे वहाँ जमीन की कीमत प्रति एकड़ एक लाख रुपए भी नहीं थी। पोलपोल में जमीन की कीमत 20 लाख प्रति एकड़ से अधिक है। यहाँ हर तरह की सुविधाएं उपलबध हैं। हमलोग वन विभाग का आभार व्यक्त करते हैं। पलामू टाइगर रिजर्व की सीमा में ऐसे कई गाँव बसे हैं जहाँ बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है। कुछ गाँव में बारिस के समय आना-जाना संभव नहीं हो पाता है। आज लोगों की प्राथमिकताएं अलग है। लोग अच्छे स्वास्थ्य की सुविधाएं चाहते हैं। अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए अच्छी शिक्षा की व्यवस्था चाहते हैं। रोजगार के नए अवसर और बेहतर जीवन लोगों की प्राथमिकताएं हैं। ऐसे में पुनर्वास की योजना एक बेहतर विकल्प के रूप में उपलबध है जिसका लाभ ग्रामीण अपनी इच्छा से ले सकते हैं।
- लातेहार: CSC डिजिटल सेंटर लातेहार मजीद रोड सभी ऑनलाइन सेवा उपलब्ध।।1
- जालिम पंचायत की 120-श्रम कार्ड धारी संगठित मजदूर की श्रेणी की महिलाओं को जल्द दिया जाएगा सिलाई एवं कंप्यूटर का प्रशिक्षण। उक्त जानकारी योजना का संचालन कर रही संस्था एसजीआरएस प्राइवेट लिमिटेड के लातेहार समन्वयक अभिषेक ठाकुर ने बुधवार की शाम 6:00 बजे दिया है।वही बताया कि प्रशिक्षण से संबंधित सारे उपकरण सिलाई मशीन एवं कंप्यूटर की व्यवस्था की जा चुकी है। वही बताएं कि यह प्रशिक्षण केंद्र जालिम खुर्द चौक स्थित शत्रुघ्न प्रसाद के आवास में खोला गया है। जहां आगामी सितंबर माह से प्रशिक्षण प्रारंभ हो जाएगा।1
- ईद मिलादुन्नबी कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद वैद्यनाथ राम का संदेश लातेहार ईद मिलादुन्नबी के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को राज्यसभा सांसद वैद्यनाथ राम ने संबोधित किया। उन्होंने पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब की शिक्षाओं को याद करते हुए समाज में शांति, प्रेम, सद्भाव और भाईचारे का संदेश दिया। सांसद ने कहा कि भारत की खूबसूरती उसकी विविधता में एकता है। सभी धर्मों और समुदायों के लोगों को आपसी प्रेम, सम्मान और सौहार्द के साथ मिल-जुलकर रहना चाहिए। उन्होंने सभी को ईद मिलादुन्नबी की हार्दिक शुभकामनाए दी।1
- ईद मिलादुन्नबी कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद बैद्यनाथ राम ने दिया सर्वधर्म समभाव और भाईचारे का संदेश ईद मिलादुन्नबी कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद बैद्यनाथ राम ने दिया सर्वधर्म समभाव और भाईचारे का संदेश लातेहार। अंजुमन इस्लामिया लातेहार के बैनर तले बुधवार को ईद मिलादुन्नबी का कार्यक्रम श्रद्धा और उत्साह के साथ आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अंजुमन इस्लामिया के सदर आफताब आलम और सचिव रिजवान अली ने की। मौके पर सरपरस्त हाजी आशिकल्लाह, शमसुल होदा एवं अलीमुद्दीन कर्मचारी सहित बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे। मंच का संचालन हाफिज बरकत आलम ने किया। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि राज्यसभा सांसद बैद्यनाथ राम शामिल हुए। उनके साथ उनके प्रतिनिधि एवं पुत्र प्रभात कुमार भी मौजूद रहे। इस दौरान अंजुमन के सदर आफताब आलम और सचिव रिजवान अली ने बुके देकर सांसद का स्वागत किया। अपने संबोधन में राज्यसभा सांसद बैद्यनाथ राम ने सर्वधर्म समभाव, आपसी एकता और भाईचारे का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि इस्लाम, ईसाई, सनातन और बौद्ध सहित सभी धर्मों में मानवता, प्रेम, सद्भाव और एकता की भावना का संदेश मिलता है। हमें हजरत मोहम्मद साहब के बताए रास्ते पर चलते हुए देश से प्रेम और एक-दूसरे से मोहब्बत करनी चाहिए। कार्यक्रम में तंजिम ओलमा अहले सुन्नत के वक्ताओं ने हजरत मोहम्मद मुस्तफा की सीरत और उनके संदेशों पर प्रकाश डाला। मुफ्ती मोदस्सीर अमजदी, मौलाना वारिश जमाल, मौलाना रजाउल्लाह और मौलाना परवेज अशरफ ने कहा कि पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब ने पूरी इंसानियत को हिदायत, रहमत, सच्चाई, अमानतदारी और भाईचारे का रास्ता दिखाया। उन्होंने गरीबों, यतीमों और जरूरतमंदों की मदद तथा पड़ोसियों के साथ अच्छे व्यवहार की शिक्षा दी। वक्ताओं ने कहा कि आज जरूरत है कि हम पैगंबर की शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाएं और सच्चाई, अच्छे आचरण, सब्र, माफी एवं इंसानियत को व्यवहार में उतारें। मौके पर हाफिज वसीम, गुलाम जाबिर, महबूब हसन, खुशनूर, मौलाना मकसूद, जावेद खान, शमशाद आलम, अख्तर, अयूब, सरताज, शमशेर, रिजवान खान, लड्डन, सरवर, वारिश, टिंकू, नसीम, नासरुद्दीन, आजाद खान, एहसान अंसारी, विशाल, रशीद साहब सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।3
- मोहम्मद साहब के जन्मदिन के अवसर पर मनिका में निकाली गई जुलूस जुलूस का नेतृत्व मनिका सदर अख्तर अंसारी के द्वारा किया गया1
- जान देंगे, जमीन नहीं देंगे" - NLC के खिलाफ किसानों का ऐलान आशीष कुमार वैद्य लातेहार/झारखंड "जान देंगे, जमीन नहीं देंगे" - NLC के खिलाफ किसानों का ऐलान एंकर -: धाधू कोल ब्लॉक को लेकर बालूमाथ के धाधू, भैंसादोन, नावाडीह, चित्रपुर, हेमपुर, सिमर स्रोत गांवों के किसानों में उबाल है। इन गांवों में ST, SC, OBC परिवार रहते हैं जिनकी आजीविका सिर्फ खेती है। किसानों का आरोप है कि उपजाऊ जमीन को साजिशन बंजर दिखाकर NLC कंपनी कौड़ियों के दाम में हड़पना चाहती है। आज तक गांव में ग्राम सभा नहीं हुई, बिचौलिए चोरी-छुपे आते हैं। किसानों ने कहा - जान देंगे लेकिन जमीन नहीं देंगे और 27 अगस्त की जनसुनवाई का विरोध करेंगे।1
- *प्रशासनिक उदासीनता की भेंट चढ़ा आरा का पुल, ग्रामीण बोले - पुल नहीं बना तो मतदान नहीं करेंगे* *चंदवा, लातेहार* चंदवा प्रखंड अंतर्गत *लाधुप पंचायत के आरा गांव* में पुल की स्थिति पिछले एक साल से बदहाल बनी हुई है। ग्रामीणों के अनुसार, पिछले साल बरसात के मौसम में ही पुल क्षतिग्रस्त हो गया था। पुल टूटने के बाद स्थानीय प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची भी थी, लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी आज तक पुल के जीर्णोद्धार या नए निर्माण को लेकर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। पुल टूटने से ग्रामीणों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, खासकर बरसात के मौसम में स्थिति और भी दयनीय हो जाती है। बच्चों को स्कूल जाने, मरीजों को अस्पताल ले जाने और रोजमर्रा के कामों में ग्रामीणों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। प्रशासन की इस उदासीनता को लेकर ग्रामीणों में काफी नाराजगी है। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि *"अगर जल्द ही पुल का निर्माण नहीं होता है तो आगामी किसी भी चुनाव में हम लोग मतदान नहीं करेंगे।"* ग्रामीणों का यह ऐलान जिला प्रशासन, प्रखंड प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के लिए शर्मसार करने वाला है। एक साल तक एक छोटे से पुल का निर्माण न हो पाना विकास के दावों की पोल खोलता है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से अविलंब पुल निर्माण की मांग की है.4
- बरवाडीह प्रखंड में क्षेत्र में अकीदत एवं उल्लास के साथ मनाया गया बुधवार की सुबह 11:00 से ईद मिलादुन्नबी का त्योहार । इस मौके पर बरवाडीह प्रखंड क्षेत्र के कई इलाकों में गाजे बाजे एवं साथ धूमधाम से जुलूस निकाला गया। इस मौके पर बरवाडीह पुलिस एवं प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पुख्ते इंतजाम रखे गए थे।1