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दो बाइकों के बीच एक जोरदार आमने-सामने की टक्कर में कुल चार लोग घायल हो गए। हादसे में घायल हुए सभी व्यक्ति दोनों बाइकों पर सवार थे।
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दो बाइकों के बीच एक जोरदार आमने-सामने की टक्कर में कुल चार लोग घायल हो गए। हादसे में घायल हुए सभी व्यक्ति दोनों बाइकों पर सवार थे।
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- उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में एक रोडवेज की चलती बस में एक महिला के जेवर चोरी हो गए। इस घटना के बाद पीड़ितों ने सिविल लाइन पुलिस चौकी पहुँचकर प्रभारी से गुहार लगाई है।1
- बांदा में विकास की आड़ में शहर की पहचान बन चुके 80 वर्ष पुराने बरगद, पीपल और नीम के वृक्षों को काटने की तैयारी से जनता में भारी आक्रोश है। पल्हरी रोड पर पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलने की खबर फैलते ही शनिवार को छात्र, समाजसेवी और आम नागरिक घरों से निकलकर सड़कों पर उतर आए। छात्रों ने पेड़ों को बचाने के लिए मानव श्रृंखला बनाई, वहीं आम नागरिकों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्हें 'विकास चाहिए, लेकिन विनाश की कीमत पर नहीं'। नागरिकों ने इस बात पर सवाल उठाया कि जब सड़क पहले से चौड़ी है और नाली व बिजली के खंभों के लिए पर्याप्त जगह मौजूद है, तब इन वृक्षों को आखिर क्यों निशाना बनाया जा रहा है। विरोध प्रदर्शन के दौरान तीखी प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं, जिसमें व्यंग्यात्मक ढंग से कहा गया कि शायद बरगद मुफ्त छाया देने, पीपल वर्षों से ऑक्सीजन बांटने या नीम धरती को मजबूती देने के कारण दोषी ठहराए जा रहे हैं। सबसे बड़ा व्यंग्य तो यह है कि अधिकारी कटान का कोई आदेश न होने की बात कह रहे हैं, जिस पर जनता ने पूछा कि फिर कुल्हाड़ी किसकी अनुमति से चली। वरिष्ठ पूर्व छात्र नेता रितेश त्रिपाठी ने शहर के बढ़ते तापमान पर चिंता जताते हुए पेड़ों को काटना 'आग पर घी डालने जैसा' बताया, और वातानुकूलित कमरों में बैठकर फैसले लेने वालों पर सवाल उठाए जिन्हें 48-50 डिग्री की तपिश महसूस नहीं होती। छात्र नेता अमित यादव और शमशेर यादव ने चेतावनी दी है कि यदि पेड़ों के कटान पर स्थायी रोक नहीं लगाई गई, तो छात्र सड़कों पर उतरकर व्यापक विरोध प्रदर्शन करेंगे। यह चेतावनी सिर्फ प्रशासन को नहीं, बल्कि उस सोच को भी है जो हरियाली को विकास की राह का रोड़ा मानती है। फिलहाल पल्हरी रोड पर पेड़ों के कटान पर अस्थायी रोक लगा दी गई है, लेकिन यह सवाल अभी भी कायम है कि क्या बांदा अपने बरगद बचा पाएगा, या फिर आने वाली पीढ़ियां केवल इतिहास की किताबों में पढ़ेंगी कि यहाँ कभी पेड़ हुआ करते थे। लोगों ने जोर देकर कहा कि पेड़ कटते हैं तो सिर्फ लकड़ी नहीं गिरती, बल्कि एक शहर की सांसें टूटती हैं, एक पीढ़ी की छांव छिनती है, और विकास के नाम पर इंसान अपनी ही कब्र के लिए धूप इकट्ठा करता है। इस दौरान पूरा बांदा कुल्हाड़ी के सामने दीवार बन गया और पल्हरी रोड पर बरगद और पीपल के पक्ष में जनसैलाब उमड़ पड़ा।1
- एक बेहद खौफनाक घटना सामने आई है, जहाँ बहन की शादी की खुशियों के बीच भाई ने खुदकुशी कर ली। यह दुखद घटना परिवार के लिए सदमे का कारण बनी है। बताया गया है कि मौत से ठीक पहले, भाई ने फोन पर किसी से बात करते हुए यह चौंकाने वाली बात कही थी कि "2 घंटे बाद पूरा घर वापस आएगा!" उसकी इस टिप्पणी को खुदकुशी से पहले के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है, जिसने परिवार की खुशियों को मातम में बदल दिया।2
- बहुजन मुक्ति पार्टी के प्रदेश सचिव ने नहर कॉलोनी में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा के बैनर तले आयोजित तीसरे चरण के आंदोलन में हिस्सा लिया। यह आंदोलन गणना प्रक्रिया में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए अलग कॉलम न होने के विरोध में किया गया। इस दौरान 'जय मूलनिवासी', 'जय भारत', 'जय भीम', और 'जय संविधान' जैसे नारों के साथ अपनी मांगों को बुलंद किया गया।2
- एक शादी समारोह में हुई हर्ष फायरिंग के दौरान एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि चार अन्य घायल हो गए।1
- एक युवा लड़का, जो खुद को 'आर्मी कमांडो' मानता है, दौड़ने का अभ्यास करते हुए अपनी देशभक्ति का प्रदर्शन कर रहा है। वह 'जय हिंद' के नारे के साथ अपने उत्साह को व्यक्त करता है। दौड़ने के कारण उसकी सांसें फूल रही हैं, लेकिन वह अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए पूरी तरह से दृढ़ संकल्पित और समर्पित दिखाई देता है।1
- बबेरू में 12वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस बड़े धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर योगाभ्यास का आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय लोगों ने भाग लिया।1
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