बांदा में विकास की आड़ में शहर की पहचान बन चुके 80 वर्ष पुराने बरगद, पीपल और नीम के वृक्षों को काटने की तैयारी से जनता में भारी आक्रोश है। पल्हरी रोड पर पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलने की खबर फैलते ही शनिवार को छात्र, समाजसेवी और आम नागरिक घरों से निकलकर सड़कों पर उतर आए। छात्रों ने पेड़ों को बचाने के लिए मानव श्रृंखला बनाई, वहीं आम नागरिकों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्हें 'विकास चाहिए, लेकिन विनाश की कीमत पर नहीं'। नागरिकों ने इस बात पर सवाल उठाया कि जब सड़क पहले से चौड़ी है और नाली व बिजली के खंभों के लिए पर्याप्त जगह मौजूद है, तब इन वृक्षों को आखिर क्यों निशाना बनाया जा रहा है। विरोध प्रदर्शन के दौरान तीखी प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं, जिसमें व्यंग्यात्मक ढंग से कहा गया कि शायद बरगद मुफ्त छाया देने, पीपल वर्षों से ऑक्सीजन बांटने या नीम धरती को मजबूती देने के कारण दोषी ठहराए जा रहे हैं। सबसे बड़ा व्यंग्य तो यह है कि अधिकारी कटान का कोई आदेश न होने की बात कह रहे हैं, जिस पर जनता ने पूछा कि फिर कुल्हाड़ी किसकी अनुमति से चली। वरिष्ठ पूर्व छात्र नेता रितेश त्रिपाठी ने शहर के बढ़ते तापमान पर चिंता जताते हुए पेड़ों को काटना 'आग पर घी डालने जैसा' बताया, और वातानुकूलित कमरों में बैठकर फैसले लेने वालों पर सवाल उठाए जिन्हें 48-50 डिग्री की तपिश महसूस नहीं होती। छात्र नेता अमित यादव और शमशेर यादव ने चेतावनी दी है कि यदि पेड़ों के कटान पर स्थायी रोक नहीं लगाई गई, तो छात्र सड़कों पर उतरकर व्यापक विरोध प्रदर्शन करेंगे। यह चेतावनी सिर्फ प्रशासन को नहीं, बल्कि उस सोच को भी है जो हरियाली को विकास की राह का रोड़ा मानती है। फिलहाल पल्हरी रोड पर पेड़ों के कटान पर अस्थायी रोक लगा दी गई है, लेकिन यह सवाल अभी भी कायम है कि क्या बांदा अपने बरगद बचा पाएगा, या फिर आने वाली पीढ़ियां केवल इतिहास की किताबों में पढ़ेंगी कि यहाँ कभी पेड़ हुआ करते थे। लोगों ने जोर देकर कहा कि पेड़ कटते हैं तो सिर्फ लकड़ी नहीं गिरती, बल्कि एक शहर की सांसें टूटती हैं, एक पीढ़ी की छांव छिनती है, और विकास के नाम पर इंसान अपनी ही कब्र के लिए धूप इकट्ठा करता है। इस दौरान पूरा बांदा कुल्हाड़ी के सामने दीवार बन गया और पल्हरी रोड पर बरगद और पीपल के पक्ष में जनसैलाब उमड़ पड़ा।
बांदा में विकास की आड़ में शहर की पहचान बन चुके 80 वर्ष पुराने बरगद, पीपल और नीम के वृक्षों को काटने की तैयारी से जनता में भारी आक्रोश है। पल्हरी रोड पर पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलने की खबर फैलते ही शनिवार को छात्र, समाजसेवी और आम नागरिक घरों से निकलकर सड़कों पर उतर आए। छात्रों ने पेड़ों को बचाने के लिए मानव श्रृंखला बनाई, वहीं आम नागरिकों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्हें 'विकास चाहिए, लेकिन विनाश की कीमत पर नहीं'। नागरिकों ने इस बात पर सवाल उठाया कि जब सड़क पहले से चौड़ी है और नाली व बिजली के खंभों के लिए पर्याप्त जगह मौजूद है, तब इन वृक्षों को आखिर क्यों निशाना बनाया जा रहा है। विरोध प्रदर्शन के दौरान तीखी प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं, जिसमें व्यंग्यात्मक ढंग से कहा गया कि शायद बरगद मुफ्त छाया देने, पीपल वर्षों से ऑक्सीजन बांटने या नीम धरती को मजबूती देने के कारण दोषी ठहराए जा रहे हैं। सबसे बड़ा व्यंग्य तो यह है कि अधिकारी कटान का कोई आदेश न होने की बात कह रहे हैं, जिस पर जनता ने पूछा कि फिर कुल्हाड़ी किसकी अनुमति से चली। वरिष्ठ पूर्व छात्र नेता रितेश त्रिपाठी ने शहर के बढ़ते तापमान पर चिंता जताते हुए पेड़ों को काटना 'आग पर घी डालने जैसा' बताया, और वातानुकूलित कमरों में बैठकर फैसले लेने वालों पर सवाल उठाए जिन्हें 48-50 डिग्री की तपिश महसूस नहीं होती। छात्र नेता अमित यादव और शमशेर यादव ने चेतावनी दी है कि यदि पेड़ों के कटान पर स्थायी रोक नहीं लगाई गई, तो छात्र सड़कों पर उतरकर व्यापक विरोध प्रदर्शन करेंगे। यह चेतावनी सिर्फ प्रशासन को नहीं, बल्कि उस सोच को भी है जो हरियाली को विकास की राह का रोड़ा मानती है। फिलहाल पल्हरी रोड पर पेड़ों के कटान पर अस्थायी रोक लगा दी गई है, लेकिन यह सवाल अभी भी कायम है कि क्या बांदा अपने बरगद बचा पाएगा, या फिर आने वाली पीढ़ियां केवल इतिहास की किताबों में पढ़ेंगी कि यहाँ कभी पेड़ हुआ करते थे। लोगों ने जोर देकर कहा कि पेड़ कटते हैं तो सिर्फ लकड़ी नहीं गिरती, बल्कि एक शहर की सांसें टूटती हैं, एक पीढ़ी की छांव छिनती है, और विकास के नाम पर इंसान अपनी ही कब्र के लिए धूप इकट्ठा करता है। इस दौरान पूरा बांदा कुल्हाड़ी के सामने दीवार बन गया और पल्हरी रोड पर बरगद और पीपल के पक्ष में जनसैलाब उमड़ पड़ा।
- उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में चलती रोडवेज बस में चोरी की एक वारदात सामने आई है, जहाँ एक महिला के बैग से पचास हज़ार रुपये कीमत के चांदी के जेवरात पार कर दिए गए। दयाशंकर तिवारी अपनी बहू को फतेहपुर जनपद ले जा रहे थे, तभी चोरों ने चलती बस में यह घटना अंजाम दी। इस घटना के बाद, पीड़ित दयाशंकर तिवारी अपनी बहू के साथ सिविल लाइन पुलिस चौकी कार्यालय पहुँचे। उन्होंने सिविल लाइन पुलिस चौकी प्रभारी को लिखित शिकायत पत्र सौंपकर इस मामले में कार्रवाई करने और न्याय दिलाने की मांग की है।4
- बांदा में विकास की आड़ में शहर की पहचान बन चुके 80 वर्ष पुराने बरगद, पीपल और नीम के वृक्षों को काटने की तैयारी से जनता में भारी आक्रोश है। पल्हरी रोड पर पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलने की खबर फैलते ही शनिवार को छात्र, समाजसेवी और आम नागरिक घरों से निकलकर सड़कों पर उतर आए। छात्रों ने पेड़ों को बचाने के लिए मानव श्रृंखला बनाई, वहीं आम नागरिकों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्हें 'विकास चाहिए, लेकिन विनाश की कीमत पर नहीं'। नागरिकों ने इस बात पर सवाल उठाया कि जब सड़क पहले से चौड़ी है और नाली व बिजली के खंभों के लिए पर्याप्त जगह मौजूद है, तब इन वृक्षों को आखिर क्यों निशाना बनाया जा रहा है। विरोध प्रदर्शन के दौरान तीखी प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं, जिसमें व्यंग्यात्मक ढंग से कहा गया कि शायद बरगद मुफ्त छाया देने, पीपल वर्षों से ऑक्सीजन बांटने या नीम धरती को मजबूती देने के कारण दोषी ठहराए जा रहे हैं। सबसे बड़ा व्यंग्य तो यह है कि अधिकारी कटान का कोई आदेश न होने की बात कह रहे हैं, जिस पर जनता ने पूछा कि फिर कुल्हाड़ी किसकी अनुमति से चली। वरिष्ठ पूर्व छात्र नेता रितेश त्रिपाठी ने शहर के बढ़ते तापमान पर चिंता जताते हुए पेड़ों को काटना 'आग पर घी डालने जैसा' बताया, और वातानुकूलित कमरों में बैठकर फैसले लेने वालों पर सवाल उठाए जिन्हें 48-50 डिग्री की तपिश महसूस नहीं होती। छात्र नेता अमित यादव और शमशेर यादव ने चेतावनी दी है कि यदि पेड़ों के कटान पर स्थायी रोक नहीं लगाई गई, तो छात्र सड़कों पर उतरकर व्यापक विरोध प्रदर्शन करेंगे। यह चेतावनी सिर्फ प्रशासन को नहीं, बल्कि उस सोच को भी है जो हरियाली को विकास की राह का रोड़ा मानती है। फिलहाल पल्हरी रोड पर पेड़ों के कटान पर अस्थायी रोक लगा दी गई है, लेकिन यह सवाल अभी भी कायम है कि क्या बांदा अपने बरगद बचा पाएगा, या फिर आने वाली पीढ़ियां केवल इतिहास की किताबों में पढ़ेंगी कि यहाँ कभी पेड़ हुआ करते थे। लोगों ने जोर देकर कहा कि पेड़ कटते हैं तो सिर्फ लकड़ी नहीं गिरती, बल्कि एक शहर की सांसें टूटती हैं, एक पीढ़ी की छांव छिनती है, और विकास के नाम पर इंसान अपनी ही कब्र के लिए धूप इकट्ठा करता है। इस दौरान पूरा बांदा कुल्हाड़ी के सामने दीवार बन गया और पल्हरी रोड पर बरगद और पीपल के पक्ष में जनसैलाब उमड़ पड़ा।1
- 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर बाँदा पुलिस ने 'पहले सेहत, फिर ड्यूटी' का महत्वपूर्ण संदेश दिया। इस पहल के तहत पुलिस लाइन में एक विशाल योग शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें सहायक पुलिस अधीक्षक मेविस टॉक सहित सभी अधिकारियों और जवानों ने उत्साहपूर्वक योगाभ्यास किया। शिविर में मौजूद योगाचार्यों और विशेषज्ञों ने विभिन्न योग आसनों और प्राणायाम की विस्तृत जानकारी दी और सभी जवानों से उनका अभ्यास कराया। जवानों ने शारीरिक और मानसिक सेहत में सुधार लाने, तनावमुक्त जीवन जीने तथा कार्यक्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से विभिन्न आसन किए। यह पहल केवल पुलिस लाइन तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि जिले के हर थाने में भी योग शिविर लगाए गए, जहाँ थाना प्रभारियों से लेकर सिपाहियों तक सभी ने सक्रिय रूप से भाग लिया। प्रतिसार निरीक्षक बेलास यादव सहित कई अन्य अधिकारी और कर्मचारी भी इन शिविरों में उपस्थित रहे। बाँदा के पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल का मानना है कि 'योग से जवान तंदुरुस्त होगा, तो अपराधी होंगे पस्त'। इस आयोजन के माध्यम से वर्दीधारियों ने यह स्पष्ट कर दिया कि एक स्वस्थ और सेहतमंद पुलिस बल ही एक सुरक्षित समाज की गारंटी है।1
- देशभर में सड़क और एक्सप्रेसवे नेटवर्क को मजबूत करने के उद्देश्य से कई परियोजनाओं पर लगातार काम जारी है। इन नए एक्सप्रेसवे के निर्माण से यात्रा के समय में कमी आने, कनेक्टिविटी में सुधार होने और व्यापारिक गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। विशेषज्ञ इस पहल को देश के बुनियादी ढाँचे के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं।1
- लोकसभा चुनाव में बुंदेलखंड क्षेत्र में अपेक्षित सफलता न मिलने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आगामी विधानसभा चुनावों के लिए अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी अब विकास योजनाओं और सरकारी उपलब्धियों को प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाकर क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने का प्रयास कर रही है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने बुंदेलखंड की 19 में से 16 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि समाजवादी पार्टी (सपा) को केवल तीन सीटें मिली थीं। हालांकि, हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में सपा ने क्षेत्र की चार में से तीन सीटों पर जीत हासिल कर भाजपा के सामने एक नई चुनौती पेश की है। आगामी विधानसभा चुनाव के लिए, जहां समाजवादी पार्टी बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने और पीडीए, संविधान तथा आरक्षण जैसे मुद्दों को लेकर जनता के बीच पहुंचने की रणनीति पर काम कर रही है, वहीं भाजपा विकास और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार को अपना मुख्य चुनावी मुद्दा बना रही है। इसी क्रम में, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में झांसी, ललितपुर, महोबा और राठ का दौरा किया, जहां उन्होंने कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों से जुड़ी करोड़ों रुपये की परियोजनाओं की सौगात दी। मुख्यमंत्री ने इस दौरान दावा किया कि प्रदेश सरकार की योजनाओं से बुंदेलखंड में विकास को गति मिली है और पलायन पर भी नियंत्रण हुआ है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बुंदेलखंड में भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिल सकता है। दोनों दल संगठन विस्तार और जनसंपर्क अभियान के जरिए अपनी चुनावी जमीन मजबूत करने में जुटे हैं। हालांकि, विकास योजनाओं और राजनीतिक रणनीतियों का जनता पर कितना असर होगा, इसका फैसला आगामी विधानसभा चुनाव के नतीजे ही करेंगे।2
- उत्तर प्रदेश में मौसम में लगातार उतार-चढ़ाव जारी है, जहाँ मानसून में देरी के कारण अधिकांश शहरों में भीषण गर्मी बढ़ गई है और पारा 42 डिग्री सेल्सियस के पार पहुँच गया है। सोमवार सुबह, गाजीपुर में तेज़ हवाओं के साथ मूसलाधार बारिश दर्ज की गई, वहीं बलिया में भी ज़ोरदार बारिश हुई जिससे सड़कों पर पानी भर गया। इसके बावजूद, प्रदेश के ज़्यादातर हिस्सों में तेज़ धूप खिली हुई है, जबकि गोरखपुर में बादल छाए रहे। बादलों की आवाजाही और हवा की धीमी रफ़्तार के चलते कई जगह उमस महसूस की गई। मौसम विभाग ने आज राज्य के 38 जिलों में लू (हीटवेव) का अलर्ट जारी किया है। साथ ही, मऊ, चंदौली, बलिया, गाजीपुर और सोनभद्र सहित 5 जिलों में बारिश की संभावना जताई गई है। पिछले 24 घंटों के आंकड़ों के अनुसार, प्रयागराज 42.5 डिग्री सेल्सियस और वाराणसी 42.4 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ प्रदेश में सबसे गर्म शहर रहे। बहराइच में 42 डिग्री सेल्सियस और झांसी में 41.8 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। इसी अवधि में, कुछ जिलों में बारिश भी हुई, जिसमें आगरा के खैरागढ़ में सर्वाधिक 18 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। मथुरा के गोवर्धन में 5 मिमी, मऊ में 4 मिमी, और सोनभद्र के चर्क तथा सुल्तानपुर में 8.6-8.6 मिमी बारिश हुई। आमतौर पर 20 जून तक उत्तर प्रदेश में प्रवेश कर जाने वाला मानसून इस बार देर से चल रहा है। मौसम विभाग के मुताबिक, मानसून इस बार यूपी-बिहार सीमा पर पहुँचने के बाद आगे नहीं बढ़ पाया है और पिछले 10-12 दिनों से महराजगंज के पास अटका हुआ है। हालांकि, 23 जून से इसके आगे बढ़ने और 25 जून तक पूरे उत्तर प्रदेश में पहुँचने की संभावना है। तब तक पूर्वी यूपी और बुंदेलखंड क्षेत्रों में गर्मी और लू का प्रकोप जारी रहने का अनुमान है।1
- बांदा जिले के तिन्दवारा गांव में अज्ञात हमलावरों ने एक साधु पर कुल्हाड़ी और डंडों से हमला कर दिया। इस हमले में साधु गंभीर रूप से घायल हो गए। परिजन तत्काल उन्हें मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे, लेकिन वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद साधु को मृत घोषित कर दिया।1
- हमीरपुर के मुस्करा थानाक्षेत्र में करिश्मा पेट्रोल पंप के पास ई-रिक्शा और ऑटो के बीच आमने-सामने की जोरदार भिड़ंत हो गई। इस हादसे में महिलाओं और बच्चों समेत कुल आधा दर्जन लोग घायल हो गए। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत सभी घायलों को पास के अस्पताल पहुंचाया ताकि उनका इलाज हो सके। इस घटना के बाद ऑटो चालक अपना वाहन वहीं छोड़कर मौके से फरार हो गया।2