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पत्रकार के सवाल पर जीभ लड़खड़ा गई भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष गुरुवार की शाम टीकमगढ़ पहुंचे जहां वह मीडिया से रूबरू हुए लेकिन जैसे ही टीकमगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार अनिल रावत ने छतरपुर का मामला उठाया तो उनकी जीभलड़खड़ा गई और उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया छतरपुर के सरानी गांव के सुरेंद्र सिंह की मौत के मामले में परिजनों द्वारा छतरपुर विधायक ललिता यादव और उनके बेटे पर लगाए गए गंभीर आरोप के मामले में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल बोले टीकमगढ़ प्रवास पर हु तो यहां की बात करे। वही मुरैना में रेत माफियाओं द्वारा वनकर्मी की हत्या के मामले में बोले कि मैं मुरैना में था तो उस मामले में अपनी बात कह दी थी।
पत्रकार धर्मेंद्र बुन्देला
पत्रकार के सवाल पर जीभ लड़खड़ा गई भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष गुरुवार की शाम टीकमगढ़ पहुंचे जहां वह मीडिया से रूबरू हुए लेकिन जैसे ही टीकमगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार अनिल रावत ने छतरपुर का मामला उठाया तो उनकी जीभलड़खड़ा गई और उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया छतरपुर के सरानी गांव के सुरेंद्र सिंह की मौत के मामले में परिजनों द्वारा छतरपुर विधायक ललिता यादव और उनके बेटे पर लगाए गए गंभीर आरोप के मामले में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल बोले टीकमगढ़ प्रवास पर हु तो यहां की बात करे। वही मुरैना में रेत माफियाओं द्वारा वनकर्मी की हत्या के मामले में बोले कि मैं मुरैना में था तो उस मामले में अपनी बात कह दी थी।
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- छतरपुर के ढोड़न क्षेत्र से भारत जंक्शन न्यूज़ की ग्राउंड रिपोर्ट… हम मौके पर पहुंचे और देखा कि केन–बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में आदिवासी किस तरह आंदोलन कर रहे हैं। कई लोग चिता पर लेटकर अपना विरोध जता रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी जमीन अधिग्रहित की गई लेकिन मुआवजा पूरी तरह नहीं मिला। वहीं प्रशासन का कहना है कि प्रक्रिया नियमों के अनुसार चल रही है। 👉 इस ग्राउंड रिपोर्ट में देखिए: आंदोलन की असली स्थिति मौके से तस्वीरें ग्रामीणों की आवाज 📍 Location: छतरपुर जिला (ढोड़न क्षेत्र) 🎤 रिपोर्ट: अंकित | Bharat Junction News1
- छतरपुर जिले के चंदला थाना परिसर में एक युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। बताया जा रहा है कि युवक ने थाने के भीतर ही जहरीला पदार्थ खा लिया, जिसके बाद उसकी मौत हो गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी अगम जैन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चंदला थाना प्रभारी संदीप दीक्षित को निलंबित कर दिया है। प्राथमिक जांच में लापरवाही के संकेत मिलने पर यह बड़ी कार्रवाई की गई है, वहीं अब पूरे मामले की विस्तृत जांच जारी है। 📹 सबसे बड़ा सवाल: क्या थाने में लगे CCTV फुटेज के आधार पर निष्पक्ष जांच होगी? 👩🦰 मृतक की पत्नी लीला अहिरवार ने न्याय की मांग उठाई है और मामले की न्यायिक जांच की मांग की है। ⚖️ अब देखने वाली बात यह होगी कि: क्या CCTV फुटेज सार्वजनिक किए जाएंगे? क्या और पुलिसकर्मियों पर भी गाज गिरेगी? क्या पीड़ित परिवार को न्याय मिल पाएगा?1
- छतरपुर//पन्ना 8 से 10 दिन से 24 घंटे आदिवासी आंदोलन कर रहे हैं उसी पानी को आदिवासी पी रहे हैं उसी में नहा रहे हैं और उसी में सोंच कर रहे हैं जिससे बीमारी फैलने की संभावना लगातार बढ़ती जा रही है। दोपहर के करीब 2:00 एक आदिवासी युवक की अचानक तबीयत बिगड़ी लेकिन वहां पर कोई भी डॉक्टर नहीं पहुंचा आदिवासियों ने आरोप लगाया कि वन विभाग की बैरियर पर हम लोगों के लिए कोई भी मददगार आता है तो उसे रोक दिया जाता है कोई भी अगर डॉक्टर इलाज के लिए आता है उसे इलाज करने से रोका जाता है।1
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- पत्रकार के सवाल पर जीभ लड़खड़ा गई भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष गुरुवार की शाम टीकमगढ़ पहुंचे जहां वह मीडिया से रूबरू हुए लेकिन जैसे ही टीकमगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार अनिल रावत ने छतरपुर का मामला उठाया तो उनकी जीभलड़खड़ा गई और उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया छतरपुर के सरानी गांव के सुरेंद्र सिंह की मौत के मामले में परिजनों द्वारा छतरपुर विधायक ललिता यादव और उनके बेटे पर लगाए गए गंभीर आरोप के मामले में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल बोले टीकमगढ़ प्रवास पर हु तो यहां की बात करे। वही मुरैना में रेत माफियाओं द्वारा वनकर्मी की हत्या के मामले में बोले कि मैं मुरैना में था तो उस मामले में अपनी बात कह दी थी।1
- *केन-बेतवा विस्थापितों का फूटा गुस्सा—प्रशासन को पीछे हटना पड़ा, चिता आंदोलन हुआ और उग्र!* - *जन आंदोलन बना जनसंघर्ष , जनता ने प्रशासन को दौड़ाया* केन बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित न्याय की मांग कर रहे आदिवासियों और किसानों का धैर्य आज जवाब दे गया। केन-बेतवा लिंक परियोजना के खिलाफ चल रहे *'चिता आंदोलन'* के दूसरे दिन हालात उस समय तनावपूर्ण हो गए, जब पुलिस प्रशासन ने शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों का *राशन-पानी* रोकने की कोशिश की। प्रशासन की इस दमनकारी कार्रवाई से हजारों आदिवासी महिलाएं और किसान भड़क उठे। आक्रोशित जनता के भारी विरोध के सामने प्रशासन को पीछे हटना पड़ा और आंदोलन स्थल से दौड़ लगानी पड़ी। स्थिति को बिगड़ते देख *सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर* ने मोर्चा संभाला और बमुश्किल ग्रामीणों को शांत कराया। *अमित भटनागर* ने प्रशासन को दो-टूक चेतावनी देते हुए कहा कि आदिवासियों के हक की यह लड़ाई अब 'जन संघर्ष' बन चुकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि आंदोलन को कुचलने या दमन करने की कोशिश की गई, तो इसके परिणाम और भी उग्र होंगे। जब तक विस्थापितों को पूर्ण न्याय नहीं मिलता, यह चिता आंदोलन थमेगा नहीं। हजारों आदिवासी महिलाओं किसान रहे शामिल *मीडिया सेल* *जय किसान संगठन*1
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