विकास के दावों पर सवाल: प्रभारी मंत्रियों और प्रदेश के मुखिया के आगमन के बावजूद बदहाल पड़ा है सर्किट हाउस का यह पार्क। अजीत मिश्रा (खोजी) सर्किट हाउस का पार्क: विकास के दावों के बीच भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी हरीतिमा की दास्तां विकास के दावों पर सवाल: प्रभारी मंत्रियों और प्रदेश के मुखिया के आगमन के बावजूद बदहाल पड़ा है सर्किट हाउस का यह पार्क। अधिकारियों और ठेकेदारों की साठगांठ: बजट के बावजूद धरातल पर दम तोड़ती हरीतिमा, प्रशासनिक उदासीनता पर उठे गंभीर सवाल। नेताओं की प्राथमिकताओं पर तंज: जाति-पाति और सेल्फी की राजनीति के बीच उपेक्षित हुआ बस्ती का जनहित और बुनियादी विकास। बस्ती: जनपद के सर्किट हाउस परिसर में स्थित वह पार्क, जिसे कभी वीआईपी मेहमानों के स्वागत और सुकून के क्षणों के लिए संवारा जाना था, आज प्रशासनिक उदासीनता और भ्रष्टाचार का जीवंत स्मारक बन चुका है। मायावती सरकार के कार्यकाल में निर्माण की स्वीकृति पाने वाला यह पार्क आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। यहां की जर्जर हालत यह चीख-चीख कर कह रही है कि कैसे अधिकारियों, ठेकेदारों और जनप्रतिनिधियों की तिजोरियां भरने के खेल में एक सार्वजनिक धरोहर को नेस्तनाबूद कर दिया गया। सियासत और वीआईपी दौरों के बीच उपेक्षित सच विडंबना देखिए कि जिस सर्किट हाउस पार्क के वजूद पर ग्रहण लगा हुआ है, उसी परिसर में आए दिन सूबे के बड़े-बड़े कद्दावर नेताओं, जिले के प्रभारी मंत्रियों, प्रशासनिक अमले और खुद प्रदेश के मुखिया तक का आगमन होता रहा है। वीआईपी दौरों की चकाचौंध और सुरक्षा व्यवस्था के साये में चलने वाली बैठकों के बीच किसी भी रसूखदार की नजर इस बदहाल पार्क पर नहीं पड़ी। स्थानीय जानकारों का कहना है कि पूर्वांचल के तमाम सियासी दिग्गजों और बड़े नेताओं के कदम इस सर्किट हाउस में बार-بيض पड़े, लेकिन किसी ने भी दो शब्द यह पूछने की जहमत नहीं उठाई कि आखिर इस पार्क की यह दुर्दशा क्यों हुई। बजट आया और कागजों पर विकास दौड़ता रहा, लेकिन धरातल पर पार्क भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता चला गया। जनता की चुप्पी और प्राथमिकताओं का संकट सवाल सिर्फ नेताओं और अधिकारियों की संवेदनहीनता का नहीं है, बल्कि आम जनमानस की प्राथमिकताओं पर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं। बस्ती की जनता की सुधि लेने वाला कोई नहीं है, और जिन्हें जनता चुनकर भेजती है, उनकी प्राथमिकताएं आज जाति-पाति, खेत-खलिहान की बयानबाजी और सोशल मीडिया पर अधिकारियों-नेताओं के साथ सेल्फी खिंचवाने तक सीमित होकर रह गई हैं। जब समाज का एक बड़ा वर्ग और जनप्रतिनिधि खुद ही व्यवस्था की इस लीपापोती में साझीदार बन जाएं, तो ऐसे में एक लाचार पार्क की सुध कौन ले? क्या कभी बदलेगी तस्वीर? आज सर्किट हाउस का यह पार्क हर आने-जाने वाले से एक ही सवाल पूछता है— "क्या कभी मेरी दशा बदल पाएगी, या मैं यूं ही भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी की भेंट चढ़ता रहूंगा?" यह तीखा सवाल सिर्फ एक पार्क का नहीं, बल्कि बस्ती के पूरे विकास मॉडल पर एक बड़ा तंज है। जब तक प्रशासनिक जवाबदेही तय नहीं होगी और जनता आत्ममुग्धता की राजनीति से बाहर आकर बुनियादी मुद्दों पर सवाल नहीं पूछेगी, तब तक ऐसे कई पार्क फाइलों में सजते और धरातल पर दम तोड़ते रहेंगे।
विकास के दावों पर सवाल: प्रभारी मंत्रियों और प्रदेश के मुखिया के आगमन के बावजूद बदहाल पड़ा है सर्किट हाउस का यह पार्क। अजीत मिश्रा (खोजी) सर्किट हाउस का पार्क: विकास के दावों के बीच भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी हरीतिमा की दास्तां विकास के दावों पर सवाल: प्रभारी मंत्रियों और प्रदेश के मुखिया के आगमन के बावजूद बदहाल पड़ा है सर्किट हाउस का यह पार्क। अधिकारियों और ठेकेदारों की साठगांठ: बजट के बावजूद धरातल पर दम तोड़ती हरीतिमा, प्रशासनिक उदासीनता पर उठे गंभीर सवाल। नेताओं की प्राथमिकताओं पर तंज: जाति-पाति और सेल्फी की राजनीति के बीच उपेक्षित हुआ बस्ती का जनहित और बुनियादी विकास। बस्ती: जनपद के सर्किट हाउस परिसर में स्थित वह पार्क, जिसे कभी वीआईपी मेहमानों के स्वागत और सुकून के क्षणों के लिए संवारा जाना था, आज प्रशासनिक उदासीनता और भ्रष्टाचार का जीवंत स्मारक बन चुका है। मायावती सरकार के कार्यकाल में निर्माण की स्वीकृति पाने वाला यह पार्क आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। यहां की जर्जर हालत यह चीख-चीख कर कह रही है कि कैसे अधिकारियों, ठेकेदारों और जनप्रतिनिधियों की तिजोरियां भरने के खेल में एक सार्वजनिक धरोहर को नेस्तनाबूद कर दिया गया। सियासत और वीआईपी दौरों के बीच उपेक्षित सच विडंबना देखिए कि जिस सर्किट हाउस पार्क के वजूद पर ग्रहण लगा हुआ है, उसी परिसर में आए दिन सूबे के बड़े-बड़े कद्दावर नेताओं, जिले के प्रभारी मंत्रियों, प्रशासनिक अमले और खुद प्रदेश के मुखिया तक का आगमन होता रहा है। वीआईपी दौरों की चकाचौंध और सुरक्षा व्यवस्था के साये में चलने वाली बैठकों के बीच किसी भी रसूखदार की नजर इस बदहाल पार्क पर नहीं पड़ी। स्थानीय जानकारों का कहना है कि पूर्वांचल के तमाम सियासी दिग्गजों और बड़े नेताओं के कदम इस सर्किट हाउस में बार-بيض पड़े, लेकिन किसी ने भी दो शब्द यह पूछने की जहमत नहीं उठाई कि आखिर इस पार्क की यह दुर्दशा क्यों हुई। बजट आया और कागजों पर विकास दौड़ता रहा, लेकिन धरातल पर पार्क भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता चला गया। जनता की चुप्पी और प्राथमिकताओं का संकट सवाल सिर्फ नेताओं और अधिकारियों की संवेदनहीनता का नहीं है, बल्कि आम जनमानस की प्राथमिकताओं पर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं। बस्ती की जनता की सुधि लेने वाला कोई नहीं है, और जिन्हें जनता चुनकर भेजती है, उनकी प्राथमिकताएं आज जाति-पाति, खेत-खलिहान की बयानबाजी और सोशल मीडिया पर अधिकारियों-नेताओं के साथ सेल्फी खिंचवाने तक सीमित होकर रह गई हैं। जब समाज का एक बड़ा वर्ग और जनप्रतिनिधि खुद ही व्यवस्था की इस लीपापोती में साझीदार बन जाएं, तो ऐसे में एक लाचार पार्क की सुध कौन ले? क्या कभी बदलेगी तस्वीर? आज सर्किट हाउस का यह पार्क हर आने-जाने वाले से एक ही सवाल पूछता है— "क्या कभी मेरी दशा बदल पाएगी, या मैं यूं ही भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी की भेंट चढ़ता रहूंगा?" यह तीखा सवाल सिर्फ एक पार्क का नहीं, बल्कि बस्ती के पूरे विकास मॉडल पर एक बड़ा तंज है। जब तक प्रशासनिक जवाबदेही तय नहीं होगी और जनता आत्ममुग्धता की राजनीति से बाहर आकर बुनियादी मुद्दों पर सवाल नहीं पूछेगी, तब तक ऐसे कई पार्क फाइलों में सजते और धरातल पर दम तोड़ते रहेंगे।
- कपिलवस्तु स्तूप पर लाइट एंड साउंड शो शुरू, विपश्यना पार्क का लोकार्पण केंद्रीय मंत्री ने किया सिद्धार्थनगर जिले की भारत-नेपाल सीमा पर स्थित ऐतिहासिक कपिलवस्तु स्तूप पर शनिवार को केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने अत्याधुनिक लाइट एंड साउंड शो एवं विपश्यना पार्क का लोकार्पण किया। उन्होंने शिलापट्ट का अनावरण कर स्तूप की परिक्रमा की और बौद्ध भिक्षुओं से संवाद किया। पर्यटन सुविधा केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री ने विभिन्न विभागों की विकास प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा गोदभराई और अन्नप्राशन कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ काला नमक चावल एवं भगवान बुद्ध पर आधारित लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। अपने संबोधन में हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि केंद्र सरकार पर्यटन और विरासत स्थलों के विकास के साथ जनकल्याणकारी योजनाओं को प्राथमिकता दे रही है। सांसद जगदंबिका पाल ने कहा कि लाइट एंड साउंड शो से कपिलवस्तु को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान मिलेगी। विधायक श्यामधनी राही ने इसे जनपद के पर्यटन विकास की दिशा में ऐतिहासिक पहल बताया। कार्यक्रम में सांसद जगदंबिका पाल, विधायक श्यामधनी राही, भाजपा जिलाध्यक्ष दीपक मौर्य, सिद्धार्थ विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. कविता शाह, भाजपा निवर्तमान जिलाध्यक्ष कन्हैया पासवान, जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष विक्रम सिंह, नगर पालिका अध्यक्ष गोविंद माधव,मीडिया प्रभारी रमेश मणि त्रिपाठी, भाजपा नेत्री पूजा पाल मुख्य विकास अधिकारी बलराम सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिषेक महाजन ,पुलिस क्षेत्राधिकारी मयंक द्विवेदी, शुभेंदु सिंह, विश्वजीत शौरयान सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।1
- अम्बेडकरनगर। आगामी कांवड़ यात्रा को सकुशल एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के उद्देश्य से जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक प्राची सिंह ने शनिवार को थाना आलापुर क्षेत्र स्थित चौहड़ा घाट का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, बैरिकेडिंग, साफ-सफाई तथा श्रद्धालुओं को उपलब्ध कराई जाने वाली मूलभूत सुविधाओं का जायजा लिया। इस दौरान संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए सभी व्यवस्थाओं को समय से पूर्ण करने तथा कांवड़ यात्रियों की सुरक्षा एवं सुविधा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। रिपोर्ट : बलराम सोनी आलापुर1
- बहन-बेटियों की सुरक्षा को लेकर सहजनवा में पैदल मार्च, 90 दिनों में दोषियों को फांसी देने की उठाई मांग बहन-बेटियों की सुरक्षा को लेकर सहजनवा में पैदल मार्च, 90 दिनों में दोषियों को फांसी देने की उठाई मांग सहजनवा, गोरखपुर। बहन-बेटियों और मासूम बच्चों के खिलाफ बढ़ रहे हत्या एवं दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराधों के विरोध में शनिवार को दलित शोषित कल्याण समिति, उत्तर प्रदेश के तत्वावधान में सहजनवा में जनजागरण पैदल मार्च निकाला गया। बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने इसमें भाग लेकर अपराधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग उठाई। पैदल मार्च भीटी चौराहे से प्रारंभ होकर सहजनवा थाना होते हुए पूरे सहजनवा बाजार में निकाला गया। इस दौरान प्रतिभागियों ने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर महिला सुरक्षा के समर्थन में नारे लगाए तथा लोगों को जागरूक किया। मार्च के उपरांत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम संबोधित ज्ञापन प्रशासन को सौंपा गया। ज्ञापन में मांग की गई कि बहन-बेटियों और बच्चों के साथ हत्या, दुष्कर्म तथा अन्य जघन्य अपराध करने वाले दोषियों को 90 दिनों के भीतर फांसी की सजा सुनिश्चित की जाए, ताकि अपराधियों में कानून का भय पैदा हो और भविष्य में ऐसे अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके। समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि सहजनवा, खजनी, चित्रकूट सहित देश और प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में लगातार सामने आ रही घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए तथा दोषियों के खिलाफ त्वरित और कठोर कार्रवाई से ही समाज में न्याय का विश्वास मजबूत होगा। कार्यक्रम के दौरान मौजूद लोगों ने एक स्वर में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा अपराधियों को शीघ्र एवं कड़ी सजा दिलाने की मांग दोहराई।4
- भरी सभा में ये कैसा 'सत्यदर्शन'? – जब मंच पर ही सच का आईना सामने आ गया! अजीत मिश्रा (खोजी) राजनीति और कूटनीति के गलियारों में अक्सर वो सब कुछ दिखाया जाता है, जो जनता देखना चाहती है। लेकिन कभी-कभी, अनजाने में या अचानक, एक ऐसा वाकया हो जाता है जो सारे पर्दों को हटाकर हकीकत को सबके सामने लाकर रख देता है। हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा एक वीडियो इस बात का सबसे बेहतरीन उदाहरण है। एक तरफ मंच पर नेताजी अपने चिर-परिचित अंदाज़ में बैठे हैं, और ठीक पीछे लगी बड़ी स्क्रीन पर अचानक एक महिला का इंटरव्यू चल पड़ता है — "मैं सैफई से हूं, अखिलेश राज में कभी सेफ नहीं रही।" भरी सभा, कैमरे की नज़रें और ठीक पीछे गूँजती यह बेबाक आवाज़! इस दृश्य को देखकर ऐसा लगा मानो किसी ने राजनीति की भारी-भरकम पटकथा के बीचों-बीच, अचानक से ज़मीन की हकीकत का सायरन बजा दिया हो। नेताजी की बगलें झांकने वाली मुद्रा और कमरे का माहौल यह बताने के लिए काफ़ी था कि कभी-कभी तकनीक भी सही समय पर सही मज़ाक करने के मूड में होती है। खैर, इसे तकनीकी चूक कहें या किसी की सोची-समझी शरारत, लेकिन इस वीडियो ने सोशल मीडिया पर बहस का एक नया दौर ज़रूर शुरू कर दिया है। आख़िरकार, जनता के बीच के सच को आप कितनी देर तक मंच के पीछे छुपाकर रख सकते हैं? स्क्रीन पर चल रही वह तसवीर और मंच पर बैठे चेहरों के भाव देखने लायक थे! इस मज़ेदार और व्यंग्यात्मक राजनीतिक पल पर आपकी क्या राय है? कमेंट सेक्शन में अपनी प्रतिक्रिया ज़रूर दें! #PoliticalSatire #ViralVideo #Saifai #IndianPolitics #AkhileshYadav #Sarcasm #PoliticalHumor #SocialMediaTrends1
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- जायरीन से भरी ऑटो पलटी, 12 घायल—2 की हालत गंभीर #viral #ambedkar_nagar #ambedkarnagarpolice #uppolice1