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छत्तरगढ़ सत्तासर क्षेत्र में नहर की बंदी के कारण पानी की किल्लत बनी हुई
DEVI SINGH UDAWAT
छत्तरगढ़ सत्तासर क्षेत्र में नहर की बंदी के कारण पानी की किल्लत बनी हुई
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- Post by DEVI SINGH UDAWAT1
- मध्य प्रदेश के छतरपुर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां इमरजेंसी सेवाओं के लिए चलाई जाने वाली 108 एंबुलेंस का कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया।जानकारी के अनुसार, सायरन बजाते हुए एंबुलेंस सड़क पर घूमती रही और लोग उसे इमरजेंसी समझकर रास्ता देते रहे, लेकिन वाहन के अंदर कोई मरीज मौजूद नहीं था। आरोप है कि एंबुलेंस चालक ड्यूटी के दौरान एक कॉलेज छात्रा के साथ शहर में घूमता हुआ पकड़ा गया। घटना के सामने आने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया और जिम्मेदारों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए चालक को सेवा से हटा दिया है। साथ ही पूरे मामले की जांच भी शुरू कर दी गई है। इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं कि जिन एंबुलेंस सेवाओं पर लोगों की जान बचाने की जिम्मेदारी होती है, उनका इस तरह दुरुपयोग कितना गंभीर मामला है।फिलहाल जांच जारी है और विभागीय रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।1
- Bikaner local update1
- छत्तीसगढ़ के कोरबा से सामने आया दिल दहला देने वाला वीडियो सिर्फ एक हत्या की कहानी नहीं, बल्कि बदलते समाज और बिखरते रिश्तों की कड़वी हकीकत भी सामने रखता है। एक शख्स अपनी पत्नी की हत्या के बाद उसका कटा हुआ सिर लेकर सड़कों पर बेखौफ घूमता नजर आया,यह दृश्य हर किसी को झकझोर देने वाला है।ऐसे मामलों में अक्सर एक और पहलू सामने आता है,रिश्तों में अविश्वास, शक, और आपसी संवाद की कमी। कई बार यह देखा गया है कि पत्नी या पति का किसी और से बात करना, सोशल मीडिया पर बढ़ती नजदीकियां या रिश्तों में दरार, इंसान को मानसिक रूप से इस कदर तोड़ देती है कि वह गलत और खतरनाक कदम उठा बैठता है। हालांकि यह किसी भी हालत में अपराध का बहाना नहीं हो सकता, लेकिन यह समझना जरूरी है कि समस्या की जड़ कहां है।आज मोबाइल और सोशल मीडिया ने जहां लोगों को जोड़ने का काम किया है, वहीं कई परिवारों में दूरी भी बढ़ाई है। गलतफहमियां, निगरानी, शक और निजी जिंदगी में दखल,ये सब रिश्तों को अंदर से खोखला कर रहे हैं। कई लोगों के लिए यह तकनीक सहूलियत नहीं, बल्कि तनाव और टूटन का कारण बनती जा रही है। लेकिन सबसे जरूरी बात यही है कि किसी भी हालात में हिंसा का रास्ता समाधान नहीं है। कानून अपने हाथ में लेना और किसी की जान लेना न सिर्फ एक जघन्य अपराध है, बल्कि पूरे समाज के लिए खतरा भी है।कोरबा की यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि हमें सिर्फ कानून व्यवस्था ही नहीं, बल्कि रिश्तों, मानसिक स्वास्थ्य और सोशल मीडिया के प्रभाव पर भी गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है वरना ऐसे खौफनाक मंज़र बार-बार सामने आते रहेंगे। अच्छा लगे तो आगे शेयर जरूर करना1
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