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महिला एवं बाल विकास कार्यालय में साहब की कुर्सी खाली, दोपहर 1 बजे तक अधिकारी नदारद कर्मचारियों के भरोसे चल रहा कार्यालय, ग्रामीण अंचल से आने वाली जनता को मिल रहे गोल-मोल जवाब करेरा। महिला एवं बाल विकास विभाग का कार्यालय इन दिनों अपनी कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा में है। सोमवार को दोपहर करीब 1 बजे तक कार्यालय में अधिकारी की कुर्सी खाली नजर आई। अधिकारी के कार्यालय में मौजूद नहीं होने के कारण विभागीय कामकाज कर्मचारियों के भरोसे चलता दिखाई दिया। ग्रामीण क्षेत्रों से अपने काम के सिलसिले में कार्यालय पहुंचे लोगों को अधिकारी के संबंध में जानकारी लेने पर कंप्यूटर ऑपरेटर एवं बाबुओं की ओर से स्पष्ट जानकारी देने के बजाय गोल-मोल जवाब मिलने की बात सामने आई। इससे दूर-दराज से आए ग्रामीणों को अपने काम के लिए इंतजार और परेशानी का सामना करना पड़ा। इसी दौरान एक व्यक्ति द्वारा जब कार्यालय में मौजूद बाबू से पूछा गया कि “साहब कब आते हैं?” तो जवाब मिला कि “जब काम होता है, तभी आते हैं, अन्यथा नहीं।” बाबू द्वारा यह भी बताया गया कि अधिकारी के पास तीन स्थानों का अतिरिक्त कार्यभार है, जिसके चलते समय मिलने पर ही वे कार्यालय में आ पाते हैं। अधिकारी के पास अतिरिक्त प्रभार होना अपनी जगह प्रशासनिक व्यवस्था का विषय है, लेकिन सवाल यह है कि जिस कार्यालय में प्रतिदिन ग्रामीण एवं आमजन अपने आवश्यक कार्यों को लेकर पहुंचते हैं, वहां जिम्मेदार अधिकारी की नियमित उपलब्धता कैसे सुनिश्चित होगी? ग्रामीण क्षेत्र से आने वाला व्यक्ति किराया, समय और मेहनत खर्च कर कार्यालय पहुंचता है, ऐसे में अधिकारी के अनुपस्थित मिलने पर उसे निराश होकर लौटना पड़ सकता है। महिला एवं बाल विकास विभाग सीधे तौर पर महिलाओं, बच्चों और ग्रामीण क्षेत्र से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण कार्यों से संबंधित है। ऐसे में कार्यालय में अधिकारी की समय पर उपलब्धता और आमजन के कार्यों का सुचारु संचालन आवश्यक माना जाता है। अब देखना यह है कि अतिरिक्त प्रभार के दबाव में चल रही व्यवस्था को लेकर विभागीय स्तर पर कोई ठोस व्यवस्था बनाई जाती है या फिर आम जनता इसी तरह कर्मचारियों के जवाबों और खाली कुर्सी के बीच अपने काम का इंतजार करती रहेगी। महिला एवं बाल विकास कार्यालय में साहब की कुर्सी खाली, दोपहर 1 बजे तक अधिकारी नदारद कर्मचारियों के भरोसे चल रहा कार्यालय, ग्रामीण अंचल से आने वाली जनता को मिल रहे गोल-मोल जवाब करेरा। महिला एवं बाल विकास विभाग का कार्यालय इन दिनों अपनी कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा में है। सोमवार को दोपहर करीब 1 बजे तक कार्यालय में अधिकारी की कुर्सी खाली नजर आई। अधिकारी के कार्यालय में मौजूद नहीं होने के कारण विभागीय कामकाज कर्मचारियों के भरोसे चलता दिखाई दिया। ग्रामीण क्षेत्रों से अपने काम के सिलसिले में कार्यालय पहुंचे लोगों को अधिकारी के संबंध में जानकारी लेने पर कंप्यूटर ऑपरेटर एवं बाबुओं की ओर से स्पष्ट जानकारी देने के बजाय गोल-मोल जवाब मिलने की बात सामने आई। इससे दूर-दराज से आए ग्रामीणों को अपने काम के लिए इंतजार और परेशानी का सामना करना पड़ा। इसी दौरान एक व्यक्ति द्वारा जब कार्यालय में मौजूद बाबू से पूछा गया कि “साहब कब आते हैं?” तो जवाब मिला कि “जब काम होता है, तभी आते हैं, अन्यथा नहीं।” बाबू द्वारा यह भी बताया गया कि अधिकारी के पास तीन स्थानों का अतिरिक्त कार्यभार है, जिसके चलते समय मिलने पर ही वे कार्यालय में आ पाते हैं। अधिकारी के पास अतिरिक्त प्रभार होना अपनी जगह प्रशासनिक व्यवस्था का विषय है, लेकिन सवाल यह है कि जिस कार्यालय में प्रतिदिन ग्रामीण एवं आमजन अपने आवश्यक कार्यों को लेकर पहुंचते हैं, वहां जिम्मेदार अधिकारी की नियमित उपलब्धता कैसे सुनिश्चित होगी? ग्रामीण क्षेत्र से आने वाला व्यक्ति किराया, समय और मेहनत खर्च कर कार्यालय पहुंचता है, ऐसे में अधिकारी के अनुपस्थित मिलने पर उसे निराश होकर लौटना पड़ सकता है। महिला एवं बाल विकास विभाग सीधे तौर पर महिलाओं, बच्चों और ग्रामीण क्षेत्र से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण कार्यों से संबंधित है। ऐसे में कार्यालय में अधिकारी की समय पर उपलब्धता और आमजन के कार्यों का सुचारु संचालन आवश्यक माना जाता है। अब देखना यह है कि अतिरिक्त प्रभार के दबाव में चल रही व्यवस्था को लेकर विभागीय स्तर पर कोई ठोस व्यवस्था बनाई जाती है या फिर आम जनता इसी तरह कर्मचारियों के जवाबों और खाली कुर्सी के बीच अपने काम का इंतजार करती रहेगी।

9 hrs ago
user_जितेंद्र परिहार पत्रकार नरवर
जितेंद्र परिहार पत्रकार नरवर
Farmer नरवर, शिवपुरी, मध्य प्रदेश•
9 hrs ago

महिला एवं बाल विकास कार्यालय में साहब की कुर्सी खाली, दोपहर 1 बजे तक अधिकारी नदारद कर्मचारियों के भरोसे चल रहा कार्यालय, ग्रामीण अंचल से आने वाली जनता को मिल रहे गोल-मोल जवाब करेरा। महिला एवं बाल विकास विभाग का कार्यालय इन दिनों अपनी कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा में है। सोमवार को दोपहर करीब 1 बजे तक कार्यालय में अधिकारी की कुर्सी खाली नजर आई। अधिकारी के कार्यालय में मौजूद नहीं होने के कारण विभागीय कामकाज कर्मचारियों के भरोसे चलता दिखाई दिया। ग्रामीण क्षेत्रों से अपने काम के सिलसिले में कार्यालय पहुंचे लोगों को अधिकारी के संबंध में जानकारी लेने पर कंप्यूटर ऑपरेटर एवं बाबुओं की ओर से स्पष्ट जानकारी देने के बजाय गोल-मोल जवाब मिलने की बात सामने आई। इससे दूर-दराज से आए ग्रामीणों को अपने काम के लिए इंतजार और परेशानी का सामना करना पड़ा। इसी दौरान एक व्यक्ति द्वारा जब कार्यालय में मौजूद बाबू से पूछा गया कि “साहब कब आते हैं?” तो जवाब मिला कि “जब काम होता है, तभी आते हैं, अन्यथा नहीं।” बाबू द्वारा यह भी बताया गया कि अधिकारी के पास तीन स्थानों का अतिरिक्त कार्यभार है, जिसके चलते समय मिलने पर ही वे कार्यालय में आ पाते हैं। अधिकारी के पास अतिरिक्त प्रभार होना अपनी जगह प्रशासनिक व्यवस्था का विषय है, लेकिन सवाल यह है कि जिस कार्यालय में प्रतिदिन ग्रामीण एवं आमजन अपने आवश्यक कार्यों को लेकर पहुंचते हैं, वहां जिम्मेदार अधिकारी की नियमित उपलब्धता कैसे सुनिश्चित होगी? ग्रामीण क्षेत्र से आने वाला व्यक्ति किराया, समय और मेहनत खर्च कर कार्यालय पहुंचता है, ऐसे में अधिकारी के अनुपस्थित मिलने पर उसे निराश होकर लौटना पड़ सकता है। महिला एवं बाल विकास विभाग सीधे तौर पर महिलाओं, बच्चों और ग्रामीण क्षेत्र से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण कार्यों से संबंधित है। ऐसे में कार्यालय में अधिकारी की समय पर उपलब्धता और आमजन के कार्यों का सुचारु संचालन आवश्यक माना जाता है। अब देखना यह है कि अतिरिक्त प्रभार के दबाव में चल रही व्यवस्था को लेकर विभागीय स्तर पर कोई ठोस व्यवस्था बनाई जाती है या फिर आम जनता इसी तरह कर्मचारियों के जवाबों और खाली कुर्सी के बीच अपने काम का इंतजार करती रहेगी। महिला एवं बाल विकास कार्यालय में साहब की कुर्सी खाली, दोपहर 1 बजे तक अधिकारी नदारद कर्मचारियों के भरोसे चल रहा कार्यालय, ग्रामीण अंचल से आने वाली जनता को मिल रहे गोल-मोल जवाब करेरा। महिला एवं बाल विकास विभाग का कार्यालय इन दिनों अपनी कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा में है। सोमवार को दोपहर करीब 1 बजे तक कार्यालय में अधिकारी की कुर्सी खाली नजर आई। अधिकारी के कार्यालय में मौजूद नहीं होने के कारण विभागीय कामकाज कर्मचारियों के भरोसे चलता दिखाई दिया। ग्रामीण क्षेत्रों से अपने काम के सिलसिले में कार्यालय पहुंचे लोगों को अधिकारी के संबंध में जानकारी लेने पर कंप्यूटर ऑपरेटर एवं बाबुओं की ओर से स्पष्ट जानकारी देने के बजाय गोल-मोल जवाब मिलने की बात सामने आई। इससे दूर-दराज से आए ग्रामीणों को अपने काम के लिए इंतजार और परेशानी का सामना करना पड़ा। इसी दौरान एक व्यक्ति द्वारा जब कार्यालय में मौजूद बाबू से पूछा गया कि “साहब कब आते हैं?” तो जवाब मिला कि “जब काम होता है, तभी आते हैं, अन्यथा नहीं।” बाबू द्वारा यह भी बताया गया कि अधिकारी के पास तीन स्थानों का अतिरिक्त कार्यभार है, जिसके चलते समय मिलने पर ही वे कार्यालय में आ पाते हैं। अधिकारी के पास अतिरिक्त प्रभार होना अपनी जगह प्रशासनिक व्यवस्था का विषय है, लेकिन सवाल यह है कि जिस कार्यालय में प्रतिदिन ग्रामीण एवं आमजन अपने आवश्यक कार्यों को लेकर पहुंचते हैं, वहां जिम्मेदार अधिकारी की नियमित उपलब्धता कैसे सुनिश्चित होगी? ग्रामीण क्षेत्र से आने वाला व्यक्ति किराया, समय और मेहनत खर्च कर कार्यालय पहुंचता है, ऐसे में अधिकारी के अनुपस्थित मिलने पर उसे निराश होकर लौटना पड़ सकता है। महिला एवं बाल विकास विभाग सीधे तौर पर महिलाओं, बच्चों और ग्रामीण क्षेत्र से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण कार्यों से संबंधित है। ऐसे में कार्यालय में अधिकारी की समय पर उपलब्धता और आमजन के कार्यों का सुचारु संचालन आवश्यक माना जाता है। अब देखना यह है कि अतिरिक्त प्रभार के दबाव में चल रही व्यवस्था को लेकर विभागीय स्तर पर कोई ठोस व्यवस्था बनाई जाती है या फिर आम जनता इसी तरह कर्मचारियों के जवाबों और खाली कुर्सी के बीच अपने काम का इंतजार करती रहेगी।

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  • महिला एवं बाल विकास कार्यालय में साहब की कुर्सी खाली, दोपहर 1 बजे तक अधिकारी नदारद कर्मचारियों के भरोसे चल रहा कार्यालय, ग्रामीण अंचल से आने वाली जनता को मिल रहे गोल-मोल जवाब करेरा। महिला एवं बाल विकास विभाग का कार्यालय इन दिनों अपनी कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा में है। सोमवार को दोपहर करीब 1 बजे तक कार्यालय में अधिकारी की कुर्सी खाली नजर आई। अधिकारी के कार्यालय में मौजूद नहीं होने के कारण विभागीय कामकाज कर्मचारियों के भरोसे चलता दिखाई दिया। ग्रामीण क्षेत्रों से अपने काम के सिलसिले में कार्यालय पहुंचे लोगों को अधिकारी के संबंध में जानकारी लेने पर कंप्यूटर ऑपरेटर एवं बाबुओं की ओर से स्पष्ट जानकारी देने के बजाय गोल-मोल जवाब मिलने की बात सामने आई। इससे दूर-दराज से आए ग्रामीणों को अपने काम के लिए इंतजार और परेशानी का सामना करना पड़ा। इसी दौरान एक व्यक्ति द्वारा जब कार्यालय में मौजूद बाबू से पूछा गया कि “साहब कब आते हैं?” तो जवाब मिला कि “जब काम होता है, तभी आते हैं, अन्यथा नहीं।” बाबू द्वारा यह भी बताया गया कि अधिकारी के पास तीन स्थानों का अतिरिक्त कार्यभार है, जिसके चलते समय मिलने पर ही वे कार्यालय में आ पाते हैं। अधिकारी के पास अतिरिक्त प्रभार होना अपनी जगह प्रशासनिक व्यवस्था का विषय है, लेकिन सवाल यह है कि जिस कार्यालय में प्रतिदिन ग्रामीण एवं आमजन अपने आवश्यक कार्यों को लेकर पहुंचते हैं, वहां जिम्मेदार अधिकारी की नियमित उपलब्धता कैसे सुनिश्चित होगी? ग्रामीण क्षेत्र से आने वाला व्यक्ति किराया, समय और मेहनत खर्च कर कार्यालय पहुंचता है, ऐसे में अधिकारी के अनुपस्थित मिलने पर उसे निराश होकर लौटना पड़ सकता है। महिला एवं बाल विकास विभाग सीधे तौर पर महिलाओं, बच्चों और ग्रामीण क्षेत्र से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण कार्यों से संबंधित है। ऐसे में कार्यालय में अधिकारी की समय पर उपलब्धता और आमजन के कार्यों का सुचारु संचालन आवश्यक माना जाता है। अब देखना यह है कि अतिरिक्त प्रभार के दबाव में चल रही व्यवस्था को लेकर विभागीय स्तर पर कोई ठोस व्यवस्था बनाई जाती है या फिर आम जनता इसी तरह कर्मचारियों के जवाबों और खाली कुर्सी के बीच अपने काम का इंतजार करती रहेगी। महिला एवं बाल विकास कार्यालय में साहब की कुर्सी खाली, दोपहर 1 बजे तक अधिकारी नदारद कर्मचारियों के भरोसे चल रहा कार्यालय, ग्रामीण अंचल से आने वाली जनता को मिल रहे गोल-मोल जवाब करेरा। महिला एवं बाल विकास विभाग का कार्यालय इन दिनों अपनी कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा में है। सोमवार को दोपहर करीब 1 बजे तक कार्यालय में अधिकारी की कुर्सी खाली नजर आई। अधिकारी के कार्यालय में मौजूद नहीं होने के कारण विभागीय कामकाज कर्मचारियों के भरोसे चलता दिखाई दिया। ग्रामीण क्षेत्रों से अपने काम के सिलसिले में कार्यालय पहुंचे लोगों को अधिकारी के संबंध में जानकारी लेने पर कंप्यूटर ऑपरेटर एवं बाबुओं की ओर से स्पष्ट जानकारी देने के बजाय गोल-मोल जवाब मिलने की बात सामने आई। इससे दूर-दराज से आए ग्रामीणों को अपने काम के लिए इंतजार और परेशानी का सामना करना पड़ा। इसी दौरान एक व्यक्ति द्वारा जब कार्यालय में मौजूद बाबू से पूछा गया कि “साहब कब आते हैं?” तो जवाब मिला कि “जब काम होता है, तभी आते हैं, अन्यथा नहीं।” बाबू द्वारा यह भी बताया गया कि अधिकारी के पास तीन स्थानों का अतिरिक्त कार्यभार है, जिसके चलते समय मिलने पर ही वे कार्यालय में आ पाते हैं। अधिकारी के पास अतिरिक्त प्रभार होना अपनी जगह प्रशासनिक व्यवस्था का विषय है, लेकिन सवाल यह है कि जिस कार्यालय में प्रतिदिन ग्रामीण एवं आमजन अपने आवश्यक कार्यों को लेकर पहुंचते हैं, वहां जिम्मेदार अधिकारी की नियमित उपलब्धता कैसे सुनिश्चित होगी? ग्रामीण क्षेत्र से आने वाला व्यक्ति किराया, समय और मेहनत खर्च कर कार्यालय पहुंचता है, ऐसे में अधिकारी के अनुपस्थित मिलने पर उसे निराश होकर लौटना पड़ सकता है। महिला एवं बाल विकास विभाग सीधे तौर पर महिलाओं, बच्चों और ग्रामीण क्षेत्र से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण कार्यों से संबंधित है। ऐसे में कार्यालय में अधिकारी की समय पर उपलब्धता और आमजन के कार्यों का सुचारु संचालन आवश्यक माना जाता है। अब देखना यह है कि अतिरिक्त प्रभार के दबाव में चल रही व्यवस्था को लेकर विभागीय स्तर पर कोई ठोस व्यवस्था बनाई जाती है या फिर आम जनता इसी तरह कर्मचारियों के जवाबों और खाली कुर्सी के बीच अपने काम का इंतजार करती रहेगी।
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    महिला एवं बाल विकास कार्यालय में साहब की कुर्सी खाली, दोपहर 1 बजे तक अधिकारी नदारद
कर्मचारियों के भरोसे चल रहा कार्यालय, ग्रामीण अंचल से आने वाली जनता को मिल रहे गोल-मोल जवाब
करेरा। महिला एवं बाल विकास विभाग का कार्यालय इन दिनों अपनी कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा में है। सोमवार को दोपहर करीब 1 बजे तक कार्यालय में अधिकारी की कुर्सी खाली नजर आई। अधिकारी के कार्यालय में मौजूद नहीं होने के कारण विभागीय कामकाज कर्मचारियों के भरोसे चलता दिखाई दिया।
ग्रामीण क्षेत्रों से अपने काम के सिलसिले में कार्यालय पहुंचे लोगों को अधिकारी के संबंध में जानकारी लेने पर कंप्यूटर ऑपरेटर एवं बाबुओं की ओर से स्पष्ट जानकारी देने के बजाय गोल-मोल जवाब मिलने की बात सामने आई। इससे दूर-दराज से आए ग्रामीणों को अपने काम के लिए इंतजार और परेशानी का सामना करना पड़ा।
इसी दौरान एक व्यक्ति द्वारा जब कार्यालय में मौजूद बाबू से पूछा गया कि “साहब कब आते हैं?” तो जवाब मिला कि “जब काम होता है, तभी आते हैं, अन्यथा नहीं।” बाबू द्वारा यह भी बताया गया कि अधिकारी के पास तीन स्थानों का अतिरिक्त कार्यभार है, जिसके चलते समय मिलने पर ही वे कार्यालय में आ पाते हैं।
अधिकारी के पास अतिरिक्त प्रभार होना अपनी जगह प्रशासनिक व्यवस्था का विषय है, लेकिन सवाल यह है कि जिस कार्यालय में प्रतिदिन ग्रामीण एवं आमजन अपने आवश्यक कार्यों को लेकर पहुंचते हैं, वहां जिम्मेदार अधिकारी की नियमित उपलब्धता कैसे सुनिश्चित होगी? ग्रामीण क्षेत्र से आने वाला व्यक्ति किराया, समय और मेहनत खर्च कर कार्यालय पहुंचता है, ऐसे में अधिकारी के अनुपस्थित मिलने पर उसे निराश होकर लौटना पड़ सकता है।
महिला एवं बाल विकास विभाग सीधे तौर पर महिलाओं, बच्चों और ग्रामीण क्षेत्र से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण कार्यों से संबंधित है। ऐसे में कार्यालय में अधिकारी की समय पर उपलब्धता और आमजन के कार्यों का सुचारु संचालन आवश्यक माना जाता है।
अब देखना यह है कि अतिरिक्त प्रभार के दबाव में चल रही व्यवस्था को लेकर विभागीय स्तर पर कोई ठोस व्यवस्था बनाई जाती है या फिर आम जनता इसी तरह कर्मचारियों के जवाबों और खाली कुर्सी के बीच अपने काम का इंतजार करती रहेगी।
महिला एवं बाल विकास कार्यालय में साहब की कुर्सी खाली, दोपहर 1 बजे तक अधिकारी नदारद
कर्मचारियों के भरोसे चल रहा कार्यालय, ग्रामीण अंचल से आने वाली जनता को मिल रहे गोल-मोल जवाब
करेरा। महिला एवं बाल विकास विभाग का कार्यालय इन दिनों अपनी कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा में है। सोमवार को दोपहर करीब 1 बजे तक कार्यालय में अधिकारी की कुर्सी खाली नजर आई। अधिकारी के कार्यालय में मौजूद नहीं होने के कारण विभागीय कामकाज कर्मचारियों के भरोसे चलता दिखाई दिया।
ग्रामीण क्षेत्रों से अपने काम के सिलसिले में कार्यालय पहुंचे लोगों को अधिकारी के संबंध में जानकारी लेने पर कंप्यूटर ऑपरेटर एवं बाबुओं की ओर से स्पष्ट जानकारी देने के बजाय गोल-मोल जवाब मिलने की बात सामने आई। इससे दूर-दराज से आए ग्रामीणों को अपने काम के लिए इंतजार और परेशानी का सामना करना पड़ा।
इसी दौरान एक व्यक्ति द्वारा जब कार्यालय में मौजूद बाबू से पूछा गया कि “साहब कब आते हैं?” तो जवाब मिला कि “जब काम होता है, तभी आते हैं, अन्यथा नहीं।” बाबू द्वारा यह भी बताया गया कि अधिकारी के पास तीन स्थानों का अतिरिक्त कार्यभार है, जिसके चलते समय मिलने पर ही वे कार्यालय में आ पाते हैं।
अधिकारी के पास अतिरिक्त प्रभार होना अपनी जगह प्रशासनिक व्यवस्था का विषय है, लेकिन सवाल यह है कि जिस कार्यालय में प्रतिदिन ग्रामीण एवं आमजन अपने आवश्यक कार्यों को लेकर पहुंचते हैं, वहां जिम्मेदार अधिकारी की नियमित उपलब्धता कैसे सुनिश्चित होगी? ग्रामीण क्षेत्र से आने वाला व्यक्ति किराया, समय और मेहनत खर्च कर कार्यालय पहुंचता है, ऐसे में अधिकारी के अनुपस्थित मिलने पर उसे निराश होकर लौटना पड़ सकता है।
महिला एवं बाल विकास विभाग सीधे तौर पर महिलाओं, बच्चों और ग्रामीण क्षेत्र से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण कार्यों से संबंधित है। ऐसे में कार्यालय में अधिकारी की समय पर उपलब्धता और आमजन के कार्यों का सुचारु संचालन आवश्यक माना जाता है।
अब देखना यह है कि अतिरिक्त प्रभार के दबाव में चल रही व्यवस्था को लेकर विभागीय स्तर पर कोई ठोस व्यवस्था बनाई जाती है या फिर आम जनता इसी तरह कर्मचारियों के जवाबों और खाली कुर्सी के बीच अपने काम का इंतजार करती रहेगी।
    user_जितेंद्र परिहार पत्रकार नरवर
    जितेंद्र परिहार पत्रकार नरवर
    Farmer नरवर, शिवपुरी, मध्य प्रदेश•
    9 hrs ago
  • bhim army ka sher h bhai chandarshekhar ahad jay bhim b
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    bhim army ka sher h bhai chandarshekhar ahad jay bhim b
    user_Ravi jatav
    Ravi jatav
    भितरवार, ग्वालियर, मध्य प्रदेश•
    14 hrs ago
  • शिवपुरी। बैराड़ में कुत्ते का आतंक, 8 से 10 स्कूली बच्चों समेत कई लोगों को काटा, तीन गंभीर घायलों को किया रेफर। शिवपुरी। बैराड़ में कुत्ते का आतंक, 8 से 10 स्कूली बच्चों समेत कई लोगों को काटा, तीन गंभीर घायलों को किया रेफर।
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    शिवपुरी। बैराड़ में कुत्ते का आतंक, 8 से 10 स्कूली बच्चों समेत कई लोगों को काटा, तीन गंभीर घायलों को किया रेफर।
शिवपुरी। बैराड़ में कुत्ते का आतंक, 8 से 10 स्कूली बच्चों समेत कई लोगों को काटा, तीन गंभीर घायलों को किया रेफर।
    user_Patarkar Shailendra dhakad
    Patarkar Shailendra dhakad
    शिवपुरी, शिवपुरी, मध्य प्रदेश•
    26 min ago
  • शिवपुरी रेलवे स्टेशन का नया अचतार: अमूत भारत योजनाके तहत आाधनिक सुविधारओं से लैस स्टेशन का लोकार्पण
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    शिवपुरी रेलवे स्टेशन का नया अचतार: अमूत भारत योजनाके तहत आाधनिक सुविधारओं से लैस स्टेशन का लोकार्पण
    user_उमाशंकर कुशवाहा
    उमाशंकर कुशवाहा
    Local News Reporter शिवपुरी, शिवपुरी, मध्य प्रदेश•
    4 hrs ago
  • बैराड़ में धूमधाम से निकली बाबा भोलेनाथ की सवारी, गूंजे हर-हर महादेव के जयकारे बैराड़ (शिवपुरी): शिवपुरी जिले के बैराड़ नगर में आज श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला। सावन मास के पावन अवसर पर बैराड़ नगर परिषद क्षेत्र में बाबा भोलेनाथ की भव्य सवारी निकाली गई। इस धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में शिव भक्तों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त किया। भव्य डीजे और बैंड: सवारी के दौरान गूंजते धार्मिक भजनों और डीजे-बैंड की धुनों पर भक्त झूमते नजर आए। शिवमय माहौल: पूरे बैराड़ नगर में "हर-हर महादेव" और "बम-बम भोले" के जयकारों से पूरा वातावरण गूंज उठा। जगह-जगह स्वागत: मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं द्वारा बाबा भोलेनाथ की सवारी का पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया। शांतिपूर्ण और भव्य रूप से संपन्न हुए इस आयोजन ने पूरे नगर को शिव की भक्ति में सराबोर कर दिया। सुरक्षा और व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए स्थानीय पुलिस प्रशासन मुस्तैद नजर आए।
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    बैराड़ में धूमधाम से निकली बाबा भोलेनाथ की सवारी, गूंजे हर-हर महादेव के जयकारे
बैराड़ (शिवपुरी):
शिवपुरी जिले के बैराड़ नगर में आज श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला। सावन मास के पावन अवसर पर बैराड़ नगर परिषद क्षेत्र में बाबा भोलेनाथ की भव्य सवारी निकाली गई। इस धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में शिव भक्तों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त किया।

भव्य डीजे और बैंड: सवारी के दौरान गूंजते धार्मिक भजनों और डीजे-बैंड की धुनों पर भक्त झूमते नजर आए।
शिवमय माहौल: पूरे बैराड़ नगर में "हर-हर महादेव" और "बम-बम भोले" के जयकारों से पूरा वातावरण गूंज उठा।
जगह-जगह स्वागत: मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं द्वारा बाबा भोलेनाथ की सवारी का पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया।
शांतिपूर्ण और भव्य रूप से संपन्न हुए इस आयोजन ने पूरे नगर को शिव की भक्ति में सराबोर कर दिया। सुरक्षा और व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए स्थानीय पुलिस प्रशासन मुस्तैद नजर आए।
    user_Anuj balothiya
    Anuj balothiya
    Local News Reporter शिवपुरी नगर, शिवपुरी, मध्य प्रदेश•
    6 hrs ago
  • झांसी की जा जनता बोली अब चाहने बदलाव- रवि शर्मा विधायक वोट लेवे आत फिर भूल जात* *MBKS न्यूज़ नेटवर्क* * लोकेश मिश्रा बुंदेली* * *झांसी की जा जनता बोली अब चाहने बदलाव- रवि शर्मा विधायक वोट लेवे आत फिर भूल जात* *MBKS न्यूज़ नेटवर्क* * लोकेश मिश्रा बुंदेली*
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    झांसी की जा जनता बोली अब चाहने बदलाव- रवि शर्मा विधायक वोट लेवे आत फिर भूल जात*

    *MBKS न्यूज़ नेटवर्क*
     * लोकेश मिश्रा बुंदेली*
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*झांसी की जा जनता बोली अब चाहने बदलाव- रवि शर्मा विधायक वोट लेवे आत फिर भूल जात*
*MBKS न्यूज़ नेटवर्क*
* लोकेश मिश्रा बुंदेली*
    user_MBKS डिजिटल न्यूज़
    MBKS डिजिटल न्यूज़
    Newspaper publisher दतिया नगर, दतिया, मध्य प्रदेश•
    56 min ago
  • यह वीडियो ग्राम पंचायत छितरी कि वताई जा रही है जो 15 अगस्त कि है अब बताईये कि इन बच्चो बुजुर्गों एवं महिलाओं के लिए आज दिनांक तक एक स्वतंत्र रास्था नहीं है । और वहां के जिम्मेदार सरपंच सचिव के लिए वड़ी शर्म कि वात है .... । यह वीडियो ग्राम पंचायत छितरी कि वताई जा रही है जो 15 अगस्त कि है अब बताईये कि इन बच्चो बुजुर्गों एवं महिलाओं के लिए आज दिनांक तक एक स्वतंत्र रास्था नहीं है । और वहां के जिम्मेदार सरपंच सचिव के लिए वड़ी शर्म कि वात है .... ।
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    यह वीडियो ग्राम पंचायत छितरी कि वताई जा रही है जो 15 अगस्त कि है अब बताईये कि इन बच्चो बुजुर्गों एवं महिलाओं के लिए आज दिनांक तक एक स्वतंत्र रास्था नहीं है । और वहां के जिम्मेदार सरपंच सचिव के लिए वड़ी शर्म कि वात है .... ।
यह वीडियो ग्राम पंचायत छितरी कि वताई जा रही है जो 15 अगस्त कि है अब बताईये कि इन बच्चो बुजुर्गों एवं महिलाओं के लिए आज दिनांक तक एक स्वतंत्र रास्था नहीं है । और वहां के जिम्मेदार सरपंच सचिव के लिए वड़ी शर्म कि वात है .... ।
    user_जितेंद्र परिहार पत्रकार नरवर
    जितेंद्र परिहार पत्रकार नरवर
    Farmer नरवर, शिवपुरी, मध्य प्रदेश•
    17 hrs ago
  • बैराड़ में आवारा कुत्तों का आतंक, 8-10 लोगों को काटा! बैराड़। शिवपुरी जिले के बैराड़ क्षेत्र में सोमवार को आवारा कुत्तों के आतंक से लोगों में दहशत का माहौल बन गया। जानकारी के अनुसार, अलग-अलग घटनाओं में आवारा कुत्तों ने करीब 8 से 10 लोगों को काटकर घायल कर दिया। बताया जा रहा है कि एक युवक को चलती बाइक पर ही आवारा कुत्ते ने काट लिया, जिससे वह घायल हो गया। कुत्तों के हमले के बाद घायलों की अस्पताल में भीड़ लग गई। वहीं, उपचार के लिए पहुंचे लोगों को उस समय परेशानी का सामना करना पड़ा, जब स्वास्थ्य केंद्र में एंटी-रेबीज इंजेक्शन उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई। इसके चलते मरीजों और उनके परिजनों में नाराजगी देखने को मिली। जानकारी के मुताबिक, दो गंभीर घायलों को बेहतर उपचार के लिए शिवपुरी जिला अस्पताल रेफर किया गया। लगातार हो रहे कुत्तों के हमलों के बाद स्थानीय लोगों ने आवारा कुत्तों को पकड़ने और समस्या से निजात दिलाने के लिए प्रशासन से प्रभावी कार्रवाई की मांग की है। अब सवाल यह है कि जब एक ही दिन में इतने लोगों को कुत्तों ने काट लिया, तो आवारा कुत्तों की समस्या पर जिम्मेदार विभाग कब गंभीर कार्रवाई करेगा? बैराड़ में आवारा कुत्तों का आतंक, 8-10 लोगों को काटा! बैराड़। शिवपुरी जिले के बैराड़ क्षेत्र में सोमवार को आवारा कुत्तों के आतंक से लोगों में दहशत का माहौल बन गया। जानकारी के अनुसार, अलग-अलग घटनाओं में आवारा कुत्तों ने करीब 8 से 10 लोगों को काटकर घायल कर दिया। बताया जा रहा है कि एक युवक को चलती बाइक पर ही आवारा कुत्ते ने काट लिया, जिससे वह घायल हो गया। कुत्तों के हमले के बाद घायलों की अस्पताल में भीड़ लग गई। वहीं, उपचार के लिए पहुंचे लोगों को उस समय परेशानी का सामना करना पड़ा, जब स्वास्थ्य केंद्र में एंटी-रेबीज इंजेक्शन उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई। इसके चलते मरीजों और उनके परिजनों में नाराजगी देखने को मिली। जानकारी के मुताबिक, दो गंभीर घायलों को बेहतर उपचार के लिए शिवपुरी जिला अस्पताल रेफर किया गया। लगातार हो रहे कुत्तों के हमलों के बाद स्थानीय लोगों ने आवारा कुत्तों को पकड़ने और समस्या से निजात दिलाने के लिए प्रशासन से प्रभावी कार्रवाई की मांग की है। अब सवाल यह है कि जब एक ही दिन में इतने लोगों को कुत्तों ने काट लिया, तो आवारा कुत्तों की समस्या पर जिम्मेदार विभाग कब गंभीर कार्रवाई करेगा?
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    बैराड़ में आवारा कुत्तों का आतंक, 8-10 लोगों को काटा!

बैराड़। शिवपुरी जिले के बैराड़ क्षेत्र में सोमवार को आवारा कुत्तों के आतंक से लोगों में दहशत का माहौल बन गया। जानकारी के अनुसार, अलग-अलग घटनाओं में आवारा कुत्तों ने करीब 8 से 10 लोगों को काटकर घायल कर दिया।

बताया जा रहा है कि एक युवक को चलती बाइक पर ही आवारा कुत्ते ने काट लिया, जिससे वह घायल हो गया। कुत्तों के हमले के बाद घायलों की अस्पताल में भीड़ लग गई।

वहीं, उपचार के लिए पहुंचे लोगों को उस समय परेशानी का सामना करना पड़ा, जब स्वास्थ्य केंद्र में एंटी-रेबीज इंजेक्शन उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई। इसके चलते मरीजों और उनके परिजनों में नाराजगी देखने को मिली।

जानकारी के मुताबिक, दो गंभीर घायलों को बेहतर उपचार के लिए शिवपुरी जिला अस्पताल रेफर किया गया। लगातार हो रहे कुत्तों के हमलों के बाद स्थानीय लोगों ने आवारा कुत्तों को पकड़ने और समस्या से निजात दिलाने के लिए प्रशासन से प्रभावी कार्रवाई की मांग की है।

अब सवाल यह है कि जब एक ही दिन में इतने लोगों को कुत्तों ने काट लिया, तो आवारा कुत्तों की समस्या पर जिम्मेदार विभाग कब गंभीर कार्रवाई करेगा?


बैराड़ में आवारा कुत्तों का आतंक, 8-10 लोगों को काटा!
बैराड़। शिवपुरी जिले के बैराड़ क्षेत्र में सोमवार को आवारा कुत्तों के आतंक से लोगों में दहशत का माहौल बन गया। जानकारी के अनुसार, अलग-अलग घटनाओं में आवारा कुत्तों ने करीब 8 से 10 लोगों को काटकर घायल कर दिया।
बताया जा रहा है कि एक युवक को चलती बाइक पर ही आवारा कुत्ते ने काट लिया, जिससे वह घायल हो गया। कुत्तों के हमले के बाद घायलों की अस्पताल में भीड़ लग गई।
वहीं, उपचार के लिए पहुंचे लोगों को उस समय परेशानी का सामना करना पड़ा, जब स्वास्थ्य केंद्र में एंटी-रेबीज इंजेक्शन उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई। इसके चलते मरीजों और उनके परिजनों में नाराजगी देखने को मिली।
जानकारी के मुताबिक, दो गंभीर घायलों को बेहतर उपचार के लिए शिवपुरी जिला अस्पताल रेफर किया गया। लगातार हो रहे कुत्तों के हमलों के बाद स्थानीय लोगों ने आवारा कुत्तों को पकड़ने और समस्या से निजात दिलाने के लिए प्रशासन से प्रभावी कार्रवाई की मांग की है।
अब सवाल यह है कि जब एक ही दिन में इतने लोगों को कुत्तों ने काट लिया, तो आवारा कुत्तों की समस्या पर जिम्मेदार विभाग कब गंभीर कार्रवाई करेगा?
    user_Ram Manohar Mishra
    Ram Manohar Mishra
    करेरा, शिवपुरी, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
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