चारों तरफ पानी ऊपर खुला आसमान, नीचे बाढ़: ड्रम के सहारे बाहर निकलने को मजबूर ग्रामीण मधेपुरा के आलमनगर की वो हकीकत है, जहां जिंदगी और पानी के बीच सिर्फ बांस की मचान और ड्रम का सहारा बचा है।घर में पानी,आंगन में पानी,रास्ते में पानी,बाहर निकलना है तो नाव का इंतजार करें या फिर खुद ही जुगाड़ करें।कहीं लोग बांस-बल्ले की मचान बनाकर पानी के ऊपर रह रहे हैं, तो कहीं खाली ड्रम को बांधकर उसके सहारे पानी पार कर बाहर निकल रहे हैं।सोचिए जिस ड्रम का इस्तेमाल सामान रखने के लिए होता है, वही यहां लोगों के लिए नाव बन गया है।नीचे बाढ़ का पानी है,ऊपर खुला आसमान है और इसी पानी में सांपों का डर भी बना हुआ है।ये तस्वीरें बताती हैं कि कोसी का पानी सिर्फ गांव में नहीं घुसा,लोगों की जिंदगी के अंदर तक घुस चुका है। दरअसल लगातार मूसलाधार बारिश और कोसी नदी के बढ़ते जलस्तर ने मधेपुरा के आलमनगर प्रखंड में हालात बिगाड़ दिए हैं।खापुर, रतवारा, गंगापुर और इटहरी पंचायत के कई गांव बाढ़ की चपेट में हैं। कई घरों में पानी घुस चुका है। लोग अपना घर छोड़कर ऊंचे स्थानों पर जाने को मजबूर हैं।लेकिन जहां नाव नहीं पहुंच पा रही या बाहर निकलने का कोई दूसरा रास्ता नहीं है, वहां ग्रामीणों ने खुद ही ड्रम का जुगाड़ कर लिया है।कई जगह ड्रम को आपस में बांधकर उसके ऊपर लकड़ी या तख्ता लगाकर पानी पार करने का इंतजाम किया गया है।यानी जरूरत ने यहां लोगों को अपना खुद का रास्ता बनाने पर मजबूर कर दिया है। बाइट- बाढ़ पीड़ित घर चारों तरफ से पानी में घिरा हुआ है। बाहर जाना हो तो ड्रम का जुगाड़ करके पानी पार करना पड़ता है। बच्चों और महिलाओं को लेकर हमेशा डर लगा रहता है। पानी में सांप भी निकलते हैं। ये तस्वीरें जितनी डरावनी हैं, उससे कहीं ज्यादा दर्दनाक है यहां रहने वाले लोगों की मजबूरी। किसी को दवा लेने जाना है।किसी को जरूरी सामान लाना है,किसी को अपने रिश्तेदार तक पहुंचना है लेकिन रास्ते में सड़क नहीं, सिर्फ पानी है।ऐसे में नाव मिले तो ठीक नहीं तो ड्रम ही सहारा है।और दूसरी तरफ घरों के आसपास बाढ़ के पानी में सांप निकलने का खतरा लोगों की चिंता और बढ़ा रहा है। बाढ़ का असर सिर्फ आने-जाने तक सीमित नहीं है। पशुपालकों के सामने पशुचारे का संकट खड़ा हो गया है। खेत और चारा क्षेत्र पानी में डूब गए हैं। ऐसे में ग्रामीण अपने मवेशियों को लेकर ऊंचे स्थानों पर शरण ले रहे हैं।कई परिवारों के लिए सवाल सिर्फ खुद को बचाने का नहीं है।बल्कि उन मवेशियों को बचाने का भी है, जिन पर उनकी रोजी-रोटी टिकी है। रतवारा पंचायत के कपसिया, ललिया पुनर्वास, सुखार घाट, अजमेरीपुर वासा, छतौना बासा, रतवारा, मूल मुरौत, भवानीपुर वासा, विस्थापित मुरौत, विस्थापित महादलित टोला और विस्थापित निषाद टोला समेत कई इलाके प्रभावित हैं। खापुर पंचायत के चौरली बासा, रायपुर बासा, खापुर, औराय बासा, दुकठिया और पचभीरा में भी पानी फैल गया है। गंगापुर पंचायत के पिपरपाती टोला, पैकात टोला, नोनिया चक टोला, कोलवारा टोला, भोरकाट टोला, मलहा बासा, कचहरी टोला, मुसहरी टोला, डॉक्टर टोला, अठगामा, कुम्हारा बासा, हरजौरा घाट, खरुवा बासा, झंडापुर बासा, बलुआ बासा, पौड़ा टोला, मुनी टोला, श्रवन्नी बासा और नवटोलिया समेत कई गांव बाढ़ की चपेट में हैं।ग्रामीणों के मुताबिक एक लाख से ज्यादा की आबादी इससे प्रभावित है। कई दिनों से पानी बढ़ रहा है। घर में रहना मुश्किल है। खाने की परेशानी है और मवेशियों के चारे की भी दिक्कत है। बाहर जाना पड़ता है तो ड्रम का सहारा लेते हैं। अभी तक सूखा राशन नहीं मिला है। बाढ़ के बीच ग्रामीणों में नाराजगी भी बढ़ रही है।ग्रामीणों का कहना है कि वे कई दिनों से पानी में फंसे हैं और अब उन्हें भोजन, पशुचारा और सुरक्षित जगह की जरूरत है। वहीं प्रशासन का कहना है कि राहत और बचाव के लिए लगातार काम किया जा रहा है। अंचलाधिकारी अंकेश कुमार के मुताबिक प्रभावित क्षेत्र में 42 नावों का परिचालन हो रहा है। बाढ़ प्रभावित गांवों में मेडिकल टीम भेजी जा रही है। SDRF की एक टीम दो नावों के साथ लगातार इलाके में मौजूद है।इसके अलावा प्रत्येक बाढ़ प्रभावित पंचायत में 14 आपदा मित्रों को स्टैंडबाय रखा गया है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 42 नावों का परिचालन हो रहा है। मेडिकल टीम के द्वारा स्वास्थ्य सुविधा दी जा रही है। SDRF की टीम दो नावों के साथ मौजूद है और प्रत्येक बाढ़ प्रभावित पंचायत में 14 आपदा मित्रों को स्टैंडबाय रखा गया है। मधेपुरा में कोसी का पानी लगातार बढ़ रहा है। हालात ये हैं कि लोग ड्रम को नाव बनाकर पानी पार कर रहे हैं और बांस की मचान को घर। प्रशासन के राहत और बचाव के दावे अपनी जगह हैं, लेकिन जमीन पर बाढ़ पीड़ितों की परेशानी साफ दिखाई दे रही है। कोसी के पानी ने रास्ते डुबो दिए हैं।
चारों तरफ पानी ऊपर खुला आसमान, नीचे बाढ़: ड्रम के सहारे बाहर निकलने को मजबूर ग्रामीण मधेपुरा के आलमनगर की वो हकीकत है, जहां जिंदगी और पानी के बीच सिर्फ बांस की मचान और ड्रम का सहारा बचा है।घर में पानी,आंगन में पानी,रास्ते में पानी,बाहर निकलना है तो नाव का इंतजार करें या फिर खुद ही जुगाड़ करें।कहीं लोग बांस-बल्ले की मचान बनाकर पानी के ऊपर रह रहे हैं, तो कहीं खाली ड्रम को बांधकर उसके सहारे पानी पार कर बाहर निकल रहे हैं।सोचिए जिस ड्रम का इस्तेमाल सामान रखने के लिए होता है, वही यहां लोगों के लिए नाव बन गया है।नीचे बाढ़ का पानी है,ऊपर खुला आसमान है और इसी पानी में सांपों का डर भी बना हुआ है।ये तस्वीरें बताती हैं कि कोसी का पानी सिर्फ गांव में नहीं घुसा,लोगों की जिंदगी के अंदर तक घुस चुका है। दरअसल लगातार मूसलाधार बारिश और कोसी नदी के बढ़ते जलस्तर ने मधेपुरा के आलमनगर प्रखंड में हालात बिगाड़ दिए हैं।खापुर, रतवारा, गंगापुर और इटहरी पंचायत के कई गांव बाढ़ की चपेट में हैं। कई घरों में पानी घुस चुका है। लोग अपना घर छोड़कर ऊंचे स्थानों पर जाने को मजबूर हैं।लेकिन जहां नाव नहीं
पहुंच पा रही या बाहर निकलने का कोई दूसरा रास्ता नहीं है, वहां ग्रामीणों ने खुद ही ड्रम का जुगाड़ कर लिया है।कई जगह ड्रम को आपस में बांधकर उसके ऊपर लकड़ी या तख्ता लगाकर पानी पार करने का इंतजाम किया गया है।यानी जरूरत ने यहां लोगों को अपना खुद का रास्ता बनाने पर मजबूर कर दिया है। बाइट- बाढ़ पीड़ित घर चारों तरफ से पानी में घिरा हुआ है। बाहर जाना हो तो ड्रम का जुगाड़ करके पानी पार करना पड़ता है। बच्चों और महिलाओं को लेकर हमेशा डर लगा रहता है। पानी में सांप भी निकलते हैं। ये तस्वीरें जितनी डरावनी हैं, उससे कहीं ज्यादा दर्दनाक है यहां रहने वाले लोगों की मजबूरी। किसी को दवा लेने जाना है।किसी को जरूरी सामान लाना है,किसी को अपने रिश्तेदार तक पहुंचना है लेकिन रास्ते में सड़क नहीं, सिर्फ पानी है।ऐसे में नाव मिले तो ठीक नहीं तो ड्रम ही सहारा है।और दूसरी तरफ घरों के आसपास बाढ़ के पानी में सांप निकलने का खतरा लोगों की चिंता और बढ़ा रहा है। बाढ़ का असर सिर्फ आने-जाने तक सीमित नहीं है। पशुपालकों के सामने पशुचारे का संकट खड़ा हो गया है। खेत और चारा क्षेत्र पानी में डूब गए हैं।
ऐसे में ग्रामीण अपने मवेशियों को लेकर ऊंचे स्थानों पर शरण ले रहे हैं।कई परिवारों के लिए सवाल सिर्फ खुद को बचाने का नहीं है।बल्कि उन मवेशियों को बचाने का भी है, जिन पर उनकी रोजी-रोटी टिकी है। रतवारा पंचायत के कपसिया, ललिया पुनर्वास, सुखार घाट, अजमेरीपुर वासा, छतौना बासा, रतवारा, मूल मुरौत, भवानीपुर वासा, विस्थापित मुरौत, विस्थापित महादलित टोला और विस्थापित निषाद टोला समेत कई इलाके प्रभावित हैं। खापुर पंचायत के चौरली बासा, रायपुर बासा, खापुर, औराय बासा, दुकठिया और पचभीरा में भी पानी फैल गया है। गंगापुर पंचायत के पिपरपाती टोला, पैकात टोला, नोनिया चक टोला, कोलवारा टोला, भोरकाट टोला, मलहा बासा, कचहरी टोला, मुसहरी टोला, डॉक्टर टोला, अठगामा, कुम्हारा बासा, हरजौरा घाट, खरुवा बासा, झंडापुर बासा, बलुआ बासा, पौड़ा टोला, मुनी टोला, श्रवन्नी बासा और नवटोलिया समेत कई गांव बाढ़ की चपेट में हैं।ग्रामीणों के मुताबिक एक लाख से ज्यादा की आबादी इससे प्रभावित है। कई दिनों से पानी बढ़ रहा है। घर में रहना मुश्किल है। खाने की परेशानी है और मवेशियों के चारे की भी दिक्कत है। बाहर जाना पड़ता है तो ड्रम का सहारा लेते हैं। अभी तक सूखा राशन नहीं मिला है। बाढ़ के बीच ग्रामीणों में नाराजगी भी बढ़
रही है।ग्रामीणों का कहना है कि वे कई दिनों से पानी में फंसे हैं और अब उन्हें भोजन, पशुचारा और सुरक्षित जगह की जरूरत है। वहीं प्रशासन का कहना है कि राहत और बचाव के लिए लगातार काम किया जा रहा है। अंचलाधिकारी अंकेश कुमार के मुताबिक प्रभावित क्षेत्र में 42 नावों का परिचालन हो रहा है। बाढ़ प्रभावित गांवों में मेडिकल टीम भेजी जा रही है। SDRF की एक टीम दो नावों के साथ लगातार इलाके में मौजूद है।इसके अलावा प्रत्येक बाढ़ प्रभावित पंचायत में 14 आपदा मित्रों को स्टैंडबाय रखा गया है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 42 नावों का परिचालन हो रहा है। मेडिकल टीम के द्वारा स्वास्थ्य सुविधा दी जा रही है। SDRF की टीम दो नावों के साथ मौजूद है और प्रत्येक बाढ़ प्रभावित पंचायत में 14 आपदा मित्रों को स्टैंडबाय रखा गया है। मधेपुरा में कोसी का पानी लगातार बढ़ रहा है। हालात ये हैं कि लोग ड्रम को नाव बनाकर पानी पार कर रहे हैं और बांस की मचान को घर। प्रशासन के राहत और बचाव के दावे अपनी जगह हैं, लेकिन जमीन पर बाढ़ पीड़ितों की परेशानी साफ दिखाई दे रही है। कोसी के पानी ने रास्ते डुबो दिए हैं।
- चारों तरफ पानी ऊपर खुला आसमान, नीचे बाढ़: ड्रम के सहारे बाहर निकलने को मजबूर ग्रामीण मधेपुरा के आलमनगर की वो हकीकत है, जहां जिंदगी और पानी के बीच सिर्फ बांस की मचान और ड्रम का सहारा बचा है।घर में पानी,आंगन में पानी,रास्ते में पानी,बाहर निकलना है तो नाव का इंतजार करें या फिर खुद ही जुगाड़ करें।कहीं लोग बांस-बल्ले की मचान बनाकर पानी के ऊपर रह रहे हैं, तो कहीं खाली ड्रम को बांधकर उसके सहारे पानी पार कर बाहर निकल रहे हैं।सोचिए जिस ड्रम का इस्तेमाल सामान रखने के लिए होता है, वही यहां लोगों के लिए नाव बन गया है।नीचे बाढ़ का पानी है,ऊपर खुला आसमान है और इसी पानी में सांपों का डर भी बना हुआ है।ये तस्वीरें बताती हैं कि कोसी का पानी सिर्फ गांव में नहीं घुसा,लोगों की जिंदगी के अंदर तक घुस चुका है। दरअसल लगातार मूसलाधार बारिश और कोसी नदी के बढ़ते जलस्तर ने मधेपुरा के आलमनगर प्रखंड में हालात बिगाड़ दिए हैं।खापुर, रतवारा, गंगापुर और इटहरी पंचायत के कई गांव बाढ़ की चपेट में हैं। कई घरों में पानी घुस चुका है। लोग अपना घर छोड़कर ऊंचे स्थानों पर जाने को मजबूर हैं।लेकिन जहां नाव नहीं पहुंच पा रही या बाहर निकलने का कोई दूसरा रास्ता नहीं है, वहां ग्रामीणों ने खुद ही ड्रम का जुगाड़ कर लिया है।कई जगह ड्रम को आपस में बांधकर उसके ऊपर लकड़ी या तख्ता लगाकर पानी पार करने का इंतजाम किया गया है।यानी जरूरत ने यहां लोगों को अपना खुद का रास्ता बनाने पर मजबूर कर दिया है। बाइट- बाढ़ पीड़ित घर चारों तरफ से पानी में घिरा हुआ है। बाहर जाना हो तो ड्रम का जुगाड़ करके पानी पार करना पड़ता है। बच्चों और महिलाओं को लेकर हमेशा डर लगा रहता है। पानी में सांप भी निकलते हैं। ये तस्वीरें जितनी डरावनी हैं, उससे कहीं ज्यादा दर्दनाक है यहां रहने वाले लोगों की मजबूरी। किसी को दवा लेने जाना है।किसी को जरूरी सामान लाना है,किसी को अपने रिश्तेदार तक पहुंचना है लेकिन रास्ते में सड़क नहीं, सिर्फ पानी है।ऐसे में नाव मिले तो ठीक नहीं तो ड्रम ही सहारा है।और दूसरी तरफ घरों के आसपास बाढ़ के पानी में सांप निकलने का खतरा लोगों की चिंता और बढ़ा रहा है। बाढ़ का असर सिर्फ आने-जाने तक सीमित नहीं है। पशुपालकों के सामने पशुचारे का संकट खड़ा हो गया है। खेत और चारा क्षेत्र पानी में डूब गए हैं। ऐसे में ग्रामीण अपने मवेशियों को लेकर ऊंचे स्थानों पर शरण ले रहे हैं।कई परिवारों के लिए सवाल सिर्फ खुद को बचाने का नहीं है।बल्कि उन मवेशियों को बचाने का भी है, जिन पर उनकी रोजी-रोटी टिकी है। रतवारा पंचायत के कपसिया, ललिया पुनर्वास, सुखार घाट, अजमेरीपुर वासा, छतौना बासा, रतवारा, मूल मुरौत, भवानीपुर वासा, विस्थापित मुरौत, विस्थापित महादलित टोला और विस्थापित निषाद टोला समेत कई इलाके प्रभावित हैं। खापुर पंचायत के चौरली बासा, रायपुर बासा, खापुर, औराय बासा, दुकठिया और पचभीरा में भी पानी फैल गया है। गंगापुर पंचायत के पिपरपाती टोला, पैकात टोला, नोनिया चक टोला, कोलवारा टोला, भोरकाट टोला, मलहा बासा, कचहरी टोला, मुसहरी टोला, डॉक्टर टोला, अठगामा, कुम्हारा बासा, हरजौरा घाट, खरुवा बासा, झंडापुर बासा, बलुआ बासा, पौड़ा टोला, मुनी टोला, श्रवन्नी बासा और नवटोलिया समेत कई गांव बाढ़ की चपेट में हैं।ग्रामीणों के मुताबिक एक लाख से ज्यादा की आबादी इससे प्रभावित है। कई दिनों से पानी बढ़ रहा है। घर में रहना मुश्किल है। खाने की परेशानी है और मवेशियों के चारे की भी दिक्कत है। बाहर जाना पड़ता है तो ड्रम का सहारा लेते हैं। अभी तक सूखा राशन नहीं मिला है। बाढ़ के बीच ग्रामीणों में नाराजगी भी बढ़ रही है।ग्रामीणों का कहना है कि वे कई दिनों से पानी में फंसे हैं और अब उन्हें भोजन, पशुचारा और सुरक्षित जगह की जरूरत है। वहीं प्रशासन का कहना है कि राहत और बचाव के लिए लगातार काम किया जा रहा है। अंचलाधिकारी अंकेश कुमार के मुताबिक प्रभावित क्षेत्र में 42 नावों का परिचालन हो रहा है। बाढ़ प्रभावित गांवों में मेडिकल टीम भेजी जा रही है। SDRF की एक टीम दो नावों के साथ लगातार इलाके में मौजूद है।इसके अलावा प्रत्येक बाढ़ प्रभावित पंचायत में 14 आपदा मित्रों को स्टैंडबाय रखा गया है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 42 नावों का परिचालन हो रहा है। मेडिकल टीम के द्वारा स्वास्थ्य सुविधा दी जा रही है। SDRF की टीम दो नावों के साथ मौजूद है और प्रत्येक बाढ़ प्रभावित पंचायत में 14 आपदा मित्रों को स्टैंडबाय रखा गया है। मधेपुरा में कोसी का पानी लगातार बढ़ रहा है। हालात ये हैं कि लोग ड्रम को नाव बनाकर पानी पार कर रहे हैं और बांस की मचान को घर। प्रशासन के राहत और बचाव के दावे अपनी जगह हैं, लेकिन जमीन पर बाढ़ पीड़ितों की परेशानी साफ दिखाई दे रही है। कोसी के पानी ने रास्ते डुबो दिए हैं।4
- सड़क मार्ग पर जल जमाव की समस्या से निजात दिलाने की लोगों ने उठाया मांग सौर बाजार प्रखंड क्षेत्र के रोता पंचायत अंतर्गत वार्ड नंबर 1 चिकनी गांव में बारिश के बाद मुख्य सड़क मार्ग पर जल जमाव की स्थिति पैदा हो गई है जिससे लोगों को आवागमन में भारी परेशानी होती है। इसको लेकर स्थानीय लोगों ने बताया की जहां पर जलजमाव की स्थिति बनी हुई है वहां सड़क मार्ग में कई गड्ढे बन गया है जिससे आने जाने के दौरान दो पहिया वाहन चालक दुर्घटना के शिकार हो जाते हैं और अगर कोई ई रिक्शा चालक गुजरता है तो वे भी कई बार पलटने से बच गया है। ऐसे स्थिति में जल निकासी का कोई व्यवस्था होना चाहिए या सड़क मार्ग का मरम्मत कार्य किया जाना चाहिए ताकि लोगों को आवागमन में सुविधा मिल सके। जब जब बारिश होती है तब तब भारी समस्या उत्पन्न हो जाती है। ऐसे गंभीर समस्या से निजात दिलाने हेतु प्रशासन से मांग उठाया है।1
- छातापुर:पूर्णिया के भट्टा बाजार कालीबाड़ी चौक के पास रात करीब 2 बजे दुकानों पर बुल्डोजर चलने का मामला सामने आया था। अब इस मामले में जमीन मालिक डॉ. एस.एस. प्रसाद खुद सामने आए हैं और वीडियो बनाकर पूरे मामले की जानकारी दी है। #Purnea #Purnia #PurneaNews #BiharNews #KalibariChowk #BhattaBazar #BulldozerAction #PurneaNewsUpdate #ViralNews #BreakingNews #BiharNews #LocalNews छातापुर:पूर्णिया के भट्टा बाजार कालीबाड़ी चौक के पास रात करीब 2 बजे दुकानों पर बुल्डोजर चलने का मामला सामने आया था। अब इस मामले में जमीन मालिक डॉ. एस.एस. प्रसाद खुद सामने आए हैं और वीडियो बनाकर पूरे मामले की जानकारी दी है। #Purnea #Purnia #PurneaNews #BiharNews #KalibariChowk #BhattaBazar #BulldozerAction #PurneaNewsUpdate #ViralNews #BreakingNews #BiharNews #LocalNews1
- महिषी, एक संवाददाता। 162 फीट लंबे विशाल कांवर की विधिवत पूजा-अर्चना कर उसे राजघाट, मुंगेर के लिए रवाना किया गया1
- पूर्णिया यूनिवर्सिटी के छात्र पर जानलेवा हमला: समाजसेवी व व्यवसायी परिवार पर रची गई गहरी साजिश, पुलिस से न्याय और सुरक्षा की गुहार। पूर्णिया / बनमनखी: पूर्णिया जिले के बनमनखी प्रखण्ड अंतर्गत महराजगंज पंचायत से एक अत्यंत सनसनीखेज और गंभीर मामला सामने आया है, जहाँ पूर्णिया यूनिवर्सिटी के एक छात्र पर परीक्षा देकर घर लौट रहे छात्र पर तीन अज्ञात नकाबपोश अपराधियों द्वारा जानलेवा हमला किया गया है। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है और पीड़ित परिवार गहरे खौफ के साये में जीने को मजबूर है। घटना का विस्तृत विवरण: प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़ित छात्र मो. नासिर शफ़ी (पिता - श्री शफ़ी अहमद), जो B.N.C. कॉलेज धमदाहा से अपनी C.B.C.S. Sem-VI की परीक्षा देकर दिनांक 09 सितम्बर 2026 की शाम करीब 6:00 बजे अपनी मोटरसाइकिल से अकेले घर वापस लौट रहे थे। तभी बिरवान के समीप हसनपुर-जोगीगंज पुल के पास एक नीले रंग की अपाचे (Apache) बाइक पर सवार तीन अज्ञात नकाबपोश बदमाशों ने उनका पीछा किया। बदमाशों ने रुकने का दबाव बनाते हुए जानलेवा हमला और छिनतई करने की नीयत से उनपर धावा बोल दिया। सूझबूझ दिखाते हुए छात्र ने तुरंत अपनी गाड़ी घुमाई और किसी तरह अपनी जान बचाकर वहाँ से भागे। सुरक्षित घर पहुँचने के बाद छात्र ने शाम 6:14 बजे ही 112 नंबर पर कॉल कर पुलिस को पूरी घटना की सूचना दी। व्यवसायी और समाजसेवी परिवार को डराने की गहरी साजिश: सूत्रों और परिवार से मिली जानकारी के अनुसार, पीड़ित छात्र के पिता श्री शफ़ी अहमद इलाके के एक जाने-माने और बेबाक समाजसेवी हैं, जो हमेशा जनहित के मुद्दों और गलत कार्यों के खिलाफ मुखर रहते हैं। इसके साथ ही, उनका एकरहा के मीना मार्केट में पिछले 8-10 वर्षों से "शफ़ी ट्रेडर्स" (ए० एच० अंसारी ट्रेडर्स) के नाम से ईंट, गिट्टी, सीमेंट, छड़ और हार्डवेयर का एक प्रतिष्ठित, लोकप्रिय और मध्यवर्गीय व्यापार है। पीड़ित परिवार का स्पष्ट आरोप है कि समाजसेवी पिता की सामाजिक सक्रियता और व्यावसायिक प्रतिष्ठा से बौखलाकर उनकी आवाज को दबाने और पूरे परिवार को डराने-धमकाने के लिए यह सुनियोजित और जानलेवा साजिश रची गई है। परीक्षा के दौरान दहशत और पुलिस-प्रशासन से गुहार: पीड़ित छात्र मो. नासिर शफ़ी की वर्तमान में 6th सेमेस्टर की फाइनल परीक्षाएं चल रही हैं, जिसके कारण उन्हें और उनके बरे भाई (मो. यासिर शफ़ी, जो G.L.M. कॉलेज के छात्र हैं) को रोजाना पढ़ाई के लिए इसी सुनसान रास्ते से आना-जाना पड़ रहा है। इस कायराना हमले के बाद से पूरा परिवार मानसिक तनाव और भारी दहशत में है। रात-रात भर परिवार को नींद नहीं आ रही है कि कब कोई अनहोनी न हो जाए। प्रशासनिक कार्रवाई और मांग: घटना के तुरंत बाद पीड़ित छात्र द्वारा चकमका ओ.पी. (जानकीनगर थाना) में लिखित आवेदन देकर प्राथमिकी दर्ज करने की गुहार लगाई गई है। घटनास्थल के पास का एक संदिग्ध CCTV फुटेज भी पुलिस को सौंपा गया है। पीड़ित छात्र, परिजनों और स्थानीय बुद्धिजीवियों ने प्रशासन से पुरज़ोर माँग की है कि: 1. मामले में विशेष टीम (Special Team) गठित कर फास्ट-ट्रैक तरीके से जाँच की जाए और अपराधियों की अविलंब गिरफ्तारी हो। 2. परीक्षार्थी छात्र के आवागमन को देखते हुए बिरवान-हसनपुर मार्ग पर पुलिस गश्ती (Patrolling) अत्यधिक और निरंतर बढ़ाई जाए। 3. पीड़ित समाजसेवी व व्यवसायी परिवार को तत्काल पुलिस सुरक्षा प्रदान की जाए। --- संबंधित वीडियो/सीसीटीवी फुटेज (FIR) की कॉपी संलग्न है।1
- एक ऐसा पति जो हमेशा पत्नी से बाहर खाती है।वीडियो हुआ वायरल पति लोगों का जीना दुश्वार? एक ऐसा पति जो हमेशा पत्नी से बाहर खाती है।वीडियो हुआ वायरल पति लोगों का जीना दुश्वार? #BreakingNews #BiharNews #schoolnews #SupaulNews #triveniganj #biharnewstoday #Supaul #ChhatapurNews1
- सहाने मेडिकल स्टोर मेडिकल स्टोर में डाक्टर की सुविधा 24 घंटे तक, गोनोन गांव में आज सहाने मेडिकल स्टोर का उदधाटन हुआ | दुकान का प्रोपराइटर - अखलाकूर रहमान दबा दुकान खुलने से लोगों में खुशी देखी जा रही है |1
- नवहट्टा में घरेलू विवाद बना खूनी खेल, चाकूबाजी में 35 वर्षीय युवक की मौत; तीन बच्चे हुए बेसहारा!1