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कोटा में राहुल गांधी के काफिले को देखने के लिए कोचिंग छात्र बड़ी संख्या में जमा हुए। इस दौरान छात्रों ने राहुल गांधी की जमकर तारीफ की। एक छात्र ने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्हें ऐसे ही नेता की जरूरत है।
Abhishek Pandey
कोटा में राहुल गांधी के काफिले को देखने के लिए कोचिंग छात्र बड़ी संख्या में जमा हुए। इस दौरान छात्रों ने राहुल गांधी की जमकर तारीफ की। एक छात्र ने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्हें ऐसे ही नेता की जरूरत है।
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- कोटा में राहुल गांधी के काफिले को देखने के लिए कोचिंग छात्र बड़ी संख्या में जमा हुए। इस दौरान छात्रों ने राहुल गांधी की जमकर तारीफ की। एक छात्र ने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्हें ऐसे ही नेता की जरूरत है।1
- मध्य प्रदेश के मैहर जिले के अमरपाटन जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत मढ़ा में फूड इंस्पेक्टर प्रियंका अग्रवाल पर गंभीर आरोप लगे हैं। वायरल वीडियो के अनुसार, उन पर हितग्राहियों पर मुख्यमंत्री हेल्पलाइन (CM हेल्पलाइन) की शिकायतें कटवाने का दबाव बनाने और मौके पर वीडियो बना रहे एक पत्रकार को धमकाने का आरोप है। वायरल वीडियो में, हितग्राही विनय कुमार मिश्रा ने बताया कि उनकी पर्ची पिछले 3-4 साल से नहीं बन पा रही है, और जितेंद्र साकेत भी इस दौरान मौजूद थे। हितग्राहियों का आरोप है कि फूड इंस्पेक्टर सीधे पर्ची बनाने से मना कर रही हैं और कह रही हैं कि "पहले सीएम हेल्पलाइन की शिकायत कटवा लो, फिर पर्ची बनवा देंगे।" हितग्राहियों ने सवाल उठाया कि शिकायत कट जाने के बाद पर्ची कैसे बनेगी। पत्रकार को सूचना मिली थी कि एक अधिकारी हितग्राहियों पर सीएम हेल्पलाइन कटवाने का दबाव बना रही हैं, जिसके बाद वे मौके पर पहुंचे और पहले शिकायतकर्ता का वीडियो बनाया। जब पत्रकार ने फूड इंस्पेक्टर प्रियंका अग्रवाल का वीडियो बनाना शुरू किया, तो मैडम ने पत्रकार से सवाल किया कि "तुम कौन होते हो वीडियो बनाने वाले? मेरे से परमिशन ली?" वीडियो में मैडम यह भी कहती दिख रही हैं कि वह GRS को "फालतू में तड़का रही थीं" और उसी दौरान पत्रकार शूटिंग कर रहा था। वीडियो देखते ही मैडम हाइपर हो गईं और पत्रकार का खुद वीडियो बनाकर धमकाने लगीं कि "मैं बताती हूं।" हितग्राहियों का आरोप है कि सीएम हेल्पलाइन कटवाने का दबाव इसलिए बनाया जा रहा है ताकि शिकायत सिस्टम से हट जाए और विभागीय कार्रवाई से बचा जा सके। पत्रकार ने सवाल किया है कि क्या अब किसी अधिकारी का वीडियो बनाने से पहले अनुमति लेनी पड़ेगी और उन्होंने अधिकारी द्वारा वीडियो बनाकर धमकाने को प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला बताया। ये सभी आरोप वायरल वीडियो और हितग्राहियों/पत्रकार के बयानों पर आधारित हैं। फूड इंस्पेक्टर प्रियंका अग्रवाल या संबंधित विभाग का पक्ष अभी सामने नहीं आया है और निष्पक्षता के लिए विभागीय प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। हितग्राहियों ने मांग की है कि उनकी पर्ची/राशन की समस्या बिना शर्त हल की जाए और सीएम हेल्पलाइन को दबाव का माध्यम न बनाया जाए। पत्रकार संगठनों ने भी इस घटना को प्रेस की स्वतंत्रता से जोड़कर देखा है, और यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।1
- सतना के सर्किट हाउस में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष अश्वनी परांजपे का स्वागत किया गया।1
- रीवा जिले की सिरमौर विधानसभा क्षेत्र में जवा वाया लूक बरदहा घाटी तक प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क के मरम्मत कार्य में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क का कार्य बेहद धीमी गति और घटिया गुणवत्ता के साथ किया जा रहा है, और अधिकारी व नेता इस भ्रष्टाचार से अनजान बने हुए हैं। बताया गया है कि ठेकेदार कमीशन लेकर यह काम छोटे ठेकेदारों को सौंप देते हैं। छोटे ठेकेदार ऐसे समय में काम शुरू करते हैं जब उसे पूरा करना मुश्किल होता है, और फिर कागजों पर काम पूरा दिखाकर बिल पास करवा लिया जाता है। ग्रामीणों में इस बात को लेकर खासा आक्रोश है कि गारंटी अवधि में कभी न बनने वाली सड़क का रखरखाव कार्य भी घटिया स्तर का हो रहा है, ताकि बरसात शुरू होने पर काम बंद किया जा सके। आरोप है कि यह सब जानते हुए भी जिम्मेदार अधिकारी और नेता आँखें मूंदे हुए हैं, जिससे सरकार को लाखों का चूना लगाया जा रहा है। इस मामले को लेकर ग्रामीणों के साथ-साथ ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष कमलेश्वर सिंह, डॉ. अरुणेंद्र शेखर मिश्रा, शिव बालक पाण्डेय, धानेन्द्र द्विवेदी, रामप्रभाव विश्वकर्मा, भूपेंद्र सिंह, धानेन्द्र पाण्डेय, अरुणेंद्र मिश्रा, देवेंद्र मिश्र, रामनरेश तिवारी, रामजी तिवारी, कूलन द्विवेदी, हर गोपाल सिंह, जयदीप सिंह, रामबदन वर्मा और किशोर कुमार तिवारी ने जिला कलेक्टर से सड़क मरम्मत कार्य की गति और गुणवत्ता की उच्च स्तरीय जांच कराने और गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करने की मांग की है।2
- रीवा जिले की सेमरिया निवासी कल्पना प्रजापति का भारतीय रेलवे में असिस्टेंट लोको पायलट के पद पर चयन हुआ है। उनकी इस उपलब्धि पर भाजपा नेता संजय द्विवेदी उनके घर पहुंचे और कल्पना को शाल-श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया। यह सम्मान कल्पना की सफलता को दर्शाता है और इसे महिला सशक्तिकरण की मिसाल के तौर पर भी देखा जा रहा है।1
- रीवा जिले के जवा थाना अंतर्गत एक गोलीबारी की घटना में, छोटे भाई ने अपने बड़े भाई पर गोली चला दी। यह गोली गेट पर जाकर लगी। पुलिस ने इस मामले में आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।1
- Post by Prime 24 News1
- मध्य प्रदेश के रीवा में किशोर न्यायालय के बालबंदी गृह के प्रभारी पर गंभीर आरोप लगे हैं। बताया जा रहा है कि प्रभारी न्यायालय के आदेशों का पालन नहीं करते हैं। एक पीड़ित के अनुसार, प्रभारी ने उससे कहा कि ₹1500 देने पर ही उसे बालबंदी गृह से बाहर जाने दिया जाएगा। प्रभारी कथित तौर पर यह भी कहते हैं कि 'यहां पर मैं ही सब कुछ हूं'।1
- मध्य प्रदेश के मैहर जिले के अमरपाटन जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत मढ़ा में फूड डिपार्टमेंट की कार्यशैली को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। एक वायरल वीडियो में फूड इंस्पेक्टर प्रियंका अग्रवाल पर हितग्राहियों से मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की शिकायतें कटवाने का दबाव बनाने और वीडियो बना रहे पत्रकार से उलझने तथा उसे धमकाने का आरोप लगा है। वायरल वीडियो में विनय कुमार मिश्रा जैसे हितग्राहियों का कहना है कि उनकी राशन पर्ची 3-4 साल से नहीं बन पा रही है। हितग्राहियों ने आरोप लगाया है कि फूड इंस्पेक्टर प्रियंका अग्रवाल उनसे सीधे पर्ची बनाने से मना कर रही हैं और कह रही हैं कि पहले सीएम हेल्पलाइन की शिकायत कटवा लो, फिर पर्ची बन जाएगी। हितग्राहियों का सवाल है कि शिकायत कटने के बाद पर्ची कैसे बन पाएगी। पत्रकार को जब यह सूचना मिली कि एक अधिकारी हितग्राहियों पर शिकायतें कटवाने का दबाव बना रही हैं, तो वे मौके पर पहुंचे और पहले शिकायतकर्ता का वीडियो बनाया। इसके बाद जब पत्रकार ने फूड इंस्पेक्टर प्रियंका अग्रवाल का वीडियो बनाना चाहा, तो उन्होंने पत्रकार से ही सवाल करना शुरू कर दिया कि "तुम कौन होते हो वीडियो बनाने वाले? मेरे से परमिशन ली?" वीडियो में मैडम यह भी कहती दिख रही हैं कि वह GRS को "फालतू में तड़का रही थीं" और उसी दौरान पत्रकार शूटिंग कर रहा था। वीडियो देखते ही मैडम हाइपर हो गईं और उन्होंने पत्रकार का खुद वीडियो बनाकर उसे "मैं बताती हूं" कहकर धमकाना शुरू कर दिया। हितग्राहियों का आरोप है कि सीएम हेल्पलाइन कटवाने का दबाव इसलिए बनाया जा रहा है ताकि शिकायत सिस्टम से हट जाए और अधिकारी विभागीय कार्रवाई से बच सकें। पत्रकार ने इसे प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला बताया है और सवाल किया है कि क्या अब किसी अधिकारी का वीडियो बनाने से पहले अनुमति लेनी होगी। इस खबर में बताए गए सभी आरोप वायरल वीडियो और हितग्राहियों/पत्रकार के बयानों पर आधारित हैं। फूड इंस्पेक्टर प्रियंका अग्रवाल या संबंधित विभाग का पक्ष अभी सामने नहीं आया है और निष्पक्षता के लिए उनकी प्रतिक्रिया का इंतजार है। हितग्राहियों ने मांग की है कि पर्ची/राशन की समस्या बिना शर्त हल की जाए और सीएम हेल्पलाइन को दबाव का माध्यम न बनाया जाए, जबकि पत्रकार संगठनों ने भी इस मामले को प्रेस की स्वतंत्रता से जोड़ा है। यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।1