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मध्य प्रदेश के रीवा में किशोर न्यायालय के बालबंदी गृह के प्रभारी पर गंभीर आरोप लगे हैं। बताया जा रहा है कि प्रभारी न्यायालय के आदेशों का पालन नहीं करते हैं। एक पीड़ित के अनुसार, प्रभारी ने उससे कहा कि ₹1500 देने पर ही उसे बालबंदी गृह से बाहर जाने दिया जाएगा। प्रभारी कथित तौर पर यह भी कहते हैं कि 'यहां पर मैं ही सब कुछ हूं'।

5 hrs ago
user_Abhishek Pandey
Abhishek Pandey
Huzur, Rewa•
5 hrs ago

मध्य प्रदेश के रीवा में किशोर न्यायालय के बालबंदी गृह के प्रभारी पर गंभीर आरोप लगे हैं। बताया जा रहा है कि प्रभारी न्यायालय के आदेशों का पालन नहीं करते हैं। एक पीड़ित के अनुसार, प्रभारी ने उससे कहा कि ₹1500 देने पर ही उसे बालबंदी गृह से बाहर जाने दिया जाएगा। प्रभारी कथित तौर पर यह भी कहते हैं कि 'यहां पर मैं ही सब कुछ हूं'।

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  • मध्य प्रदेश के रीवा में किशोर न्यायालय के बालबंदी गृह के प्रभारी पर गंभीर आरोप लगे हैं। बताया जा रहा है कि प्रभारी न्यायालय के आदेशों का पालन नहीं करते हैं। एक पीड़ित के अनुसार, प्रभारी ने उससे कहा कि ₹1500 देने पर ही उसे बालबंदी गृह से बाहर जाने दिया जाएगा। प्रभारी कथित तौर पर यह भी कहते हैं कि 'यहां पर मैं ही सब कुछ हूं'।
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    मध्य प्रदेश के रीवा में किशोर न्यायालय के बालबंदी गृह के प्रभारी पर गंभीर आरोप लगे हैं। बताया जा रहा है कि प्रभारी न्यायालय के आदेशों का पालन नहीं करते हैं। एक पीड़ित के अनुसार, प्रभारी ने उससे कहा कि ₹1500 देने पर ही उसे बालबंदी गृह से बाहर जाने दिया जाएगा। प्रभारी कथित तौर पर यह भी कहते हैं कि 'यहां पर मैं ही सब कुछ हूं'।
    user_Abhishek Pandey
    Abhishek Pandey
    Huzur, Rewa•
    5 hrs ago
  • मध्य प्रदेश के मैहर जिले के अमरपाटन जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत मढ़ा में फूड डिपार्टमेंट की कार्यशैली को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। एक वायरल वीडियो में फूड इंस्पेक्टर प्रियंका अग्रवाल पर हितग्राहियों से मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की शिकायतें कटवाने का दबाव बनाने और वीडियो बना रहे पत्रकार से उलझने तथा उसे धमकाने का आरोप लगा है। वायरल वीडियो में विनय कुमार मिश्रा जैसे हितग्राहियों का कहना है कि उनकी राशन पर्ची 3-4 साल से नहीं बन पा रही है। हितग्राहियों ने आरोप लगाया है कि फूड इंस्पेक्टर प्रियंका अग्रवाल उनसे सीधे पर्ची बनाने से मना कर रही हैं और कह रही हैं कि पहले सीएम हेल्पलाइन की शिकायत कटवा लो, फिर पर्ची बन जाएगी। हितग्राहियों का सवाल है कि शिकायत कटने के बाद पर्ची कैसे बन पाएगी। पत्रकार को जब यह सूचना मिली कि एक अधिकारी हितग्राहियों पर शिकायतें कटवाने का दबाव बना रही हैं, तो वे मौके पर पहुंचे और पहले शिकायतकर्ता का वीडियो बनाया। इसके बाद जब पत्रकार ने फूड इंस्पेक्टर प्रियंका अग्रवाल का वीडियो बनाना चाहा, तो उन्होंने पत्रकार से ही सवाल करना शुरू कर दिया कि "तुम कौन होते हो वीडियो बनाने वाले? मेरे से परमिशन ली?" वीडियो में मैडम यह भी कहती दिख रही हैं कि वह GRS को "फालतू में तड़का रही थीं" और उसी दौरान पत्रकार शूटिंग कर रहा था। वीडियो देखते ही मैडम हाइपर हो गईं और उन्होंने पत्रकार का खुद वीडियो बनाकर उसे "मैं बताती हूं" कहकर धमकाना शुरू कर दिया। हितग्राहियों का आरोप है कि सीएम हेल्पलाइन कटवाने का दबाव इसलिए बनाया जा रहा है ताकि शिकायत सिस्टम से हट जाए और अधिकारी विभागीय कार्रवाई से बच सकें। पत्रकार ने इसे प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला बताया है और सवाल किया है कि क्या अब किसी अधिकारी का वीडियो बनाने से पहले अनुमति लेनी होगी। इस खबर में बताए गए सभी आरोप वायरल वीडियो और हितग्राहियों/पत्रकार के बयानों पर आधारित हैं। फूड इंस्पेक्टर प्रियंका अग्रवाल या संबंधित विभाग का पक्ष अभी सामने नहीं आया है और निष्पक्षता के लिए उनकी प्रतिक्रिया का इंतजार है। हितग्राहियों ने मांग की है कि पर्ची/राशन की समस्या बिना शर्त हल की जाए और सीएम हेल्पलाइन को दबाव का माध्यम न बनाया जाए, जबकि पत्रकार संगठनों ने भी इस मामले को प्रेस की स्वतंत्रता से जोड़ा है। यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
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    मध्य प्रदेश के मैहर जिले के अमरपाटन जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत मढ़ा में फूड डिपार्टमेंट की कार्यशैली को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। एक वायरल वीडियो में फूड इंस्पेक्टर प्रियंका अग्रवाल पर हितग्राहियों से मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की शिकायतें कटवाने का दबाव बनाने और वीडियो बना रहे पत्रकार से उलझने तथा उसे धमकाने का आरोप लगा है।

वायरल वीडियो में विनय कुमार मिश्रा जैसे हितग्राहियों का कहना है कि उनकी राशन पर्ची 3-4 साल से नहीं बन पा रही है। हितग्राहियों ने आरोप लगाया है कि फूड इंस्पेक्टर प्रियंका अग्रवाल उनसे सीधे पर्ची बनाने से मना कर रही हैं और कह रही हैं कि पहले सीएम हेल्पलाइन की शिकायत कटवा लो, फिर पर्ची बन जाएगी। हितग्राहियों का सवाल है कि शिकायत कटने के बाद पर्ची कैसे बन पाएगी। पत्रकार को जब यह सूचना मिली कि एक अधिकारी हितग्राहियों पर शिकायतें कटवाने का दबाव बना रही हैं, तो वे मौके पर पहुंचे और पहले शिकायतकर्ता का वीडियो बनाया। इसके बाद जब पत्रकार ने फूड इंस्पेक्टर प्रियंका अग्रवाल का वीडियो बनाना चाहा, तो उन्होंने पत्रकार से ही सवाल करना शुरू कर दिया कि "तुम कौन होते हो वीडियो बनाने वाले? मेरे से परमिशन ली?"

वीडियो में मैडम यह भी कहती दिख रही हैं कि वह GRS को "फालतू में तड़का रही थीं" और उसी दौरान पत्रकार शूटिंग कर रहा था। वीडियो देखते ही मैडम हाइपर हो गईं और उन्होंने पत्रकार का खुद वीडियो बनाकर उसे "मैं बताती हूं" कहकर धमकाना शुरू कर दिया। हितग्राहियों का आरोप है कि सीएम हेल्पलाइन कटवाने का दबाव इसलिए बनाया जा रहा है ताकि शिकायत सिस्टम से हट जाए और अधिकारी विभागीय कार्रवाई से बच सकें। पत्रकार ने इसे प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला बताया है और सवाल किया है कि क्या अब किसी अधिकारी का वीडियो बनाने से पहले अनुमति लेनी होगी। इस खबर में बताए गए सभी आरोप वायरल वीडियो और हितग्राहियों/पत्रकार के बयानों पर आधारित हैं। फूड इंस्पेक्टर प्रियंका अग्रवाल या संबंधित विभाग का पक्ष अभी सामने नहीं आया है और निष्पक्षता के लिए उनकी प्रतिक्रिया का इंतजार है। हितग्राहियों ने मांग की है कि पर्ची/राशन की समस्या बिना शर्त हल की जाए और सीएम हेल्पलाइन को दबाव का माध्यम न बनाया जाए, जबकि पत्रकार संगठनों ने भी इस मामले को प्रेस की स्वतंत्रता से जोड़ा है। यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
    user_रामदत्त दाहिया
    रामदत्त दाहिया
    Firefighter रामपुर बघेलन, सतना, मध्य प्रदेश•
    6 hrs ago
  • मध्य प्रदेश के रीवा जिले से प्रशासन और स्थानीय ग्राम पंचायत की मनमानी का एक बड़ा मामला सामने आया है। सिरमौर तहसील के खरौली गांव की एक 85 वर्षीय बुजुर्ग महिला ने ग्राम पंचायत पर उनकी निजी और पैतृक भूमि पर जबरन कब्जा करने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
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    मध्य प्रदेश के रीवा जिले से प्रशासन और स्थानीय ग्राम पंचायत की मनमानी का एक बड़ा मामला सामने आया है। सिरमौर तहसील के खरौली गांव की एक 85 वर्षीय बुजुर्ग महिला ने ग्राम पंचायत पर उनकी निजी और पैतृक भूमि पर जबरन कब्जा करने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
    user_ऋषिकेश त्रिपाठी
    ऋषिकेश त्रिपाठी
    रामपुर बघेलन, सतना, मध्य प्रदेश•
    16 hrs ago
  • मध्य प्रदेश के सिरमौर तहसील के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत पड़री में दलित और आदिवासी किसान परिवारों की सैकड़ों एकड़ भूमि का सीमांकन करने में राजस्व विभाग के कर्मचारी असमर्थ दिख रहे हैं। बताया गया है कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में इन गरीब परिवारों को 5-5 एकड़ भूमि आवंटित की गई थी, जिस पर वे खेती-बाड़ी कर अपना जीवन यापन करते थे। यूथ कांग्रेस के अनुसार, वर्तमान भाजपा सरकार के कार्यकाल में इन परिवारों से उनकी जमीन छीनी जा रही है। यूथ कांग्रेस की टीम इस अन्याय के खिलाफ है और उसने जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए निरंतर प्रयास जारी रखने का संकल्प लिया है।
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    मध्य प्रदेश के सिरमौर तहसील के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत पड़री में दलित और आदिवासी किसान परिवारों की सैकड़ों एकड़ भूमि का सीमांकन करने में राजस्व विभाग के कर्मचारी असमर्थ दिख रहे हैं। बताया गया है कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में इन गरीब परिवारों को 5-5 एकड़ भूमि आवंटित की गई थी, जिस पर वे खेती-बाड़ी कर अपना जीवन यापन करते थे।

यूथ कांग्रेस के अनुसार, वर्तमान भाजपा सरकार के कार्यकाल में इन परिवारों से उनकी जमीन छीनी जा रही है। यूथ कांग्रेस की टीम इस अन्याय के खिलाफ है और उसने जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए निरंतर प्रयास जारी रखने का संकल्प लिया है।
    user_रिपोर्टर अजय यादव
    रिपोर्टर अजय यादव
    Local News Reporter Sirmour, Rewa•
    5 hrs ago
  • मध्य प्रदेश के सतना जिले के बरौधा थाने में देर रात तक हंगामा जारी रहा। ड्यूटी पर तैनात नाइट एचसीएम, प्रधान आरक्षक रामचंद्र साकेत, जो बिना वर्दी के थे, उन्होंने एक पीड़िता का आवेदन लेने से इनकार कर दिया। एक महिला अपनी 2 साल की मासूम बच्ची को गोद में लिए थाने की चौखट पर गुहार लगाती रही, लेकिन उसकी फरियाद नहीं सुनी गई। प्रधान आरक्षक आवेदन की पावती देने तक को तैयार नहीं थे।
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    मध्य प्रदेश के सतना जिले के बरौधा थाने में देर रात तक हंगामा जारी रहा। ड्यूटी पर तैनात नाइट एचसीएम, प्रधान आरक्षक रामचंद्र साकेत, जो बिना वर्दी के थे, उन्होंने एक पीड़िता का आवेदन लेने से इनकार कर दिया।

एक महिला अपनी 2 साल की मासूम बच्ची को गोद में लिए थाने की चौखट पर गुहार लगाती रही, लेकिन उसकी फरियाद नहीं सुनी गई। प्रधान आरक्षक आवेदन की पावती देने तक को तैयार नहीं थे।
    user_Shiv Singh rajput dahiya journ
    Shiv Singh rajput dahiya journ
    Court reporter Amarpatan, Satna•
    8 hrs ago
  • मध्य प्रदेश के सीधी जिले के कमर्जी थाना प्रभारी पर हुए हमले के मामले में पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी एक नई रणनीति के तहत की गई है।
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    मध्य प्रदेश के सीधी जिले के कमर्जी थाना प्रभारी पर हुए हमले के मामले में पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी एक नई रणनीति के तहत की गई है।
    user_Avi Standing with the truth
    Avi Standing with the truth
    Yoga instructor मंगवां, रीवा, मध्य प्रदेश•
    13 hrs ago
  • रीवा में जिला पंचायत सदस्य एकता मनोज सिंह ने अपने कार्यों को लेकर स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उन्होंने अपने सभी कर्तव्यों का निर्वहन पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ किया है।
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    रीवा में जिला पंचायत सदस्य एकता मनोज सिंह ने अपने कार्यों को लेकर स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उन्होंने अपने सभी कर्तव्यों का निर्वहन पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ किया है।
    user_Abhishek Pandey
    Abhishek Pandey
    Huzur, Rewa•
    10 hrs ago
  • मध्य प्रदेश के रीवा जिले के ग्रामीण इलाकों में एक चिंताजनक स्थिति सामने आई है, जहाँ छोटे-छोटे बच्चे, जिनकी उम्र स्कूल जाने की है, खुद को उत्तर प्रदेश के बरगढ़ क्षेत्र का बताकर गाँव-गाँव में गठिया और वात रोग की दवाएं बेचते हुए दिख रहे हैं। इन बच्चों के साथ कौन लोग जुड़े हैं, वे किस कंपनी या संस्था की दवा बेच रहे हैं, और इन दवाओं की गुणवत्ता व वैधता का सत्यापन हुआ है या नहीं, इसकी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। न ही इन बच्चों के पास कोई लाइसेंस, अनुमति या स्वास्थ्य विभाग की स्वीकृति होने की बात सामने आई है। यह स्थिति आम जनता के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है, खासकर ऐसे समय में जब बड़ी संख्या में बुजुर्ग वात और गठिया से पीड़ित हैं और बिना किसी चिकित्सकीय परीक्षण या सरकारी निगरानी के ये दवाएं बेची जा रही हैं। आश्चर्य की बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग, पुलिस प्रशासन और बाल संरक्षण से जुड़े विभाग इस मामले में कोई सक्रियता नहीं दिखा रहे हैं, जबकि ठगी, चोरी और संदिग्ध गतिविधियों के बढ़ते मामलों के बीच ऐसे प्रकरणों की जांच और सत्यापन अत्यंत आवश्यक है। जनता प्रशासन से मांग कर रही है कि इन बच्चों, उनके संचालकों और उनके द्वारा बेची जा रही दवाओं की तत्काल जांच की जाए। यह मामला बाल श्रम से भी जुड़ा है, जहाँ बच्चों के हाथों में किताबें होनी चाहिए, लेकिन वे दवाएं बेचने के लिए सड़कों पर घूम रहे हैं। बाल अधिकारों की रक्षा का दावा करने वाला बाल आयोग भी इस विषय पर मौन है, जिस पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
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    मध्य प्रदेश के रीवा जिले के ग्रामीण इलाकों में एक चिंताजनक स्थिति सामने आई है, जहाँ छोटे-छोटे बच्चे, जिनकी उम्र स्कूल जाने की है, खुद को उत्तर प्रदेश के बरगढ़ क्षेत्र का बताकर गाँव-गाँव में गठिया और वात रोग की दवाएं बेचते हुए दिख रहे हैं। इन बच्चों के साथ कौन लोग जुड़े हैं, वे किस कंपनी या संस्था की दवा बेच रहे हैं, और इन दवाओं की गुणवत्ता व वैधता का सत्यापन हुआ है या नहीं, इसकी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। न ही इन बच्चों के पास कोई लाइसेंस, अनुमति या स्वास्थ्य विभाग की स्वीकृति होने की बात सामने आई है।

यह स्थिति आम जनता के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है, खासकर ऐसे समय में जब बड़ी संख्या में बुजुर्ग वात और गठिया से पीड़ित हैं और बिना किसी चिकित्सकीय परीक्षण या सरकारी निगरानी के ये दवाएं बेची जा रही हैं। आश्चर्य की बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग, पुलिस प्रशासन और बाल संरक्षण से जुड़े विभाग इस मामले में कोई सक्रियता नहीं दिखा रहे हैं, जबकि ठगी, चोरी और संदिग्ध गतिविधियों के बढ़ते मामलों के बीच ऐसे प्रकरणों की जांच और सत्यापन अत्यंत आवश्यक है।

जनता प्रशासन से मांग कर रही है कि इन बच्चों, उनके संचालकों और उनके द्वारा बेची जा रही दवाओं की तत्काल जांच की जाए। यह मामला बाल श्रम से भी जुड़ा है, जहाँ बच्चों के हाथों में किताबें होनी चाहिए, लेकिन वे दवाएं बेचने के लिए सड़कों पर घूम रहे हैं। बाल अधिकारों की रक्षा का दावा करने वाला बाल आयोग भी इस विषय पर मौन है, जिस पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
    user_Corruption Free India
    Corruption Free India
    Social worker हुजूर, रीवा, मध्य प्रदेश•
    9 hrs ago
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