मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले स्थित ऐतिहासिक नरवर किले से चोरी हुई करीब 400 वर्ष पुरानी सिंधियाकालीन तोप की तलाश राजस्थान के करौली जिले तक पहुंच गई है। खुफिया सूचना के आधार पर मध्यप्रदेश और राजस्थान पुलिस की संयुक्त टीम हिंडौन क्षेत्र के गांवड़ा मीणा गांव में व्यापक सर्च ऑपरेशन चला रही है। इस दौरान 50 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती के साथ मेटल डिटेक्टर और जेसीबी मशीनों की मदद से संभावित स्थानों पर खुदाई और तलाशी ली जा रही है। यह वारदात 15 जुलाई की रात को नरवर किले की ओपन कचहरी में हुई थी, जहां से बदमाश करीब 3,500 किलोग्राम वजनी 16वीं शताब्दी की दुर्लभ तोप चुरा ले गए। चोरों ने पूरी योजना के तहत तोप को पहले गद्दों में लपेटा, फिर बेयरिंग लगी लोहे की ट्रॉली की मदद से करीब 3 हजार फीट नीचे उतारा और लोडिंग गाड़ी में लादकर फरार हो गए। वारदात के समय किले में सुरक्षाकर्मी ड्यूटी पर तैनात नहीं थे और बाहर भारी गाड़ियों के टायर के निशान मिले हैं। अंतरराष्ट्रीय एंटीक ब्लैक मार्केट में इस तोप की कीमत 3 से 5 करोड़ रुपये बताई जा रही है, जिससे इसमें अंतरराष्ट्रीय गिरोह का हाथ होने का शक है। हिंडौन सदर थाना प्रभारी गिर्राज प्रसाद ने बताया कि शिवपुरी पुलिस से मिले इनपुट के बाद गांवड़ा मीणा में तलाशी अभियान शुरू किया गया है और पुलिस इस जांच में जुटी है कि तोप को गांव तक कब और कैसे लाया गया। 16वीं शताब्दी में कछवाह राजाओं द्वारा निर्मित और 1925 में तत्कालीन महाराजा माधवराव सिंधिया द्वारा जीर्णोद्धार कराए गए कचहरी महल में सिंधिया राजवंश काल की कुल 14 दुर्लभ तोपें रखी थीं, जिनमें से अब 13 ही बची हैं। पीतल, तांबा, कांसा और अष्टधातु से बनी इन तोपों पर फारसी और देवनागरी लिपि में शिलालेख भी अंकित हैं।
मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले स्थित ऐतिहासिक नरवर किले से चोरी हुई करीब 400 वर्ष पुरानी सिंधियाकालीन तोप की तलाश राजस्थान के करौली जिले तक पहुंच गई है। खुफिया सूचना के आधार पर मध्यप्रदेश और राजस्थान पुलिस की संयुक्त टीम हिंडौन क्षेत्र के गांवड़ा मीणा गांव में व्यापक सर्च ऑपरेशन चला रही है। इस दौरान 50 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती के साथ मेटल डिटेक्टर और जेसीबी मशीनों की मदद से संभावित स्थानों पर खुदाई और तलाशी ली जा रही है। यह वारदात 15 जुलाई की रात को नरवर किले की ओपन कचहरी में हुई थी, जहां से बदमाश करीब 3,500 किलोग्राम वजनी 16वीं शताब्दी की दुर्लभ तोप चुरा ले गए। चोरों ने पूरी योजना के तहत तोप को पहले गद्दों में लपेटा, फिर बेयरिंग लगी लोहे की ट्रॉली की मदद से करीब 3 हजार फीट नीचे उतारा और लोडिंग गाड़ी में लादकर फरार हो गए। वारदात के समय किले में सुरक्षाकर्मी ड्यूटी पर तैनात नहीं थे और बाहर भारी गाड़ियों के टायर के निशान मिले हैं। अंतरराष्ट्रीय एंटीक ब्लैक मार्केट में इस तोप की कीमत 3 से 5 करोड़ रुपये बताई जा रही है, जिससे इसमें अंतरराष्ट्रीय गिरोह का हाथ होने का शक है। हिंडौन सदर थाना प्रभारी गिर्राज प्रसाद ने बताया कि शिवपुरी पुलिस से मिले इनपुट के बाद गांवड़ा मीणा में तलाशी अभियान शुरू किया गया है और पुलिस इस जांच में जुटी है कि तोप को गांव तक कब और कैसे लाया गया। 16वीं शताब्दी में कछवाह राजाओं द्वारा निर्मित और 1925 में तत्कालीन महाराजा माधवराव सिंधिया द्वारा जीर्णोद्धार कराए गए कचहरी महल में सिंधिया राजवंश काल की कुल 14 दुर्लभ तोपें रखी थीं, जिनमें से अब 13 ही बची हैं। पीतल, तांबा, कांसा और अष्टधातु से बनी इन तोपों पर फारसी और देवनागरी लिपि में शिलालेख भी अंकित हैं।
- मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में मगरौनी चौकी पुलिस द्वारा चलाए जा रहे "नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0" जागरूकता अभियान के अंतर्गत शासकीय माध्यमिक विद्यालय, निजामपुर में विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया गया। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को नशे के दुष्परिणामों की विस्तार से जानकारी दी गई और सभी को नशे से दूर रहने की शपथ दिलाई गई, जिसके बाद विद्यार्थियों ने नशामुक्त समाज के निर्माण में अपनी सक्रिय भागीदारी का संकल्प लिया। इस अवसर पर चौकी प्रभारी अभिमन्यु राजावत ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए बताया कि नशा व्यक्ति के स्वास्थ्य, परिवार, शिक्षा और समाज पर गंभीर दुष्प्रभाव डालता है। उन्होंने विद्यार्थियों से किसी भी प्रकार के नशे से दूर रहने और अपने परिवार तथा आसपास के लोगों को नशामुक्त जीवन अपनाने के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया। चौकी प्रभारी ने कहा कि पुलिस का उद्देश्य केवल कानून व्यवस्था बनाए रखना ही नहीं, बल्कि समाज में जनजागरूकता फैलाकर युवाओं को सही दिशा देना भी है। इसी उद्देश्य से क्षेत्र में लगातार इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।1
- मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले स्थित ऐतिहासिक नरवर किले से चोरी हुई करीब 400 वर्ष पुरानी सिंधियाकालीन तोप की तलाश राजस्थान के करौली जिले तक पहुंच गई है। खुफिया सूचना के आधार पर मध्यप्रदेश और राजस्थान पुलिस की संयुक्त टीम हिंडौन क्षेत्र के गांवड़ा मीणा गांव में व्यापक सर्च ऑपरेशन चला रही है। इस दौरान 50 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती के साथ मेटल डिटेक्टर और जेसीबी मशीनों की मदद से संभावित स्थानों पर खुदाई और तलाशी ली जा रही है। यह वारदात 15 जुलाई की रात को नरवर किले की ओपन कचहरी में हुई थी, जहां से बदमाश करीब 3,500 किलोग्राम वजनी 16वीं शताब्दी की दुर्लभ तोप चुरा ले गए। चोरों ने पूरी योजना के तहत तोप को पहले गद्दों में लपेटा, फिर बेयरिंग लगी लोहे की ट्रॉली की मदद से करीब 3 हजार फीट नीचे उतारा और लोडिंग गाड़ी में लादकर फरार हो गए। वारदात के समय किले में सुरक्षाकर्मी ड्यूटी पर तैनात नहीं थे और बाहर भारी गाड़ियों के टायर के निशान मिले हैं। अंतरराष्ट्रीय एंटीक ब्लैक मार्केट में इस तोप की कीमत 3 से 5 करोड़ रुपये बताई जा रही है, जिससे इसमें अंतरराष्ट्रीय गिरोह का हाथ होने का शक है। हिंडौन सदर थाना प्रभारी गिर्राज प्रसाद ने बताया कि शिवपुरी पुलिस से मिले इनपुट के बाद गांवड़ा मीणा में तलाशी अभियान शुरू किया गया है और पुलिस इस जांच में जुटी है कि तोप को गांव तक कब और कैसे लाया गया। 16वीं शताब्दी में कछवाह राजाओं द्वारा निर्मित और 1925 में तत्कालीन महाराजा माधवराव सिंधिया द्वारा जीर्णोद्धार कराए गए कचहरी महल में सिंधिया राजवंश काल की कुल 14 दुर्लभ तोपें रखी थीं, जिनमें से अब 13 ही बची हैं। पीतल, तांबा, कांसा और अष्टधातु से बनी इन तोपों पर फारसी और देवनागरी लिपि में शिलालेख भी अंकित हैं।1
- Post by Ravi jatav1
- दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे युवा-छात्र आंदोलन में ग्वालियर-चंबल अंचल के कई युवाओं ने हिस्सा लिया है। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और रिपोर्टों के अनुसार, इस क्षेत्र के युवाओं ने शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और भर्ती संबंधी मुद्दों को लेकर अपनी आवाज बुलंद की। यह रिपोर्ट राहुल कुशवाह द्वारा प्रस्तुत की गई है।1
- Post by Kamlesh tiwari पत्रकार करेरा1
- शिवपुरी में दिल्ली के छात्र प्रदर्शन से प्रेरित होकर छात्रों ने ज़ोरदार प्रदर्शन किया है। अपनी बात और ख़बर सरकार तक पहुँचाने के लिए छात्र रोज़ माधव चौक पर एकत्र होकर लगातार ज़ोरदार नारेबाजी कर रहे हैं।1
- Post by Ravi jatav1
- शिवपुरी जिले के रन्नौद थाना क्षेत्र के ग्राम विजयपुरा के जंगल में गुरुवार को आकाशीय बिजली गिरने से बड़ा हादसा हो गया। इस घटना में कई भैंसें आकाशीय बिजली की चपेट में आकर मर गईं, जिससे पशुपालकों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। इस हादसे के बाद से पूरे गांव में शोक का माहौल व्याप्त है। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। इसके बाद पशुपालन एवं राजस्व विभाग की टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण कर नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है। प्रशासन की ओर से प्रभावित पशुपालकों को नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।1