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रक्तदान किया, एवं हास्पिटल में कुर्सी, व पानी के जार वितरण कर पौधे लगाये रक्तदान किया, एवं हास्पिटल में कुर्सी, व पानी के जार वितरण कर पौधे लगाये देवास जिले के नेवरी में कांग्रेस कमेटी अल्पसंख्यक विभाग के निर्देश अनुसार 30 लोगों ने रक्तदान किया, एवं हास्पिटल में कुर्सी, व पानी के जार वितरण कर पौधे लगाये। राज्यसभा सांसद एवं अल्पसंख्यक विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष जनाब इमरान प्रतापगढ़ी साहब के जन्मदिवस को पखवाड़े के रूप में मनाया जा रहा है देवास ग्रामीण कांग्रेस कमेटी अल्पसंख्यक विभाग टीम गोलू काजी द्वारा सेवा संकल्प के रूप में 3 दिन तक मनाया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ जन डॉक्टर जगदीश जी जोशी,डॉक्टर पंकज जोशी,गणेश जी जायसवाल , मुबारीक खान,शरीफ मेवाती,विनोद कुमार तथा सभी वरिष्ठ कांग्रेस जन एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे

11 hrs ago
user_पत्रकार करीम खान H. p
पत्रकार करीम खान H. p
हाटपीपल्या, देवास, मध्य प्रदेश•
11 hrs ago

रक्तदान किया, एवं हास्पिटल में कुर्सी, व पानी के जार वितरण कर पौधे लगाये रक्तदान किया, एवं हास्पिटल में कुर्सी, व पानी के जार वितरण कर पौधे लगाये देवास जिले के नेवरी में कांग्रेस कमेटी अल्पसंख्यक विभाग के निर्देश अनुसार 30 लोगों ने रक्तदान किया, एवं हास्पिटल में कुर्सी, व पानी के जार वितरण कर पौधे लगाये। राज्यसभा सांसद एवं अल्पसंख्यक विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष जनाब इमरान प्रतापगढ़ी साहब के जन्मदिवस को पखवाड़े के रूप में मनाया जा रहा है देवास ग्रामीण कांग्रेस कमेटी अल्पसंख्यक विभाग टीम गोलू काजी द्वारा सेवा संकल्प के रूप में 3 दिन तक मनाया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ जन डॉक्टर जगदीश जी जोशी,डॉक्टर पंकज जोशी,गणेश जी जायसवाल , मुबारीक खान,शरीफ मेवाती,विनोद कुमार तथा सभी वरिष्ठ कांग्रेस जन एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे

More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
  • इंदौर के TI दिनेश वर्मा को डिमोट कर SI बनाया.......... इंदौर पुलिस में तत्कालीन खजराना टीआई एवं वर्तमान साइबर टीआई दिनेश वर्मा के खिलाफ विभागीय जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद उन्हें टीआई पद से डिमोट कर सब-इंस्पेक्टर (SI) बना दिया गया है। जांच के अनुसार, उन पर 700 से अधिक मामलों में एक जैसे “पॉकेट गवाह” (Pocket Witnesses) तैयार करने का आरोप था। इन मामलों में जुआ-सट्टा, शराब और आर्म्स एक्ट से जुड़े प्रकरण शामिल बताए गए हैं। जानकारी के अनुसार, इनमें से लगभग 80% मामलों में आरोपियों को सजा भी हो चुकी है। यह मामला करीब छह महीने पहले तत्कालीन चंदन नगर टीआई इंद्रमणि पटेल से जुड़े प्रकरण के बाद सामने आया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में कई मामलों में एक जैसे गवाहों के इस्तेमाल का मुद्दा उठा और जांच शुरू हुई।
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    इंदौर के TI दिनेश वर्मा को डिमोट कर SI बनाया..........
इंदौर पुलिस में तत्कालीन खजराना टीआई एवं वर्तमान साइबर टीआई दिनेश वर्मा के खिलाफ विभागीय जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद उन्हें टीआई पद से डिमोट कर सब-इंस्पेक्टर (SI) बना दिया गया है। जांच के अनुसार, उन पर 700 से अधिक मामलों में एक जैसे “पॉकेट गवाह” (Pocket Witnesses) तैयार करने का आरोप था। इन मामलों में जुआ-सट्टा, शराब और आर्म्स एक्ट से जुड़े प्रकरण शामिल बताए गए हैं। जानकारी के अनुसार, इनमें से लगभग 80% मामलों में आरोपियों को सजा भी हो चुकी है। यह मामला करीब छह महीने पहले तत्कालीन चंदन नगर टीआई इंद्रमणि पटेल से जुड़े प्रकरण के बाद सामने आया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में कई मामलों में एक जैसे गवाहों के इस्तेमाल का मुद्दा उठा और जांच शुरू हुई।
    user_पत्रकार करीम खान H. p
    पत्रकार करीम खान H. p
    हाटपीपल्या, देवास, मध्य प्रदेश•
    10 hrs ago
  • पीपल रावा नगर परिषद अध्यक्ष कविता शर्मा का मनाया गया बर्थडे
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    पीपल रावा नगर परिषद अध्यक्ष कविता शर्मा का मनाया गया बर्थडे
    user_Pipalrawan News
    Pipalrawan News
    सोनकच्छ, देवास, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
  • देवास में सीएम जन विश्वास अभियान: कलेक्टर ने बच्चों के बीच बैठकर ली पढ़ाई की क्लास!
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    देवास में सीएम जन विश्वास अभियान: कलेक्टर ने बच्चों के बीच बैठकर ली पढ़ाई की क्लास!
    user_Sajid Pathan
    Sajid Pathan
    सोनकच्छ, देवास, मध्य प्रदेश•
    23 hrs ago
  • 9अगस्त 2026 को विश्व आदिवासी दिवस की जन सेवक विश्राम बारिया बारेला भील आदिवासी की और से मध्य प्रदेश के समस्त भाई बहनों को जय आदिवासी जय जोहार जय सेवा जय भीम जय संविधान
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    9अगस्त 2026 को विश्व आदिवासी दिवस की जन सेवक विश्राम बारिया बारेला भील आदिवासी की और से मध्य प्रदेश के समस्त भाई बहनों को जय आदिवासी जय जोहार जय सेवा जय भीम जय संविधान
    user_जन सेवक विश्राम बारिया बारेला आदिवासी विश्व परिषद
    जन सेवक विश्राम बारिया बारेला आदिवासी विश्व परिषद
    पत्रकार देवास, देवास, मध्य प्रदेश•
    19 hrs ago
  • 16 आदिवासी आईटीआई के निजीकरण के विरोध में तीन दिवसीय पदयात्रा 8 अगस्त से 10 अगस्त 2026 शासकीय एकलव्य आईटीआई, चकल्दी से सीहोर कलेक्टर कार्यालय तक
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    16 आदिवासी आईटीआई के निजीकरण के विरोध में तीन दिवसीय पदयात्रा
8 अगस्त से 10 अगस्त 2026
शासकीय एकलव्य आईटीआई, चकल्दी से सीहोर कलेक्टर कार्यालय तक
    user_Today Bharat DiGital news Inpu
    Today Bharat DiGital news Inpu
    Graphic designer देवास, देवास, मध्य प्रदेश•
    20 hrs ago
  • दो दिवसीय वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस इन्हेंसिंग एक्सेस टू जस्टिस" *न्याय तभी संभव, जब हम पीड़ित के दु:ख-दर्द को उसकी भाषा में समझें: सीजेआई न्यायमूर्ति सूर्यकांत मध्यप्रदेश में 4 नए फास्ट ट्रैक शुरु, करने वाला देश का पहला राज्य नेशनल लीगल सर्विस अथॉरिटी की योजनाओं के हिंदी संस्करण और ब्रेल लिपि में गाइड का हुआ विमोचन* जस्टिस टू चिल्ड्रन लिटिगेशन फेलोशिप प्रोग्राम तथा मध्यस्थता पर सर्टिफिकेट कोर्स का किया गया शुभारंभ 9 अगस्त तक चलेगी कॉन्फ्रेंस* इंदौर 08 अगस्त 2026 भारत के मुख्य न्यायाधीश और राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रमुख संरक्षक न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उच्चतम न्यायालय के अन्य न्यायमूर्तिगणों ने शनिवार को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में दो दिवसीय वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस - 'इन्हेंसिंग एक्सेस जस्टिस' के उद्घाटन सत्र का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। यह कॉन्फ्रेंस 9 अगस्त तक चलेगी। कॉन्फ्रेंस का आयोजन राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली (नालसा), मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर (सालसा) और मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के संयुक्त तत्वावधान में किया गया है। इस 2 दिवसीय कॉन्फ्रेंस का विषय 'इन्हेंसिंग एक्सेस टू जस्टिस' तथा इसकी थीम 'एकजुट आवाज, सशक्त भविष्य : संवाद, गरिमा और समावेशन के माध्यम से न्याय तक पहुंच' रखी गयी है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत ने नालसा की शिक्षा स्कीम तथा नालसा के थीम सॉन्ग को इंडियन साइन लैंग्वेज में लाँच किया। कॉन्फ्रेंस में नालसा के थीम सॉन्ग का प्रदर्शन कर इसकी योजनाओं के हिंदी संस्करण और ब्रेल लिपि में गाइड का विमोचन किया गया। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत, मुख्यमंत्री डॉ. यादव सहित अन्य सभी अतिथियों ने 'जस्टिस टू चिल्ड्रन लिटिगेशन फेलोशिप प्रोग्राम' तथा मध्यस्थता पर सर्टिफिकेट कोर्स - विवाद से सहमति की ओर का भी शुभारंभ किया। केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अर्जुनराम मेघवाल सहित अन्य न्यायमूर्तियों ने कॉन्फ्रेंस में आयोजकों द्वारा तैयार की गई 'न्याय के स्वर' नामक पुस्तक का विमोचन किया। सीजेआई न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत ने कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि 2 पक्षों में विवाद के हल में संवाद की प्रक्रिया अनेक विचारों से एकमत या आवाज तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। सबके न्याय की पहुंच सिर्फ कानून के आधार पर तैयार नहीं हो सकती है। यह संवाद से ही संभव है। न्याय की प्रक्रिया केवल न्यायपालिका या किसी एक संस्था से पूरी नहीं होती है। इस यज्ञ में सबको मिलकर आहूति देनी होती है। किसी विवाद में मध्यस्थता की प्रक्रिया सामने वाले के सुनने से प्रारंभ होती है। न्याय मिलने से पहले पीड़ित को यह विश्वास होना आवश्यक है कि उसकी पीड़ा या समस्या को कोई सुन रहा है। उन्होंने कहा कि सभी की समस्याएं अलग-अलग हो सकती हैं, परंतु हर समस्या का समाधान एक जैसा नहीं होगा। समस्या की प्रकृति के अनुसार हमें अलग तरीके से सोचकर उसका समाधान देना होगा। स्थानीय समस्या को उसी सोच के साथ निदान तक लेकर जाना पड़ेगा। सीजेआई न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत ने कहा कि किसी पीड़ित की समस्या और उसके दुख-दर्द को हमें उसकी अपनी भाषा में अंर्तमन से सुनना पड़ेगा। इससे समस्या को समझने और उसका निदान करने में बड़ा अंतर देखने को मिलेगा और यही अंतिम न्याय का आधार बनेगा। उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था के संदर्भ में सशक्त भविष्य, गरिमा, समावेशन सिर्फ शब्द नहीं, यह विधिक सहायता की वास्तविक परिभाषा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर के न्याय के प्रति समर्पण का जिक्र किया। लोकमाता के लिए न्याय सबके लिए समान अधिकार था। वे इकलौती महिला शासक थीं, जो प्रतिदिन नागरिकों, किसानों और विधवाओं से मुलाकात कर उनकी समस्याओं का समाधान करती थीं। वे सीधे नागरिकों से संवाद करती थीं, उनके शासनकाल में किसी के साथ भेदभाव नहीं होता था। इंदौर नगरी में इस सम्मेलन के आयोजन के लिए मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बधाई का पात्र है। न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत ने कहा कि नालसा के संवाद और चर्चा के लिए कार्यक्रमों से राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जिला और तहसील स्तर की संस्थाएं जुड़ी हैं। हमारे पैरा लीगल वॉलेंटियर सामाजिक व्यवस्था के सबसे करीब होते हैं। उनकी भूमिकाएं अलग हो सकती हैं, लेकिन हम सभी एक समान संवैधानिक उद्देश्य से साथ जुड़े होते हैं। वेस्ट जोन में विधिक सेवाओं का विस्तार मध्यप्रदेश के जनजातीय समुदाय, गोवा के मछुआरा समुदाय, गुजरात के माइग्रेंट वर्कर और मुंबई में रहने वाली किसी महिला के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार कोई डॉक्टर, किसी मरीज से बात करके उसकी परेशानियों को समझता है। उसी प्रकार समुदायों की समस्या को जानने-समझने के लिए हमें संवाद का सहारा लेना चाहिए। यह क्रॉन्फ्रेंस सिर्फ अपने विचारों का आदान-प्रदान करने का मंच नहीं है, हमें सभी तक न्याय की पहुंच आसान बनाने के लिए एक बेहतर न्याय व्यवस्था का निर्माण करना है। सशक्त भविष्य के लिए हम आज संवाद, नागरिकों की गरिमा, समानता की आवश्यकता है। पीड़ित को सबसे पहले मानवीय व्यवहार के साथ रिसीव करें। उसकी समस्या सुनें और फिर उसके अंतिम निदान का प्रयास किया जाए। पीड़ित की गरिमा का पूरा सम्मान किया जाए। गरीब, लाचार, आर्थिक रूप से पिछड़े, महिलाओं, बच्चों की सहायता करना कोई चैरिटी नहीं है, न्याय पाना सबका संवैधानिक अधिकारी है। हम सब पीड़ित को न्याय दिलाने में उसके सहायक की भूमिका में रहें। न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत ने कहा कि समाज के अंतिम छोर के व्यक्ति तक न्याय की पहुंच हो, इसी में समानता का भाव छिपा है। समानता सिर्फ शब्दों में नहीं वास्तविक अर्थों में भी आनी चाहिए, इसलिए जब खुद बड़ी भूमिका में आ जाएं, तो यह जरूर देखें कि हमारे बीच में से कोई पीछे तो नहीं रह गया ? हमें प्रगति और अधिकार दिलाने की कोशिश में यह जरूर देखना होगा कि कहीं कोई पीछे तो नहीं छूट गया ? उन्होंने कहा कि समानता और न्याय की पहुंच हर नागरिक का अधिकार है और यह सुनिश्चित करना भी हम सभी की ही जिम्मेदारी है। हमारी असली परीक्षा तो इस बात में है कि जो न्याय पाने के लिए हमारे पास नहीं आया है, हम उस तक कैसे पहुंचे ? न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत ने कहा कि देशभर में काम कर रहे न्यायमित्र (पैरा लीगल वॉलेंटियर्स) हमारी न्यायिक सेना (लीगल आर्मी) हैं। ये उन समाजसेवियों की तरह हैं, जिन्हें समाज के पीड़ितों, जरूरतमंदों और वंचितों को न्याय दिलाने का काम सौंपा गया है। महात्मा गांधी ने भी तत्कालीन समाज के लिए यही काम किया था। उन्होंने कहा कि समानता केवल स्कीम लॉन्च करने से ही नहीं आ जाएगी। इसके लिए संवाद किया जाना चाहिए। न्याय के लिए जरूरी है कि हर समस्या को पूरी संवेदनशीलता के साथ सुना जाए। सभी के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार हो। समावेशन यह सुनिश्चित करता है कि न्याय पाने से कोई वंचित न रहे, कोई पीछे न रह जाए। उन्होंने पैरा लीगल वॉलेंटियर्स से आहवान किया कि वे समाज के विकास के लिए और वंचितों को बराबरी में लाने के लिए समर्पित होकर काम करें और हर पात्र व्यक्ति को उसका वाजिब हक और उसके अधिकार का लाभ दिलाएं। *संवाद, गरिमा और संवदेनशीलता..., ये हमारी न्याय प्रणाली की हैं आत्मा* मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस अवसर पर कहा कि न्याय पाना इस धरती में जन्मे हर व्यक्ति का प्राथमिक और मानवीय अधिकार है। एक जागरूक नागरिक के रूप में यह हमारा कर्तव्य भी है कि हम समाज के हर उस पीड़ित व्यक्ति या समुदाय को न्याय के मंदिर तक न केवल पहुंचाए, वरन् उसे न्याय भी दिलवाएं जो न्याय पाने का वास्तविक अधिकारी है। उन्होंने कहा कि इसके लिए जरूरी है कि हमारी न्याय व्यवस्था ऐसी हो, जो सर्वव्यापी हो, सुलभ हो, सुगम हो, शीघ्र हो, सस्ती हो, समदर्शी हो और सबसे जरूरी यह कि न्याय मानवीय संवेदनाओं से भरा हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण भारतीय न्याय परंपरा को समृद्ध करने की दिशा में अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहा है। आज के इस पवित्र आयोजन की थीम - एक आवाज, सशक्त भविष्य, गरिमा, समावेशन के माध्यम से न्याय पहुंचाना है। न्याय, स्वतंत्रता और बंधुत्व को लोकतंत्र का आधार बनाया गया है। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता से छोटे-छोटे मामलों का निपटारा कर हम केस पेंडेंसी जैसे गंभीर विषयों पर मंथन कर रहे हैं। हमारे लिए न्याय की अवधारणा पंच परमेश्वरों की परंपरा रही है, जिन्होंने कभी समझाइश देकर, कभी समझौतों से विवादों को सहजता से सुलझाया है। भगवान श्रीकृष्ण के गीता के ज्ञान में भी समाधान का मार्ग दिखाई देता है, उन्होंने महाभारत युद्ध के भीषण समय को टालने के लिए 5 गांवों से समाधान निकालने का प्रयास किया था। हमारे संविधान में हजारों वर्षों की न्याय परंपरा का आधुनिक उत्कृष्ट संगम है। यह देश का न्याय विधान है। हमारे सभी न्यायालय वास्तव में न्याय के मंदिर हैं। भारतीय अदालतों को लोग श्रद्धा से न्याय मिलने के स्थान के रूप में मानते हैं। न्याय की आस में न्यायालय की चौखट पर कदम रखते हैं। राज्य सरकार न्यायपालिका की भावना के अनुसार अपने सभी उपलब्ध संसाधनों के साथ सदैव सभी के लिए न्याय सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
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    दो दिवसीय वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस इन्हेंसिंग एक्सेस टू जस्टिस"
*न्याय तभी संभव, जब हम पीड़ित के दु:ख-दर्द को उसकी भाषा में समझें: सीजेआई न्यायमूर्ति सूर्यकांत 
मध्यप्रदेश में 4 नए फास्ट ट्रैक शुरु, करने वाला देश का पहला राज्य
नेशनल लीगल सर्विस अथॉरिटी की योजनाओं के हिंदी संस्करण और ब्रेल लिपि में गाइड का हुआ विमोचन*
जस्टिस टू चिल्ड्रन लिटिगेशन फेलोशिप प्रोग्राम तथा मध्यस्थता पर सर्टिफिकेट कोर्स का किया गया शुभारंभ
9 अगस्त तक चलेगी कॉन्फ्रेंस*
इंदौर 08 अगस्त 2026 
भारत के मुख्य न्यायाधीश और राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रमुख संरक्षक न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उच्चतम न्यायालय के अन्य न्यायमूर्तिगणों ने शनिवार को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में दो दिवसीय वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस - 'इन्हेंसिंग एक्सेस जस्टिस' के उद्घाटन सत्र का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। यह कॉन्फ्रेंस 9 अगस्त तक चलेगी। कॉन्फ्रेंस का आयोजन राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली (नालसा), मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर (सालसा) और मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के संयुक्त तत्वावधान में किया गया है। इस 2 दिवसीय कॉन्फ्रेंस का विषय 'इन्हेंसिंग एक्सेस टू जस्टिस' तथा इसकी थीम 'एकजुट आवाज, सशक्त भविष्य : संवाद, गरिमा और समावेशन के माध्यम से न्याय तक पहुंच' रखी गयी है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत ने नालसा की शिक्षा स्कीम तथा नालसा के थीम सॉन्ग को इंडियन साइन लैंग्वेज में लाँच किया। कॉन्फ्रेंस में नालसा के थीम सॉन्ग का प्रदर्शन कर इसकी योजनाओं के हिंदी संस्करण और ब्रेल लिपि में गाइड का विमोचन किया गया। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत, मुख्यमंत्री डॉ. यादव सहित अन्य सभी अतिथियों ने 'जस्टिस टू चिल्ड्रन लिटिगेशन फेलोशिप प्रोग्राम' तथा मध्यस्थता पर सर्टिफिकेट कोर्स - विवाद से सहमति की ओर का भी शुभारंभ किया। केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अर्जुनराम मेघवाल सहित अन्य न्यायमूर्तियों ने कॉन्फ्रेंस में आयोजकों द्वारा तैयार की गई 'न्याय के स्वर' नामक पुस्तक का विमोचन किया।
सीजेआई न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत ने कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि 2 पक्षों में विवाद के हल में संवाद की प्रक्रिया अनेक विचारों से एकमत या आवाज तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। सबके न्याय की पहुंच सिर्फ कानून के आधार पर तैयार नहीं हो सकती है। यह संवाद से ही संभव है। न्याय की प्रक्रिया केवल न्यायपालिका या किसी एक संस्था से पूरी नहीं होती है। इस यज्ञ में सबको मिलकर आहूति देनी होती है। किसी विवाद में मध्यस्थता की प्रक्रिया सामने वाले के सुनने से प्रारंभ होती है। न्याय मिलने से पहले पीड़ित को यह विश्वास होना आवश्यक है कि उसकी पीड़ा या समस्या को कोई सुन रहा है। उन्होंने कहा कि सभी की समस्याएं अलग-अलग हो सकती हैं, परंतु हर समस्या का समाधान एक जैसा नहीं होगा। समस्या की प्रकृति के अनुसार हमें अलग तरीके से सोचकर उसका समाधान देना होगा। स्थानीय समस्या को उसी सोच के साथ निदान तक लेकर जाना पड़ेगा। सीजेआई न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत ने कहा कि किसी पीड़ित की समस्या और उसके दुख-दर्द को हमें उसकी अपनी भाषा में अंर्तमन से सुनना पड़ेगा। इससे समस्या को समझने और उसका निदान करने में बड़ा अंतर देखने को मिलेगा और यही अंतिम न्याय का आधार बनेगा। उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था के संदर्भ में सशक्त भविष्य, गरिमा, समावेशन सिर्फ शब्द नहीं, यह विधिक सहायता की वास्तविक परिभाषा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर के न्याय के प्रति समर्पण का जिक्र किया। लोकमाता के लिए न्याय सबके लिए समान अधिकार था। वे इकलौती महिला शासक थीं, जो प्रतिदिन नागरिकों, किसानों और विधवाओं से मुलाकात कर उनकी समस्याओं का समाधान करती थीं। वे सीधे नागरिकों से संवाद करती थीं, उनके शासनकाल में किसी के साथ भेदभाव नहीं होता था। इंदौर नगरी में इस सम्मेलन के आयोजन के लिए मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बधाई का पात्र है। 
न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत ने कहा कि नालसा के संवाद और चर्चा के लिए कार्यक्रमों से राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जिला और तहसील स्तर की संस्थाएं जुड़ी हैं। हमारे पैरा लीगल वॉलेंटियर सामाजिक व्यवस्था के सबसे करीब होते हैं। उनकी भूमिकाएं अलग हो सकती हैं, लेकिन हम सभी एक समान संवैधानिक उद्देश्य से साथ जुड़े होते हैं। वेस्ट जोन में विधिक सेवाओं का विस्तार मध्यप्रदेश के जनजातीय समुदाय, गोवा के मछुआरा समुदाय, गुजरात के माइग्रेंट वर्कर और मुंबई में रहने वाली किसी महिला के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार कोई डॉक्टर, किसी मरीज से बात करके उसकी परेशानियों को समझता है। उसी प्रकार समुदायों की समस्या को जानने-समझने के लिए हमें संवाद का सहारा लेना चाहिए। यह क्रॉन्फ्रेंस सिर्फ अपने विचारों का आदान-प्रदान करने का मंच नहीं है, हमें सभी तक न्याय की पहुंच आसान बनाने के लिए एक बेहतर न्याय व्यवस्था का निर्माण करना है। सशक्त भविष्य के लिए हम आज संवाद, नागरिकों की गरिमा, समानता की आवश्यकता है। पीड़ित को सबसे पहले मानवीय व्यवहार के साथ रिसीव करें। उसकी समस्या सुनें और फिर उसके अंतिम निदान का प्रयास किया जाए। पीड़ित की गरिमा का पूरा सम्मान किया जाए। गरीब, लाचार, आर्थिक रूप से पिछड़े, महिलाओं, बच्चों की सहायता करना कोई चैरिटी नहीं है, न्याय पाना सबका संवैधानिक अधिकारी है। हम सब पीड़ित को न्याय दिलाने में उसके सहायक की भूमिका में रहें। 
न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत ने कहा कि समाज के अंतिम छोर के व्यक्ति तक न्याय की पहुंच हो, इसी में समानता का भाव छिपा है। समानता सिर्फ शब्दों में नहीं वास्तविक अर्थों में भी आनी चाहिए, इसलिए जब खुद बड़ी भूमिका में आ जाएं, तो यह जरूर देखें कि हमारे बीच में से कोई पीछे तो नहीं रह गया ? हमें प्रगति और अधिकार दिलाने की कोशिश में यह जरूर देखना होगा कि कहीं कोई पीछे तो नहीं छूट गया ? उन्होंने कहा कि समानता और न्याय की पहुंच हर नागरिक का अधिकार है और यह सुनिश्चित करना भी हम सभी की ही जिम्मेदारी है। हमारी असली परीक्षा तो इस बात में है कि जो न्याय पाने के लिए हमारे पास नहीं आया है, हम उस तक कैसे पहुंचे ? न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत ने कहा कि देशभर में काम कर रहे न्यायमित्र (पैरा लीगल वॉलेंटियर्स) हमारी न्यायिक सेना (लीगल आर्मी) हैं। ये उन समाजसेवियों की तरह हैं, जिन्हें समाज के पीड़ितों, जरूरतमंदों और वंचितों को न्याय दिलाने का काम सौंपा गया है। महात्मा गांधी ने भी तत्कालीन समाज के लिए यही काम किया था। उन्होंने कहा कि समानता केवल स्कीम लॉन्च करने से ही नहीं आ जाएगी। इसके लिए संवाद किया जाना चाहिए। न्याय के लिए जरूरी है कि हर समस्या को पूरी संवेदनशीलता के साथ सुना जाए। सभी के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार हो। समावेशन यह सुनिश्चित करता है कि न्याय पाने से कोई वंचित न रहे, कोई पीछे न रह जाए। उन्होंने पैरा लीगल वॉलेंटियर्स से आहवान किया कि वे समाज के विकास के लिए और वंचितों को बराबरी में लाने के लिए समर्पित होकर काम करें और हर पात्र व्यक्ति को उसका वाजिब हक और उसके अधिकार का लाभ दिलाएं।  
*संवाद, गरिमा और संवदेनशीलता..., ये हमारी न्याय प्रणाली की हैं आत्मा*
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस अवसर पर कहा कि न्याय पाना इस धरती में जन्मे हर व्यक्ति का प्राथमिक और मानवीय अधिकार है। एक जागरूक नागरिक के रूप में यह हमारा कर्तव्य भी है कि हम समाज के हर उस पीड़ित व्यक्ति या समुदाय को न्याय के मंदिर तक न केवल पहुंचाए, वरन् उसे न्याय भी दिलवाएं जो न्याय पाने का वास्तविक अधिकारी है। उन्होंने कहा कि इसके लिए जरूरी है कि हमारी न्याय व्यवस्था ऐसी हो, जो सर्वव्यापी हो, सुलभ हो, सुगम हो, शीघ्र हो, सस्ती हो, समदर्शी हो और सबसे जरूरी यह कि न्याय मानवीय संवेदनाओं से भरा हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण भारतीय न्याय परंपरा को समृद्ध करने की दिशा में अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहा है। आज के इस पवित्र आयोजन की थीम - एक आवाज, सशक्त भविष्य, गरिमा, समावेशन के माध्यम से न्याय पहुंचाना है। न्याय, स्वतंत्रता और बंधुत्व को लोकतंत्र का आधार बनाया गया है। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता से छोटे-छोटे मामलों का निपटारा कर हम केस पेंडेंसी जैसे गंभीर विषयों पर मंथन कर रहे हैं। हमारे लिए न्याय की अवधारणा पंच परमेश्वरों की परंपरा रही है, जिन्होंने कभी समझाइश देकर, कभी समझौतों से विवादों को सहजता से सुलझाया है। भगवान श्रीकृष्ण के गीता के ज्ञान में भी समाधान का मार्ग दिखाई देता है, उन्होंने महाभारत युद्ध के भीषण समय को टालने के लिए 5 गांवों से समाधान निकालने का प्रयास किया था। हमारे संविधान में हजारों वर्षों की न्याय परंपरा का आधुनिक उत्कृष्ट संगम है। यह देश का न्याय विधान है। हमारे सभी न्यायालय वास्तव में न्याय के मंदिर हैं। भारतीय अदालतों को लोग श्रद्धा से न्याय मिलने के स्थान के रूप में मानते हैं। न्याय की आस में न्यायालय की चौखट पर कदम रखते हैं। राज्य सरकार न्यायपालिका की भावना के अनुसार अपने सभी उपलब्ध संसाधनों के साथ सदैव सभी के लिए न्याय सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
    user_Naseem Khan
    Naseem Khan
    इंदौर, इंदौर, मध्य प्रदेश•
    15 min ago
  • डॉ भीमराव जी की प्रतिमा के आगे गाना लगाया बनाया गया जय भीम जय संविधान
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    डॉ भीमराव जी की प्रतिमा के आगे गाना लगाया बनाया गया जय भीम जय संविधान
    user_AARTI Jadhav
    AARTI Jadhav
    इंदौर, इंदौर, मध्य प्रदेश•
    24 min ago
  • रक्तदान किया, एवं हास्पिटल में कुर्सी, व पानी के जार वितरण कर पौधे लगाये रक्तदान किया, एवं हास्पिटल में कुर्सी, व पानी के जार वितरण कर पौधे लगाये देवास जिले के नेवरी में कांग्रेस कमेटी अल्पसंख्यक विभाग के निर्देश अनुसार 30 लोगों ने रक्तदान किया, एवं हास्पिटल में कुर्सी, व पानी के जार वितरण कर पौधे लगाये। राज्यसभा सांसद एवं अल्पसंख्यक विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष जनाब इमरान प्रतापगढ़ी साहब के जन्मदिवस को पखवाड़े के रूप में मनाया जा रहा है देवास ग्रामीण कांग्रेस कमेटी अल्पसंख्यक विभाग टीम गोलू काजी द्वारा सेवा संकल्प के रूप में 3 दिन तक मनाया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ जन डॉक्टर जगदीश जी जोशी,डॉक्टर पंकज जोशी,गणेश जी जायसवाल , मुबारीक खान,शरीफ मेवाती,विनोद कुमार तथा सभी वरिष्ठ कांग्रेस जन एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे
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    रक्तदान किया, एवं हास्पिटल में कुर्सी, व पानी के जार वितरण कर  पौधे लगाये
रक्तदान किया, एवं हास्पिटल में कुर्सी, व पानी के जार वितरण कर  पौधे लगाये
देवास जिले के नेवरी में कांग्रेस कमेटी अल्पसंख्यक विभाग के निर्देश अनुसार 30 लोगों ने रक्तदान किया, एवं हास्पिटल में कुर्सी, व पानी के जार वितरण कर  पौधे लगाये।   
राज्यसभा सांसद एवं अल्पसंख्यक विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष जनाब इमरान प्रतापगढ़ी साहब के जन्मदिवस को पखवाड़े के रूप में मनाया जा रहा है देवास ग्रामीण कांग्रेस कमेटी अल्पसंख्यक विभाग टीम गोलू काजी द्वारा सेवा संकल्प के रूप में 3 दिन तक मनाया गया।
इस अवसर पर वरिष्ठ जन डॉक्टर जगदीश जी जोशी,डॉक्टर पंकज जोशी,गणेश जी जायसवाल , मुबारीक खान,शरीफ मेवाती,विनोद कुमार तथा
सभी वरिष्ठ कांग्रेस जन एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे
    user_पत्रकार करीम खान H. p
    पत्रकार करीम खान H. p
    हाटपीपल्या, देवास, मध्य प्रदेश•
    11 hrs ago
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