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विधानसभा क्षेत्र कटंगी के ग्राम गजपुर में आयोजित पारंपरिक गर्र मेला

2 hrs ago
user_संदीप शर्मा
संदीप शर्मा
Local News Reporter कटंगी, बालाघाट, मध्य प्रदेश•
2 hrs ago

विधानसभा क्षेत्र कटंगी के ग्राम गजपुर में आयोजित पारंपरिक गर्र मेला

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  • Post by संदीप शर्मा
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    Post by संदीप शर्मा
    user_संदीप शर्मा
    संदीप शर्मा
    Local News Reporter कटंगी, बालाघाट, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
  • प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी धूरेड़ी के दिन कटंगी तहसील क्षेत्र के ग्राम समतपुरी, लिंगापौनार और खैरलांजी तहसील के ग्राम गजपुर में मेले का आयोजन कर गर्र देव का पूजन किया गया। 04 मार्च बुधवार की शाम करीब 04 बजे से इन सभी गांवों में मेले की शुरूआत हुई। मेले में विभिन्न प्रकार की दुकानें और मनोरंजन के लिए विविध कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसके साथ ही बड़ी संख्या में हिंदु धर्मावंलबियों ने गर्र देव का पूजन किया। मान्यता है कि हिंदु धर्म को मानने वाले वह लोग जो महाशिवरात्रि के अवसर पर भगवान शिव के तीर्थ क्षेत्र या धार्मिक स्थल नंदी लेकर जाते है। वह आज धुरेड़ी के दिन अपने घरों से पुनः नंदी लेकर गर्र देव का पूजन करने के लिए भी जाते है।
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    प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी धूरेड़ी के दिन कटंगी तहसील क्षेत्र के ग्राम समतपुरी, लिंगापौनार और खैरलांजी तहसील के ग्राम गजपुर में मेले का आयोजन कर गर्र देव का पूजन किया गया। 04 मार्च बुधवार की शाम करीब 04 बजे से इन सभी गांवों में मेले की शुरूआत हुई। मेले में विभिन्न प्रकार की दुकानें और मनोरंजन के लिए विविध कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसके साथ ही बड़ी संख्या में हिंदु धर्मावंलबियों ने गर्र देव का पूजन किया। मान्यता है कि हिंदु धर्म को मानने वाले वह लोग जो महाशिवरात्रि के अवसर पर भगवान शिव के तीर्थ क्षेत्र या धार्मिक स्थल नंदी लेकर जाते है। वह आज धुरेड़ी के दिन अपने घरों से पुनः नंदी लेकर गर्र देव का पूजन करने के लिए भी जाते है।
    user_Dev Anand
    Dev Anand
    कटंगी, बालाघाट, मध्य प्रदेश•
    7 hrs ago
  • सिवनी जिले के बादलपार में होली दहन के बाद निभाई जाती है अनोखी परंपरा सिवनी जिले के विकासखंड अंतर्गत ग्राम बादलपार में होली दहन के पश्चात एक अनोखी और प्रेरणादायक परंपरा निभाई जाती है, जो गांव की एकता, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत की मिसाल पेश करती है। सुबह की शुरुआत एकता के संग होली दहन की रात उत्सव और उल्लास के साथ संपन्न होने के बाद अगली सुबह गांव का नजारा कुछ अलग ही होता है। परंपरा के अनुसार, पूरे ग्राम से प्रत्येक परिवार का एक सदस्य होली दहन स्थल पर पहुंचता है। यह केवल एक रस्म नहीं, बल्कि पूरे गांव की सामूहिक सहभागिता और जिम्मेदारी का प्रतीक है। मिलकर लगाया जाता है होली का प्रखंबा ग्रामवासी एकत्रित होकर विधि-विधान के साथ होली का प्रखंबा (ध्वज/स्तंभ) स्थापित करते हैं। यह प्रखंबा गांव की समृद्धि, शांति और आपसी भाईचारे का प्रतीक माना जाता है। इस दौरान वातावरण भक्ति गीतों, हंसी-खुशी और पारंपरिक उल्लास से सराबोर रहता है। बुजुर्गों के मार्गदर्शन में युवा पीढ़ी इस परंपरा को सीखती और आगे बढ़ाती है। यही कारण है कि वर्षों पुरानी यह परंपरा आज भी पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाई जा रही है। सामाजिक एकता का संदेश आज जब आधुनिकता के दौर में कई परंपराएं लुप्त होती जा रही हैं, ऐसे समय में बादलपार गांव की यह परंपरा सामाजिक एकजुटता का सशक्त संदेश देती है। यहां जाति, वर्ग और उम्र का भेदभाव मिटाकर सभी लोग एक मंच पर खड़े दिखाई देते हैं। संस्कृति और परंपरा का संगम यह अनूठी परंपरा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि ग्राम संस्कृति का जीवंत उदाहरण है। होली दहन के बाद प्रखंबा स्थापना की यह परंपरा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है। ग्राम बादलपार की यह परंपरा न केवल सिवनी जिले बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है, जो बताती है कि भारत के गांव आज भी अपनी जड़ों और संस्कारों से जुड़े हुए हैं।
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    सिवनी जिले के बादलपार में होली दहन के बाद निभाई जाती है अनोखी परंपरा
सिवनी जिले के विकासखंड अंतर्गत ग्राम बादलपार में होली दहन के पश्चात एक अनोखी और प्रेरणादायक परंपरा निभाई जाती है, जो गांव की एकता, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत की मिसाल पेश करती है।
सुबह की शुरुआत एकता के संग
होली दहन की रात उत्सव और उल्लास के साथ संपन्न होने के बाद अगली सुबह गांव का नजारा कुछ अलग ही होता है। परंपरा के अनुसार, पूरे ग्राम से प्रत्येक परिवार का एक सदस्य होली दहन स्थल पर पहुंचता है। यह केवल एक रस्म नहीं, बल्कि पूरे गांव की सामूहिक सहभागिता और जिम्मेदारी का प्रतीक है।
मिलकर लगाया जाता है होली का प्रखंबा
ग्रामवासी एकत्रित होकर विधि-विधान के साथ होली का प्रखंबा (ध्वज/स्तंभ) स्थापित करते हैं। यह प्रखंबा गांव की समृद्धि, शांति और आपसी भाईचारे का प्रतीक माना जाता है। इस दौरान वातावरण भक्ति गीतों, हंसी-खुशी और पारंपरिक उल्लास से सराबोर रहता है।
बुजुर्गों के मार्गदर्शन में युवा पीढ़ी इस परंपरा को सीखती और आगे बढ़ाती है। यही कारण है कि वर्षों पुरानी यह परंपरा आज भी पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाई जा रही है।
सामाजिक एकता का संदेश
आज जब आधुनिकता के दौर में कई परंपराएं लुप्त होती जा रही हैं, ऐसे समय में बादलपार गांव की यह परंपरा सामाजिक एकजुटता का सशक्त संदेश देती है। यहां जाति, वर्ग और उम्र का भेदभाव मिटाकर सभी लोग एक मंच पर खड़े दिखाई देते हैं।
संस्कृति और परंपरा का संगम
यह अनूठी परंपरा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि ग्राम संस्कृति का जीवंत उदाहरण है। होली दहन के बाद प्रखंबा स्थापना की यह परंपरा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है।
ग्राम बादलपार की यह परंपरा न केवल सिवनी जिले बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है, जो बताती है कि भारत के गांव आज भी अपनी जड़ों और संस्कारों से जुड़े हुए हैं।
    user_सरवन वर्मा पत्रकार
    सरवन वर्मा पत्रकार
    Journalist कुरई, सिवनी, मध्य प्रदेश•
    4 hrs ago
  • #premanand ji mahraj
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    #premanand ji mahraj
    user_Aniruddhacharya ji
    Aniruddhacharya ji
    Graphic designer Balaghat, Madhya Pradesh•
    6 hrs ago
  • कुरई विकासखंड के अंतर्गत ग्राम घाटकोहका में मेघनाथ मेले का आयोजन हुआ जिसमें गांव के लोगों द्वारा मेघनाथ की पूजा पाठ की गई
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    कुरई विकासखंड के अंतर्गत ग्राम घाटकोहका में मेघनाथ मेले का आयोजन हुआ जिसमें गांव के लोगों द्वारा मेघनाथ की पूजा पाठ की गई
    user_Ramkumar Prajapati
    Ramkumar Prajapati
    Classified ads newspaper publisher कुरई, सिवनी, मध्य प्रदेश•
    6 hrs ago
  • Post by Love
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    Post by Love
    user_Love
    Love
    Balaghat, Madhya Pradesh•
    6 hrs ago
  • होली का त्योहार बड़े उमंग उत्साह भाईचारे से मनाया गया इस दौरान रंग गुलाल लगाकर एक दूसरे को गले लगे
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    होली का त्योहार बड़े उमंग उत्साह भाईचारे से मनाया गया इस दौरान रंग गुलाल लगाकर एक दूसरे को गले लगे
    user_बिहारीलाल सोनी
    बिहारीलाल सोनी
    पत्रकार कुरई, सिवनी, मध्य प्रदेश•
    13 hrs ago
  • 02 और 03 मार्च की रात्रि होलिका दहन के बाद 04 मार्च बुधवार को क्षेत्र भर में धुरेड़ी का पर्व पूरी उत्साह और उमंग के साथ मनाया जा रहा हैं। छोटे बच्चों में इस पर्व को लेकर बेहद उत्साह नजर आ रहा है। बुधवार की सुबह सुरज की पहली किरण के साथ ही शहर के लेकर गांवों में रंगों का पर्व धुरेड़ी पर लोग एक दूसरे को रंग-गुलाल लगाकर पर्व की बधाईया देते हुए नजर आए। बच्चे हाथों में पिचकारी और रंग लेकर अपने हम उम्र के साथियों का पीछा करते हुए रंग लगाने में मशगुल दिखाएं। एक बड़ा तबका सोशल मीडिया के जरिए भी एक-दूसरे को पर्व की बधाई देते हुए नजर आया।
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    02 और 03 मार्च की रात्रि होलिका दहन के बाद 04 मार्च बुधवार को क्षेत्र भर में धुरेड़ी का पर्व पूरी उत्साह और उमंग के साथ मनाया जा रहा हैं। छोटे बच्चों में इस पर्व को लेकर बेहद उत्साह नजर आ रहा है। बुधवार की सुबह सुरज की पहली किरण के साथ ही शहर के लेकर गांवों में रंगों का पर्व धुरेड़ी पर लोग एक दूसरे को रंग-गुलाल लगाकर पर्व की बधाईया देते हुए नजर आए। बच्चे हाथों में पिचकारी और रंग लेकर अपने हम उम्र के साथियों का पीछा करते हुए रंग लगाने में मशगुल दिखाएं। एक बड़ा तबका सोशल मीडिया के जरिए भी एक-दूसरे को पर्व की बधाई देते हुए नजर आया।
    user_Dev Anand
    Dev Anand
    कटंगी, बालाघाट, मध्य प्रदेश•
    14 hrs ago
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