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सिवनी जिले के बादलपार में होली दहन के बाद निभाई जाती है अनोखी परंपरा सिवनी जिले के विकासखंड अंतर्गत ग्राम बादलपार में होली दहन के पश्चात एक अनोखी और प्रेरणादायक परंपरा निभाई जाती है, जो गांव की एकता, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत की मिसाल पेश करती है। सुबह की शुरुआत एकता के संग होली दहन की रात उत्सव और उल्लास के साथ संपन्न होने के बाद अगली सुबह गांव का नजारा कुछ अलग ही होता है। परंपरा के अनुसार, पूरे ग्राम से प्रत्येक परिवार का एक सदस्य होली दहन स्थल पर पहुंचता है। यह केवल एक रस्म नहीं, बल्कि पूरे गांव की सामूहिक सहभागिता और जिम्मेदारी का प्रतीक है। मिलकर लगाया जाता है होली का प्रखंबा ग्रामवासी एकत्रित होकर विधि-विधान के साथ होली का प्रखंबा (ध्वज/स्तंभ) स्थापित करते हैं। यह प्रखंबा गांव की समृद्धि, शांति और आपसी भाईचारे का प्रतीक माना जाता है। इस दौरान वातावरण भक्ति गीतों, हंसी-खुशी और पारंपरिक उल्लास से सराबोर रहता है। बुजुर्गों के मार्गदर्शन में युवा पीढ़ी इस परंपरा को सीखती और आगे बढ़ाती है। यही कारण है कि वर्षों पुरानी यह परंपरा आज भी पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाई जा रही है। सामाजिक एकता का संदेश आज जब आधुनिकता के दौर में कई परंपराएं लुप्त होती जा रही हैं, ऐसे समय में बादलपार गांव की यह परंपरा सामाजिक एकजुटता का सशक्त संदेश देती है। यहां जाति, वर्ग और उम्र का भेदभाव मिटाकर सभी लोग एक मंच पर खड़े दिखाई देते हैं। संस्कृति और परंपरा का संगम यह अनूठी परंपरा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि ग्राम संस्कृति का जीवंत उदाहरण है। होली दहन के बाद प्रखंबा स्थापना की यह परंपरा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है। ग्राम बादलपार की यह परंपरा न केवल सिवनी जिले बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है, जो बताती है कि भारत के गांव आज भी अपनी जड़ों और संस्कारों से जुड़े हुए हैं।

6 hrs ago
user_सरवन वर्मा पत्रकार
सरवन वर्मा पत्रकार
Journalist कुरई, सिवनी, मध्य प्रदेश•
6 hrs ago

सिवनी जिले के बादलपार में होली दहन के बाद निभाई जाती है अनोखी परंपरा सिवनी जिले के विकासखंड अंतर्गत ग्राम बादलपार में होली दहन के पश्चात एक अनोखी और प्रेरणादायक परंपरा निभाई जाती है, जो गांव की एकता, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत की मिसाल पेश करती है। सुबह की शुरुआत एकता के संग होली दहन की रात उत्सव और उल्लास के साथ संपन्न होने के बाद अगली सुबह गांव का नजारा कुछ अलग ही होता है। परंपरा के अनुसार, पूरे ग्राम से प्रत्येक परिवार का एक सदस्य होली दहन स्थल पर पहुंचता है। यह केवल एक रस्म नहीं, बल्कि पूरे गांव की सामूहिक सहभागिता और जिम्मेदारी का प्रतीक है। मिलकर लगाया जाता है होली का प्रखंबा ग्रामवासी एकत्रित होकर विधि-विधान के साथ होली का प्रखंबा (ध्वज/स्तंभ) स्थापित करते हैं। यह प्रखंबा गांव की समृद्धि, शांति और आपसी भाईचारे का प्रतीक माना जाता है। इस दौरान वातावरण भक्ति गीतों, हंसी-खुशी और पारंपरिक उल्लास से सराबोर रहता है। बुजुर्गों के मार्गदर्शन में युवा पीढ़ी इस परंपरा को सीखती और आगे बढ़ाती है। यही कारण है कि वर्षों पुरानी यह परंपरा आज भी पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाई जा रही है। सामाजिक एकता का संदेश आज जब आधुनिकता के दौर में कई परंपराएं लुप्त होती जा रही हैं, ऐसे समय में बादलपार गांव की यह परंपरा सामाजिक एकजुटता का सशक्त संदेश देती है। यहां जाति, वर्ग और उम्र का भेदभाव मिटाकर सभी लोग एक मंच पर खड़े दिखाई देते हैं। संस्कृति और परंपरा का संगम यह अनूठी परंपरा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि ग्राम संस्कृति का जीवंत उदाहरण है। होली दहन के बाद प्रखंबा स्थापना की यह परंपरा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है। ग्राम बादलपार की यह परंपरा न केवल सिवनी जिले बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है, जो बताती है कि भारत के गांव आज भी अपनी जड़ों और संस्कारों से जुड़े हुए हैं।

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  • सिवनी जिले के बादलपार में होली दहन के बाद निभाई जाती है अनोखी परंपरा सिवनी जिले के विकासखंड अंतर्गत ग्राम बादलपार में होली दहन के पश्चात एक अनोखी और प्रेरणादायक परंपरा निभाई जाती है, जो गांव की एकता, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत की मिसाल पेश करती है। सुबह की शुरुआत एकता के संग होली दहन की रात उत्सव और उल्लास के साथ संपन्न होने के बाद अगली सुबह गांव का नजारा कुछ अलग ही होता है। परंपरा के अनुसार, पूरे ग्राम से प्रत्येक परिवार का एक सदस्य होली दहन स्थल पर पहुंचता है। यह केवल एक रस्म नहीं, बल्कि पूरे गांव की सामूहिक सहभागिता और जिम्मेदारी का प्रतीक है। मिलकर लगाया जाता है होली का प्रखंबा ग्रामवासी एकत्रित होकर विधि-विधान के साथ होली का प्रखंबा (ध्वज/स्तंभ) स्थापित करते हैं। यह प्रखंबा गांव की समृद्धि, शांति और आपसी भाईचारे का प्रतीक माना जाता है। इस दौरान वातावरण भक्ति गीतों, हंसी-खुशी और पारंपरिक उल्लास से सराबोर रहता है। बुजुर्गों के मार्गदर्शन में युवा पीढ़ी इस परंपरा को सीखती और आगे बढ़ाती है। यही कारण है कि वर्षों पुरानी यह परंपरा आज भी पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाई जा रही है। सामाजिक एकता का संदेश आज जब आधुनिकता के दौर में कई परंपराएं लुप्त होती जा रही हैं, ऐसे समय में बादलपार गांव की यह परंपरा सामाजिक एकजुटता का सशक्त संदेश देती है। यहां जाति, वर्ग और उम्र का भेदभाव मिटाकर सभी लोग एक मंच पर खड़े दिखाई देते हैं। संस्कृति और परंपरा का संगम यह अनूठी परंपरा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि ग्राम संस्कृति का जीवंत उदाहरण है। होली दहन के बाद प्रखंबा स्थापना की यह परंपरा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है। ग्राम बादलपार की यह परंपरा न केवल सिवनी जिले बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है, जो बताती है कि भारत के गांव आज भी अपनी जड़ों और संस्कारों से जुड़े हुए हैं।
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    सिवनी जिले के बादलपार में होली दहन के बाद निभाई जाती है अनोखी परंपरा
सिवनी जिले के विकासखंड अंतर्गत ग्राम बादलपार में होली दहन के पश्चात एक अनोखी और प्रेरणादायक परंपरा निभाई जाती है, जो गांव की एकता, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत की मिसाल पेश करती है।
सुबह की शुरुआत एकता के संग
होली दहन की रात उत्सव और उल्लास के साथ संपन्न होने के बाद अगली सुबह गांव का नजारा कुछ अलग ही होता है। परंपरा के अनुसार, पूरे ग्राम से प्रत्येक परिवार का एक सदस्य होली दहन स्थल पर पहुंचता है। यह केवल एक रस्म नहीं, बल्कि पूरे गांव की सामूहिक सहभागिता और जिम्मेदारी का प्रतीक है।
मिलकर लगाया जाता है होली का प्रखंबा
ग्रामवासी एकत्रित होकर विधि-विधान के साथ होली का प्रखंबा (ध्वज/स्तंभ) स्थापित करते हैं। यह प्रखंबा गांव की समृद्धि, शांति और आपसी भाईचारे का प्रतीक माना जाता है। इस दौरान वातावरण भक्ति गीतों, हंसी-खुशी और पारंपरिक उल्लास से सराबोर रहता है।
बुजुर्गों के मार्गदर्शन में युवा पीढ़ी इस परंपरा को सीखती और आगे बढ़ाती है। यही कारण है कि वर्षों पुरानी यह परंपरा आज भी पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाई जा रही है।
सामाजिक एकता का संदेश
आज जब आधुनिकता के दौर में कई परंपराएं लुप्त होती जा रही हैं, ऐसे समय में बादलपार गांव की यह परंपरा सामाजिक एकजुटता का सशक्त संदेश देती है। यहां जाति, वर्ग और उम्र का भेदभाव मिटाकर सभी लोग एक मंच पर खड़े दिखाई देते हैं।
संस्कृति और परंपरा का संगम
यह अनूठी परंपरा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि ग्राम संस्कृति का जीवंत उदाहरण है। होली दहन के बाद प्रखंबा स्थापना की यह परंपरा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है।
ग्राम बादलपार की यह परंपरा न केवल सिवनी जिले बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है, जो बताती है कि भारत के गांव आज भी अपनी जड़ों और संस्कारों से जुड़े हुए हैं।
    user_सरवन वर्मा पत्रकार
    सरवन वर्मा पत्रकार
    Journalist कुरई, सिवनी, मध्य प्रदेश•
    6 hrs ago
  • कुरई विकासखंड के अंतर्गत ग्राम घाटकोहका में मेघनाथ मेले का आयोजन हुआ जिसमें गांव के लोगों द्वारा मेघनाथ की पूजा पाठ की गई
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    कुरई विकासखंड के अंतर्गत ग्राम घाटकोहका में मेघनाथ मेले का आयोजन हुआ जिसमें गांव के लोगों द्वारा मेघनाथ की पूजा पाठ की गई
    user_Ramkumar Prajapati
    Ramkumar Prajapati
    Classified ads newspaper publisher कुरई, सिवनी, मध्य प्रदेश•
    8 hrs ago
  • होली का त्योहार बड़े उमंग उत्साह भाईचारे से मनाया गया इस दौरान रंग गुलाल लगाकर एक दूसरे को गले लगे
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    होली का त्योहार बड़े उमंग उत्साह भाईचारे से मनाया गया इस दौरान रंग गुलाल लगाकर एक दूसरे को गले लगे
    user_बिहारीलाल सोनी
    बिहारीलाल सोनी
    पत्रकार कुरई, सिवनी, मध्य प्रदेश•
    14 hrs ago
  • Post by संदीप शर्मा
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    Post by संदीप शर्मा
    user_संदीप शर्मा
    संदीप शर्मा
    Local News Reporter कटंगी, बालाघाट, मध्य प्रदेश•
    3 hrs ago
  • महुआ बीनने गई महिला पर बाघ का हमला, मौके पर मौत; ग्रामीणों का हंगामा वन परिक्षेत्र बहरई अंतर्गत पाण्डरवानी गांव के पास जंगल में एक दर्दनाक घटना सामने आई है। यहां महुआ बीनने गई एक महिला पर घात लगाए बैठे बाघ ने अचानक हमला कर दिया। हमले में महिला की मौके पर ही मौत हो गई। बताया जा रहा है कि बाघ ने महिला के शरीर को दो हिस्सों में अलग कर दिया, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया है। घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और आक्रोश जताते हुए हंगामा करने लगे। ग्रामीणों ने वन विभाग पर लापरवाही के आरोप भी लगाए हैं। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला। विभाग ने मृतिका के परिजनों को 8 लाख रुपये की सहायता राशि तथा अंत्येष्टि के लिए 20 हजार रुपये देने का तत्काल आश्वासन दिया है। फिलहाल वन विभाग क्षेत्र में निगरानी बढ़ाने और बाघ की मूवमेंट पर नजर रखने की बात कह रहा है। वहीं इस घटना के बाद आसपास के गांवों में डर का माहौल बना हुआ है।
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    महुआ बीनने गई महिला पर बाघ का हमला, मौके पर मौत; ग्रामीणों का हंगामा
वन परिक्षेत्र बहरई अंतर्गत पाण्डरवानी गांव के पास जंगल में एक दर्दनाक घटना सामने आई है। यहां महुआ बीनने गई एक महिला पर घात लगाए बैठे बाघ ने अचानक हमला कर दिया। हमले में महिला की मौके पर ही मौत हो गई। बताया जा रहा है कि बाघ ने महिला के शरीर को दो हिस्सों में अलग कर दिया, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया है।
घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और आक्रोश जताते हुए हंगामा करने लगे। ग्रामीणों ने वन विभाग पर लापरवाही के आरोप भी लगाए हैं।
सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला। विभाग ने मृतिका के परिजनों को 8 लाख रुपये की सहायता राशि तथा अंत्येष्टि के लिए 20 हजार रुपये देने का तत्काल आश्वासन दिया है।
फिलहाल वन विभाग क्षेत्र में निगरानी बढ़ाने और बाघ की मूवमेंट पर नजर रखने की बात कह रहा है। वहीं इस घटना के बाद आसपास के गांवों में डर का माहौल बना हुआ है।
    user_BS News Network
    BS News Network
    Local News Reporter Seoni, Madhya Pradesh•
    7 hrs ago
  • प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी धूरेड़ी के दिन कटंगी तहसील क्षेत्र के ग्राम समतपुरी, लिंगापौनार और खैरलांजी तहसील के ग्राम गजपुर में मेले का आयोजन कर गर्र देव का पूजन किया गया। 04 मार्च बुधवार की शाम करीब 04 बजे से इन सभी गांवों में मेले की शुरूआत हुई। मेले में विभिन्न प्रकार की दुकानें और मनोरंजन के लिए विविध कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसके साथ ही बड़ी संख्या में हिंदु धर्मावंलबियों ने गर्र देव का पूजन किया। मान्यता है कि हिंदु धर्म को मानने वाले वह लोग जो महाशिवरात्रि के अवसर पर भगवान शिव के तीर्थ क्षेत्र या धार्मिक स्थल नंदी लेकर जाते है। वह आज धुरेड़ी के दिन अपने घरों से पुनः नंदी लेकर गर्र देव का पूजन करने के लिए भी जाते है।
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    प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी धूरेड़ी के दिन कटंगी तहसील क्षेत्र के ग्राम समतपुरी, लिंगापौनार और खैरलांजी तहसील के ग्राम गजपुर में मेले का आयोजन कर गर्र देव का पूजन किया गया। 04 मार्च बुधवार की शाम करीब 04 बजे से इन सभी गांवों में मेले की शुरूआत हुई। मेले में विभिन्न प्रकार की दुकानें और मनोरंजन के लिए विविध कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसके साथ ही बड़ी संख्या में हिंदु धर्मावंलबियों ने गर्र देव का पूजन किया। मान्यता है कि हिंदु धर्म को मानने वाले वह लोग जो महाशिवरात्रि के अवसर पर भगवान शिव के तीर्थ क्षेत्र या धार्मिक स्थल नंदी लेकर जाते है। वह आज धुरेड़ी के दिन अपने घरों से पुनः नंदी लेकर गर्र देव का पूजन करने के लिए भी जाते है।
    user_Dev Anand
    Dev Anand
    कटंगी, बालाघाट, मध्य प्रदेश•
    9 hrs ago
  • चौरई: माचागोरा मार्ग पर भीषण सड़क हादसा, तीन की मौत चौरई थाना क्षेत्र के माचागोरा मार्ग पर दो दुपहिया वाहनों की सीधी भिड़ंत में तीन लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। हादसे में दो लोग गंभीर रूप से घायल हैं, जिनका जिला अस्पताल में उपचार जारी है। #Chaurai #Machagora #RoadAccident #ChhindwaraNews #Tragedy DistrictHospital MPNews BreakingNews
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    चौरई: माचागोरा मार्ग पर भीषण सड़क हादसा, तीन की मौत
चौरई थाना क्षेत्र के माचागोरा मार्ग पर दो दुपहिया वाहनों की सीधी भिड़ंत में तीन लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। हादसे में दो लोग गंभीर रूप से घायल हैं, जिनका जिला अस्पताल में उपचार जारी है।
#Chaurai #Machagora #RoadAccident #ChhindwaraNews #Tragedy DistrictHospital MPNews BreakingNews
    user_मानव अधिकार मिशन मीडिया सेक्रे
    मानव अधिकार मिशन मीडिया सेक्रे
    छिंदवाड़ा नगर, छिंदवाड़ा, मध्य प्रदेश•
    4 hrs ago
  • अजब एमपी के गजब तहसीलदार: मंदिर से चोरी हुई चप्पल, तो साहब ने सीधे एसपी को लिख डाली चिट्ठी!
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    अजब एमपी के गजब तहसीलदार: मंदिर से चोरी हुई चप्पल, तो साहब ने सीधे एसपी को लिख डाली चिट्ठी!
    user_BS News Network
    BS News Network
    Local News Reporter Seoni, Madhya Pradesh•
    7 hrs ago
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