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*लाइसेंस देर से मिलने से पटाखा दुकानदारों की बिक्री घटी,व्यापारी महंगाई और बढ़े किराए से नाराज* सुल्तानपुर के खुर्शीद क्लब ग्राउंड पर दीपावली के लिए आतिशबाजी की दुकानें लग गई हैं। व्यापारियों का कहना है कि इस बार बिक्री पिछले साल के मुकाबले कम है। उन्होंने देर से लाइसेंस मिलने, पाबंदियों, महंगाई और बढ़े किराए को इसकी वजह बताया। पटाखा विक्रेता प्रिंस कुमार अग्रहरी ने बताया कि उनकी दुकान करीब 27-28 साल पुरानी है। वर्ष 2020 में भाई के निधन के बाद उन्होंने कारोबार संभाला। दुकान पर काग, सोनी, तिलक, आरआर, मोरी और मगर ब्रांड के पटाखे उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि सबसे सस्ते पटाखे 10 रुपये के हैं, जिनमें छुटपुटिया, नाग और बम शामिल हैं। सबसे महंगे स्काई शॉट 80 से 120 शॉट वाले हैं और इनकी कीमत 1,100 से 2,400 रुपये तक है। प्रिंस कुमार के मुताबिक, प्रशासन से लाइसेंस समय पर नहीं मिला। 6 तारीख की रात 10 बजे लाइसेंस मिलने के कारण दुकान देर से लग पाई और कारोबार के लिए करीब दो दिन ही मिले। उन्होंने कहा कि बाहर और ग्रामीण इलाकों के लोग बाजार तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। कई पाबंदियों के चलते ग्राउंड पर खरीदार भी कम हैं। उन्होंने बताया कि दुकान का किराया पिछले साल करीब 25,000 रुपये था, जो इस बार 30,000 रुपये से ज्यादा हो गया है। मौजूदा हालात में खर्च निकालना भी मुश्किल हो सकता है। पटाखा कारोबार से 10-15 साल से जुड़े व्यापारी संजय कुमार गुप्ता ने भी बिक्री घटने की बात कही। उन्होंने इसकी वजह महंगाई और दुकान का ज्यादा किराया बताया। संजय कुमार गुप्ता के अनुसार, उन्हें भी लाइसेंस समय पर नहीं मिला। लाइसेंस रात करीब 10:30 बजे जारी हुआ, जिससे शुरुआती बिक्री पर असर पड़ा। उन्होंने दुकान के भारी-भरकम किराए पर चिंता जाहिर करते हुए बताया कि पिछले साल उन्होंने अपनी दुकान का किराया ₹26,000 दिया था, लेकिन इस बार उनसे ₹35,000 वसूले गए हैं। सीधे ₹9,000 की बढ़ोतरी पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, "जब बिक्री ही नहीं हो रही है तो हम इतना किराया कहां से देंगे? ऐसे हालात में व्यापारियों के पास कर्जा लेने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता।" दुकान पर सबसे सस्ता पटाखा ₹10 का है, जबकि सबसे महंगा पटाखा ₹4,000 का (चटाई पटाखा) उपलब्ध है। बच्चों के बीच ₹10 वाला 'पॉप-पॉप' और 'पड़-पड़' पटाखा सबसे ज्यादा लोकप्रिय है और इसी की मांग सर्वाधिक बनी हुई है। वहीं, बड़े लोग आसमान में रंग-बिरंगी रोशनी बिखेरने वाले 'स्काई शॉट' पटाखे अधिक पसंद कर रहे हैं। व्यापारियों ने उम्मीद जताई है कि आने वाले दिनों में बाजार की स्थिति सुधरेगी, ताकि वे अपना लागत और किराया निकाल सकें। पुरानी पटाखा दुकान के संचालक इम्तियाज हाशमी ने बताया उनकी दुकान पर ग्राहकों के लिए हर बजट के पटाखे उपलब्ध हैं। बच्चों के पटकने वाले पटाखे मात्र ₹10 और बच्चों का अनार ₹20 की शुरुआती कीमत पर उपलब्ध है। आसमान में रंग-बिरंगे चित्र और आतिशबाजी दिखाने वाले बड़े आइटम ₹2,500 से ₹3,000 तक की कीमत में बिक रहे हैं। बच्चे मुख्य रूप से अनार, छुछुरिया (छुचुंदरी), मिर्ची पटाखे और छोटी चटाई अधिक पसंद कर रहे हैं। वयस्क और युवा डबल या ट्रिपल आवाज वाले सुतली बम और बड़े गोले वाले बमों की खरीदारी कर रहे हैं। व्यापार की स्थिति पर चर्चा करते हुए दुकानदार इम्तियाज हाशमी ने बताया कि पिछले साल की तुलना में इस बार बाजार में वह भीड़ और रौनक देखने को नहीं मिल रही है। महंगाई के असर के कारण लोगों की जेब पर प्रभाव पड़ा है, जिसके चलते इस वर्ष पटाखों की कुल बिक्री में कमी दर्ज की गई है।

20 hrs ago
user_लालजी
लालजी
सुल्तानपुर, सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश•
20 hrs ago

*लाइसेंस देर से मिलने से पटाखा दुकानदारों की बिक्री घटी,व्यापारी महंगाई और बढ़े किराए से नाराज* सुल्तानपुर के खुर्शीद क्लब ग्राउंड पर दीपावली के लिए आतिशबाजी की दुकानें लग गई हैं। व्यापारियों का कहना है कि इस बार बिक्री पिछले साल के मुकाबले कम है। उन्होंने देर से लाइसेंस मिलने, पाबंदियों, महंगाई और बढ़े किराए को इसकी वजह बताया। पटाखा विक्रेता प्रिंस कुमार अग्रहरी ने बताया कि उनकी दुकान करीब 27-28 साल पुरानी है। वर्ष 2020 में भाई के निधन के बाद उन्होंने कारोबार संभाला। दुकान पर काग, सोनी, तिलक, आरआर, मोरी और मगर ब्रांड के पटाखे उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि सबसे सस्ते पटाखे 10 रुपये के हैं, जिनमें छुटपुटिया, नाग और बम शामिल हैं। सबसे महंगे स्काई शॉट 80 से 120 शॉट वाले हैं और इनकी कीमत 1,100 से 2,400 रुपये तक है। प्रिंस कुमार के मुताबिक, प्रशासन से लाइसेंस समय पर नहीं मिला। 6 तारीख की रात 10 बजे लाइसेंस मिलने के कारण दुकान देर से लग पाई और कारोबार के लिए करीब दो दिन ही मिले। उन्होंने कहा कि बाहर और ग्रामीण इलाकों के लोग बाजार तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। कई पाबंदियों के चलते ग्राउंड पर खरीदार भी कम हैं। उन्होंने बताया कि दुकान का किराया पिछले साल करीब 25,000 रुपये था, जो इस बार 30,000 रुपये से ज्यादा हो गया है। मौजूदा हालात में खर्च निकालना भी मुश्किल हो सकता है। पटाखा कारोबार से 10-15 साल से जुड़े व्यापारी संजय कुमार गुप्ता ने भी बिक्री घटने की बात कही। उन्होंने इसकी वजह महंगाई और दुकान का ज्यादा किराया बताया। संजय कुमार गुप्ता के अनुसार, उन्हें भी लाइसेंस समय पर नहीं मिला। लाइसेंस रात करीब 10:30 बजे जारी हुआ, जिससे शुरुआती बिक्री पर असर पड़ा। उन्होंने दुकान के भारी-भरकम किराए पर चिंता जाहिर करते हुए बताया कि पिछले साल उन्होंने अपनी दुकान का किराया ₹26,000 दिया था, लेकिन इस बार उनसे ₹35,000 वसूले गए हैं। सीधे ₹9,000 की बढ़ोतरी पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, "जब बिक्री ही नहीं हो रही है तो हम इतना किराया कहां से देंगे? ऐसे हालात में व्यापारियों के पास कर्जा लेने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता।" दुकान पर सबसे सस्ता पटाखा ₹10 का है, जबकि सबसे महंगा पटाखा ₹4,000 का (चटाई पटाखा) उपलब्ध है। बच्चों के बीच ₹10 वाला 'पॉप-पॉप' और 'पड़-पड़' पटाखा सबसे ज्यादा लोकप्रिय है और इसी की मांग सर्वाधिक बनी हुई है। वहीं, बड़े लोग आसमान में रंग-बिरंगी रोशनी बिखेरने वाले 'स्काई शॉट' पटाखे अधिक पसंद कर रहे हैं। व्यापारियों ने उम्मीद जताई है कि आने वाले दिनों में बाजार की स्थिति सुधरेगी, ताकि वे अपना लागत और किराया निकाल सकें। पुरानी पटाखा दुकान के संचालक इम्तियाज हाशमी ने बताया उनकी दुकान पर ग्राहकों के लिए हर बजट के पटाखे उपलब्ध हैं। बच्चों के पटकने वाले पटाखे मात्र ₹10 और बच्चों का अनार ₹20 की शुरुआती कीमत पर उपलब्ध है। आसमान में रंग-बिरंगे चित्र और आतिशबाजी दिखाने वाले बड़े आइटम ₹2,500 से ₹3,000 तक की कीमत में बिक रहे हैं। बच्चे मुख्य रूप से अनार, छुछुरिया (छुचुंदरी), मिर्ची पटाखे और छोटी चटाई अधिक पसंद कर रहे हैं। वयस्क और युवा डबल या ट्रिपल आवाज वाले सुतली बम और बड़े गोले वाले बमों की खरीदारी कर रहे हैं। व्यापार की स्थिति पर चर्चा करते हुए दुकानदार इम्तियाज हाशमी ने बताया कि पिछले साल की तुलना में इस बार बाजार में वह भीड़ और रौनक देखने को नहीं मिल रही है। महंगाई के असर के कारण लोगों की जेब पर प्रभाव पड़ा है, जिसके चलते इस वर्ष पटाखों की कुल बिक्री में कमी दर्ज की गई है।

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    *लाइसेंस देर से मिलने से पटाखा दुकानदारों की बिक्री घटी,व्यापारी महंगाई और बढ़े किराए से नाराज*
सुल्तानपुर के खुर्शीद क्लब ग्राउंड पर दीपावली के लिए आतिशबाजी की दुकानें लग गई हैं। व्यापारियों का कहना है कि इस बार बिक्री पिछले साल के मुकाबले कम है। उन्होंने देर से लाइसेंस मिलने, पाबंदियों, महंगाई और बढ़े किराए को इसकी वजह बताया।
पटाखा विक्रेता प्रिंस कुमार अग्रहरी ने बताया कि उनकी दुकान करीब 27-28 साल पुरानी है। वर्ष 2020 में भाई के निधन के बाद उन्होंने कारोबार संभाला। दुकान पर काग, सोनी, तिलक, आरआर, मोरी और मगर ब्रांड के पटाखे उपलब्ध हैं।
उन्होंने बताया कि सबसे सस्ते पटाखे 10 रुपये के हैं, जिनमें छुटपुटिया, नाग और बम शामिल हैं। सबसे महंगे स्काई शॉट 80 से 120 शॉट वाले हैं और इनकी कीमत 1,100 से 2,400 रुपये तक है।
प्रिंस कुमार के मुताबिक, प्रशासन से लाइसेंस समय पर नहीं मिला। 6 तारीख की रात 10 बजे लाइसेंस मिलने के कारण दुकान देर से लग पाई और कारोबार के लिए करीब दो दिन ही मिले। उन्होंने कहा कि बाहर और ग्रामीण इलाकों के लोग बाजार तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। कई पाबंदियों के चलते ग्राउंड पर खरीदार भी कम हैं।
उन्होंने बताया कि दुकान का किराया पिछले साल करीब 25,000 रुपये था, जो इस बार 30,000 रुपये से ज्यादा हो गया है। मौजूदा हालात में खर्च निकालना भी मुश्किल हो सकता है।
पटाखा कारोबार से 10-15 साल से जुड़े व्यापारी संजय कुमार गुप्ता ने भी बिक्री घटने की बात कही। उन्होंने इसकी वजह महंगाई और दुकान का ज्यादा किराया बताया।
संजय कुमार गुप्ता के अनुसार, उन्हें भी लाइसेंस समय पर नहीं मिला। लाइसेंस रात करीब 10:30 बजे जारी हुआ, जिससे शुरुआती बिक्री पर असर पड़ा।
उन्होंने दुकान के भारी-भरकम किराए पर चिंता जाहिर करते हुए बताया कि पिछले साल उन्होंने अपनी दुकान का किराया ₹26,000 दिया था, लेकिन इस बार उनसे ₹35,000 वसूले गए हैं। सीधे ₹9,000 की बढ़ोतरी पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, "जब बिक्री ही नहीं हो रही है तो हम इतना किराया कहां से देंगे? ऐसे हालात में व्यापारियों के पास कर्जा लेने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता।" दुकान पर सबसे सस्ता पटाखा ₹10 का है, जबकि सबसे महंगा पटाखा ₹4,000 का (चटाई पटाखा) उपलब्ध है। बच्चों के बीच ₹10 वाला 'पॉप-पॉप' और 'पड़-पड़' पटाखा सबसे ज्यादा लोकप्रिय है और इसी की मांग सर्वाधिक बनी हुई है। वहीं, बड़े लोग आसमान में रंग-बिरंगी रोशनी बिखेरने वाले 'स्काई शॉट' पटाखे अधिक पसंद कर रहे हैं।
व्यापारियों ने उम्मीद जताई है कि आने वाले दिनों में बाजार की स्थिति सुधरेगी, ताकि वे अपना लागत और किराया निकाल सकें।
पुरानी पटाखा दुकान के संचालक इम्तियाज हाशमी ने बताया उनकी दुकान पर ग्राहकों के लिए हर बजट के पटाखे उपलब्ध हैं। बच्चों के पटकने वाले पटाखे मात्र ₹10 और बच्चों का अनार ₹20 की शुरुआती कीमत पर उपलब्ध है। आसमान में रंग-बिरंगे चित्र और आतिशबाजी दिखाने वाले बड़े आइटम ₹2,500 से ₹3,000 तक की कीमत में बिक रहे हैं। बच्चे मुख्य रूप से अनार, छुछुरिया (छुचुंदरी), मिर्ची पटाखे और छोटी चटाई अधिक पसंद कर रहे हैं। वयस्क और युवा डबल या ट्रिपल आवाज वाले सुतली बम और बड़े गोले वाले बमों की खरीदारी कर रहे हैं।
व्यापार की स्थिति पर चर्चा करते हुए दुकानदार इम्तियाज हाशमी ने बताया कि पिछले साल की तुलना में इस बार बाजार में वह भीड़ और रौनक देखने को नहीं मिल रही है। महंगाई के असर के कारण लोगों की जेब पर प्रभाव पड़ा है, जिसके चलते इस वर्ष पटाखों की कुल बिक्री में कमी दर्ज की गई है।
    user_लालजी
    लालजी
    सुल्तानपुर, सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश•
    20 hrs ago
  • अयोध्या के दसवें, दीपोत्सव में जगमगायी रामनगरी, 30 लाख दियों से रोशन हुई सरयू नगरी ,लेजर शो में साकार हुई रामायण की दिव्य गाथा अयोध्या। प्रभु श्रीराम की पावन नगरी अयोध्या में 10वां दीपोत्सव भव्यता और दिव्यता के साथ मनाया गया। इस ऐतिहासिक आयोजन में पूरी रामनगरी दीपों की रोशनी से जगमगा उठी। सरयू नदी के किनारे स्थित 56 घाटों पर करीब 30 लाख दीप प्रज्ज्वलित किए गए, जिससे अयोध्या का नजारा अद्भुत और अलौकिक दिखाई दिया। दीपोत्सव के दौरान राम की पैड़ी और सरयू घाट पर अत्याधुनिक लेजर शो के माध्यम से रामायण की मनमोहक झलकियां प्रस्तुत की गईं। वहीं 2100 ड्रोनों के विशेष शो ने आसमान में प्रभु श्रीराम के जीवन से जुड़े अद्भुत दृश्य उकेरकर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर सरयू तट पर 2147 अर्चकों द्वारा भव्य सरयू महाआरती की गई। इसके बाद शानदार आतिशबाजी ने दीपोत्सव की भव्यता में चार चांद लगा दिए। कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित कई मंत्री एवं गणमान्य अतिथि मौजूद रहे। दीपों की रोशनी, मंत्रोच्चार, भव्य आरती और आधुनिक तकनीक के अद्भुत संगम ने अयोध्या को आस्था, संस्कृति और सनातन परंपरा के रंग में रंग दिया। यह दीपोत्सव एक बार फिर दुनिया को भगवान श्रीराम की नगरी की आध्यात्मिक महिमा और भारतीय संस्कृति की भव्यता का संदेश दे गया।
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    अयोध्या के दसवें, दीपोत्सव में जगमगायी रामनगरी, 30 लाख दियों से रोशन हुई सरयू नगरी ,लेजर शो में साकार हुई रामायण की दिव्य गाथा
अयोध्या। प्रभु श्रीराम की पावन नगरी अयोध्या में 10वां दीपोत्सव भव्यता और दिव्यता के साथ मनाया गया। इस ऐतिहासिक आयोजन में पूरी रामनगरी दीपों की रोशनी से जगमगा उठी। सरयू नदी के किनारे स्थित 56 घाटों पर करीब 30 लाख दीप प्रज्ज्वलित किए गए, जिससे अयोध्या का नजारा अद्भुत और अलौकिक दिखाई दिया।
दीपोत्सव के दौरान राम की पैड़ी और सरयू घाट पर अत्याधुनिक लेजर शो के माध्यम से रामायण की मनमोहक झलकियां प्रस्तुत की गईं। वहीं 2100 ड्रोनों के विशेष शो ने आसमान में प्रभु श्रीराम के जीवन से जुड़े अद्भुत दृश्य उकेरकर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इस अवसर पर सरयू तट पर 2147 अर्चकों द्वारा भव्य सरयू महाआरती की गई। इसके बाद शानदार आतिशबाजी ने दीपोत्सव की भव्यता में चार चांद लगा दिए। कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित कई मंत्री एवं गणमान्य अतिथि मौजूद रहे।
दीपों की रोशनी, मंत्रोच्चार, भव्य आरती और आधुनिक तकनीक के अद्भुत संगम ने अयोध्या को आस्था, संस्कृति और सनातन परंपरा के रंग में रंग दिया। यह दीपोत्सव एक बार फिर दुनिया को भगवान श्रीराम की नगरी की आध्यात्मिक महिमा और भारतीय संस्कृति की भव्यता का संदेश दे गया।
    user_पत्रकार पांडे
    पत्रकार पांडे
    Comedy club जयसिंहपुर, सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश•
    6 hrs ago
  • खाकी ने निभाया इंसानियत का फर्ज, थाना प्रभारी ने गरीबों के बीच मनाई दीपावली खाकी ने निभाया इंसानियत का फर्ज, थाना प्रभारी ने गरीबों के बीच मनाई दीपावली संग्रामपुर- अमेठी। दीपावली का पर्व जहां हर घर में खुशियों और रोशनी का संदेश लेकर आता है, वहीं संग्रामपुर के थानाध्यक्ष संजय सिंह ने इस बार दीपावली को एक मिसाल बनाकर मनाया। उन्होंने गरीब और जरूरतमंद परिवारों के बीच पहुंचकर उनके साथ दीपावली की खुशियां बांटी और इंसानियत का फर्ज निभाया। थानाध्यक्ष संजय सिंह शनिवार को थाना क्षेत्र के विभिन्न गांवों और मोहल्लों में पहुंचे। वहां उन्होंने गरीब परिवारों, बुजुर्गों और बच्चों से मुलाकात की और उन्हें मिठाई, मोमबत्ती, दीये व अन्य जरूरी सामान वितरित किया। सामान पाकर गरीब परिवारों के चेहरों पर खुशी साफ झलक रही थी। बच्चों ने दीये जलाकर थानाध्यक्ष के साथ दीपावली मनाई। इस दौरान थानाध्यक्ष ने कहा कि पुलिस का रिश्ता सिर्फ कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के सुख-दुख में साथ खड़े रहना भी पुलिस का दायित्व है। वर्दी की जिम्मेदारी के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों को निभाना ही सच्ची पुलिसिंग है। उन्होंने लोगों से अपील की कि दीपावली पर सभी लोग अपने आसपास के जरूरतमंदों की मदद करें, ताकि किसी के घर अंधेरा न रहे। थानाध्यक्ष की इस पहल की क्षेत्र में जमकर सराहना हो रही है। ग्रामीणों ने कहा कि पहली बार किसी थाना प्रभारी को इस तरह गरीबों के बीच आकर त्योहार मनाते देखा है। इससे पुलिस के प्रति लोगों के मन में विश्वास और सम्मान और बढ़ा है। गरीब परिवारों ने थानाध्यक्ष को आशीर्वाद देते हुए कहा कि इस दीपावली उनके घरों में भी रोशनी आ गई है।
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    खाकी ने निभाया इंसानियत का फर्ज, थाना प्रभारी ने गरीबों के बीच मनाई दीपावली

खाकी ने निभाया इंसानियत का फर्ज, थाना प्रभारी ने गरीबों के बीच मनाई दीपावली
संग्रामपुर- अमेठी। दीपावली का पर्व जहां हर घर में खुशियों और रोशनी का संदेश लेकर आता है, वहीं संग्रामपुर के थानाध्यक्ष संजय सिंह ने इस बार दीपावली को एक मिसाल बनाकर मनाया। उन्होंने गरीब और जरूरतमंद परिवारों के बीच पहुंचकर उनके साथ दीपावली की खुशियां बांटी और इंसानियत का फर्ज निभाया।
थानाध्यक्ष संजय सिंह शनिवार को थाना क्षेत्र के विभिन्न गांवों और मोहल्लों में पहुंचे। वहां उन्होंने गरीब परिवारों, बुजुर्गों और बच्चों से मुलाकात की और उन्हें मिठाई, मोमबत्ती, दीये व अन्य जरूरी सामान वितरित किया। सामान पाकर गरीब परिवारों के चेहरों पर खुशी साफ झलक रही थी। बच्चों ने दीये जलाकर थानाध्यक्ष के साथ दीपावली मनाई।
इस दौरान थानाध्यक्ष ने कहा कि पुलिस का रिश्ता सिर्फ कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के सुख-दुख में साथ खड़े रहना भी पुलिस का दायित्व है। वर्दी की जिम्मेदारी के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों को निभाना ही सच्ची पुलिसिंग है। उन्होंने लोगों से अपील की कि दीपावली पर सभी लोग अपने आसपास के जरूरतमंदों की मदद करें, ताकि किसी के घर अंधेरा न रहे।
थानाध्यक्ष की इस पहल की क्षेत्र में जमकर सराहना हो रही है। ग्रामीणों ने कहा कि पहली बार किसी थाना प्रभारी को इस तरह गरीबों के बीच आकर त्योहार मनाते देखा है। इससे पुलिस के प्रति लोगों के मन में विश्वास और सम्मान और बढ़ा है।
गरीब परिवारों ने थानाध्यक्ष को आशीर्वाद देते हुए कहा कि इस दीपावली उनके घरों में भी रोशनी आ गई है।
    user_रामकृष्ण मिश्र
    रामकृष्ण मिश्र
    अमेठी, अमेठी, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • न जाने वे कौन कुत्ते है, जिन्हें दीपावली के पटाखों से परेशानी है। देशी नस्ल का शेरु पाले.. नर्तकी नदंन की तरह हाइब्रिड मिक्सचर टॉमी नहीं
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    न जाने वे कौन कुत्ते है, जिन्हें दीपावली के पटाखों से परेशानी है। देशी नस्ल का शेरु पाले.. नर्तकी नदंन की तरह हाइब्रिड मिक्सचर टॉमी नहीं
    user_Ashok verma
    Ashok verma
    Local News Reporter लंभुआ, सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश•
    6 hrs ago
  • पारा चौराहा पर दीपावली की रौनक, मिट्टी के दीयों और लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों से सजा बाजार, जमकर हुई खरीदारी सुल्तानपुर-तहसील क्षेत्र बल्दीराय के पारा चौराहा पर दीपावली के पावन पर्व को लेकर बाजार पूरी तरह सज गया है। चौराहे के दोनों तरफ सजी दुकानों पर रंग-बिरंगी झालरें, दीये, मोमबत्तियां, लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां, खिलौने, मिठाई, फल-फूल और पूजन सामग्री से बाजार गुलजार नजर आया। सुबह से ही बाजार में खरीदारी के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे अपने परिवार के साथ बाजार पहुंचे और दीपावली की खरीदारी करते नजर आए। सबसे ज्यादा मांग इस बार मिट्टी के दीयों और देसी लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों की रही। पारा चौराहा पर जमीन पर दीये सजाकर बैठी महिला दुकानदारों और कुम्हारों ने बताया कि इस बार लोगों ने चाइनीज सामान की बजाय मिट्टी के दीयों को ज्यादा पसंद किया है। एक दुकानदार ने कहा, "पहले से ज्यादा लोग मिट्टी का दीया खरीद रहे हैं, इससे हमें भी रोजगार मिल रहा है और त्योहार की असली रौनक भी लौट रही है।" बाजार में रंग-बिरंगे खिलौनों वाली दुकानों पर भी बच्चों की खूब भीड़ देखी गई। छोटे-छोटे बच्चे अपने माता-पिता के साथ खिलौने, पटाखों की दुकानों पर मोलभाव करते नजर आए। त्योहार की भीड़ के कारण पारा चौराहा पर दिनभर जाम की स्थिति भी बनी रही। बाइक, साइकिल और पैदल चलने वालों को आवागमन में काफी दिक्कत हुई। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से बाजार के दिनों में यातायात व्यवस्था दुरुस्त करने और पुलिस की तैनाती की मांग की है। दुकानदारों का कहना है कि धनतेरस से लेकर दीपावली तक बाजार में और भी ज्यादा रौनक बढी । मिठाई, कपड़े, बर्तन और इलेक्ट्रॉनिक सामान की दुकानों पर भी ग्राहकों की संख्या बढ़ी है। कुल मिलाकर पारा चौराहा का बाजार इस बार दीपावली पर पूरी तरह त्योहारी रंग में रंगा नजर आया, जहां महंगाई की चिंता के बावजूद लोगों के चेहरे पर त्योहार की खुशी साफ झलक रही थी।
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    पारा चौराहा पर दीपावली की रौनक, मिट्टी के दीयों और लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों से सजा बाजार, जमकर हुई खरीदारी
सुल्तानपुर-तहसील क्षेत्र बल्दीराय के पारा चौराहा पर दीपावली के पावन पर्व को लेकर बाजार पूरी तरह सज गया है। चौराहे के दोनों तरफ सजी दुकानों पर रंग-बिरंगी झालरें, दीये, मोमबत्तियां, लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां, खिलौने, मिठाई, फल-फूल और पूजन सामग्री से बाजार गुलजार नजर आया।
सुबह से ही बाजार में खरीदारी के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे अपने परिवार के साथ बाजार पहुंचे और दीपावली की खरीदारी करते नजर आए। सबसे ज्यादा मांग इस बार मिट्टी के दीयों और देसी लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों की रही।
पारा चौराहा पर जमीन पर दीये सजाकर बैठी महिला दुकानदारों और कुम्हारों ने बताया कि इस बार लोगों ने चाइनीज सामान की बजाय मिट्टी के दीयों को ज्यादा पसंद किया है। एक दुकानदार ने कहा, "पहले से ज्यादा लोग मिट्टी का दीया खरीद रहे हैं, इससे हमें भी रोजगार मिल रहा है और त्योहार की असली रौनक भी लौट रही है।"
बाजार में रंग-बिरंगे खिलौनों वाली दुकानों पर भी बच्चों की खूब भीड़ देखी गई। छोटे-छोटे बच्चे अपने माता-पिता के साथ खिलौने, पटाखों की दुकानों पर मोलभाव करते नजर आए।
त्योहार की भीड़ के कारण पारा चौराहा पर दिनभर जाम की स्थिति भी बनी रही। बाइक, साइकिल और पैदल चलने वालों को आवागमन में काफी दिक्कत हुई। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से बाजार के दिनों में यातायात व्यवस्था दुरुस्त करने और पुलिस की तैनाती की मांग की है।
दुकानदारों का कहना है कि धनतेरस से लेकर दीपावली तक बाजार में और भी ज्यादा रौनक बढी । मिठाई, कपड़े, बर्तन और इलेक्ट्रॉनिक सामान की दुकानों पर भी ग्राहकों की संख्या बढ़ी है।
कुल मिलाकर पारा चौराहा का बाजार इस बार दीपावली पर पूरी तरह त्योहारी रंग में रंगा नजर आया, जहां महंगाई की चिंता के बावजूद लोगों के चेहरे पर त्योहार की खुशी साफ झलक रही थी।
    user_Rajdev yadav (पत्रकार )
    Rajdev yadav (पत्रकार )
    बलदीराय, सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश•
    7 hrs ago
  • थाना प्रभारी संजय सिंह की पहल ने जीता दिल, जरूरतमंद बच्चों के चेहरों पर खिलाई दीपावली की मुस्कान शंकरपुर और टीकरमाफी में संग्रामपुर पुलिस ने गरीब बच्चों के बीच बांटी मिठाई, खिलौने और पटाखे, उपहार पाकर खिल उठे मासूमों के चेहरे अमेठी। दीपावली का त्योहार सिर्फ अपने घरों को रोशन करने का नहीं, बल्कि दूसरों के जीवन में भी खुशियों का उजाला भरने का पर्व है। इसी भावना को साकार करते हुए संग्रामपुर थाना प्रभारी संजय सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम ने मानवता और संवेदनशीलता की अनूठी मिसाल पेश की। रविवार को पुलिस टीम शंकरपुर और टीकरमाफी पहुंची, जहां गरीब और जरूरतमंद बच्चों के साथ दीपावली की खुशियां साझा की गईं। रविवार सुबह करीब 11 बजे थाना प्रभारी संजय सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम ने दोनों स्थानों पर बच्चों को मिठाई, खिलौने, फुलझड़ियां और पटाखे वितरित किए। खाकी वर्दी में पुलिसकर्मियों को अपने बीच पाकर बच्चे उत्साहित नजर आए। जैसे ही उन्हें दीपावली के उपहार मिले, उनके चेहरे खुशी से खिल उठे। किसी के हाथ में मिठाई का डिब्बा था तो कोई खिलौना पाकर खुशी से झूम उठा। बच्चों ने मुस्कुराते हुए पुलिसकर्मियों का आभार जताया। इस दौरान पुलिसकर्मियों ने बच्चों को दीपावली के महत्व और त्योहार से जुड़ी परंपराओं के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बच्चों के साथ समय बिताकर उन्हें अपनापन महसूस कराया और त्योहार की खुशियां साझा कीं। परिवार से दूर रहकर रोशन की दूसरों की दिवाली ड्यूटी की जिम्मेदारियों के चलते कई पुलिसकर्मी अपने परिवार से दूर रहे, लेकिन उन्होंने शंकरपुर और टीकरमाफी में जरूरतमंद बच्चों के बीच पहुंचकर उनकी दीपावली को यादगार बना दिया। पुलिसकर्मियों ने बच्चों और उनके परिजनों से बातचीत कर खुशियों के इस पर्व पर उनके साथ समय बिताया। थाना प्रभारी संजय सिंह के नेतृत्व में संग्रामपुर पुलिस की इस पहल की क्षेत्र में सराहना हो रही है। पुलिसकर्मियों ने अपने इस प्रयास से संदेश दिया कि खाकी सिर्फ कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के जरूरतमंद लोगों के चेहरों पर मुस्कान लाने में भी अहम भूमिका निभाती है। पुलिस की इस मानवीय पहल ने दीपावली के अवसर पर सेवा, संवेदना और इंसानियत की सच्ची तस्वीर पेश की।
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    थाना प्रभारी संजय सिंह की पहल ने जीता दिल, जरूरतमंद बच्चों के चेहरों पर खिलाई दीपावली की मुस्कान
शंकरपुर और टीकरमाफी में संग्रामपुर पुलिस ने गरीब बच्चों के बीच बांटी मिठाई, खिलौने और पटाखे, उपहार पाकर खिल उठे मासूमों के चेहरे
अमेठी। दीपावली का त्योहार सिर्फ अपने घरों को रोशन करने का नहीं, बल्कि दूसरों के जीवन में भी खुशियों का उजाला भरने का पर्व है। इसी भावना को साकार करते हुए संग्रामपुर थाना प्रभारी संजय सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम ने मानवता और संवेदनशीलता की अनूठी मिसाल पेश की। रविवार को पुलिस टीम शंकरपुर और टीकरमाफी पहुंची, जहां गरीब और जरूरतमंद बच्चों के साथ दीपावली की खुशियां साझा की गईं।
रविवार सुबह करीब 11 बजे थाना प्रभारी संजय सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम ने दोनों स्थानों पर बच्चों को मिठाई, खिलौने, फुलझड़ियां और पटाखे वितरित किए। खाकी वर्दी में पुलिसकर्मियों को अपने बीच पाकर बच्चे उत्साहित नजर आए। जैसे ही उन्हें दीपावली के उपहार मिले, उनके चेहरे खुशी से खिल उठे। किसी के हाथ में मिठाई का डिब्बा था तो कोई खिलौना पाकर खुशी से झूम उठा। बच्चों ने मुस्कुराते हुए पुलिसकर्मियों का आभार जताया।
इस दौरान पुलिसकर्मियों ने बच्चों को दीपावली के महत्व और त्योहार से जुड़ी परंपराओं के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बच्चों के साथ समय बिताकर उन्हें अपनापन महसूस कराया और त्योहार की खुशियां साझा कीं।
परिवार से दूर रहकर रोशन की दूसरों की दिवाली
ड्यूटी की जिम्मेदारियों के चलते कई पुलिसकर्मी अपने परिवार से दूर रहे, लेकिन उन्होंने शंकरपुर और टीकरमाफी में जरूरतमंद बच्चों के बीच पहुंचकर उनकी दीपावली को यादगार बना दिया। पुलिसकर्मियों ने बच्चों और उनके परिजनों से बातचीत कर खुशियों के इस पर्व पर उनके साथ समय बिताया।
थाना प्रभारी संजय सिंह के नेतृत्व में संग्रामपुर पुलिस की इस पहल की क्षेत्र में सराहना हो रही है। पुलिसकर्मियों ने अपने इस प्रयास से संदेश दिया कि खाकी सिर्फ कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के जरूरतमंद लोगों के चेहरों पर मुस्कान लाने में भी अहम भूमिका निभाती है। पुलिस की इस मानवीय पहल ने दीपावली के अवसर पर सेवा, संवेदना और इंसानियत की सच्ची तस्वीर पेश की।
    user_Mr. P. K. Tiwari
    Mr. P. K. Tiwari
    Local News Reporter अमेठी, अमेठी, उत्तर प्रदेश•
    9 hrs ago
  • *अमावस्या पर दो माह के मासूम की बलि देने की थी साजिश! महराजगंज से दिल्ली तक पुलिस ने खंगाले 100 से अधिक CCTV कैमरे, कश्मीरी गेट बस स्टैंड से बच्चा सकुशल बरामद* *अमावस्या पर दो माह के मासूम की बलि देने की थी साजिश! महराजगंज से दिल्ली तक पुलिस ने खंगाले 100 से अधिक CCTV कैमरे, कश्मीरी गेट बस स्टैंड से बच्चा सकुशल बरामद* *महराजगंज* जिले के ठूठीबारी थाना क्षेत्र से दो माह के मासूम बच्चे के अपहरण के मामले में महराजगंज पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा किया है। पुलिस के मुताबिक, अपहृत मासूम विक्की को अमावस्या के दिन बलि देने की योजना बनाई गई थी। इस साजिश के तहत बच्चे का अपहरण किया गया था। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, सर्विलांस और मुखबिर तंत्र की मदद से महराजगंज से दिल्ली तक पीछा करते हुए बच्चे को नई दिल्ली के कश्मीरी गेट बस स्टैंड से सकुशल बरामद कर लिया। मामले में दो महिलाओं समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी के निर्देशन में अपर पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ एवं क्षेत्राधिकारी निचलौल रविन्द्र कुमार सिंह के पर्यवेक्षण में ठूठीबारी पुलिस, एसओजी, स्वाट और डॉग ट्रैकर स्क्वायड की संयुक्त टीम ने यह कार्रवाई की। पुलिस के अनुसार, 3 नवंबर 2026 को ग्राम राजाबारी के टोला रमजीता निवासी गोविन्द पुत्र नन्दलाल ने ठूठीबारी थाने में सूचना दी थी कि रात करीब 2 से 4 बजे के बीच वह अपनी पत्नी और दो माह के बेटे विक्की के साथ घर में सो रहा था। इसी दौरान किसी अज्ञात व्यक्ति ने घर में घुसकर उसके बच्चे का अपहरण कर लिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर कई टीमें गठित कीं और बच्चे की तलाश शुरू कर दी। पुलिस टीम ने घटनास्थल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। जांच के दौरान रात करीब 3:57 बजे राजाबारी पुल के पास एक संदिग्ध महिला हाथ में बच्चा लेकर निचलौल रोड की तरफ जाती दिखाई दी। इसके बाद पुलिस ने रास्ते में लगे कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की। महिला ठूठीबारी बस स्टैंड तक पहुंची और फिर बस से शिकारपुर मोड़ पर उतरकर घुघली की तरफ जाती दिखाई दी। स्थानीय पूछताछ और मुखबिर की सूचना के आधार पर महिला की पहचान सावित्री पत्नी स्वर्गीय उमेश राजभर निवासी ग्राम कफवा, थाना घुघली के रूप में हुई। इसके बाद पुलिस ने सर्विलांस के जरिए उसकी लोकेशन ट्रैक करनी शुरू की। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस टीम लगातार संदिग्धों का पीछा करते हुए दिल्ली पहुंची। नई दिल्ली के कश्मीरी गेट बस स्टैंड पर सावित्री अपने साथी करण कुमार गौतम के साथ एक शिशु के साथ मिली। बच्चे के संबंध में पूछताछ करने पर दोनों कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। पुलिस ने बच्चे की तस्वीर पिता गोविन्द को व्हाट्सएप पर भेजी, जिसके बाद उन्होंने अपने बेटे विक्की के रूप में उसकी पहचान की। पुलिस ने मासूम को सकुशल बरामद कर लिया। चिकित्सकीय परीक्षण कराने के बाद बच्चे को उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। पुलिस प्रेस नोट के मुताबिक, पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि दो माह के मासूम की बलि देने की योजना बनाई गई थी। आगामी एक-दो दिनों में अमावस्या के दिन इस घटना को अंजाम देने की तैयारी थी। बताया गया कि आरोपियों का अंधविश्वास था कि मासूम की बलि देने से सरस्वती का कई वर्षों से लापता पति और पुत्र वापस आ जाएंगे तथा परिवार में पूर्व में हुई अकाल मृत्यु की घटनाएं रुक जाएंगी। पुलिस के अनुसार, नेपाल के बैरियहवा में एक कथित झाड़-फूंक करने वाले व्यक्ति ने उन्हें ऐसा करने की सलाह दी थी। इसी अंधविश्वास के चलते सावित्री और सरस्वती ने अपहरण की योजना बनाई, जिसमें सावित्री का दूसरा पति करण कुमार गौतम भी शामिल था। *पुलिस टीम को ₹25 हजार का पुरस्कार* पुलिस ने बताया कि डॉग स्क्वायड, 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, स्थानीय पूछताछ, मुखबिर तंत्र और सर्विलांस की मदद से इस पूरे मामले का खुलासा किया गया। पुलिस अधीक्षक महराजगंज ने मासूम की सकुशल बरामदगी करने वाली टीम को ₹25,000 नकद पुरस्कार देने की घोषणा की है। फिलहाल गिरफ्तार तीनों आरोपियों के विरुद्ध अग्रिम विधिक कार्रवाई करते हुए न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है।
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    *अमावस्या पर दो माह के मासूम की बलि देने की थी साजिश! महराजगंज से दिल्ली तक पुलिस ने खंगाले 100 से अधिक CCTV कैमरे, कश्मीरी गेट बस स्टैंड से बच्चा सकुशल बरामद*

*अमावस्या पर दो माह के मासूम की बलि देने की थी साजिश! महराजगंज से दिल्ली तक पुलिस ने खंगाले 100 से अधिक CCTV कैमरे, कश्मीरी गेट बस स्टैंड से बच्चा सकुशल बरामद*
*महराजगंज*  जिले के ठूठीबारी थाना क्षेत्र से दो माह के मासूम बच्चे के अपहरण के मामले में महराजगंज पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा किया है। पुलिस के मुताबिक, अपहृत मासूम विक्की को अमावस्या के दिन बलि देने की योजना बनाई गई थी। इस साजिश के तहत बच्चे का अपहरण किया गया था। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, सर्विलांस और मुखबिर तंत्र की मदद से महराजगंज से दिल्ली तक पीछा करते हुए बच्चे को नई दिल्ली के कश्मीरी गेट बस स्टैंड से सकुशल बरामद कर लिया। मामले में दो महिलाओं समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी के निर्देशन में अपर पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ एवं क्षेत्राधिकारी निचलौल रविन्द्र कुमार सिंह के पर्यवेक्षण में ठूठीबारी पुलिस, एसओजी, स्वाट और डॉग ट्रैकर स्क्वायड की संयुक्त टीम ने यह कार्रवाई की।
पुलिस के अनुसार, 3 नवंबर 2026 को ग्राम राजाबारी के टोला रमजीता निवासी गोविन्द पुत्र नन्दलाल ने ठूठीबारी थाने में सूचना दी थी कि रात करीब 2 से 4 बजे के बीच वह अपनी पत्नी और दो माह के बेटे विक्की के साथ घर में सो रहा था। इसी दौरान किसी अज्ञात व्यक्ति ने घर में घुसकर उसके बच्चे का अपहरण कर लिया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर कई टीमें गठित कीं और बच्चे की तलाश शुरू कर दी। 
पुलिस टीम ने घटनास्थल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। जांच के दौरान रात करीब 3:57 बजे राजाबारी पुल के पास एक संदिग्ध महिला हाथ में बच्चा लेकर निचलौल रोड की तरफ जाती दिखाई दी।
इसके बाद पुलिस ने रास्ते में लगे कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की। महिला ठूठीबारी बस स्टैंड तक पहुंची और फिर बस से शिकारपुर मोड़ पर उतरकर घुघली की तरफ जाती दिखाई दी।
स्थानीय पूछताछ और मुखबिर की सूचना के आधार पर महिला की पहचान सावित्री पत्नी स्वर्गीय उमेश राजभर निवासी ग्राम कफवा, थाना घुघली के रूप में हुई। इसके बाद पुलिस ने सर्विलांस के जरिए उसकी लोकेशन ट्रैक करनी शुरू की।
तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस टीम लगातार संदिग्धों का पीछा करते हुए दिल्ली पहुंची। नई दिल्ली के कश्मीरी गेट बस स्टैंड पर सावित्री अपने साथी करण कुमार गौतम के साथ एक शिशु के साथ मिली।
बच्चे के संबंध में पूछताछ करने पर दोनों कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। पुलिस ने बच्चे की तस्वीर पिता गोविन्द को व्हाट्सएप पर भेजी, जिसके बाद उन्होंने अपने बेटे विक्की के रूप में उसकी पहचान की।
पुलिस ने मासूम को सकुशल बरामद कर लिया। चिकित्सकीय परीक्षण कराने के बाद बच्चे को उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया।
पुलिस प्रेस नोट के मुताबिक, पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि दो माह के मासूम की बलि देने की योजना बनाई गई थी। आगामी एक-दो दिनों में अमावस्या के दिन इस घटना को अंजाम देने की तैयारी थी।
बताया गया कि आरोपियों का अंधविश्वास था कि मासूम की बलि देने से सरस्वती का कई वर्षों से लापता पति और पुत्र वापस आ जाएंगे तथा परिवार में पूर्व में हुई अकाल मृत्यु की घटनाएं रुक जाएंगी।
पुलिस के अनुसार, नेपाल के बैरियहवा में एक कथित झाड़-फूंक करने वाले व्यक्ति ने उन्हें ऐसा करने की सलाह दी थी। इसी अंधविश्वास के चलते सावित्री और सरस्वती ने अपहरण की योजना बनाई, जिसमें सावित्री का दूसरा पति करण कुमार गौतम भी शामिल था।
*पुलिस टीम को ₹25 हजार का पुरस्कार*
पुलिस ने बताया कि डॉग स्क्वायड, 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, स्थानीय पूछताछ, मुखबिर तंत्र और सर्विलांस की मदद से इस पूरे मामले का खुलासा किया गया। पुलिस अधीक्षक महराजगंज ने मासूम की सकुशल बरामदगी करने वाली टीम को ₹25,000 नकद पुरस्कार देने की घोषणा की है।
फिलहाल गिरफ्तार तीनों आरोपियों के विरुद्ध अग्रिम विधिक कार्रवाई करते हुए न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है।
    user_Sheetla Prasad
    Sheetla Prasad
    Patti, Pratapgarh•
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