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आखिर महोबा डिपो की बसें ही क्यों रहती हैं सुर्खियों में।। क्या यह लापरवाही है इस पर विशेष जांच होनी चाहिए बुंदेलखंड में चर्चा में महोबा तो रहेगा ही।।। महोबा डिपो की बस में उरई राठ चिकासी बेतवा नदी पुल में बड़ा सड़क हादसा टला दिल्ली से महोबा आ रही महोबा डिपो की बस की अचानक पुल की‌ रेलिंग तोड़ते हुए बस नदी में गिरने से बाल बाल बची।। अगस्त माह में तीसरी घटना है, एक चालक की मौत भी कुछ दिनों पहले सड़क दुर्घटना में हो चुकी।। यूपी रोडवेज के अधिकारीयों को कोई फर्क नहीं पड़ता, यूपी सरकार का ध्यान यूपी रोडवेज बसो की ओर केन्द्रित हो, ताकि चालकों की मौत और जनता की मौतें न हो सके। आखिर महोबा जनपद की बसें ही क्यों रहती है सुर्खियों में जांच का विषय।। #रोडवेज #दुर्घटना #nonfalowar

5 hrs ago
user_Ramlakhan Namdev
Ramlakhan Namdev
Local News Reporter महोबा, महोबा, उत्तर प्रदेश•
5 hrs ago
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आखिर महोबा डिपो की बसें ही क्यों रहती हैं सुर्खियों में।। क्या यह लापरवाही है इस पर विशेष जांच होनी चाहिए बुंदेलखंड में चर्चा में महोबा तो रहेगा ही।।। महोबा डिपो की बस में उरई राठ चिकासी बेतवा नदी पुल में बड़ा सड़क हादसा टला दिल्ली से महोबा आ रही महोबा डिपो की बस की अचानक पुल की‌ रेलिंग तोड़ते हुए बस नदी में गिरने से बाल बाल बची।। अगस्त माह में तीसरी घटना है, एक चालक की मौत भी कुछ दिनों पहले सड़क दुर्घटना में हो चुकी।। यूपी रोडवेज के अधिकारीयों को कोई फर्क नहीं पड़ता, यूपी सरकार का ध्यान यूपी रोडवेज बसो की ओर केन्द्रित हो, ताकि चालकों की मौत और जनता की मौतें न हो सके। आखिर महोबा जनपद की बसें ही क्यों रहती है सुर्खियों में जांच का विषय।। #रोडवेज #दुर्घटना #nonfalowar

More news from Mahoba and nearby areas
  • बाढ़ के पानी में फंसे बुजुर्ग दंपति का सुरक्षित रेस्क्यू, 8 बकरियों की भी बचाई जान महोबा। चरखारी तहसील क्षेत्र के बराएं गांव में बाढ़ के पानी के बीच झोपड़ी में फंसे 65 वर्षीय बहादुर और उनकी पत्नी को तहसील प्रशासन एवं स्थानीय तैराकों की टीम ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया। बाढ़ का पानी बढ़ने के कारण बुजुर्ग दंपति अपनी झोपड़ी में फंस गए थे। सूचना मिलते ही प्रशासनिक टीम और स्थानीय तैराक मौके पर पहुंचे और ट्यूब की मदद से दोनों का रेस्क्यू किया। रेस्क्यू अभियान के दौरान दंपति की 8 बकरियों को भी सुरक्षित बाहर निकालकर उनकी जान बचाई गई। समय रहते हुए किए गए इस राहत एवं बचाव कार्य से बड़ा हादसा टल गया।
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    बाढ़ के पानी में फंसे बुजुर्ग दंपति का सुरक्षित रेस्क्यू, 8 बकरियों की भी बचाई जान
महोबा। चरखारी तहसील क्षेत्र के बराएं गांव में बाढ़ के पानी के बीच झोपड़ी में फंसे 65 वर्षीय बहादुर और उनकी पत्नी को तहसील प्रशासन एवं स्थानीय तैराकों की टीम ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
बाढ़ का पानी बढ़ने के कारण बुजुर्ग दंपति अपनी झोपड़ी में फंस गए थे। सूचना मिलते ही प्रशासनिक टीम और स्थानीय तैराक मौके पर पहुंचे और ट्यूब की मदद से दोनों का रेस्क्यू किया।
रेस्क्यू अभियान के दौरान दंपति की 8 बकरियों को भी सुरक्षित बाहर निकालकर उनकी जान बचाई गई। समय रहते हुए किए गए इस राहत एवं बचाव कार्य से बड़ा हादसा टल गया।
    user_Nitendra Jha
    Nitendra Jha
    Mahoba Insight & Ikvnews Sharafipura, Mahoba•
    9 hrs ago
  • सिचाई विभाग की खाउ कमाऊ नीति का शिकार हो रही नहरे #महोबा तालाबो को कनेक्ट करने वाली नहरे हो रही अस्तित्व विहीन लाखों रुपये बजट के बाबजूद सिचाई विभाग नही करा रहा नहरों की सफाई सिचाई विभाग की खाउ कमाऊ नीति का शिकार हो रही नहरे मदन सागर से कल्याण सागर जाने वाली नहर की सफाई न होने से इलाके में जल भराव की स्थित मदन सागर के फाटक की मरम्मत न होने से हुआ जाम हाईवोल्टेज लाइन से इलाके के लोगो मे दहशत का माहौल मदन सागर से कल्याण सागर जाने वाली नहर का मामला
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    सिचाई विभाग की खाउ कमाऊ नीति का शिकार हो रही नहरे
#महोबा
तालाबो को कनेक्ट करने वाली नहरे हो रही अस्तित्व विहीन
लाखों रुपये बजट के बाबजूद सिचाई विभाग नही करा रहा नहरों की सफाई
सिचाई विभाग की खाउ कमाऊ नीति का शिकार हो रही नहरे
मदन सागर से कल्याण सागर जाने वाली नहर की सफाई न होने से इलाके में जल भराव की स्थित
मदन सागर के फाटक की मरम्मत न होने से हुआ जाम
हाईवोल्टेज लाइन से इलाके के लोगो मे दहशत का माहौल
मदन सागर से कल्याण सागर जाने वाली नहर का मामला
    user_RAHUL KASHYAP
    RAHUL KASHYAP
    Local News Reporter महोबा, महोबा, उत्तर प्रदेश•
    10 hrs ago
  • हमीरपुर :शिहो नाला व चंद्रावल नदी का जलस्तर घटने से ग्रामीणों ने ली राहत की सांस मौदहा क्षेत्र के दर्जनों गांवों में मंडराया था बाढ़ का खतरा, रातभर अलर्ट रहा प्रशासन मौदहा, हमीरपुर। चंद्रावल नदी और शिहो नाला में बढ़े जलस्तर के बाद शुक्रवार को पानी धीरे-धीरे घटने लगा। जलस्तर कम होने से नदी किनारे बसे दर्जनों गांवों के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। हालांकि कई निचले इलाकों में अब भी पानी भरा होने से ग्रामीणों की मुश्किलें पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। बीते दिनों डैम से छोड़े गए पानी और लगातार बारिश के कारण चंद्रावल नदी व शिहो नाला उफान पर आ गए थे। इसके चलते पारा, हिमौली, लदार , रतौली, लरौंध, भमौरा, नारायच, खन्ना, भवानी, छिरका, मवैया, मदारपुर और छिमौली समेत कई गांवों में बाढ़ का खतरा पैदा हो गया था। नदी किनारे रहने वाले ग्रामीण पूरी रात जागकर जलस्तर पर नजर बनाए रहे। हालात को देखते हुए प्रशासन और पुलिस भी पूरी तरह अलर्ट रही। उपजिलाधिकारी मौदहा और क्षेत्राधिकारी मौदहा ने प्रभावित गांवों के लोगों से संपर्क बनाए रखा। पुलिस टीमों ने नदी किनारे के गांवों में लगातार निगरानी की और ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील की। शुक्रवार को दोनों जलधाराओं का पानी कम होने से ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है। हालांकि खेतों में पानी भरने से किसानों की फसलों को नुकसान हुआ है। गांवों का संपर्क पूरी तरह बहाल होने और पानी उतरने के बाद ही नुकसान की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। प्रशासन की ओर से स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
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    हमीरपुर :शिहो नाला व चंद्रावल नदी का जलस्तर घटने से ग्रामीणों ने ली राहत की सांस
मौदहा क्षेत्र के दर्जनों गांवों में मंडराया था बाढ़ का खतरा, रातभर अलर्ट रहा प्रशासन
मौदहा, हमीरपुर। चंद्रावल नदी और शिहो नाला में बढ़े जलस्तर के बाद शुक्रवार को पानी धीरे-धीरे घटने लगा। जलस्तर कम होने से नदी किनारे बसे दर्जनों गांवों के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। हालांकि कई निचले इलाकों में अब भी पानी भरा होने से ग्रामीणों की मुश्किलें पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं।
बीते दिनों डैम से छोड़े गए पानी और लगातार बारिश के कारण चंद्रावल नदी व शिहो नाला उफान पर आ गए थे। इसके चलते पारा, हिमौली, लदार , रतौली, लरौंध, भमौरा, नारायच, खन्ना, भवानी,  छिरका, मवैया, मदारपुर और छिमौली समेत कई गांवों में बाढ़ का खतरा पैदा हो गया था। नदी किनारे रहने वाले ग्रामीण पूरी रात जागकर जलस्तर पर नजर बनाए रहे।
हालात को देखते हुए प्रशासन और पुलिस भी पूरी तरह अलर्ट रही। उपजिलाधिकारी मौदहा और क्षेत्राधिकारी मौदहा ने प्रभावित गांवों के लोगों से संपर्क बनाए रखा। पुलिस टीमों ने नदी किनारे के गांवों में लगातार निगरानी की और ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील की।
शुक्रवार को दोनों जलधाराओं का पानी कम होने से ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है। हालांकि खेतों में पानी भरने से किसानों की फसलों को नुकसान हुआ है। गांवों का संपर्क पूरी तरह बहाल होने और पानी उतरने के बाद ही नुकसान की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। प्रशासन की ओर से स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
    user_Raj kumar जिला ब्यूरो चीफ
    Raj kumar जिला ब्यूरो चीफ
    मौदहा, हमीरपुर, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • 12 साल से लापता असम के शख्स को बांदा पुलिस ने परिजनों से मिलाया शुभम सिंह उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के थाना बदौसा क्षेत्र में पुलिस चेकिंग के दौरान एक मंदबुद्धि शख्स संदिग्ध अवस्था में मिला। शुरुआती पूछताछ में भाषा स्पष्ट न होने के कारण पुलिस ने इंटरनेट और असम के संबंधित थाना क्षेत्र से संपर्क स्थापित किया। व्यक्ति की पहचान मो0 सफीउर्रहमान (45 वर्ष), निवासी बोंगाईगांव (असम) के रूप में हुई। ​वीडियो कॉल और दस्तावेजों के मिलान से उसके भाई शुजाउल हक ने पुष्टि की कि सफीउर्रहमान 12 वर्ष पूर्व घर से नाराज होकर लापता हो गया था। पुलिस ने परिजनों को सूचना दे दी है, जो उसे लेने आ रहे हैं। नियमानुसार अग्रिम कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
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    12 साल से लापता असम के शख्स को बांदा पुलिस ने परिजनों से मिलाया

शुभम सिंह
उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के थाना बदौसा क्षेत्र में पुलिस चेकिंग के दौरान एक मंदबुद्धि शख्स संदिग्ध अवस्था में मिला। शुरुआती पूछताछ में भाषा स्पष्ट न होने के कारण पुलिस ने इंटरनेट और असम के संबंधित थाना क्षेत्र से संपर्क स्थापित किया। व्यक्ति की पहचान मो0 सफीउर्रहमान (45 वर्ष), निवासी बोंगाईगांव (असम) के रूप में हुई।
​वीडियो कॉल और दस्तावेजों के मिलान से उसके भाई शुजाउल हक ने पुष्टि की कि सफीउर्रहमान 12 वर्ष पूर्व घर से नाराज होकर लापता हो गया था। पुलिस ने परिजनों को सूचना दे दी है, जो उसे लेने आ रहे हैं। नियमानुसार अग्रिम कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
    user_Shubham Singh
    Shubham Singh
    Local News Reporter बांदा, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • नौगांव के नन्ही मऊ तिदनी में सवा करोड़ पार्थिव शिवलिंग निर्माण, यज्ञ और भंडारे में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब सूरज हीरा फाउंडेशन के अध्यक्ष धर्मेंद्र लाटोरिया ने बताया की गांव में श्रावण मास के पावन अवसर पर सवा करोड़ पार्थिव शिवलिंग निर्माण के साथ यज्ञ एवं भंडारे का आयोजन किया गया। धार्मिक कार्यक्रम में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए और सभी ने भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया । कार्यक्रम में सागर आईजी मिथिलेश शुक्ला भी शामिल हुए ।
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    नौगांव के नन्ही मऊ तिदनी में सवा करोड़ पार्थिव शिवलिंग निर्माण, यज्ञ और भंडारे में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब 
सूरज हीरा फाउंडेशन के अध्यक्ष धर्मेंद्र लाटोरिया ने बताया की गांव में श्रावण मास के पावन अवसर पर सवा करोड़ पार्थिव शिवलिंग निर्माण के साथ यज्ञ एवं भंडारे का आयोजन किया गया। धार्मिक कार्यक्रम में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए और सभी ने भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया ।
कार्यक्रम में सागर आईजी मिथिलेश शुक्ला भी शामिल हुए ।
    user_The best news
    The best news
    लौंडी, छतरपुर, मध्य प्रदेश•
    10 hrs ago
  • डेढ़ करोड़ की गौशाला बनी जलाशय, गोवंश बेहाल और किसान हलकान; व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल नरैनी, बांदा | 27 अगस्त 2026 बारिश ने रगौली-भटपुरा की डेढ़ करोड़ रुपये की स्थाई गौशाला की वह तस्वीर सामने ला दी है, जिसे शायद फाइलों में देखने की जरूरत नहीं पड़ती। गौशाला के नाम पर बना परिसर पानी और कीचड़ का तालाब बन गया है और उसमें संरक्षण के नाम पर रखे गए गोवंश घुटने भर पानी में खड़े नजर आ रहे हैं। टीन शेड, नांद और रास्ते जलमग्न हैं, जबकि भूसा लदा ट्रैक्टर और जेसीबी तक कीचड़ में फंसने की स्थिति बताई जा रही है।यह सिर्फ बारिश का संकट नहीं है। यह करोड़ों की योजनाओं में दूरदर्शिता, निर्माण की गुणवत्ता और जिम्मेदारी के दावों पर सीधा सवाल है। अगर एक स्थाई गौशाला में बारिश का पानी निकालने तक का इंतजाम नहीं है तो फिर ‘स्थाई’ शब्द किस उपलब्धि का प्रमाण है? पानी से बचाने के नाम पर सड़क पर पहुंचा दिए गए गोवंश?मामले का सबसे गंभीर पहलू ग्रामीणों के उस आरोप से जुड़ा है, जिसमें क्षेत्रीय पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अभिषेक कुमार पर गौशाला का गेट खुलवाकर गोवंश बाहर निकलवाने की बात कही गई है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है, इसलिए जांच के बाद ही सच्चाई स्पष्ट होगी। लेकिन सवाल इतना जरूर है कि यदि गोवंश को गौशाला से बाहर निकाला गया, तो उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की व्यवस्था किसकी जिम्मेदारी थी?क्योंकि गौशाला से बाहर निकला गोवंश अब खेतों तक पहुंच रहा है और किसानों की खड़ी फसल को नुकसान पहुंचने की शिकायत सामने आ रही है। यानी एक तरफ गौशाला में गोवंश पानी में फंसा है और दूसरी तरफ बाहर निकलने पर किसान की मेहनत की फसल संकट में है।समाधान यदि यही है कि पानी बढ़े तो गायें निकाल दो, तो फिर गौशाला बनाने और उसके रखरखाव पर खर्च की गई रकम का औचित्य क्या है?डेढ़ करोड़ रुपये और नतीजा—जलभराव! सबसे तीखा सवाल निर्माण व्यवस्था से है। डेढ़ करोड़ रुपये की लागत वाली गौशाला में जलनिकासी, पर्याप्त ऊंचाई और बारिश के पानी से बचाव की व्यवस्था क्यों नहीं दिखाई दे रही? विकास की फाइलों में रकम बढ़ती रही, योजनाओं के नाम चमकते रहे, लेकिन पहली बड़ी बारिश ने जमीन पर व्यवस्था की असलियत खोल दी। जहां गोवंश को छत, चारा और सुरक्षा मिलनी चाहिए थी, वहां पानी, कीचड़ और अव्यवस्था का साम्राज्य दिखाई दे रहा है।यह तस्वीर केवल पशु संरक्षण की विफलता नहीं, बल्कि सरकारी धन के इस्तेमाल पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।NGO और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की हो जांच विश्व हिंदू महासंघ के जिला अध्यक्ष महेश कुमार प्रजापति ने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि ग्रामीणों ने डॉ. अभिषेक कुमार द्वारा गेट खुलवाकर गोवंश बाहर निकलवाने की जानकारी दी है। उन्होंने अधिकारी और NGO संचालक की भूमिका की जांच तथा दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। मामला आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित न रहे, बल्कि गौशाला की निर्माण लागत, तकनीकी स्वीकृति, जलनिकासी व्यवस्था, NGO के संचालन, गोवंश की संख्या और उनके बाहर जाने की पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।अब कागज नहीं, जमीन पर चाहिए जवाब जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी को इस मामले को महज एक स्थानीय शिकायत मानकर टालना नहीं चाहिए। स्थलीय निरीक्षण हो, पानी की निकासी तत्काल कराई जाए, गोवंश को सुरक्षित किया जाए और किसानों की फसल क्षति का वास्तविक आकलन कराया जाए।साथ ही नरैनी ब्लॉक की अन्य गौशालाओं का भी भौतिक सत्यापन जरूरी है, क्योंकि यदि एक गौशाला की पहली बारिश में ऐसी दुर्दशा है तो बाकी व्यवस्थाओं की हकीकत जानना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है।आखिर सवाल सिर्फ गायों का नहीं है। सवाल उस पैसे का भी है जो जनता से लिया गया और संरक्षण के नाम पर खर्च किया गया। बारिश का पानी कुछ दिनों में उतर जाएगा, लेकिन डेढ़ करोड़ की गौशाला के जलभराव ने जो सवाल खड़े किए हैं, उनका पानी जवाबदेही के बिना नहीं उतरने वाला।
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    डेढ़ करोड़ की गौशाला बनी जलाशय, गोवंश बेहाल और किसान हलकान; व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
नरैनी, बांदा | 27 अगस्त 2026 बारिश ने रगौली-भटपुरा की डेढ़ करोड़ रुपये की स्थाई गौशाला की वह तस्वीर सामने ला दी है, जिसे शायद फाइलों में देखने की जरूरत नहीं पड़ती। गौशाला के नाम पर बना परिसर पानी और कीचड़ का तालाब बन गया है और उसमें संरक्षण के नाम पर रखे गए गोवंश घुटने भर पानी में खड़े नजर आ रहे हैं। टीन शेड, नांद और रास्ते जलमग्न हैं, जबकि भूसा लदा ट्रैक्टर और जेसीबी तक कीचड़ में फंसने की स्थिति बताई जा रही है।यह सिर्फ बारिश का संकट नहीं है। यह करोड़ों की योजनाओं में दूरदर्शिता, निर्माण की गुणवत्ता और जिम्मेदारी के दावों पर सीधा सवाल है। अगर एक स्थाई गौशाला में बारिश का पानी निकालने तक का इंतजाम नहीं है तो फिर ‘स्थाई’ शब्द किस उपलब्धि का प्रमाण है?
पानी से बचाने के नाम पर सड़क पर पहुंचा दिए गए गोवंश?मामले का सबसे गंभीर पहलू ग्रामीणों के उस आरोप से जुड़ा है, जिसमें क्षेत्रीय पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अभिषेक कुमार पर गौशाला का गेट खुलवाकर गोवंश बाहर निकलवाने की बात कही गई है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है, इसलिए जांच के बाद ही सच्चाई स्पष्ट होगी। लेकिन सवाल इतना जरूर है कि यदि गोवंश को गौशाला से बाहर निकाला गया, तो उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की व्यवस्था किसकी जिम्मेदारी थी?क्योंकि गौशाला से बाहर निकला गोवंश अब खेतों तक पहुंच रहा है और किसानों की खड़ी फसल को नुकसान पहुंचने की शिकायत सामने आ रही है। यानी एक तरफ गौशाला में गोवंश पानी में फंसा है और दूसरी तरफ बाहर निकलने पर किसान की मेहनत की फसल संकट में है।समाधान यदि यही है कि पानी बढ़े तो गायें निकाल दो, तो फिर गौशाला बनाने और उसके रखरखाव पर खर्च की गई रकम का औचित्य क्या है?डेढ़ करोड़ रुपये और नतीजा—जलभराव!
सबसे तीखा सवाल निर्माण व्यवस्था से है। डेढ़ करोड़ रुपये की लागत वाली गौशाला में जलनिकासी, पर्याप्त ऊंचाई और बारिश के पानी से बचाव की व्यवस्था क्यों नहीं दिखाई दे रही?
विकास की फाइलों में रकम बढ़ती रही, योजनाओं के नाम चमकते रहे, लेकिन पहली बड़ी बारिश ने जमीन पर व्यवस्था की असलियत खोल दी। जहां गोवंश को छत, चारा और सुरक्षा मिलनी चाहिए थी, वहां पानी, कीचड़ और अव्यवस्था का साम्राज्य दिखाई दे रहा है।यह तस्वीर केवल पशु संरक्षण की विफलता नहीं, बल्कि सरकारी धन के इस्तेमाल पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।NGO और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की हो जांच विश्व हिंदू महासंघ के जिला अध्यक्ष महेश कुमार प्रजापति ने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि ग्रामीणों ने डॉ. अभिषेक कुमार द्वारा गेट खुलवाकर गोवंश बाहर निकलवाने की जानकारी दी है। उन्होंने अधिकारी और NGO संचालक की भूमिका की जांच तथा दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।
मामला आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित न रहे, बल्कि गौशाला की निर्माण लागत, तकनीकी स्वीकृति, जलनिकासी व्यवस्था, NGO के संचालन, गोवंश की संख्या और उनके बाहर जाने की पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।अब कागज नहीं, जमीन पर चाहिए जवाब
जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी को इस मामले को महज एक स्थानीय शिकायत मानकर टालना नहीं चाहिए। स्थलीय निरीक्षण हो, पानी की निकासी तत्काल कराई जाए, गोवंश को सुरक्षित किया जाए और किसानों की फसल क्षति का वास्तविक आकलन कराया जाए।साथ ही नरैनी ब्लॉक की अन्य गौशालाओं का भी भौतिक सत्यापन जरूरी है, क्योंकि यदि एक गौशाला की पहली बारिश में ऐसी दुर्दशा है तो बाकी व्यवस्थाओं की हकीकत जानना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है।आखिर सवाल सिर्फ गायों का नहीं है। सवाल उस पैसे का भी है जो जनता से लिया गया और संरक्षण के नाम पर खर्च किया गया। बारिश का पानी कुछ दिनों में उतर जाएगा, लेकिन डेढ़ करोड़ की गौशाला के जलभराव ने जो सवाल खड़े किए हैं, उनका पानी जवाबदेही के बिना नहीं उतरने वाला।
    user_Amod Kumar
    Amod Kumar
    रिपोर्टर बांदा, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    15 hrs ago
  • बारिश बनी आफत, सैफ सचिव बने राहत की ढाल पानी ने रोका रास्ता, जेसीबी ने खोला राहत का रास्ता बारिश बनी आफत, सैफ सचिव बने राहत की ढाल पानी ने रोका रास्ता, जेसीबी ने खोला राहत का रास्ता
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    बारिश बनी आफत, सैफ सचिव बने राहत की ढाल पानी ने रोका रास्ता, जेसीबी ने खोला राहत का रास्ता
बारिश बनी आफत, सैफ सचिव बने राहत की ढाल पानी ने रोका रास्ता, जेसीबी ने खोला राहत का रास्ता
    user_इंडिया न्यूज यूपी एक्सप्रेस
    इंडिया न्यूज यूपी एक्सप्रेस
    महोबा, महोबा, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
  • सिसोलर कस्बे में हनुमान मंदिर में घुसे अराजक तत्व ऑन ने मूर्ति को नुकसान पहुंचाने का किया प्रयास ➡️ मंदिर परिसर में की गई खुदाई, खजाने की तलाश का जताया जा रहा अंदेशा ➡️ हनुमान जी की मूर्ति को खोदने और खंडित करने का प्रयास ➡️ मंदिर में हुई घटना से ग्रामीणों में भारी आक्रोश ➡️ ग्रामीणों ने आरोपियों की पहचान कर कड़ी कार्रवाई की मांग की ➡️ सूचना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की ➡️ सिसोलर कस्बे के विलोहटा मंदिर का मामला
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    सिसोलर कस्बे में हनुमान मंदिर में घुसे अराजक तत्व ऑन ने मूर्ति को नुकसान पहुंचाने का किया प्रयास 
➡️ मंदिर परिसर में की गई खुदाई, खजाने की तलाश का जताया जा रहा अंदेशा
➡️ हनुमान जी की मूर्ति को खोदने और खंडित करने का प्रयास
➡️ मंदिर में हुई घटना से ग्रामीणों में भारी आक्रोश
➡️ ग्रामीणों ने आरोपियों की पहचान कर कड़ी कार्रवाई की मांग की
➡️ सूचना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की
➡️ सिसोलर कस्बे के विलोहटा मंदिर का मामला
    user_ISLAM
    ISLAM
    Local News Reporter मौदहा, हमीरपुर, उत्तर प्रदेश•
    17 hrs ago
  • छतरपुर नगरपालिका में गरीबों की बेबसी पर सवाल: वायरल वीडियो में अधिकारी के बयान से मचा बवाल छतरपुर। नगर पालिका के कथित “मलाईदार विभागों” को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा एक वीडियो नगरपालिका की कार्यप्रणाली और गरीब फुटपाथ कारोबारियों के प्रति अधिकारियों के रवैये पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। वायरल वीडियो में हाथठेला और फुटपाथ पर कारोबार करने वाले कुछ व्यापारी नगरपालिका अध्यक्ष ज्योति चौरसिया के सामने अपनी परेशानियां बताते नजर आ रहे हैं। एक व्यापारी अपनी पत्नी के भोपाल में चल रहे इलाज के लिए हर महीने करीब 10 हजार रुपये भेजने की मजबूरी बताता है। वहीं, एक अन्य व्यापारी इतना परेशान नजर आता है कि वीडियो में उसके द्वारा फांसी लगाने तक की बात कही जाती सुनाई दे रही है। इसी दौरान वीडियो में उपयंत्री आमिर खान का कथित बयान—“आपके धंधे के जिम्मेदार हम नहीं हैं”—चर्चा का विषय बना हुआ है। वहीं उनका यह कहना भी सुनाई देता है कि “यह फुटपाथ आपकी जमीन नहीं है।” निश्चित तौर पर शहर में अतिक्रमण हटाना नगरपालिका की जिम्मेदारी है और सार्वजनिक स्थानों को अतिक्रमण मुक्त रखना भी जरूरी है। लेकिन सवाल यह है कि क्या कार्रवाई के दौरान आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की परिस्थितियों को समझना और उनसे सम्मानजनक तरीके से संवाद करना भी प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है? गरीब फुटपाथ व्यापारी अपनी रोजी-रोटी के लिए सड़क किनारे कारोबार करते हैं। यदि उनके खिलाफ कार्रवाई जरूरी है तो क्या नगरपालिका उनके लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था, व्यवस्थित वेंडिंग जोन या रोजगार का विकल्प उपलब्ध करा रही है? वायरल वीडियो ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या नियमों का पालन करवाने के साथ मानवीय संवेदनशीलता भी प्रशासन की जिम्मेदारी है? अब देखना यह होगा कि वायरल वीडियो पर नगरपालिका प्रशासन क्या स्पष्टीकरण देता है और क्या फुटपाथ कारोबारियों की समस्याओं के समाधान के लिए कोई ठोस कदम उठाया जाता है।
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    छतरपुर नगरपालिका में गरीबों की बेबसी पर सवाल: वायरल वीडियो में अधिकारी के बयान से मचा बवाल

छतरपुर। नगर पालिका के कथित “मलाईदार विभागों” को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा एक वीडियो नगरपालिका की कार्यप्रणाली और गरीब फुटपाथ कारोबारियों के प्रति अधिकारियों के रवैये पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
वायरल वीडियो में हाथठेला और फुटपाथ पर कारोबार करने वाले कुछ व्यापारी नगरपालिका अध्यक्ष ज्योति चौरसिया के सामने अपनी परेशानियां बताते नजर आ रहे हैं। एक व्यापारी अपनी पत्नी के भोपाल में चल रहे इलाज के लिए हर महीने करीब 10 हजार रुपये भेजने की मजबूरी बताता है। वहीं, एक अन्य व्यापारी इतना परेशान नजर आता है कि वीडियो में उसके द्वारा फांसी लगाने तक की बात कही जाती सुनाई दे रही है।
इसी दौरान वीडियो में उपयंत्री आमिर खान का कथित बयान—“आपके धंधे के जिम्मेदार हम नहीं हैं”—चर्चा का विषय बना हुआ है। वहीं उनका यह कहना भी सुनाई देता है कि “यह फुटपाथ आपकी जमीन नहीं है।”
निश्चित तौर पर शहर में अतिक्रमण हटाना नगरपालिका की जिम्मेदारी है और सार्वजनिक स्थानों को अतिक्रमण मुक्त रखना भी जरूरी है। लेकिन सवाल यह है कि क्या कार्रवाई के दौरान आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की परिस्थितियों को समझना और उनसे सम्मानजनक तरीके से संवाद करना भी प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है?
गरीब फुटपाथ व्यापारी अपनी रोजी-रोटी के लिए सड़क किनारे कारोबार करते हैं। यदि उनके खिलाफ कार्रवाई जरूरी है तो क्या नगरपालिका उनके लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था, व्यवस्थित वेंडिंग जोन या रोजगार का विकल्प उपलब्ध करा रही है?
वायरल वीडियो ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या नियमों का पालन करवाने के साथ मानवीय संवेदनशीलता भी प्रशासन की जिम्मेदारी है?
अब देखना यह होगा कि वायरल वीडियो पर नगरपालिका प्रशासन क्या स्पष्टीकरण देता है और क्या फुटपाथ कारोबारियों की समस्याओं के समाधान के लिए कोई ठोस कदम उठाया जाता है।
    user_Mukesh Gautam
    Mukesh Gautam
    Advertising agency छतरपुर, छतरपुर, मध्य प्रदेश•
    22 hrs ago
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