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डीजल और पेट्रोल की दैनिक खपत पर एक नई सीमा निर्धारित की गई है। इस व्यवस्था के अनुसार, अब एक दिन में अधिकतम 200 लीटर डीजल या पेट्रोल ही प्राप्त किया जा सकेगा।
Angoori meena
डीजल और पेट्रोल की दैनिक खपत पर एक नई सीमा निर्धारित की गई है। इस व्यवस्था के अनुसार, अब एक दिन में अधिकतम 200 लीटर डीजल या पेट्रोल ही प्राप्त किया जा सकेगा।
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- सवाई माधोपुर जिले के मखौली गांव से कांसीर लिंक रोड पर लंबे समय से गंदा पानी भरा रहता है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों, मस्जिद में नमाज पढ़ने जाने वाले नमाजियों और मदरसे के बच्चों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। राहगीरों को सड़क पर जमा इसी गंदे पानी से होकर गुजरने को मजबूर होना पड़ता है, जिससे उन्हें गंदे पानी के छींटे लगने की समस्या भी झेलनी पड़ती है। यह सड़क करीब एक दर्जन गांवों के लिए मुख्य रास्ता है, जिससे कई ग्रामीण रोजाना आवागमन करते हैं। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए सरपंच और प्रशासन को कई बार अवगत कराया है, लेकिन अभी तक उनकी समस्या का कोई हल नहीं निकला है। एक दिन बाद ही ईद का त्योहार मनाया जाएगा, जब नमाजी बड़ी संख्या में मस्जिद पहुंचेंगे, ऐसे में गंदे पानी की यह समस्या और भी विकट हो गई है। सड़क पर गंदे पानी के जमाव और प्रशासन की निष्क्रियता को लेकर मखौली गांव के ग्रामीणों में गहरा रोष व्याप्त है, जो सुनवाई न होने से बेहद आक्रोशित हैं।1
- सवाई माधोपुर के चौथ का बरवाड़ा में लगभग 100 वर्ष पुरानी काली तलाई की पाल को क्षतिग्रस्त कर उस पर अतिक्रमण करने के प्रयास का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई थी। ग्रामीणों की शिकायत पर तुरंत हरकत में आते हुए पंचायत और राजस्व प्रशासन मौके पर पहुंचा। प्रशासन ने वहां चल रहे निर्माण कार्य को तत्काल रुकवा दिया और पूर्व यथास्थिति बहाल करने के निर्देश दिए। हालांकि, इस मामले में संबंधित किसान ने अतिक्रमण के इन सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है।2
- राजस्थान के खण्डीप गाँव में पांचना बांध से कमाण्ड क्षेत्र की नहरों में पानी छोड़े जाने की मांग को लेकर किसानों का अनिश्चितकालीन धरना और महापंचायत दसवें दिन भी जारी है। इस आंदोलन में रायपुर, कुसाय, परीता, सैगरपुरा, खोरपुरा सहित आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में किसान, महिलाएं, युवा और ग्रामीण एकजुट होकर जनसैलाब की तरह उमड़ रहे हैं। किसानों का स्पष्ट कहना है कि माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों का पालन करते हुए जल्द से जल्द नहरों में पानी छोड़ा जाए और मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। धरना स्थल पर व्यवस्थाएं पांचना कमाण्ड क्षेत्र विकास संघर्ष समिति द्वारा संभाली जा रही हैं, जिसमें गांव-वार जिम्मेदारियां तय की गई हैं। किशोरपुर गांव के ग्रामीणों ने 13 और 14 जून को भोजन, पेयजल और साफ-सफाई सहित अन्य व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी निभाई, जबकि 15 और 16 जून के लिए छोटी उदेई, डिवस्या, बिनेगा, छान और खिदपुर गांवों के किसानों को यह जिम्मेदारी दी गई है। आंदोलन में लोक कलाकारों और गीतकारों द्वारा किसान संघर्ष से जुड़े गीत प्रस्तुत कर सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से भी किसानों का उत्साह बढ़ाया जा रहा है, जिसमें महिलाओं की बढ़ती भागीदारी आंदोलन की एक प्रमुख ताकत बनकर उभरी है। महापंचायत में किसानों ने जोर देकर कहा कि यह केवल पानी की लड़ाई नहीं, बल्कि उनके अधिकार, सम्मान और भविष्य की लड़ाई है, जिसमें सर्व समाज और सभी जातियों के लोग एकजुटता से शामिल हो रहे हैं। आगे की रणनीति के तहत, किसानों ने गांव-गांव में कमेटियां गठित करने का निर्णय लिया है और सभी राजनीतिक दलों के नेताओं से आंदोलन को समर्थन देने की अपील की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि जो भी नेता किसानों के साथ खड़ा नहीं होगा, उसका सामूहिक रूप से विरोध किया जाएगा। किसानों ने सरकार और प्रशासन को साफ शब्दों में आगाह किया है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और अधिक व्यापक रूप दिया जाएगा। उनका कहना है कि न्याय मिलने तक यह संघर्ष जारी रहेगा।2
- राजस्थान राज्य विद्युत वितरण निगम लिमिटेड ने सवाई माधोपुर वृत्त में विद्युत चोरी और अनधिकृत विद्युत उपयोग पर अंकुश लगाने के लिए एक विशेष सघन विजिलेंस अभियान चलाया। अधीक्षण अभियंता (ओ.एण्ड.एम.) आर.के. मीना के निर्देशन में गठित विभागीय टीमों ने जिले के विभिन्न शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक जांच और सत्यापन की कार्यवाही की। इस अभियान में सवाई माधोपुर, गंगापुर सिटी, खण्डार, बौंली, बामनवास, चौथ का बरवाड़ा, मलारना डूंगर और वजीरपुर क्षेत्र की टीमों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। अभियान के दौरान विभिन्न श्रेणी के विद्युत उपभोक्ताओं के परिसरों का निरीक्षण किया गया, जिसमें विद्युत चोरी और अनधिकृत उपयोग के कुल 123 प्रकरण चिन्हित किए गए। निगम के प्रावधानों के अनुसार, सभी मामलों में वीसीआर दर्ज कर आवश्यक कार्यवाही शुरू की गई। जांच में लगभग 1.41 लाख यूनिट विद्युत ऊर्जा का आकलन किया गया, जिसके आधार पर 23.24 लाख रुपये का प्रारंभिक राजस्व निर्धारण किया गया है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि यह कार्यवाही राजस्व संरक्षण के साथ-साथ उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण और निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अधीक्षण अभियंता आर.के. मीना ने स्पष्ट किया कि विद्युत चोरी से वितरण तंत्र पर अनावश्यक भार बढ़ता है, तकनीकी एवं वाणिज्यिक हानियां बढ़ती हैं, और ईमानदार उपभोक्ताओं के हित प्रभावित होते हैं। उन्होंने बताया कि भविष्य में भी विद्युत चोरी और अनियमितताओं के विरुद्ध इसी प्रकार के विशेष अभियान लगातार चलाए जाएंगे तथा दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने आमजन से अपील की है कि वे वैध विद्युत कनेक्शन के माध्यम से ही बिजली का उपयोग करें और विद्युत चोरी या अनियमितता की जानकारी मिलने पर निगम को सूचित कर जनहित में सहयोग करें, ताकि सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सके।1
- गंगापुर सिटी के खंडीप गांव में माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों के बावजूद पांचना बांध से कमाण्ड क्षेत्र की नहरों में पानी छोड़े जाने की मांग को लेकर चल रही किसान महापंचायत और अनिश्चितकालीन धरना दसवें दिन भी पूरे जोश और उत्साह के साथ जारी है। इस आंदोलन में रायपुर, कुसाय, परीता, सैगरपुरा और खोरपुरा सहित कमाण्ड क्षेत्र के कई गांवों से भारी संख्या में किसान, महिलाएं, पंच-पटेल, युवा और बच्चे शामिल हो रहे हैं, जिससे यह एक व्यापक जनआंदोलन का रूप ले चुका है। धरना स्थल पर व्यवस्थाएं बनाए रखने के लिए पांचना कमाण्ड क्षेत्र विकास संघर्ष समिति द्वारा गांव-वार जिम्मेदारियां तय की गई हैं। 13 से 14 जून तक किशोरपुर गांव के ग्रामीणों ने भोजन, पेयजल और साफ-सफाई का प्रबंधन किया, जबकि 15 से 16 जून तक छोटी उदेई, डिवस्या, बिनेगा, छान और खिदपुर के किसान इन व्यवस्थाओं को संभालेंगे। आंदोलन स्थल पर दिनभर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जा रहा है, जहाँ लोक कलाकारों और गीतकारों ने अपने ओजस्वी प्रदर्शनों से किसानों में नई ऊर्जा भरी है। विशेष रूप से, महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत माना जा रहा है। महापंचायत के मंच से किसानों ने यह संकल्प दोहराया है कि माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों का पूरी तरह से पालन कराकर पांचना बांध से नहरों में पानी छोड़े जाने तक उनका संघर्ष किसी भी कीमत पर समाप्त नहीं होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल सिंचाई जल की मांग नहीं, बल्कि लाखों किसानों के अधिकार, सम्मान, आजीविका और भविष्य की लड़ाई है। किसानों ने राज्य सरकार और प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि नहरों में शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेकर पानी नहीं छोड़ा गया, तो आंदोलन को और अधिक व्यापक और उग्र रूप दिया जाएगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी राज्य सरकार और प्रशासन की होगी। किसानों ने इसे 'आर-पार की लड़ाई' करार दिया है और न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रखने की बात कही है। आंदोलन को सफल बनाने के लिए गांव-गांव में कमेटियां गठित करने का निर्णय लिया गया है। सर्व जाति और सर्वसमाज इस मुद्दे पर एकजुट होकर खड़ा हो गया है। सरकार को सीधी चेतावनी दी जा रही है और सभी पार्टियों के नेताओं से भी बात की जा रही है। यह भी निर्णय लिया गया है कि यदि कोई नेता किसानों का साथ नहीं देगा, तो उसका सामूहिक रूप से विरोध किया जाएगा।1
- Post by Yogesh Kumar Gupta4
- ग्राम खण्डीप में चल रही किसान महापंचायत और अनिश्चितकालीन धरना दसवें दिन भी पूरे जोश और उत्साह के साथ जारी है, जिसमें पांचना बांध से कमांड क्षेत्र की नहरों में पानी छोड़े जाने की मांग की जा रही है। यह मांग माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों के बावजूद पानी न मिलने के विरोध में है। धरना स्थल पर रायपुर, कुसाय, परीता, सैगरपुरा और खोरपुरा सहित कमांड क्षेत्र के कई गाँवों के किसानों का भारी जनसमूह उमड़ रहा है, जिसमें महिलाओं, पंच-पटेलों, युवाओं और बच्चों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है, जिससे यह आंदोलन अब एक व्यापक जनआंदोलन का रूप ले चुका है। आंदोलन की व्यवस्थाओं को सुचारु और अनुशासित बनाए रखने के लिए पांचना कमांड क्षेत्र विकास संघर्ष समिति ने गांव-वार जिम्मेदारियाँ तय की हैं। इसी क्रम में किशोरपुर गांव के ग्रामीणों ने 13 से 14 जून तक भोजन, पेयजल, साफ-सफाई और अन्य व्यवस्थाओं का सफलतापूर्वक संचालन किया, जबकि 15 से 16 जून तक छोटी उदेई, डिवस्या, बिनेगा, छान और खिदपुर के किसान धरने की जिम्मेदारी संभालेंगे। धरना स्थल पर दिनभर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया, जहाँ लोक कलाकारों और गीतकारों ने अपने ओजस्वी गीतों से किसानों में नई ऊर्जा का संचार किया। महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत के रूप में देखा जा रहा है। महापंचायत के मंच से किसानों ने एक स्वर में संकल्प लिया कि माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित कराते हुए पांचना बांध से नहरों में पानी छोड़े जाने तक उनका संघर्ष किसी भी कीमत पर समाप्त नहीं होगा। किसानों ने स्पष्ट किया कि यह केवल सिंचाई के लिए पानी की मांग नहीं है, बल्कि लाखों किसानों के अधिकार, सम्मान, आजीविका और भविष्य की लड़ाई है। उन्होंने राज्य सरकार और प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेकर नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया, तो आंदोलन को और अधिक व्यापक एवं उग्र रूप दिया जाएगा, और ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाली सभी परिस्थितियों की जिम्मेदारी सरकार एवं प्रशासन की होगी। किसानों ने कहा कि अब आर-पार की लड़ाई का समय आ गया है और न्याय मिलने तक संघर्ष निरंतर जारी रहेगा। आंदोलन को सफल बनाने के लिए गाँव-गाँव में कमेटियाँ गठित करने का निर्णय लिया गया है और सभी जाति तथा समाज एक साथ उठ खड़े हुए हैं। सरकार को कड़ी चेतावनी दी जा रही है। सभी पार्टियों के नेताओं से बात की जा रही है, और यह भी निर्णय लिया गया है कि जो नेता किसानों का साथ नहीं देगा, उसका सामूहिक रूप से विरोध किया जाएगा।1
- गंगापुर सिटी के खंडीप गांव में चल रही किसान महापंचायत अब एक व्यापक जन आंदोलन का रूप ले चुकी है। यह महत्वपूर्ण जानकारी विधायक रामकेश मीणा ने दी है।1
- गंगापुरसिटी के सदर थाना क्षेत्र में ज्योति विद्या मंदिर स्कूल, बाढ़ कलां के प्रिंसिपल गोविंद पाराशर पर एक महिला शिक्षिका ने छेड़छाड़ के गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता शिक्षिका ने पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराते हुए बताया कि 8 जून 2026 को प्रिंसिपल ने उसे जरूरी काम बताकर घर से स्कूल बुलाया था। स्कूल पहुंचने पर जब वह अकेली थी, तो प्रिंसिपल ने उसके साथ गलत हरकत करने का प्रयास किया। महिला शिक्षिका ने अपनी शिकायत में विस्तार से बताया कि आरोपी गोविंद पाराशर ने उसके कंधे और सीने पर हाथ लगाया तथा गलत काम करने के लिए उस पर दबाव डाला। पीड़िता किसी तरह वहां से बचकर अपने घर पहुंची। उसने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी ने उसे घटना के बारे में किसी को न बताने की धमकी दी और रास्ते में उसका पीछा भी किया। इसके बाद पीड़िता अपने माता-पिता के साथ सदर थाना गंगापुरसिटी पहुंची और पूरी घटना की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने शिक्षिका की रिपोर्ट के आधार पर तुरंत मामला दर्ज कर लिया है। प्रकरण में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 75, 78 और अनुसूचित जाति/जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3-1(w) के तहत मामला दर्ज किया गया है। मामले की जांच वृत्ताधिकारी गंगापुरसिटी, गिर्राज प्रसाद आरपीएस को सौंपी गई है, जिन्होंने जांच शुरू कर दी है।1