उमरिया जिले के करकेली से सटे बसकुटा गांव में स्थित डीके राइस मिल में गुरुवार को अचानक भीषण आग लग गई। यह घटना इस लिहाज से हैरान करने वाली है कि यह बरसात के मौसम में हुई, जब आमतौर पर आग लगने की घटनाएं कम होती हैं। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और राइस मिल में भंडारित हजारों क्विंटल धान को अपनी चपेट में ले लिया, जो किसानों के खून-पसीने की कमाई थी। यह वही धान था जिसे किसानों ने महीनों की कड़ी मेहनत, तपती धूप और बारिश के बीच तैयार किया था, और कुछ ही देर में अन्नदाता की यह मेहनत आग की लपटों में जलकर खाक हो गई। गनीमत रही कि कुछ देर बाद दमकल वाहन मौके पर पहुंचा और आग पर काबू पा लिया, हालांकि तब तक काफी धान जलकर नष्ट हो चुका था। आग लगने के कारण फिलहाल स्पष्ट नहीं हो सके हैं। इस दुखद घटना ने धान मिल में भंडारित अनाज की सुरक्षा व्यवस्था और जिम्मेदार एजेंसियों की सतर्कता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
उमरिया जिले के करकेली से सटे बसकुटा गांव में स्थित डीके राइस मिल में गुरुवार को अचानक भीषण आग लग गई। यह घटना इस लिहाज से हैरान करने वाली है कि यह बरसात के मौसम में हुई, जब आमतौर पर आग लगने की घटनाएं कम होती हैं। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और राइस मिल में भंडारित हजारों क्विंटल धान को अपनी चपेट में ले लिया, जो किसानों के खून-पसीने की कमाई थी। यह वही धान था जिसे किसानों ने महीनों की कड़ी मेहनत, तपती धूप और बारिश के बीच तैयार किया था, और कुछ ही देर में अन्नदाता की यह मेहनत आग की लपटों में जलकर खाक हो गई। गनीमत रही कि कुछ देर बाद दमकल वाहन मौके पर पहुंचा और आग पर काबू पा लिया, हालांकि तब तक काफी धान जलकर नष्ट हो चुका था। आग लगने के कारण फिलहाल स्पष्ट नहीं हो सके हैं। इस दुखद घटना ने धान मिल में भंडारित अनाज की सुरक्षा व्यवस्था और जिम्मेदार एजेंसियों की सतर्कता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
- उमरिया जिले की मानपुर जनपद पंचायत के ग्राम पड़वार स्थित हलफल-भदार नदी पर पुल का अभाव बारिश के मौसम में एक बड़ी मुसीबत बन गया है। नदी का जलस्तर बढ़ते ही बचहा, मुडगुड़ी, सलैया, कुंडी, भरौली और पड़वार सहित आसपास के गांवों का संपर्क टूट जाता है, जिससे स्थानीय निवासियों का आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो जाता है। इस स्थिति से सबसे अधिक जूझना छात्र-छात्राओं को पड़ रहा है, जो पड़वार स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में पढ़ने जाते हैं। सामान्य दिनों में विद्यालय की दूरी 4 से 5 किलोमीटर है, लेकिन बरसात में नदी उफान पर होने के कारण उन्हें अमरपुर होकर 18 से 20 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ता है। विद्यार्थियों की पढ़ाई पर इसका सीधा असर पड़ रहा है और कई बार स्कूल पहुंचना भी मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि ग्राम कुंडी के पास बने स्टॉप डेम में किए गए अवरोध के कारण जलभराव की समस्या और बढ़ गई है, जिससे न केवल आवागमन प्रभावित है बल्कि किसानों की कृषि भूमि का कटाव भी हो रहा है। ग्रामीणों ने शिकायत की है कि वे वर्षों से पुल की मांग कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है। उन्होंने जिला खनिज प्रतिष्ठान (DMF) या अन्य योजनाओं के माध्यम से पुल निर्माण की मांग रखी है। ग्रामीणों के अनुसार, पूर्व में अपनी पढ़ाई और पुल की मांग को लेकर छात्र-छात्राओं ने 'नदी बचाओ आंदोलन' का समर्थन किया था, जिसके बाद जिला प्रशासन ने कुछ शिक्षकों के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई तो की, लेकिन पुल के निर्माण पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। अब ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर से बरसात के दौरान मौके का निरीक्षण करने और पुल निर्माण की प्रक्रिया शीघ्र शुरू करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो वे क्षेत्रीय नागरिकों के साथ लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन और धरना-प्रदर्शन करेंगे, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।2
- जनपद पंचायत मानपुर के अंतर्गत ग्राम पड़वार स्थित हलफल-भदार नदी पर पुल न होने के कारण बारिश के मौसम में बचहा, मुडगुड़ी, सलैया, कुंडी, भरौली और पड़वार सहित आसपास के गांवों का आवागमन पूरी तरह ठप्प हो जाता है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि वे वर्षों से पुल निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। इससे सबसे अधिक परेशानी छात्र-छात्राओं को उठानी पड़ रही है, जिन्हें पड़वार स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पहुँचने के लिए सामान्य 4 से 5 किलोमीटर की दूरी के बजाय अमरपुर होकर लगभग 18 से 20 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ता है, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है और कई बार विद्यालय पहुंचना भी संभव नहीं हो पाता। ग्रामीणों ने बताया कि बरसात के दौरान नदी में जलभराव से पूर्व में भी कई अप्रिय घटनाएं हो चुकी हैं। छात्र-छात्राओं ने अपनी पढ़ाई सुचारु रखने और पुल निर्माण की मांग को लेकर 'नदी बचाओ आंदोलन' का समर्थन किया था, जिसके बाद जिला प्रशासन द्वारा कुछ शिक्षकों के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई की गई थी। ग्रामीणों का आरोप है कि हलफल-भदार नदी के संगम क्षेत्र में जलभराव पहले से अधिक हो रहा है, कुछ ग्रामीणों ने इसके लिए ग्राम कुंडी के पास बने स्टॉप डेम में किए गए अवरोध को जिम्मेदार ठहराया है, जिससे आवागमन के साथ-साथ किसानों की कृषि भूमि का कटाव भी बढ़ रहा है। ग्रामीणों ने मांग की है कि हलफल-भदार नदी से जुड़े रेत समूहों से शासन को राजस्व मिलता है, इसलिए जिला खनिज प्रतिष्ठान (DMF) मद या अन्य उपयुक्त योजना से पुल का निर्माण कराया जाना चाहिए। उन्होंने संबंधित विभागों, जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को मौखिक एवं लिखित आवेदन दिए हैं, लेकिन कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन ने शिक्षकों पर कार्रवाई तो कर दी, लेकिन पुल के अभाव में हर वर्ष हजारों छात्र-छात्राओं की प्रभावित होती पढ़ाई और उनके भविष्य की चिंता नहीं की। उन्होंने जिला कलेक्टर से शीघ्र मौके का निरीक्षण कर पुल निर्माण की प्रक्रिया शुरू कराने की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो क्षेत्रीय नागरिक लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन एवं धरना-प्रदर्शन करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।2
- शहडोल जिले में 9 जुलाई 2026 को नवागत पुलिस अधीक्षक श्री संजय कुमार अग्रवाल ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर अपना पदभार ग्रहण किया। श्री अग्रवाल मध्यप्रदेश पुलिस की राज्य पुलिस सेवा के वर्ष 1997 बैच के अधिकारी हैं और वर्ष 2016 से भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं। अपने सेवाकाल में उन्होंने डीसीपी इंटेलिजेंस भोपाल और मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी में अपनी सेवाएँ दी हैं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने भिंड, नीमच, टीकमगढ़, छतरपुर, सागर, दतिया, शिवपुरी, जबलपुर एवं भोपाल सहित विभिन्न जिलों में कार्य किया है। उनकी सेवाएँ पुलिस अकादमी, सीआईडी, विशेष शाखा, विशेष सशस्त्र बल, आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ और एसआईएसएफ जैसी महत्वपूर्ण इकाइयों में भी रही हैं। उत्कृष्ट सेवाओं के लिए श्री अग्रवाल को मध्यप्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2017 और 2018 का के.एफ. रुस्तम पुरस्कार प्रदान किया जा चुका है। साथ ही, वर्ष 2020 में भारत सरकार ने उन्हें सराहनीय सेवाओं के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया था।1
- शहडोल में 9 जुलाई 2026 को कलेक्ट्रेट कार्यालय के विराट सभागार में जिले के विभिन्न मंदिरों के पुजारियों और ट्रस्ट समिति के सदस्यों की एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में कलेक्टर डॉ. केदार सिंह और मध्यप्रदेश तीर्थ स्थल एवं मेला प्राधिकरण (धर्मस्व न्यास) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. राजेश श्रीवास्तव उपस्थित रहे। कलेक्टर डॉ. केदार सिंह ने जोर देकर कहा कि मंदिर श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था, श्रद्धा और विश्वास के प्रमुख केंद्र होते हैं, इसलिए उनकी आस्था बनाए रखना पुजारियों की एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि पुजारियों का व्यवहार ही मंदिर की पहचान बनाता है और मंदिरों में प्राप्त चढ़ावे का उपयोग मंदिर के विकास, रखरखाव और व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने में किया जाना चाहिए। कलेक्टर ने पुजारियों एवं ट्रस्ट समिति के सदस्यों से आपसी समन्वय स्थापित कर मंदिर परिसरों में स्वच्छता, सुव्यवस्थित व्यवस्थाएं और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को प्राथमिकता देने को कहा। उन्होंने मुंडन जैसे धार्मिक संस्कारों के लिए उपयुक्त स्थान चिन्हित करने और मंदिरों में बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। बैठक में मिले सुझावों के आधार पर, कलेक्टर ने जिला मुख्यालय स्थित रामजानकी मंदिर परिसर की खाली भूमि पर सीसीटीवी कैमरे लगाने की अनुमति प्रदान की। इसके अतिरिक्त, उन्होंने कंकाली मंदिर परिसर से अतिक्रमण हटाने, वाहन पार्किंग की व्यवस्था विकसित करने और आवश्यकतानुसार मंदिरों में पुजारियों के लिए आवासीय सुविधा सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. राजेश श्रीवास्तव ने पुजारियों को समाज और प्रशासन के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु बताया। उन्होंने जिले के धार्मिक एवं ऐतिहासिक मंदिरों, तीर्थस्थलों, आश्रमों तथा आयोजित होने वाले मेलों की जानकारी जिला प्रशासन को उपलब्ध कराने और उनका पंजीयन कराने का आह्वान किया। डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि पंजीकृत मंदिरों एवं ट्रस्टों को मध्यप्रदेश शासन द्वारा अनुदान प्रदान किया जाता है, साथ ही पात्र पुजारियों को मानदेय भी दिया जाता है। उन्होंने पुजारियों को पूजा-पद्धति, उचित वेशभूषा, मंदिर के इतिहास, मंत्रों के शुद्ध उच्चारण एवं धार्मिक परंपराओं का ज्ञान रखने की आवश्यकता पर बल दिया। इसके साथ ही, उन्होंने मंदिरों में घंटी, शंख, धर्मग्रंथ जैसी आवश्यक व्यवस्थाएं जनसहयोग से करने, खंडित मूर्तियों की पूजा न करने, मंदिर परिसरों को अतिक्रमण मुक्त रखने तथा स्वच्छता बनाए रखने की भी बात कही। डॉ. राजेश श्रीवास्तव ने यह भी जानकारी दी कि आगामी दिनों में शहडोल संभाग में धर्मगुरुओं एवं पुजारियों की एक संगोष्ठी आयोजित की जाएगी, जिसमें सभी पुजारियों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। इसके अतिरिक्त, उज्जैन में आयोजित होने वाले सिंहस्थ मेले में भी जिले के पुजारियों का सहयोग लिया जाएगा।1
- उमरिया जिले के करकेली से सटे बसकुटा गांव में स्थित डीके राइस मिल में गुरुवार को अचानक भीषण आग लग गई। यह घटना इस लिहाज से हैरान करने वाली है कि यह बरसात के मौसम में हुई, जब आमतौर पर आग लगने की घटनाएं कम होती हैं। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और राइस मिल में भंडारित हजारों क्विंटल धान को अपनी चपेट में ले लिया, जो किसानों के खून-पसीने की कमाई थी। यह वही धान था जिसे किसानों ने महीनों की कड़ी मेहनत, तपती धूप और बारिश के बीच तैयार किया था, और कुछ ही देर में अन्नदाता की यह मेहनत आग की लपटों में जलकर खाक हो गई। गनीमत रही कि कुछ देर बाद दमकल वाहन मौके पर पहुंचा और आग पर काबू पा लिया, हालांकि तब तक काफी धान जलकर नष्ट हो चुका था। आग लगने के कारण फिलहाल स्पष्ट नहीं हो सके हैं। इस दुखद घटना ने धान मिल में भंडारित अनाज की सुरक्षा व्यवस्था और जिम्मेदार एजेंसियों की सतर्कता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।1