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बाराबंकी/औशानेश्वर में हुई चोरी को पुलिस ने 72घंटे में चोरों को पकड़ कर भेजा जेल जर्नलिस्ट दिवाकर सिन्हा
Divakar sinha
बाराबंकी/औशानेश्वर में हुई चोरी को पुलिस ने 72घंटे में चोरों को पकड़ कर भेजा जेल जर्नलिस्ट दिवाकर सिन्हा
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- बाराबंकी/औशानेश्वर में हुई चोरी को पुलिस ने 72घंटे में चोरों को पकड़ कर भेजा जेल जर्नलिस्ट दिवाकर सिन्हा1
- *दोनों आरोपी हिरासत में!*1
- *स्वाट/सर्विलांस व थाना हैदरगढ़ की संयुक्त पुलिस टीम द्वारा 02 अभियुक्तों को किया गया गिरफ्तार, कब्जे/निशांदेही से चोरी की 04 किलो 769 ग्राम चांदी व 07 हजार रुपये नकदी व घटना में प्रयुक्त औजार बरामदगी के सम्बन्ध में पुलिस अधीक्षक बाराबंकी श्री अर्पित विजयवर्गीय की बाइट -*2
- संत कबीर आश्रम में उमड़ा आस्था का सैलाब 50वीं पुण्यतिथि पर विशाल भंडारा, साधु-संतों संग पहुंचे अपर मुख्य सचिव मसौली/बाराबंकी। संत कबीर आश्रम मुंजापुर में सद्गुरु विशाल देव साहेब की 50वीं पुण्यतिथि के अवसर पर श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। भजन-कीर्तन के साथ विशाल भंडारे का आयोजन हुआ, जिसमें दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। पूरा आश्रम परिसर “संत कबीर साहेब की जय” के जयघोष से गूंज उठा। कार्यक्रम में समाज कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव एल. वेंकटेश्वर लू ने समाज में बढ़ते वैमनस्य और युवाओं के भटकाव पर चिंता जताई। उन्होंने कहा— “आज समाज जाति और धर्म के नाम पर बंटता जा रहा है, वहीं युवा पीढ़ी नशे और गलत संगत की ओर बढ़ रही है। संतों की वाणी और संस्कार ही युवाओं को सही दिशा दे सकते हैं। जब मन पर नियंत्रण होगा और ईश्वर से जुड़ाव बनेगा, तभी सच्ची शांति मिलेगी।” संत निष्ठा साहेब ने पारिवारिक मूल्यों पर जोर देते हुए कहा— “घर-परिवार की जिम्मेदारी निभाते हुए परमात्मा का स्मरण करना आवश्यक है। माता-पिता की अच्छी सोच और संस्कार ही बच्चों के भविष्य को उज्ज्वल बनाते हैं। ऐसे संस्कार आगे चलकर परिवार और समाज का नाम रोशन करते हैं।” ट्रस्ट अध्यक्ष महंत आलोक दास ने आयोजन में सहयोग करने वाले श्रद्धालुओं व अतिथियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन संत प्रांजल दास ने किया। इस अवसर पर निर्वतमान विधायक शरद अवस्थी, मद्य निषेध अधिकारी एल. राजवंशी, नागेश सिंह सहित बड़ी संख्या में साधु-संत और गणमान्य लोग उपस्थित रहे। भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने पंक्तिबद्ध होकर प्रसाद ग्रहण किया। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे धार्मिक आयोजन न सिर्फ सामाजिक समरसता बढ़ाते हैं, बल्कि युवाओं को गलत रास्तों से बचाने में भी अहम भूमिका निभाते हैं।4
- देवा शरीफ दरगाह के पास युवक से मारपीट, माथे का तिलक धुलवाया; वीडियो वायरल, आरोपी हिरासत में1
- यूंही कोई योगी नहीं बन जाता… योगी जी के अपने पैतृक गांव पहुंचते ही हर गली, हर चेहरा, हर नज़र भावुक हो उठी… लोगों की आंखों में सम्मान था, दिलों में गर्व था, और माहौल में अपनापन… योगी जी की एक छवि ऐसी— जहां अपराधियों और भ्रष्टाचारियों को वे यमराज नजर आते हैं… और दूसरी छवि ऐसी— जहां आम जनता को वे भगवान जैसे प्रतीत होते हैं… सच में, यह व्यक्तित्व साधारण नहीं, असाधारण है… यह नेतृत्व यूं ही नहीं बन जाता… 🔥 फिर कहूंगी— यूंही कोई योगी नहीं बन जाता… #योगी_आदित्यनाथ #योगीजी #उत्तरप्रदेश #नेतृत्व #जनता_का_विश्वास #सुशासन #माफिया_मुक्त_प्रदेश #भावुक_क्षण #भारत #राजनीति #प्रेरणा1
- उत्तर प्रदेश चतुर्थ श्रेणी राज्य कर्मचारी महासंघ का शपथ ग्रहण समारोह संपन्न हुआ1
- सफदरगंज कस्बे में बंदरों का आतंक, फसलें और घरों का सामान बर्बाद मसौली/बाराबंकी। बाराबंकी जनपद के मसौली विकासखंड क्षेत्र अंतर्गत सफदरगंज कस्बे में बंदरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। गांव और कस्बे में घूम रहे बंदरों के झुंड किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, वहीं घरों में घुसकर रखा सामान उठाकर तोड़-फोड़ कर रहे हैं। इस समस्या से ग्रामीणों में दहशत और आक्रोश दोनों बढ़ता जा रहा है। स्थानीय ग्रामीण रामलाल ने बताया कि “दिन में बंदरों का झुंड खेतों में घुस जाता है। गेहूं, चना और सब्जियों की फसल को बर्बाद कर देते हैं। कई बार भगाने पर हमला करने को दौड़ पड़ते हैं।” वहीं किसान राकेश का कहना है कि “घर की छत पर रखे कपड़े, अनाज और छोटे सामान बंदर उठाकर ले जाते हैं। बच्चों और बुजुर्गों को बाहर निकलने में डर लगता है।” महिला ग्रामीण सीमा देवी ने बताया कि “सुबह-सुबह बंदर छतों पर आकर बर्तन गिरा देते हैं, कई बार बच्चों के हाथ से खाना तक छीन लेते हैं। रोज का जीना मुश्किल हो गया है।” ग्रामीण वीरेंद्र और अमित ने कहा कि “कई बार वन विभाग और नगर प्रशासन से शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सिर्फ आश्वासन ही मिला है।” ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि बंदरों को पकड़वाकर सुरक्षित स्थान पर छोड़ा जाए या स्थायी समाधान किया जाए, ताकि फसल, संपत्ति और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। अब देखना यह है कि जिम्मेदार कब जागते हैं और कस्बे को बंदरों के आतंक से राहत मिलती है।2