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जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों का समर्थन करने वाले जुनैद नामक व्यक्ति के प्रति एकजुटता और सुरक्षा की भावना व्यक्त की गई है। एक तस्वीर में हिंदी और उर्दू भाषा में लिखे संदेश के माध्यम से उनके प्रति अपना समर्थन और सुरक्षा का भाव जाहिर किया गया है।
Reporter Shahnawaz
जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों का समर्थन करने वाले जुनैद नामक व्यक्ति के प्रति एकजुटता और सुरक्षा की भावना व्यक्त की गई है। एक तस्वीर में हिंदी और उर्दू भाषा में लिखे संदेश के माध्यम से उनके प्रति अपना समर्थन और सुरक्षा का भाव जाहिर किया गया है।
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- जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों का समर्थन करने वाले जुनैद नामक व्यक्ति के प्रति एकजुटता और सुरक्षा की भावना व्यक्त की गई है। एक तस्वीर में हिंदी और उर्दू भाषा में लिखे संदेश के माध्यम से उनके प्रति अपना समर्थन और सुरक्षा का भाव जाहिर किया गया है।1
- धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े के बाद छात्रों में खुशी की लहर देखने को मिल रही है। इस इस्तीफ़े की खबर सामने आते ही छात्र वर्ग के बीच भारी उत्साह और खुशी का माहौल देखा जा रहा है।1
- दिल्ली ब्यूरो रिपोर्ट के अनुसार, छात्रों के आगे आखिरकार सरकार को झुकना पड़ा है। इस बड़े घटनाक्रम के बीच शिक्षा मंत्री ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।1
- केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आखिरकार अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। जंतर-मंतर पर पिछले एक महीने से भी ज्यादा समय से विरोध-प्रदर्शन कर रहे छात्रों, युवाओं और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की लगातार मांग के बाद यह कदम सामने आया है। शुक्रवार को केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों के साथ मुलाकात में सीजेपी के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट कर दिया था कि जब तक धर्मेंद्र प्रधान पद नहीं छोड़ते, प्रदर्शन जारी रहेगा। शनिवार को इस्तीफा देते हुए प्रधान ने कहा कि उन्हें प्रजातंत्र पर पूरा भरोसा है। इस्तीफे की खबर के बाद जंतर-मंतर पर डटे CJP के नेताओं और समर्थकों ने इसे आंदोलन की बड़ी जीत बताते हुए जश्न मनाया। पार्टी के नेता अभिजीत दिपके ने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि लगातार संघर्ष की वजह से सरकार को झुकना पड़ा है। दिपके ने कहा, 'हमने कर दिखाया। धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। लोग कहते थे कि इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते, लेकिन हमने साबित कर दिया कि झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए।' उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन का मकसद सिर्फ मंत्री का इस्तीफा नहीं, बल्कि कथित अनियमितताओं से प्रभावित छात्रों को न्याय दिलाना है। अभिजीत दिपके ने पीड़ित छात्रों के लिए लड़ाई जारी रखने का वादा करते हुए कहा, 'पीड़ितों के लिए मैं लड़ूंगा, न्याय दिलाऊंगा।' आंदोलन के प्रतीक का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, 'कॉकरोच एक बार घुसता है तो निकलता नहीं है।' इसके साथ ही उन्होंने सरकार के सामने मांग रखी कि कथित तौर पर परीक्षा विवाद के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को ₹1 करोड़ का मुआवजा और उचित सहायता प्रदान की जाए।1
- दिल्ली में चल रहे SIR को लेकर इलेक्शन कमिशन पर एक बड़ी लापरवाही बरतने का आरोप लगाया गया है। गोमती इलेक्शन कमिश्नर ऑफिस से जुड़ी इस गलती को वीडियो में भी साफ देखा जा सकता है, लेकिन इसके बावजूद चुनाव आयोग की इस नाकामी को जनता के ऊपर थोपा जा रहा है। इलेक्शन कमिशन की इसी चूक के कारण दिल्ली में भारी संख्या में लोगों के वोट काटे जाने की आशंका बनी हुई है। आयोग की इस कार्रवाई पर कड़ा ऐतराज जताते हुए सवाल उठाया जा रहा है कि इलेक्शन कमिशन की इस गलती में भला आम जनता की क्या गलती है।1
- दिल्ली हाईकोर्ट की अनुमति के बावजूद सफदरजंग अस्पताल प्रशासन और पुलिस ने सोनम वांगचुक को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल जाने से रोकने की कोशिश की थी।1
- आंदोलन के दिन समाजवादी पार्टी के समाजवाद की ओर से क्या कहा गया, इसको लेकर सवाल सामने रखा गया है। इसमें आंदोलन के दौरान पार्टी और उसके समाजवाद के रुख का उल्लेख किया गया है।1
- NEET पेपर लीक, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और लाठीचार्ज के विरोध में बुलाए गए बिहार बंद के दौरान छात्रों का आंदोलन बेहद हिंसक रूप ले चुका है। प्रदर्शनकारियों के उग्र रुख के कारण राज्य के कई हिस्सों में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। प्रदर्शन के दौरान छपरा में छात्रों ने पुलिस की वैन को आग के हवाले कर दिया, जबकि सिवान में स्थिति पर काबू पाने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। राज्य के 8 जिलों में प्रदर्शनकारियों द्वारा पुलिस पर जमकर पत्थर बरसाए गए हैं। इस हिंसा में पुलिस की कई गाड़ियों को तोड़ दिया गया है और कई इलाकों में पुलिसकर्मियों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटे जाने की भी खबरें सामने आ रही हैं।1