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नर्मदापुरम जिले के पिपरिया तहसील में जनसुनवाई के दौरान एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है। ग्राम धनश्री का एक ग्रामीण जब अपनी शिकायत लेकर पहुँचा, तो मुख्यमंत्री पर की गई किसी टिप्पणी को लेकर वहाँ मौजूद अधिकारी और कर्मचारी इस कदर नाराज़ हुए कि उन्होंने अपना आपा खो दिया। मदद करने और बात सुनने की बजाय, ग्रामीण को सरेआम भद्दी गालियाँ दी गईं और उसे धक्के मारकर कक्ष से बाहर निकाल दिया गया। इस पूरी घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है, जिससे सरकारी तंत्र के इस रवैये पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। यह पूछा जा रहा है कि क्या मुख्यमंत्री पर टिप्पणी करने की सज़ा सरेआम गाली देना है और इस अधिकारी पर क्या कार्रवाई होनी चाहिए।
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नर्मदापुरम जिले के पिपरिया तहसील में जनसुनवाई के दौरान एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है। ग्राम धनश्री का एक ग्रामीण जब अपनी शिकायत लेकर पहुँचा, तो मुख्यमंत्री पर की गई किसी टिप्पणी को लेकर वहाँ मौजूद अधिकारी और कर्मचारी इस कदर नाराज़ हुए कि उन्होंने अपना आपा खो दिया। मदद करने और बात सुनने की बजाय, ग्रामीण को सरेआम भद्दी गालियाँ दी गईं और उसे धक्के मारकर कक्ष से बाहर निकाल दिया गया। इस पूरी घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है, जिससे सरकारी तंत्र के इस रवैये पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। यह पूछा जा रहा है कि क्या मुख्यमंत्री पर टिप्पणी करने की सज़ा सरेआम गाली देना है और इस अधिकारी पर क्या कार्रवाई होनी चाहिए।
More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
- पिपरिया के धनाश्री श्री में जनसुनवाई के दौरान हुए एक विवाद का वीडियो सामने आया है। जानकारी के अनुसार, एक ग्रामीण ने मुख्यमंत्री को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की और गाली-गलौज भी की, जिससे वहां मौजूद एक सरकारी कर्मचारी अत्यधिक नाराज हो गया। वायरल हुए इस वीडियो में देखा जा सकता है कि नाराज कर्मचारी ग्रामीण को जनसुनवाई कक्ष से बाहर निकालते हुए अपशब्दों का प्रयोग कर रहा है। यह घटना सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। इस घटना से पहले, बनखेड़ी चादौंन में भी एक हितग्राही के साथ अभद्रता का ऐसा ही एक मामला सामने आया था। लगातार सामने आ रहे इस तरह के वीडियो प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।1
- छिंदवाड़ा जिले की ग्राम पंचायत भरडी के अंतर्गत आने वाले कोंगला गांव में तीन घरों में बिजली नहीं होने से गंभीर बिजली की समस्या बनी हुई है। यह समस्या गांव के इन तीन घरों को प्रभावित कर रही है।1
- एक बेहद अनोखा कछुआ देखा गया है, जिसकी पीठ पर सितारे जैसे निशान बने हुए हैं।1
- हरदा के टिमरनी नगर में सकल जैन समाज ने हाल ही में हुई जैन आर्यिकाओं की सड़क दुर्घटना में मौत पर गहरा दुःख और रोष व्यक्त किया है। समाज के महिला, पुरुषों और बच्चों ने एक मौन रैली निकालकर इस घटना की उच्चस्तरीय जांच की मांग की। उन्होंने प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के नाम एसडीएम संजीव कुमार नागू को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें कहा गया कि चारपहिया वाहन चालक द्वारा लापरवाही से टक्कर मारे जाने के कारण आर्यिकाओं का दुःखद निधन हुआ। ज्ञापन में स्पष्ट किया गया कि समाज इस घटना को मात्र एक सड़क दुर्घटना नहीं मान रहा, बल्कि उपलब्ध तथ्यों और वीडियो क्लिपों के आधार पर इसमें गहरी आशंका और चिंता व्याप्त है। जैन समाज ने इस प्रकरण की निष्पक्ष, पारदर्शी एवं उच्चस्तरीय जांच की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि जैन साधु-संत निहत्थे, अहिंसक और पैदल विहार करने वाले तपस्वी होते हैं, जो किसी प्रकार की सुरक्षा या सुविधाओं का उपयोग नहीं करते, बल्कि समाज में शांति और अहिंसा का संदेश प्रसारित करते हैं। ऐसे संतों के साथ लगातार बढ़ती दुर्घटनाएं एवं हमले संपूर्ण समाज के लिए चिंताजनक विषय हैं। सकल जैन समाज ने इस संबंध में तीन प्रमुख मांगें रखी हैं। पहली, घटना की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, जिसमें एसआईटी या न्यायिक जांच शामिल हो, सभी सीसीटीवी, वीडियो एवं डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित किए जाएं, दोषियों पर कठोरतम कानूनी कार्यवाही की जाए, और यदि सुनियोजित कृत्य अथवा षड्यंत्र के तथ्य मिलें तो कठोर धाराएं लगाई जाएं। दूसरी मांग 'संत सुरक्षा प्रोटोकॉल' लागू करने की है, जिसमें विहाररत साधु-संतों की सुरक्षा हेतु प्रशासनिक समन्वय, संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस सहयोग, ट्रैफिक नियंत्रण, चेतावनी संकेतक और हाईवे एवं भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में विशेष सावधानी सुनिश्चित की जाए। तीसरी मांग 'राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति' बनाने की है, ताकि साधु-संतों के लिए मार्ग पर प्रशासनिक समन्वय, पुलिस सहयोग एवं ट्रैफिक नियंत्रण सुनिश्चित किया जा सके।4
- आज गंगा दशहरा के अवसर पर 'जल गंगा संवर्धन अभियान' के तहत साचेत में स्थित प्राचीन बाबड़ी पर जल स्त्रोत का पूजन किया गया। इस दौरान एक भव्य कलश यात्रा निकाली गई, जिसके उपरांत भगवान शिव जी का अभिषेक किया गया। कार्यक्रम में सभी उपस्थित लोगों ने जल संरक्षण का संकल्प भी लिया। जन अभियान परिषद द्वारा आयोजित इस पूजन और कलश यात्रा में मुख्य अतिथि के तौर पर सरपंच कल्याण सिंह लोधी, सचिव खुशी लाल गौर, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहित ग्रामीण महिलाएं, नवाँकुर संस्था के अध्यक्ष नरेंद्र बघेल और मेंटर देवेन्द्र गौर शामिल हुए। छात्र कमलेश लोधी, विकास लोधी, कोमल सिंह सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण जन भी इस आयोजन में उपस्थित रहे।1
- Post by Sohan Lal Rathor3
- इटारसी शहर के नागरिक गंदे और अनियमित पेयजल की समस्या से बेहद परेशान हैं, जिसके चलते अब उन्होंने एकजुट होकर प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अधिवक्ता सिद्धार्थ महेश आर्य के नेतृत्व में एक जन जागरूकता अभियान शुरू किया गया है, जिसकी मुख्य माँग है "साफ पानी दो या टैक्स लेना बंद करो"। यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल की लड़ाई नहीं है, बल्कि हर उस आम इंसान के लिए है जो पूरा टैक्स भरने के बावजूद दूषित पानी के कारण बीमारियों का खतरा झेलता है। अभियान का ज़ोर इस बात पर है कि गंदा पानी किसी पार्टी को देखकर नहीं आता, इसलिए सभी को अपनी सेहत के लिए मिलकर आवाज़ उठानी चाहिए। नागरिकों ने प्रशासन से माँग की है कि इस गंभीर समस्या का तत्काल और स्थाई समाधान निकाला जाए।1
- मध्य प्रदेश की राजधानी इंदौर के नगर निगम पर गंभीर आरोप लगे हैं, जहाँ जनता को पीने का पानी उपलब्ध कराने में विफल रहने के बावजूद, विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया। यह घटना इंदौर के पालदा क्षेत्र की है, जहाँ पानी के भीषण संकट से परेशान होकर स्थानीय रहवासी और पार्षद कुणाल सोलंकी सड़क पर उतर आए थे। आरोप है कि प्रशासन ने लोगों की समस्या हल करने के लिए पानी के टैंकर भेजने के बजाय, प्रदर्शनकारियों पर पानी की बौछारें करने वाली गाड़ियाँ तैनात कर दीं। इस कार्रवाई पर प्रशासन से सीधा सवाल किया गया है कि यदि उनके पास वाटर कैनन में भरने के लिए हजारों लीटर पानी उपलब्ध है, तो वही पानी पालदा की प्यासी जनता के घरों तक क्यों नहीं पहुँचाया जा रहा है। प्रशासन को जनता को डराना बंद करने और अगर उनमें दम है तो उनके खाली नलों में पानी लाकर दिखाने की चुनौती दी गई है।1
- पूर्व मंत्री एवं सांची विधायक डॉ. प्रभुराम चौधरी ने रायसेन के अर्जुन नगर में हर बारिश में होने वाले जलभराव पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने एक कार्यक्रम के दौरान इस समस्या के स्थाई समाधान के लिए ₹3 करोड़ का नाला स्वीकृत कराने की जानकारी दी। डॉ. चौधरी ने नगर पालिका द्वारा अर्जुन नगर की तरफ पानी छोड़ दिए जाने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि पानी की निकासी इतनी पुख्ता होनी चाहिए, जिससे क्षेत्र में दोबारा जलभराव की स्थिति निर्मित न हो सके।1