उपचार के दौरान हेड कांस्टेबल की मौत, गार्ड ऑफ ऑनर के साथ अंतिम विदाई फतेहपुर। जनपद के कजंरनडेरा जाफरपुर सिठरर्रा निवासी हेड कांस्टेबल इंदल सिंह का उपचार के दौरान देर रात दर्दनाक निधन हो गया। उनकी मौत की खबर से परिजनों में कोहराम मच गया, वहीं पुलिस विभाग में भी शोक की लहर दौड़ गई। मृतक के पुत्र अभिषेक कुमार ने बताया कि उनके पिता इंदल सिंह वर्तमान में पुलिस लाइन कानपुर देहात में तैनात थे। लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व उन्नाव में ड्यूटी के दौरान हुए एक सड़क हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। हादसे के बाद से उनका लगातार इलाज चल रहा था, लेकिन हालत में सुधार नहीं हो सकी और अंततः देर रात अस्पताल में उन्होंने दम तोड़ दिया। बताया गया कि इंदल सिंह की वर्ष 1992 में आरक्षी पद पर नियुक्ति हुई थी और उन्होंने लंबे समय तक पुलिस विभाग में सेवाएं दीं। उनके निधन के बाद थाना प्रभारी मनीष कुमार के नेतृत्व में पार्थिव शरीर को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके बाद गांव में पूरे सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। इंदल सिंह अपने पीछे दो पुत्र—अभिषेक और बृजेश—को छोड़ गए हैं। उनकी पत्नी का लगभग चार वर्ष पूर्व ही निधन हो चुका था। परिवार पहले से ही इस सदमे से उबर नहीं पाया था कि अब मुखिया के निधन ने उन्हें पूरी तरह तोड़ दिया है। परिवार में एक पुत्रवधू भी है, जो वर्तमान में सेवा में कार्यरत है। इंदल सिंह की मृत्यु से क्षेत्र में शोक की लहर है। स्थानीय लोगों और पुलिस कर्मियों ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है।
उपचार के दौरान हेड कांस्टेबल की मौत, गार्ड ऑफ ऑनर के साथ अंतिम विदाई फतेहपुर। जनपद के कजंरनडेरा जाफरपुर सिठरर्रा निवासी हेड कांस्टेबल इंदल सिंह का उपचार के दौरान देर रात दर्दनाक निधन हो गया। उनकी मौत की खबर से परिजनों में कोहराम मच गया, वहीं पुलिस विभाग में भी शोक की लहर दौड़ गई। मृतक के पुत्र अभिषेक कुमार ने बताया कि उनके पिता इंदल सिंह वर्तमान में पुलिस
लाइन कानपुर देहात में तैनात थे। लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व उन्नाव में ड्यूटी के दौरान हुए एक सड़क हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। हादसे के बाद से उनका लगातार इलाज चल रहा था, लेकिन हालत में सुधार नहीं हो सकी और अंततः देर रात अस्पताल में उन्होंने दम तोड़ दिया। बताया गया कि इंदल सिंह की वर्ष 1992 में आरक्षी पद पर नियुक्ति हुई
थी और उन्होंने लंबे समय तक पुलिस विभाग में सेवाएं दीं। उनके निधन के बाद थाना प्रभारी मनीष कुमार के नेतृत्व में पार्थिव शरीर को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके बाद गांव में पूरे सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। इंदल सिंह अपने पीछे दो पुत्र—अभिषेक और बृजेश—को छोड़ गए हैं। उनकी पत्नी का लगभग चार वर्ष पूर्व ही निधन हो चुका था। परिवार पहले से ही
इस सदमे से उबर नहीं पाया था कि अब मुखिया के निधन ने उन्हें पूरी तरह तोड़ दिया है। परिवार में एक पुत्रवधू भी है, जो वर्तमान में सेवा में कार्यरत है। इंदल सिंह की मृत्यु से क्षेत्र में शोक की लहर है। स्थानीय लोगों और पुलिस कर्मियों ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है।
- थाना खागा पर मु0अ0सं0 115/26 धारा 74/64(1)/ 61(2) /130/308/352/351(3)/115(2) बीएनएस व 66 (E) IT ACT में वांछित अभियुक्त बब्लू सिंगरौर पर श्रीमान अपर पुलिस महानिदेशक प्रयागराज, जोन प्रयागराज द्वारा वांछित अभियुक्त पर पूर्व में घोषित ₹50,000/- के इनाम को बढ़ाकर ₹1,00,000/- (एक लाख रुपये) कर दिया गया है। अभियुक्त की गिरफ्तारी हेतु कुल 07 पुलिस टीमें गठित की गई हैं, जो निरंतर विभिन्न राज्यों में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। विभिन्न राज्यों के रेलवे प्लेटफॉर्मों पर अभियुक्त की उपस्थिति संबंधी सूचना प्राप्त हुई है, जिसके आधार पर उसकी पहचान कर सतर्कतापूर्वक गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। आशा है कि अभियुक्त को शीघ्र ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। प्रकरण में सम्मिलित अन्य अभियुक्तों के आपराधिक इतिहास के आधार पर उनके विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। आवश्यकतानुसार गैंगस्टर अधिनियम के अंतर्गत भी कार्रवाई प्रस्तावित है। अभियुक्तों द्वारा अर्जित अवैध संपत्तियों का चिन्हांकन प्रारंभ कर दिया गया है तथा गैंगस्टर एक्ट की धारा 14(1) के अंतर्गत विधिक कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी। शांति एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने तथा पीड़िता की गोपनीयता की दृष्टि से किसी भी राजनीतिक दल अथवा संगठन को पीड़िता से मिलने की अनुमति नहीं प्रदान की गई है। यदि किसी भी व्यक्ति/संगठन को पुलिस अथवा प्रशासन की कार्यवाही के संबंध में कोई आपत्ति अथवा स्पष्टीकरण अपेक्षित हो, तो वे पुलिस अधीक्षक अथवा जिलाधिकारी महोदया से सीधे संपर्क कर सकते हैं। पीड़िता को आवश्यक चिकित्सीय एवं विधिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही, उसे उपलब्ध समस्त वैधानिक प्रावधानों एवं प्रतिकर (कंपनसेशन) योजनाओं की जानकारी देकर शीघ्र लाभ दिलाने हेतु आवश्यक कार्यवाही की जा रही है। प्रकरण में शीघ्र चार्जशीट दाखिल कर न्यायालय में प्रस्तुत की जाएगी तथा प्रकरण को फास्ट ट्रैक के माध्यम से शीघ्र निस्तारण हेतु अभियोजन पक्ष के साथ समन्वय स्थापित किया गया है, जिससे अभियुक्तों को कठोरतम दंड सुनिश्चित कराया जा सके। उक्त समस्त कार्यवाहियों की नियमित मॉनिटरिंग वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की जा रही है। के संबंध में श्रीमान पुलिस अधीक्षक फतेहपुर, श्री अभिमन्यु मांगलिक की बाइट ।1
- उपचार के दौरान हेड कांस्टेबल की मौत, गार्ड ऑफ ऑनर के साथ अंतिम विदाई फतेहपुर। जनपद के कजंरनडेरा जाफरपुर सिठरर्रा निवासी हेड कांस्टेबल इंदल सिंह का उपचार के दौरान देर रात दर्दनाक निधन हो गया। उनकी मौत की खबर से परिजनों में कोहराम मच गया, वहीं पुलिस विभाग में भी शोक की लहर दौड़ गई। मृतक के पुत्र अभिषेक कुमार ने बताया कि उनके पिता इंदल सिंह वर्तमान में पुलिस लाइन कानपुर देहात में तैनात थे। लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व उन्नाव में ड्यूटी के दौरान हुए एक सड़क हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। हादसे के बाद से उनका लगातार इलाज चल रहा था, लेकिन हालत में सुधार नहीं हो सकी और अंततः देर रात अस्पताल में उन्होंने दम तोड़ दिया। बताया गया कि इंदल सिंह की वर्ष 1992 में आरक्षी पद पर नियुक्ति हुई थी और उन्होंने लंबे समय तक पुलिस विभाग में सेवाएं दीं। उनके निधन के बाद थाना प्रभारी मनीष कुमार के नेतृत्व में पार्थिव शरीर को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके बाद गांव में पूरे सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। इंदल सिंह अपने पीछे दो पुत्र—अभिषेक और बृजेश—को छोड़ गए हैं। उनकी पत्नी का लगभग चार वर्ष पूर्व ही निधन हो चुका था। परिवार पहले से ही इस सदमे से उबर नहीं पाया था कि अब मुखिया के निधन ने उन्हें पूरी तरह तोड़ दिया है। परिवार में एक पुत्रवधू भी है, जो वर्तमान में सेवा में कार्यरत है। इंदल सिंह की मृत्यु से क्षेत्र में शोक की लहर है। स्थानीय लोगों और पुलिस कर्मियों ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है।4
- Post by Vinod shriwastva1
- सर्राफा कारोबारियों ने एसपी को सौंपा ज्ञापन, गिरवी विवादों में स्पष्ट दिशा-निर्देश की मांग फतेहपुर सर्राफा एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष कुलदीप उर्फ पप्पन रस्तोगी के नेतृत्व में व्यापारियों ने पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर आभूषण व्यवसाय में गिरवी (प्लेज) से जुड़े विवादों में विधिक स्पष्टता और पुलिस कार्रवाई के लिए ठोस दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की। ज्ञापन में बताया गया कि सोना-चांदी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के चलते वर्षों पुराने और निष्क्रिय पड़े गिरवी लेनदेन अब दोबारा विवादित किए जा रहे हैं। इससे व्यापारियों को अनावश्यक कानूनी, आर्थिक और प्रतिष्ठागत परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई मामलों में 10 से 30 साल पुराने लेनदेन बिना पर्याप्त साक्ष्यों के उठाए जा रहे हैं, जो प्रथम दृष्टया संदिग्ध प्रतीत होते हैं। व्यापारियों ने आरोप लगाया कि कई बार पुलिस बिना प्रारंभिक जांच और अभिलेखों का परीक्षण किए सीधे एफआईआर दर्ज कर लेती है या दबावपूर्ण कार्रवाई करती है। इतना ही नहीं, बिना पूर्व सूचना के प्रतिष्ठानों पर पहुंचकर असभ्य व्यवहार की शिकायतें भी सामने आई हैं, जिससे व्यापारिक माहौल प्रभावित हो रहा है। ज्ञापन में यह भी स्पष्ट किया गया कि गिरवी, ऋण, ब्याज और हिसाब-किताब से जुड़े अधिकांश मामले स्वभावतः दीवानी (सिविल) होते हैं, जिनमें पुलिस हस्तक्षेप सीमित होना चाहिए। केवल उन्हीं मामलों में कार्रवाई हो, जहां स्पष्ट रूप से आपराधिक तत्व मौजूद हों। सर्राफा एसोसिएशन ने मांग की कि ऐसे मामलों में किसी भी कार्रवाई से पहले अनिवार्य रूप से प्रारंभिक सत्यापन किया जाए, दोनों पक्षों को सुनने का अवसर दिया जाए और दस्तावेजों की जांच के बाद ही कोई कदम उठाया जाए। साथ ही बिना नोटिस के दबावपूर्ण कार्रवाई पर रोक लगाने और पुलिस व्यवहार को सभ्य व विधिसम्मत बनाए रखने की भी अपील की गई। इस दौरान अध्यक्ष कुलदीप रस्तोगी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष बृजेश सोनी, महामंत्री धर्मेंद्र गुप्ता, कोषाध्यक्ष मोनू रस्तोगी सहित आनंद रस्तोगी, रंजन गुप्ता, सोनू गुप्ता, अमित रस्तोगी, प्रदीप रस्तोगी, अर्पित रस्तोगी, मनोज रस्तोगी, योगेश चंद्र रस्तोगी, संजय कुमार, अमित कुमार और अभिषेक रस्तोगी समेत कई व्यापारी मौजूद रहे।1
- Post by Anurag1
- Post by Press Ashish Tripathi1
- रायबरेली से इस वक्त की बड़ी खबर। पुलिस की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। भदोखर थाना क्षेत्र के महंगू का पुरवा निवासी कपिराज मिश्रा ने नगर कोतवाली में तैनात कॉन्स्टेबल धीरज गौड़ पर मारपीट और अभद्र व्यवहार का गंभीर आरोप लगाया है।पीड़ित का कहना है कि वह अपनी बहन के पारिवारिक विवाद के मामले में नगर कोतवाली पहुंचा था। उसकी बहन ने अपने पति के साथ हुए विवाद की शिकायत पुलिस से की थी। आरोप है कि इसी दौरान कोतवाली में मौजूद कॉन्स्टेबल ने उसकी बहन के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया। जब कपिराज मिश्रा ने इसका विरोध किया और सवाल पूछा, तो कॉन्स्टेबल ने कथित तौर पर उसके साथ मारपीट कर दी। अब इस पूरे मामले ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई है। वहीं,क्षेत्राधिकारी नगर ने मामले की जांच कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।फिलहाल, देखना होगा कि इस मामले में पुलिस विभाग क्या कदम उठाता है और पीड़ित को न्याय कब तक मिल पाता है।1
- फतेहपुर जिले में गिरवी आभूषण विवाद में पुलिस की कार्रवाई पर सर्राफा कारोबारियों ने उठाए सवाल - डीजीपी से जारी किए जाएं दिशा-निर्देश, दीवानी मामलों में एफआईआर पर रोक की मांग 50ज्वेलर्स व्यापारियों ने आज फतेहपुर पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर बताई समस्या जिसमें फतेहपुर पुलिस अधीक्षक ने हर संभव मदद का दिया आश्वासन सोने-चांदी के दाम बढ़ने के बाद पुराने गिरवी लेनदेन को लेकर विवाद बढ़ गए हैं। सर्राफा कारोबारियों का कहना है कि 10 से 30 साल पुराने निष्क्रिय मामलों में अब बिना दस्तावेज के दावे किए जा रहे हैं। इससे व्यापारियों को कानूनी और आर्थिक संकट झेलना पड़ रहा है। व्यापारियों का आरोप है कि पुलिस बिना जांच और बिना पक्ष सुने सीधे एफआईआर दर्ज कर रही है। कई बार बिना नोटिस के दुकानों पर पहुंचकर दबाव बनाया जाता है। इससे व्यापारियों की साख खराब हो रही है और कारोबारी माहौल में डर का माहौल है। कारोबारियों ने बताया कि कई मामलों में गिरवी रखने वालों ने खुद सामान वापस लेने से इनकार किया था, क्योंकि उस समय सोने का दाम मूलधन और ब्याज से कम था। अब दाम बढ़ने पर वही लोग पुराने मामले उठा रहे हैं। व्यापारियों ने मांग की है कि गिरवी विवाद मूल रूप से दीवानी मामला है। ऐसे में पुलिस कार्रवाई से पहले प्रारंभिक सत्यापन अनिवार्य किया जाए। बिना दस्तावेज जांचे और दोनों पक्षों को सुने बिना एफआईआर न हो। सर्राफा कारोबारियों ने डीजीपी से मांग की है कि पुलिस के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। 1. दीवानी मामलों में बिना जांच कोई कार्रवाई न हो। 2. व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर बिना नोटिस न जाएं। 3. पुलिस का व्यवहार सभ्य और विधिसम्मत हो। 4. दबावपूर्ण और अपमानजनक व्यवहार पर रोक लगे। कारोबारियों का कहना है कि पुलिस की त्वरित कार्रवाई से वैध व्यापार बाधित हो रहा है। उन्होंने दीवानी मामलों में पुलिस हस्तक्षेप सीमित रखने की मांग की है।1