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मेसकौर प्रमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव #दो साल बाद भी निर्णय नहीं #सिस्टम पर सवाल तो उठेंगे...!
Varunendra kumar (Nawada Live)
मेसकौर प्रमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव #दो साल बाद भी निर्णय नहीं #सिस्टम पर सवाल तो उठेंगे...!
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- मेसकौर प्रमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव #दो साल बाद भी निर्णय नहीं #सिस्टम पर सवाल तो उठेंगे...!3
- आप देख रहे हैं आज की सच्ची खबर ,यह वीडियो तेजी से वाईरल हो रहा है, जो कि आप विडियो से देख रहे हैं संजय वर्मा की खास रिपोर्ट गया जिला के टनकुप्पा प्रखंड अन्तर्गत मायापुर में शुक्रवार को सूबे के मुखिया नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा के तहत आयोजित सभा उस समय चर्चा का विषय बन गई, जब सभा में शामिल कुछ लोग अचानक सड़क किनारे स्थित एक किसान के चने के खेत में घुस गए और हरे भरे चने उखाड़ खाने लगे। सभा में दूर-दूर से आए महिला-पुरुषों की भीड़ जैसे ही सड़क किनारे हरे चने की फसल देखी, कई लोग खुद को रोक नहीं पाए और खेत में उतर गए। देखते ही देखते दर्जनों लोग खेत में फैल गए और चने तोड़-तोड़ कर खाने लगे। यह दृश्य इतना सामान्य सा बना दिया गया मानो किसी की महीनों की मेहनत की कोई कीमत ही न हो। सबसे हैरानी की बात यह रही कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में कुछ पुलिसकर्मी भी उसी खेत के चने खाते हुए नजर आ रहे हैं। जिस पुलिस पर कानून और व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी होती है, वही अगर किसी गरीब किसान की फसल को इस तरह नुकसान पहुंचाते दिखे तो यह दृश्य किसी भी संवेदनशील व्यक्ति को अंदर तक झकझोर देता है। जरा सोचिए उस किसान पर क्या बीत रही होगी, जिसने दिन रात मेहनत करके, धूप बरसात सहकर अपनी फसल तैयार की होगी। खेत में लहलहाता चना उसके लिए सिर्फ फसल नहीं बल्कि उसके परिवार की उम्मीद, बच्चों की पढ़ाई और घर के खर्च का सहारा होता है। लेकिन कुछ मिनटों की लापरवाही और भीड़ की मानसिकता ने उसकी मेहनत को यूं ही रौंद डाला। ग्रामीणों का कहना है कि अगर प्रशासन और पुलिस चाहती तो भीड़ को खेत में जाने से रोक सकती थी। लेकिन जब सुरक्षा में तैनात लोग ही तमाशबीन बन जाएं या खुद फसल तोड़ने लगें, तो फिर किसान किससे न्याय की उम्मीद करे! यह घटना सिर्फ एक खेत के नुकसान की कहानी नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज की उस सोच को भी दिखाती है जहां किसी गरीब किसान की मेहनत को मामूली समझ लिया जाता है। सवाल यह भी उठता है कि जिस समृद्धि यात्रा का उद्देश्य विकास और समृद्धि का संदेश देना है, उसी यात्रा के दौरान अगर एक किसान की फसल ही उजाड़ दिए जाए तो यह कैसी समृद्धि है! स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए और जिस किसान की फसल को नुकसान हुआ है उसे उचित मुआवजा दिया जाए। क्योंकि किसान की मेहनत पर चोट सिर्फ उसकी जेब पर नहीं, बल्कि उसकी उम्मीदों पर भी लगती है।1
- लड़की घर में बुलाकर क्या करती है1
- हिसुआ की पूर्व विधायक नीतू सिंह ने एक बार फिर अपनी धर्मपरायण छवि को कायम रखते हुए लोहंडा पर्व पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ मनाया। वे हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी पूजा-पाठ और पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए स्वयं प्रसाद तैयार कर रही हैं। ज्ञात हो कि नीतू सिंह अपने विधायक कार्यकाल के दौरान भी सभी पर्व-त्योहार पूरे उत्साह और धार्मिक नियमों के अनुसार मनाती रही हैं। राजनीति में सक्रिय रहते हुए भी उनकी धार्मिक आस्था और परंपराओं के प्रति समर्पण हमेशा देखने को मिलता रहा है। लोहंडा जैसे पवित्र अवसर पर स्वयं प्रसादी बनाकर उन्होंने समाज को संस्कृति और परंपरा से जुड़े रहने का संदेश दिया है।1
- गोविंदपुर प्रखंड मुख्यालय गोविंदपुर डीह पर सोमवार को भावी मुखिया प्रत्याशी मंटू यादव के द्वारा छठ व्रतियों के बीच पुजा सामाग्री का किया वितरण1
- rings se nisan leke jate huy baba shyam khatu wale ke darbar me mandir me baba Shyam ka bhagat jatehu shyam Premi bolo jay shree shyam baba2
- राजद नेता राजेन्द्र पासवान के पिता श्री राम पासवान के अंतिम विदाई शव यात्रा3
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