उर ढांक सड़क पर राहत की उम्मीद: सुरंग निर्माण की दिशा में BRO ने शुरू किया सर्वेक्षण हिम संदेश चंबा/पांगी, 17 अप्रैल 2026 पांगी घाटी के धरवास, लुज और सुराल पंचायतों के लोगों को लंबे समय से भय और खतरे के साए में जीने पर मजबूर करने वाली उर ढांक सड़क से जल्द राहत मिलने की उम्मीद जगी है। सीमा सड़क संगठन (BRO) की एक उच्च स्तरीय टीम ने बीते दो दिनों के दौरान उर ढांक और धरवास पुल क्षेत्र का विस्तृत निरीक्षण एवं सर्वेक्षण किया। इस सर्वेक्षण में स्थानीय प्रतिनिधियों को भी शामिल होने का अवसर मिला, जिससे क्षेत्र की वास्तविक समस्याओं को सीधे अधिकारियों तक पहुंचाया गया। उर ढांक सड़क को क्षेत्र की सबसे खतरनाक सड़कों में गिना जाता है, जहां हर समय पहाड़ों से पत्थर गिरने और हादसों का खतरा बना रहता है। कई बार इस मार्ग पर जानलेवा दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिससे स्थानीय लोगों में भय का माहौल बना रहता है। ऐसे में लंबे समय से इस मार्ग पर सुरंग निर्माण की मांग उठाई जा रही थी, ताकि लोगों को सुरक्षित और स्थायी यातायात सुविधा मिल सके। स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा इस मुद्दे को लेकर समय-समय पर DGBRO से मुलाकात, पत्राचार और लगातार प्रयास किए गए, जिसके परिणामस्वरूप अब यह पहल जमीनी स्तर पर आगे बढ़ती नजर आ रही है। BRO द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए उच्च स्तरीय टीम को मौके पर भेजना निश्चित रूप से सराहनीय कदम माना जा रहा है। सर्वेक्षण के दौरान BRO टीम ने क्षेत्र के विभिन्न बिंदुओं का गहन निरीक्षण किया और तीन से चार संभावित स्थान चिन्हित किए हैं, जहां सुरंग निर्माण की व्यवहार्यता का परीक्षण किया जाएगा। आगामी चरण में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जाएगी और आवश्यक तकनीकी परीक्षण किए जाएंगे। इसके बाद आने वाले समय में सुरंग निर्माण की दिशा में कार्य आगे बढ़ने की संभावना है। यह परियोजना केवल एक सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि हजारों लोगों की सुरक्षा, सुविधा और बेहतर भविष्य से जुड़ी हुई है। इस अवसर पर उन लोगों को भी श्रद्धांजलि दी गई जिन्होंने इस खतरनाक मार्ग पर हादसों में अपनी जान गंवाई। उनकी स्मृति इस परियोजना को और अधिक महत्वपूर्ण बनाती है। BRO की इस टीम में DRDO के वरिष्ठ वैज्ञानिक, मेजर पारस कोचर, श्री पीयूष सोनी, श्री निर्मल उप्रेती सहित अन्य अधिकारी शामिल रहे। इसके साथ ही क्षेत्र के पूर्व प्रधान श्री राज कुमार और अन्य स्थानीय प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। स्थानीय लोगों ने BRO और संबंधित अधिकारियों का आभार व्यक्त करते हुए उम्मीद जताई है कि यह पहल जल्द ही साकार होगी और धरवास, लुज, सुराल सहित पूरे क्षेत्र को एक सुरक्षित, सुगम और आधुनिक सड़क सुविधा मिल सकेगी।
उर ढांक सड़क पर राहत की उम्मीद: सुरंग निर्माण की दिशा में BRO ने शुरू किया सर्वेक्षण हिम संदेश चंबा/पांगी, 17 अप्रैल 2026 पांगी घाटी के धरवास, लुज और सुराल पंचायतों के लोगों को लंबे समय से भय और खतरे के साए में जीने पर मजबूर करने वाली उर ढांक सड़क से जल्द राहत मिलने की उम्मीद जगी है। सीमा सड़क संगठन (BRO) की एक उच्च स्तरीय टीम ने बीते दो दिनों के दौरान उर ढांक और धरवास पुल क्षेत्र का विस्तृत निरीक्षण एवं सर्वेक्षण किया। इस सर्वेक्षण में स्थानीय प्रतिनिधियों को भी शामिल होने का अवसर मिला, जिससे क्षेत्र की वास्तविक समस्याओं को सीधे अधिकारियों तक पहुंचाया गया। उर ढांक सड़क को क्षेत्र की सबसे खतरनाक सड़कों में गिना जाता है, जहां हर समय पहाड़ों से पत्थर गिरने और हादसों का खतरा बना रहता है। कई बार इस मार्ग पर जानलेवा दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिससे स्थानीय लोगों में भय का माहौल बना रहता है। ऐसे में लंबे समय से इस मार्ग पर सुरंग निर्माण की मांग उठाई जा रही थी, ताकि लोगों को सुरक्षित और स्थायी यातायात सुविधा मिल सके। स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा इस मुद्दे को लेकर समय-समय पर DGBRO से मुलाकात, पत्राचार और लगातार प्रयास किए गए, जिसके परिणामस्वरूप अब यह पहल जमीनी स्तर पर आगे बढ़ती नजर आ रही है। BRO द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए उच्च स्तरीय टीम को मौके पर भेजना निश्चित रूप से सराहनीय कदम माना जा रहा है। सर्वेक्षण के दौरान BRO टीम ने क्षेत्र के विभिन्न बिंदुओं का गहन निरीक्षण किया और तीन से चार संभावित स्थान चिन्हित किए हैं, जहां सुरंग निर्माण की व्यवहार्यता का परीक्षण किया जाएगा। आगामी चरण में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जाएगी और आवश्यक तकनीकी परीक्षण किए जाएंगे। इसके बाद आने वाले समय में सुरंग निर्माण की दिशा में कार्य आगे बढ़ने की संभावना है। यह परियोजना केवल एक सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि हजारों लोगों की सुरक्षा, सुविधा और बेहतर भविष्य से जुड़ी हुई है। इस अवसर पर उन लोगों को भी श्रद्धांजलि दी गई जिन्होंने इस खतरनाक मार्ग पर हादसों में अपनी जान गंवाई। उनकी स्मृति इस परियोजना को और अधिक महत्वपूर्ण बनाती है। BRO की इस टीम में DRDO के वरिष्ठ वैज्ञानिक, मेजर पारस कोचर, श्री पीयूष सोनी, श्री निर्मल उप्रेती सहित अन्य अधिकारी शामिल रहे। इसके साथ ही क्षेत्र के पूर्व प्रधान श्री राज कुमार और अन्य स्थानीय प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। स्थानीय लोगों ने BRO और संबंधित अधिकारियों का आभार व्यक्त करते हुए उम्मीद जताई है कि यह पहल जल्द ही साकार होगी और धरवास, लुज, सुराल सहित पूरे क्षेत्र को एक सुरक्षित, सुगम और आधुनिक सड़क सुविधा मिल सकेगी।
- Post by Surender Thakur1
- पांगी घाटी के कुलाल गांव से शिक्षा व्यवस्था की एक बेहद चिंताजनक और शर्मनाक तस्वीर सामने आई है। यहां करोड़ों रुपये खर्च कर राजकीय माध्यमिक पाठशाला का भवन तो तैयार किया जा रहा है, लेकिन विडंबना यह है कि स्कूल में पढ़ाने के लिए पर्याप्त अध्यापक ही मौजूद नहीं हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि एकमात्र शास्त्री के सहारे स्कूल चलाने की कोशिश नाकाम साबित हो रही है। स्थानीय लोगों द्वारा कई बार प्रशासन और सरकार से अध्यापकों की नियुक्ति की मांग की गई, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला। शुरुआत में अच्छी संख्या में बच्चों ने इस स्कूल में प्रवेश लिया था, लेकिन लगातार अध्यापकों की कमी के चलते अभिभावकों ने अपने बच्चों को दूसरे स्कूलों में भेजना शुरू कर दिया। अब हालात यह हैं कि स्कूल का आंगन पूरी तरह सूना हो चुका है और आखिरी बचा छात्र भी स्कूल छोड़ने को मजबूर हो गया है। कुलाल गांव के वार्ड पंच कोल सिंह के अनुसार, बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए अभिभावकों को दूसरे स्थानों पर किराए के कमरे तक लेने पड़ रहे हैं। कुलाल से मिंधल की दूरी करीब 6 किलोमीटर है और गांव आज भी सड़क सुविधा से वंचित है, जिससे बच्चों का रोजाना सफर बेहद जोखिम भरा बन जाता है। स्थानीय लोगों ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कुलाल जैसे दुर्गम गांवों की लगातार अनदेखी की जा रही है। जब स्कूल में स्टाफ ही उपलब्ध नहीं है, तो ऐसे में स्कूल खोलने का क्या औचित्य रह जाता है? एक ओर सरकार शिक्षा को लेकर बड़े-बड़े दावे करती है और ऑनलाइन संवाद के जरिए अपनी उपलब्धियां गिनाती है, वहीं जमीनी स्तर पर हकीकत बिल्कुल उलट नजर आ रही है। यह मामला सिर्फ एक गांव का नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलता है। अब देखना यह है कि क्या सरकार इस गंभीर मुद्दे पर कोई ठोस कदम उठाती है या फिर कुलाल के बच्चों का भविष्य यूं ही अधर में लटका रहेगा।1
- चुराह विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाला सालवी–पधरोलू मार्ग पिछले आठ साल से पक्का होने के लिए तरस रहा है। लोक निर्माण विभाग द्वारा वर्षों पहले मार्ग का निर्माण तो किया गया, लेकिन उसके बाद इसकी सुध नहीं ली गई। नतीजतन आज तक यह सड़क पक्की नहीं हो पाई है। यह मार्ग भावला पंचायत की करीब दो हजार की आबादी को जोड़ता है और रोजाना इस सड़क पर काफी संख्या में वाहन गुजरते हैं। लेकिन मार्ग की खस्ता हालत के कारण वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जगह-जगह गड्ढों के कारण कई बार वाहनों को नुकसान पहुंचता है, जिससे लोगों की दिक्कतें और बढ़ जाती हैं। ऐसे में स्थानीय लोगों ने सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द इस सड़क को पक्का किया जाए। वीओ: स्थानीय निवासी पुंजर देव और हेमराज का कहना है कि इस मार्ग को बने 8 से 9 साल बीत चुके हैं, लेकिन आज तक विभाग ने इसे पक्का नहीं किया। सड़क पर बने गहरे गड्ढों के चलते सफर करना मुश्किल हो गया है और रोजाना लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि जल्द इस सड़क का पक्कीकरण किया जाए, ताकि क्षेत्र की करीब 2000 की आबादी को राहत मिल सके। बाइट: (पुंजर देव और हेमराज – स्थानीय निवासी)3
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