फतेहगढ़ में धूमधाम से मनी तेजाजी दशमी, वीर तेजाजी महाराज के दरबार में उमड़ा आस्था का सैलाब फतेहगढ़। कस्बे में सोमवार को वीर तेजाजी महाराज की तेजादशमी श्रद्धा, भक्ति और लोक आस्था के साथ धूमधाम से मनाई गई। सीएम राइज स्कूल के पास स्थित वीर तेजाजी महाराज के स्थान पर प्रतिवर्ष की परंपरा के अनुसार भव्य मेले का आयोजन किया गया। आयोजन को लेकर समिति द्वारा कई दिनों से तैयारियां की जा रही थीं। मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यवस्थाएं की गईं। तेजादशमी के अवसर पर सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों सहित फतेहगढ़ कस्बे से बड़ी संख्या में महिला, पुरुष और बच्चे मेले में पहुंचे। श्रद्धालुओं ने वीर तेजाजी महाराज के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और सुख-समृद्धि की कामना के साथ आशीर्वाद प्राप्त किया। पूरे आयोजन के दौरान परिसर में धार्मिक आस्था और लोक संस्कृति का रंग दिखाई दिया। लोकदेवता तेजाजी—वचन, वीरता और गौ-रक्षा के प्रतीक राजस्थान और मध्यप्रदेश के मालवा-चंबल सहित कई क्षेत्रों में वीर तेजाजी को लोकदेवता के रूप में श्रद्धा से पूजा जाता है। लोकगाथाओं और तेजाजी से संबंधित पारंपरिक ग्रंथों में उनके जीवन का मूल संदेश सत्य, वचन-पालन, साहस, गौ-रक्षा और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने से जुड़ा दिखाई देता है। लोकमान्यता के अनुसार तेजाजी ने अपने वचन को सर्वोपरि माना। कथाओं में वर्णित है कि एक ओर संकटग्रस्त गायों की रक्षा का दायित्व था, वहीं दूसरी ओर नागदेवता से किया हुआ वचन निभाना था। तेजाजी ने अपने प्राणों की चिंता किए बिना दोनों दायित्व पूरे करने का प्रयास किया। इसी कारण लोक परंपरा में उन्हें वचन के पक्के वीर और गौ-रक्षक लोकदेवता के रूप में विशेष स्थान मिला। तेजाजी की लोकगाथा का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही माना जाता है कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, दिया हुआ वचन, धर्म और कर्तव्य नहीं छोड़ना चाहिए। यही कारण है कि सदियों बाद भी ग्रामीण अंचलों में तेजाजी की पूजा केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि लोक-संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जुड़ी आस्था के रूप में कायम है। मेले में दिखी परंपरा और आस्था की झलक फतेहगढ़ में आयोजित तेजादशमी मेले में भी इसी लोक आस्था की झलक देखने को मिली। श्रद्धालुओं ने तेजाजी महाराज के स्थान पर पहुंचकर पूजा-अर्चना की। समिति की ओर से मेले की भव्य सजावट और व्यवस्थाएं की गईं। दिनभर श्रद्धालुओं की आवाजाही से आयोजन स्थल भक्तिमय माहौल में नजर आया। स्थानीय लोगों के लिए तेजादशमी का यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही लोक परंपरा, सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक विरासत का उत्सव भी है। मेले के माध्यम से नई पीढ़ी भी वीर तेजाजी की लोकगाथा और उनके आदर्शों से जुड़ रही है। फतेहगढ़ में तेजादशमी का यह आयोजन एक बार फिर यह संदेश दे गया कि लोकदेवताओं से जुड़ी आस्था आज भी गांव-कस्बों की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का मजबूत हिस्सा है।
फतेहगढ़ में धूमधाम से मनी तेजाजी दशमी, वीर तेजाजी महाराज के दरबार में उमड़ा आस्था का सैलाब फतेहगढ़। कस्बे में सोमवार को वीर तेजाजी महाराज की तेजादशमी श्रद्धा, भक्ति और लोक आस्था के साथ धूमधाम से मनाई गई। सीएम राइज स्कूल के पास स्थित वीर तेजाजी महाराज के स्थान पर प्रतिवर्ष की परंपरा के अनुसार भव्य मेले का आयोजन किया गया। आयोजन को लेकर समिति द्वारा कई दिनों से तैयारियां की जा रही थीं। मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यवस्थाएं की गईं। तेजादशमी के अवसर पर सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों सहित फतेहगढ़ कस्बे से बड़ी संख्या में महिला, पुरुष और बच्चे मेले में पहुंचे। श्रद्धालुओं ने वीर तेजाजी महाराज के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और सुख-समृद्धि की कामना के साथ आशीर्वाद प्राप्त किया। पूरे आयोजन के दौरान परिसर में धार्मिक आस्था और लोक संस्कृति का रंग दिखाई दिया। लोकदेवता तेजाजी—वचन, वीरता और गौ-रक्षा के प्रतीक राजस्थान और मध्यप्रदेश के मालवा-चंबल सहित कई क्षेत्रों में वीर तेजाजी को लोकदेवता के रूप में श्रद्धा से पूजा जाता है। लोकगाथाओं और तेजाजी से संबंधित पारंपरिक ग्रंथों में उनके जीवन का मूल संदेश सत्य, वचन-पालन, साहस, गौ-रक्षा और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने से जुड़ा दिखाई देता है। लोकमान्यता के अनुसार तेजाजी ने अपने वचन को सर्वोपरि माना। कथाओं में वर्णित है कि एक ओर संकटग्रस्त गायों की रक्षा का दायित्व था, वहीं दूसरी ओर नागदेवता से किया हुआ वचन निभाना था। तेजाजी ने अपने प्राणों की चिंता किए बिना दोनों दायित्व पूरे करने का प्रयास किया। इसी कारण लोक परंपरा में उन्हें वचन के पक्के वीर और गौ-रक्षक लोकदेवता के रूप में विशेष स्थान मिला। तेजाजी की लोकगाथा का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही माना जाता है कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, दिया हुआ वचन, धर्म और कर्तव्य नहीं छोड़ना चाहिए। यही कारण है कि सदियों बाद भी ग्रामीण अंचलों में तेजाजी की पूजा केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि लोक-संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जुड़ी आस्था के रूप में कायम है। मेले में दिखी परंपरा और आस्था की झलक फतेहगढ़ में आयोजित तेजादशमी मेले में भी इसी लोक आस्था की झलक देखने को मिली। श्रद्धालुओं ने तेजाजी महाराज के स्थान पर पहुंचकर पूजा-अर्चना की। समिति की ओर से मेले की भव्य सजावट और व्यवस्थाएं की गईं। दिनभर श्रद्धालुओं की आवाजाही से आयोजन स्थल भक्तिमय माहौल में नजर आया। स्थानीय लोगों के लिए तेजादशमी का यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही लोक परंपरा, सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक विरासत का उत्सव भी है। मेले के माध्यम से नई पीढ़ी भी वीर तेजाजी की लोकगाथा और उनके आदर्शों से जुड़ रही है। फतेहगढ़ में तेजादशमी का यह आयोजन एक बार फिर यह संदेश दे गया कि लोकदेवताओं से जुड़ी आस्था आज भी गांव-कस्बों की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का मजबूत हिस्सा है।
- फतेहगढ़ में धूमधाम से मनी तेजाजी दशमी, वीर तेजाजी महाराज के दरबार में उमड़ा आस्था का सैलाब फतेहगढ़। कस्बे में सोमवार को वीर तेजाजी महाराज की तेजादशमी श्रद्धा, भक्ति और लोक आस्था के साथ धूमधाम से मनाई गई। सीएम राइज स्कूल के पास स्थित वीर तेजाजी महाराज के स्थान पर प्रतिवर्ष की परंपरा के अनुसार भव्य मेले का आयोजन किया गया। आयोजन को लेकर समिति द्वारा कई दिनों से तैयारियां की जा रही थीं। मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यवस्थाएं की गईं। तेजादशमी के अवसर पर सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों सहित फतेहगढ़ कस्बे से बड़ी संख्या में महिला, पुरुष और बच्चे मेले में पहुंचे। श्रद्धालुओं ने वीर तेजाजी महाराज के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और सुख-समृद्धि की कामना के साथ आशीर्वाद प्राप्त किया। पूरे आयोजन के दौरान परिसर में धार्मिक आस्था और लोक संस्कृति का रंग दिखाई दिया। लोकदेवता तेजाजी—वचन, वीरता और गौ-रक्षा के प्रतीक राजस्थान और मध्यप्रदेश के मालवा-चंबल सहित कई क्षेत्रों में वीर तेजाजी को लोकदेवता के रूप में श्रद्धा से पूजा जाता है। लोकगाथाओं और तेजाजी से संबंधित पारंपरिक ग्रंथों में उनके जीवन का मूल संदेश सत्य, वचन-पालन, साहस, गौ-रक्षा और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने से जुड़ा दिखाई देता है। लोकमान्यता के अनुसार तेजाजी ने अपने वचन को सर्वोपरि माना। कथाओं में वर्णित है कि एक ओर संकटग्रस्त गायों की रक्षा का दायित्व था, वहीं दूसरी ओर नागदेवता से किया हुआ वचन निभाना था। तेजाजी ने अपने प्राणों की चिंता किए बिना दोनों दायित्व पूरे करने का प्रयास किया। इसी कारण लोक परंपरा में उन्हें वचन के पक्के वीर और गौ-रक्षक लोकदेवता के रूप में विशेष स्थान मिला। तेजाजी की लोकगाथा का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही माना जाता है कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, दिया हुआ वचन, धर्म और कर्तव्य नहीं छोड़ना चाहिए। यही कारण है कि सदियों बाद भी ग्रामीण अंचलों में तेजाजी की पूजा केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि लोक-संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जुड़ी आस्था के रूप में कायम है। मेले में दिखी परंपरा और आस्था की झलक फतेहगढ़ में आयोजित तेजादशमी मेले में भी इसी लोक आस्था की झलक देखने को मिली। श्रद्धालुओं ने तेजाजी महाराज के स्थान पर पहुंचकर पूजा-अर्चना की। समिति की ओर से मेले की भव्य सजावट और व्यवस्थाएं की गईं। दिनभर श्रद्धालुओं की आवाजाही से आयोजन स्थल भक्तिमय माहौल में नजर आया। स्थानीय लोगों के लिए तेजादशमी का यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही लोक परंपरा, सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक विरासत का उत्सव भी है। मेले के माध्यम से नई पीढ़ी भी वीर तेजाजी की लोकगाथा और उनके आदर्शों से जुड़ रही है। फतेहगढ़ में तेजादशमी का यह आयोजन एक बार फिर यह संदेश दे गया कि लोकदेवताओं से जुड़ी आस्था आज भी गांव-कस्बों की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का मजबूत हिस्सा है।1
- डीपी में करंट आने से गोवंश की तड़प-तड़पकर मौत, विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल* *डीपी में करंट आने से गोवंश की तड़प-तड़पकर मौत, विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल* आरोन। शहर में विद्युत विभाग की डीपी एवं विद्युत व्यवस्था से जुड़ी लापरवाही का एक और मामला सामने आया है। शहर में कई स्थानों पर डीपी में करंट आने की शिकायतें सामने आने के बाद भी उचित सुरक्षा व्यवस्था नहीं किए जाने से गोवंश के करंट की चपेट में आने की घटनाएं लगातार होने का आरोप है। गौरक्षकों का कहना है कि इस संबंध में विद्युत विभाग के अधिकारियों को कई बार आवेदन देकर डीपी एवं विद्युत लाइनों की जांच कराने तथा जहां करंट आने की स्थिति बन रही है, वहां आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था करने की मांग की जा चुकी है। इसके बावजूद अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया। सोमवार को एक बार फिर करंट की चपेट में आने से एक गोवंश की तड़प-तड़पकर मौत हो गई। घटना के बाद गौरक्षकों एवं स्थानीय लोगों में नाराजगी देखने को मिली। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते विद्युत विभाग द्वारा शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए डीपी की जांच और आवश्यक सुरक्षा इंतजाम किए जाते तो ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता था। अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर विद्युत विभाग कब तक ऐसी घटनाओं को नजरअंदाज करता रहेगा? क्या गोवंश इसी तरह विद्युत करंट की चपेट में आकर अपनी जान गंवाते रहेंगे? स्थानीय लोगों एवं गौरक्षकों ने विद्युत विभाग से तत्काल सभी संवेदनशील डीपी की जांच कराकर आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।1
- 2000 रुपये से अधिक के UPI पेमेंट पर मर्चेंट चार्ज को लेकर हलचल1
- सेवा संकल्प अभियान अंतर्गत जन शिक्षा केंद्र मदऊखेड़ी में किया गया चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन सेवा संकल्प अभियान अंतर्गत जन शिक्षा केंद्र स्तरीय भाषण एवं चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें जन शिक्षा केंद्र मदऊखेड़ी के कक्षा 6 से 10 तक के बच्चे इस प्रतियोगिता में शामिल हुए कार्यक्रम में बच्चों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के गत 25 वर्षों के सेवा कार्य एवं विकसित भारत थीम पर तरह-तरह के कार्ड शीट पर चित्र बनाकर अपने भाव प्रकट किया साथ ही भाषण के द्वारा भी मोदी जी के कार्यकाल एवं विकसित भारत के संकल्प पर प्रकाश डाला चित्रकला में प्रथम स्थान कृष्णा राजपूत द्वितीय स्थान सागर मोगिया तृतीय स्थान रेखा यादव ने प्राप्त किया। इसी तरह भाषण प्रतियोगिता में प्रथम स्थान गोविंद परिहार द्वितीय स्थान शुभी राजपूत तृतीय स्थान यशवंती यादव ने प्राप्त किया। जिन्हें प्रमाण पत्र का वितरण भी किया गया कार्यक्रम की अध्यक्षता दातार सिंह यादव जनपद सदस्य किरौला ने की। कार्यक्रम में शिक्षक मनोज मोंगिया, संतोष शर्मा ,खलक सिंह बागड़ी, चंद्र मोहन शेषा cac आदि अन्य शिक्षक भी उपस्थित रहे आभार आशीष राय संकुल प्राचार्य द्वारा व्यक्त किया गया1
- निर्दलीयों ने किया जनता से दोखा,भाजपा के पक्ष में दिखाई मेहरबानी,कोंग्रेस अपने ही कर्मों की गलतियों का खामयाजा भोग रही। छबड़ा:,कहते है कि लोकतंत्र में किसी का भी सितारा चमक सकता है,ऐसा ही हुआ छबड़ा की नगर पालिका में 21 सितम्बर ओर 21 वोट ने चमकाई रीना सुमन की तकदीर, जिन वार्डों से जीते उम्मीदवार उन निर्दलीयों ने किया जनता के मतदान से दोखा,कोंग्रेस को छोड़ा और भाजपा के पक्ष में दिखाई मेहरबानी,कोंग्रेस ने अपने ही वृद्ध नेताओ के कर्मों की गलतियों का खामयाजा भोगा अब उपाध्यक्ष भी नही बना पायेगी। भाजपा में जीत के बाद जश्न का माहौल2
- tet परीक्षा के बिरोध में शिक्षकों ने किया सामूहिक उपवास, निकाली रैली आज पूरे प्रदेश के समस्त जिलों में शिक्षकों को अपमानित करने वाली tet परीक्षा एवं त्रुटि पूर्ण e अटेंडेंस के विरोध और पुरानी पेंशन ops के समर्थन में जिले में सामूहिक उपवास धरना कार्यक्रम रघुवंशी धर्मशाला अशोकनगर में आयोजित किया गया जिसमे दर्जनों शिक्षक आमरण अनशन पर बैठ गये जिन्हे बमुश्किल विधायक श्री हरिबाबू राय (कांग्रेस ), चंदेरी विधायक श्री जगन्नाथ रघुवंशी जी (BJP)के प्रतिनिधि एवं भारतीय मजदूर संघ के जिला अध्यक्ष श्री हरिसिंह रघुवंशी जी की आश्वासन पर जूस पिलाकर शाम को अनशन तुड़वाया गया आजाद अध्यापक संघ के प्रांतीय उपाध्यक्ष श्री प्रेमनारायण तिवारी एवं महेश श्रीवास्तव ने बताया कि यदि सरकार द्वारा मांगे नहीं मानी गयीं या सहानुभूति पूर्वक विचार नहीं किया गया तो पूरे जिलों में 27 सितंबर के पश्चात अमरण अनशन की श्रँखला प्रारम्भ हो जायेगी इस अवसर परआजाद अध्यापक संघ के जिला अध्यक्ष भीम सिंह,राज्य अध्यापक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष गोपाल शिवहरे, दिलीप रघुवंशी, नीलम तिघरी, रघुवीर राजपूत चंदेरी, तिलक सिंह दांगी ब्लॉक अध्यक्ष मुंगवली, रवि रघुवंशी shadora, चंद्रभान छाबरिया एवं ईसागढ़ ब्लॉक नईसराय अशोकनगर के सभी ब्लॉक अध्यक्ष अपनी पूरी टीम के सैकड़ो साथियों के साथ उपस्थित रहे अंत में रैली से पूर्व सभी शिक्षकों को tet परीक्षा आवेदन न भरने की शपथ महेश श्रीवास्तव मेरे द्वारा दिलाई गयी, मंत्री महोदय श्री ब्रजेन्द्र सिंह जी द्वारा ऑनलाइन सभी शिक्षकों को सम्बोधित किया गया और आश्वासन दिया गया कि विधानसभा में प्रश्न उठाया जायेगा अंत में रैली निकाल कर माननीय कलेक्टर महोदय के माध्यम से मुख्यमंत्री महोदय के नाम ज्ञापन सौपा गया हजारों की संख्या में शिक्षक शिक्षिका उपस्थित रहे. मंच संचालन मेरे द्वारा किया गया2
- संस्कृति महोत्सव में केलखेड़ी का परचम, सात विधाओं में जिला स्तर पर प्रथम स्थान संस्कृति महोत्सव में केलखेड़ी का परचम, सात विधाओं में जिला स्तर पर प्रथम स्थान छीपाबड़ौद / बारां विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान द्वारा संचालित आदर्श विद्या मन्दिर उच्च माध्यमिक विद्यालय केलखेड़ी ने जिला स्तरीय संस्कृति महोत्सव में शानदार प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया। विद्यालय ने लोकनृत्य, प्रश्न मंच, कविता, सुगम संगीत, कथा कथन, आशु भाषण एवं अन्त्याक्षरी — सभी सात प्रतियोगिताओं में प्रथम स्थान प्राप्त कर विद्यालय एवं क्षेत्र का गौरव बढ़ाया। विद्यालय की संगीत प्रमुख कुमकुम कुशवाह एवं सुल्तान गुर्जर ने बताया कि भैया-बहिनों ने विभिन्न विधाओं में उत्कृष्ट प्रतिभा का प्रदर्शन किया। *विजेताओं की सूची इस प्रकार रही :* *कविता -* तन्मय नागर - प्रथम *सुगम संगीत -* तन्वी मालव एवं हर्षिता नागर - प्रथम *कथा कथन -* नीति सुमन एवं पूनम नागर - प्रथम *आशु भाषण -* हर्षिता अहीर - प्रथम *प्रश्न मंच -* ईशान्त नागर, वन्दना गुर्जर, निकिता चौधरी, गोविन्द अहीर, आराध्या मालव, नक्ष नागर, शोदान मीणा, अन्नू नागर, हंसिका नागर, चरिता मालव, अनुष्का मालव, पूनम मालव - प्रथम *अन्त्याक्षरी -* आर्यन जाट, चन्दन पांचाल, गर्वित मालव, मयंक नागर, लोकेश बंजारा एवं प्रिन्स सुमन - प्रथम *लोकनृत्य -* मधु नागर, हर्षिता नागर, प्रियंका नागर, तन्वी मीणा, वन्दना नागर, तन्वी मालव, आदित्य शर्मा, सोनाक्षी मालव, प्रतिभा मीणा, लक्षिता नामदेव, तनिशा मीणा, दीपिका जिन्दल, वर्षा नागर, अंजली मालव एवं कृष्णा मालव - प्रथम इस ऐतिहासिक सफलता से विद्यालय परिसर में हर्ष एवं उत्साह का वातावरण है। विद्यालय परिवार ने सभी विजेता भैया-बहिनों, उनके अभिभावकों तथा अथक तैयारी करवाने वाले आचार्य एवं दीदी जी को हार्दिक बधाई दी। *एक मंच, सात विधाएँ और हर विधा में प्रथम — केलखेड़ी ने साबित कर दिया कि प्रतिभा, संस्कार और परिश्रम साथ हों तो सफलता स्वयं कदम चूमती है।* ये सभी विजेता भैया-बहिन 26 सितंबर से माण्डलगढ़ (भीलवाड़ा) में होने वाली प्रान्त स्तरीय प्रतियोगिता में हिस्सा लेंगे।4
- छबड़ा में पर्युषण पर्व का छठा दिन: संयम ही जीवन की सच्ची सुगंध है - आयुष शास्त्री। छबड़ा(बारां) जीवन में अनंत इच्छाओं और इंद्रियों के वशीभूत होकर मनुष्य बाहरी आडंबरों में फंसकर जीवन को कष्टमय बना लेता है, जबकि इच्छाओं एवं इंद्रियों को वश में कर संयम से जीवन जीने वाला व्यक्ति भगवान की भक्ति के साथ सन्मार्ग पर चलकर भव-भव के कष्टों से मुक्ति पा सकता है।यह सद्-प्रवचन स्थानीय दिगंबर जैन मंदिर में पर्युषण पर्व के छठे दिन 'संयम धर्म' विषय पर बोलते हुए सांगानेर से पधारे विद्वान भैया जी आयुष शास्त्री ने व्यक्त किए।उन्होंने कहा कि संयम से जीवन जीने वाला व्यक्ति संसार में सदा सुखी रहता है तथा उस पर भगवान की कृपा भी बनी रहती है। ऐसा व्यक्ति ज्यादा परिग्रह से दूर रहता है और थोड़े में भी संतुष्ट रहता है। संयम ही जीवन की सच्ची सुगंध है, जो आत्मा को शुद्ध, शांत एवं प्रकाशमय बनाता है।समाज अध्यक्ष प्रकाश चन्द जैन लुहाड़िया एवं महिला मण्डल अध्यक्ष निधि पाटनी ने बताया कि स्थानीय दिगंबर जैन समाज द्वारा पर्वराज पर्युषण पर्व हर्षोल्लास एवं धूमधाम से मनाया जा रहा है। मंदिर जी में नित्य प्रतिदिन भगवान का अभिषेक, शांति धारा के साथ ही नित्य-नियम पूजा, दस लक्षण विधान सहित अन्य धार्मिक कार्यक्रमों का संगीतमय आयोजन हो रहा है।पर्व के छठे दिन सुबह जिनेंद्र भगवान की अभिषेक शांति धारा हुई। इसके बाद भैया जी आयुष शास्त्री के सानिध्य में नित्य नियम पूजा के अंतर्गत नव देवता, शीतलनाथ भगवान, महावीर स्वामी, सोलह कारण जी एवं दस लक्षण धर्म में संयम धर्म की पूजा हुई, तत्पश्चात दस लक्षण विधान की पूजा संपन्न हुई।शांति धारा करने का सौभाग्य 8100 रुपये की बोली लगाकर पूर्व चेयरमैन कैलाश चन्द, राकेश कुमार, चेतन कुमार ने प्राप्त किया। वहीं रविवार को आरती करने का सौभाग्य ऋषभ चन्द, नरेंद्र कुमार, गौरव कुमार, सौरभ कुमार पाटनी ने बोली लगाकर प्राप्त किया। रात्रि में महाआरती का आयोजन हुआ।रात्रि में नेहा पाटनी द्वारा 'स्वयं खेलो-स्वयं जीतो' प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें प्रथम स्थान अंशुल पाटनी, द्वितीय स्थान रोशनी सेठी एवं तृतीय स्थान रजनी जैन भारिल्ल ने प्राप्त किया।3