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गांदरबल के थीरू स्थित मकतब तालीमुल क़ुरआन के वार्षिक जलसे के दौरान मुफ़्ती मुश्ताक अहमद कासमी साहब ने एक बेहद भावुक और दिल छू लेने वाली नात शरीफ़ पेश की। इस इस्लामिक जलसे में प्रस्तुत की गई यह नात शरीफ़ लोगों के दिलों को गहराई से छूने वाली रही।
Shahid Jeelani
गांदरबल के थीरू स्थित मकतब तालीमुल क़ुरआन के वार्षिक जलसे के दौरान मुफ़्ती मुश्ताक अहमद कासमी साहब ने एक बेहद भावुक और दिल छू लेने वाली नात शरीफ़ पेश की। इस इस्लामिक जलसे में प्रस्तुत की गई यह नात शरीफ़ लोगों के दिलों को गहराई से छूने वाली रही।
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- संबंधित अधिकारियों से बार-बार की गई गुहार पर कोई कार्रवाई न होने के बाद, बारकाह आउटरीच ट्रस्ट ने खुद पहल करते हुए हॉस्पिटल रोड पर स्ट्रीट लाइटें लगाने का काम सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। चूंकि इस स्थान पर पहले से बिजली की कोई वायरिंग मौजूद नहीं थी, इसलिए ट्रस्ट ने रात के समय पैदल यात्रियों और राहगीरों की सुरक्षा तथा दृश्यता में सुधार के लिए नई इलेक्ट्रिकल केबल बिछाने से लेकर लाइटें लगाने तक का पूरा प्रोजेक्ट खुद अंजाम दिया। इस जनकल्याणकारी कार्य को संभव बनाने के लिए ट्रस्ट ने बिजली विकास विभाग (पीडीडी) का आभार व्यक्त किया है, जिसने अपने मौजूदा बिजली के खंभों का उपयोग करने और पास की पावर लाइन से कनेक्शन जोड़ने की अनुमति दी। बारकाह आउटरीच ट्रस्ट ने उम्मीद जताई है कि इस पहल से हॉस्पिटल रोड अधिक सुरक्षित और चमकदार बनेगी। साथ ही ट्रस्ट ने भविष्य में भी सार्वजनिक कल्याण और बुनियादी ढांचे में सुधार के ऐसे ही कार्यों को जारी रखने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।1
- जम्मू संभाग में 28 जुलाई के बाद बारिश का एक और दौर आने की संभावना है। मौसम विज्ञान केंद्र श्रीनगर (Director MET Srinagar) के अनुसार, इस स्थिति को देखते हुए आम जनता और यात्रियों को जल निकायों या पहाड़ी क्षेत्रों के पास न जाने की सलाह दी गई है।1
- जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले के ज़ोनीपोरा में बाढ़ सुरक्षा तटबंध के हिस्से में लगातार दरारें आने से पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि 2025 की भीषण बाढ़ में टूटे हुए तटबंध के इस हिस्से पर सरकार ने कंक्रीट की पक्की रिटेनिंग दीवार नहीं बनाई, जिससे एक बार फिर तटबंध टूटने का खतरा पैदा हो गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, गुरुवार सुबह से ही तटबंध के निचले हिस्से में दरारें आ रही हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि सरकार द्वारा क्षतिग्रस्त तटबंध की मरम्मत पर ₹90 लाख से अधिक खर्च किए जाने के बावजूद खतरा बना हुआ है। और अधिक नुकसान को रोकने के लिए मजबूर होकर ग्रामीणों को अपने सामूहिक खर्च पर आपातकालीन मरम्मत का काम खुद शुरू करना पड़ा है। लोगों का कहना है कि अगर पिछले साल की बाढ़ के बाद यहां कंक्रीट की पक्की सुरक्षा दीवार बना दी जाती, तो आज यह स्थिति पैदा नहीं होती। सुबह से ही पूरे इलाके में खौफ का माहौल बना हुआ है और ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से तुरंत मौके का मुआयना करने की अपील की है। उन्होंने मांग की है कि इस संवेदनशील हिस्से को स्थायी बाढ़ सुरक्षा उपायों से मजबूत किया जाए और क्षेत्र में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।1
- पिछले 10 वर्षों में 1,23,000 से अधिक छात्रों की आत्महत्या की घटनाओं ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है, जिसे एक बड़ी राष्ट्रीय त्रासदी के रूप में देखा जा रहा है। शिक्षा व्यवस्था, युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य और देश में मंडराते शिक्षा संकट को लेकर गहराते मुद्दों के बीच अब यह तीखा सवाल खड़ा हो गया है कि इस राष्ट्रीय त्रासदी के लिए आखिरकार किसे जवाबदेह ठहराया जाएगा। इस भयावह स्थिति को देखते हुए अब इंसाफ और जवाबदेही तय करने की मांग की जा रही है।1
- टंगमर्ग, गुलमर्ग और आसपास के इलाकों में सार्वजनिक पेयजल की सुरक्षा को लेकर जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी (PHE) विभाग से सीधा सवाल किया गया है कि आखिर फिल्टरेशन प्लांट को अब तक ठीक से ढका और सुरक्षित क्यों नहीं किया गया है। यदि जानवर आसानी से इसके अंदर जा सकते हैं, तो लोगों को मिलने वाले पीने के पानी की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी होगी? PHE विभाग से अपील की गई है कि इस फिल्टरेशन प्लांट की उचित बाड़ेबंदी (फेंसिंग) की जाए और इसे पूरी तरह कवर करके सुरक्षित बनाया जाए। ऐसा होने पर ही टंगमर्ग, गुलमर्ग और आसपास के गांवों के निवासियों, भाई-बहनों और बच्चों को साफ व सुरक्षित पानी मिल सकेगा और वे स्वास्थ्य से जुड़े किसी भी संभावित खतरे से महफूज रह सकेंगे। इसके साथ ही सार्वजनिक सुरक्षा और इस मुद्दे पर साधी जा रही चुप्पी को लेकर भी सवाल खड़े किए गए हैं। PHE विभाग से जवाब मांगते हुए यह मुद्दा भी उठाया गया है कि इस पूरे मामले से जुड़ा वीडियो हटाने के लिए क्यों कहा गया।2
- गांदरबल के थीरू स्थित मकतब तालीमुल क़ुरआन के वार्षिक जलसे के दौरान मुफ़्ती मुश्ताक अहमद कासमी साहब ने एक बेहद भावुक और दिल छू लेने वाली नात शरीफ़ पेश की। इस इस्लामिक जलसे में प्रस्तुत की गई यह नात शरीफ़ लोगों के दिलों को गहराई से छूने वाली रही।1
- जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में सरनाल और केपी रोड स्थित महजूर कॉलोनी के स्थानीय निवासियों ने मौजूदा स्थिति को लेकर चिंता जताई है। क्षेत्र के हालात को देखते हुए स्थानीय लोगों ने उच्च अधिकारियों से मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने और आवश्यक कार्रवाई करने की अपील की है।1