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#भागलपुर #पीरपैंती #प्रखंड के #प्यालापुर पंचायत के मिर्जा गांव में पशु को करेंट लगने से मृत्यु। गरीब परिवार का रो-रो कर बुरा हाल। #viral #NewsUpdate #pitpinti #bhagalpur #spbhagalpur #dcbhagalpur #bijli Ranjit Paswan

1 hr ago
user_रिपोर्टर- संजीव कुमार [
रिपोर्टर- संजीव कुमार [
Local News Reporter मेहरमा, गोड्डा, झारखंड•
1 hr ago

#भागलपुर #पीरपैंती #प्रखंड के #प्यालापुर पंचायत के मिर्जा गांव में पशु को करेंट लगने से मृत्यु। गरीब परिवार का रो-रो कर बुरा हाल। #viral #NewsUpdate #pitpinti #bhagalpur #spbhagalpur #dcbhagalpur #bijli Ranjit Paswan

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  • #भागलपुर #पीरपैंती #प्रखंड के #प्यालापुर पंचायत के मिर्जा गांव में पशु को करेंट लगने से मृत्यु। गरीब परिवार का रो-रो कर बुरा हाल। #viral #NewsUpdate #pitpinti #bhagalpur #spbhagalpur #dcbhagalpur #bijli Ranjit Paswan
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    #भागलपुर #पीरपैंती #प्रखंड के #प्यालापुर पंचायत के मिर्जा गांव में पशु को करेंट लगने से मृत्यु। गरीब परिवार का रो-रो कर बुरा हाल। #viral #NewsUpdate #pitpinti #bhagalpur #spbhagalpur #dcbhagalpur #bijli Ranjit Paswan
    user_रिपोर्टर- संजीव कुमार [
    रिपोर्टर- संजीव कुमार [
    Local News Reporter मेहरमा, गोड्डा, झारखंड•
    1 hr ago
  • जब मैं तेरे ही भरोसे हूँ, तो फिर मैं चिंता किस बात की करूँ? * राधे राधे🙏🌸🌷🙏🌷🌸🙏 जब मैं तेरे ही भरोसे हूँ, तो फिर मैं चिंता किस बात की करूँ? * राधे राधे🙏🌷🌸🙏
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    जब मैं तेरे ही भरोसे हूँ, तो फिर मैं चिंता किस बात की करूँ?

*

राधे राधे🙏🌸🌷🙏🌷🌸🙏
जब मैं तेरे ही भरोसे हूँ, तो फिर मैं चिंता किस बात की करूँ?
*
राधे राधे🙏🌷🌸🙏
    user_Usha
    Usha
    पीरपैंती, भागलपुर, बिहार•
    4 hrs ago
  • भागलपुर के लकड़ाकोल में दिखी यूपी की अनूठी लोकआस्था, गर्म दूध के कठिन अनुष्ठान ने सबको किया हैरान; काशी दास पंथी पूजा देखने उमड़ी हजारों की भीड़ गाजीपुर के पूर्वजों की परंपरा को बिहार की धरती पर भी जीवंत रखे हुए हैं लालू यादव, बनारस से पहुंचे भगत संगम यादव ने वैदिक विधि-विधान और पारंपरिक रीति से संपन्न कराया अनुष्ठान भागलपुर। बिहार के भागलपुर जिले के पीरपैंती प्रखंड अंतर्गत लकड़ाकोल गांव में रविवार को आस्था, विश्वास और सदियों पुरानी लोकपरंपरा का अनूठा संगम देखने को मिला। गांव निवासी लालू यादव के घर आयोजित श्री काशी दास पंथी पूजा में एक ऐसा धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुआ, जिसे देखने के लिए आसपास के गांवों से हजारों की संख्या में लोग जुटे। पूजा के दौरान गर्म दूध से जुड़े विशेष अनुष्ठान ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। कोई इस अनोखी परंपरा को श्रद्धा भाव से निहार रहा था तो कोई अपने मोबाइल में इस अद्भुत दृश्य को कैद करने में जुटा था। पूरे आयोजन के दौरान गांव का माहौल भक्तिमय बना रहा। इस विशेष पूजा को संपन्न कराने के लिए उत्तर प्रदेश के बनारस से भगत संगम यादव पहुंचे थे। उन्होंने पारंपरिक रीति-रिवाज और धार्मिक विधि-विधान के साथ पूजा के सभी अनुष्ठानों को संपन्न कराया। इस दौरान काशी दास बाबा के प्रति श्रद्धा प्रकट करते हुए विशेष पूजा-अर्चना की गई। पूजा का सबसे चर्चित और आकर्षक हिस्सा गर्म दूध से जुड़ा अनुष्ठान रहा। इसी अनुष्ठान को देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण और आसपास के क्षेत्रों के लोग लकड़ाकोल पहुंचे थे। सात समंदर नहीं, यूपी से बिहार तक पूर्वजों की परंपरा का सफर इस पूजा की खास बात केवल इसका अनोखा अनुष्ठान नहीं, बल्कि इसके पीछे छिपी पारिवारिक आस्था और अपनी जड़ों से जुड़े रहने की कहानी भी है। दरअसल, लाल यादव मूल रूप से उत्तर प्रदेश के यादव समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। उनके पूर्वज उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में रहते थे। वहां उनके परिवार में श्री काशी दास पंथी पूजा की विशेष धार्मिक मान्यता और परंपरा रही है। समय के साथ परिवार बिहार आकर बस गया, लेकिन लाल यादव ने अपने पूर्वजों की आस्था और परंपरा को पीछे नहीं छूटने दिया। उन्होंने तय किया कि भले ही रहने का ठिकाना बदल गया हो, लेकिन परिवार की पहचान, संस्कार और पूर्वजों से मिली धार्मिक परंपरा जीवित रहनी चाहिए। इसी सोच के साथ वह बिहार की धरती पर भी अपने पूर्वजों की पूजा-पद्धति को आगे बढ़ा रहे हैं। लालू यादव के लिए यह आयोजन महज एक पूजा नहीं, बल्कि अपनी मिट्टी, अपने पूर्वजों और पारिवारिक विरासत से जुड़े रहने का माध्यम है। उनका प्रयास है कि आने वाली पीढ़ियां भी इस लोकपरंपरा को जानें, समझें और इसे आगे बढ़ाएं। गर्म दूध का अनुष्ठान बना आकर्षण का केंद्र श्री काशी दास पंथी पूजा में गर्म दूध से जुड़ा अनुष्ठान सबसे अधिक चर्चा का विषय रहता है। लकड़ाकोल में भी इस अनुष्ठान को लेकर लोगों में खास उत्सुकता देखने को मिली। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इसे पंथी महाराज की साधना, तपस्या और बाबा काशी दास के प्रति अटूट आस्था से जोड़कर देखा जाता है। श्रद्धालुओं के बीच ऐसी मान्यता है कि पंथी महाराज अपनी साधना और तपोबल के माध्यम से इस कठिन अनुष्ठान को संपन्न करते हैं। उत्तर प्रदेश के गाजीपुर, मऊ और बिहार के कैमूर जैसे क्षेत्रों में भी काशी दास बाबा की पूजा की परंपरा प्रचलित है। अलग-अलग क्षेत्रों में पूजा की विधियों और अनुष्ठानों में कुछ अंतर हो सकता है, लेकिन बाबा के प्रति श्रद्धा और लोकविश्वास इस परंपरा का मूल आधार है। पूजा में छिपा है परिवार और समाज को जोड़ने का संदेश श्री काशी दास पंथी पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है। इससे जुड़ी लोकमान्यताओं में माता-पिता की सेवा, बड़ों का सम्मान, सत्य के मार्ग पर चलने, सदाचार अपनाने और समाज में प्रेम व भाईचारा बनाए रखने का संदेश भी दिया जाता है। श्रद्धालु बाबा काशी दास से परिवार की सुख-समृद्धि, संतान की उन्नति, घर में शांति और जीवन की परेशानियों से मुक्ति की कामना करते हैं। ग्रामीण परिवेश में ऐसी लोकपरंपराएं केवल पूजा-पाठ का माध्यम नहीं होतीं, बल्कि पीढ़ियों को एक-दूसरे से जोड़ने और अपनी सांस्कृतिक विरासत को बचाए रखने का भी काम करती हैं। लकड़ाकोल में आयोजित इस पूजा ने भी यही संदेश दिया कि आधुनिकता और बदलते समय के बीच भी लोग अपनी पुरानी परंपराओं को सहेजकर रखे हुए हैं। आस्था अपनी जगह, सुरक्षा भी जरूरी गर्म दूध से जुड़े इस अनुष्ठान को लेकर धार्मिक मान्यताएं भले ही गहरी हों, लेकिन वैज्ञानिक दृष्टिकोण से खौलता या अत्यधिक गर्म दूध त्वचा को गंभीर रूप से जला सकता है। दूध के शरीर पर पड़ते ही ठंडा हो जाने अथवा उससे किसी प्रकार की क्षति नहीं होने के दावों की वैज्ञानिक पुष्टि नहीं है। इसलिए ऐसे अनुष्ठानों को देखकर आम लोगों को उनका अनुकरण नहीं करना चाहिए। धार्मिक आयोजनों में श्रद्धा के साथ सुरक्षा का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है। फिलहाल, पीरपैंती के लकड़ाकोल में आयोजित श्री काशी दास पंथी पूजा ने न केवल लोगों को एक अनूठी लोकपरंपरा से रूबरू कराया, बल्कि यह भी दिखाया कि इंसान चाहे कहीं भी बस जाए, अपने पूर्वजों की विरासत और संस्कारों से उसका रिश्ता कितना गहरा हो सकता है। लाल यादव ने बिहार की धरती पर अपने पूर्वजों की परंपरा को जीवंत रखकर यह संदेश दिया कि जगह बदल सकती है, पीढ़ियां बदल सकती हैं, लेकिन आस्था और सांस्कृतिक विरासत को संजोने का संकल्प नहीं बदलना चाहिए।
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    भागलपुर के लकड़ाकोल में दिखी यूपी की अनूठी लोकआस्था, गर्म दूध के कठिन अनुष्ठान ने सबको किया हैरान; काशी दास पंथी पूजा देखने उमड़ी हजारों की भीड़
गाजीपुर के पूर्वजों की परंपरा को बिहार की धरती पर भी जीवंत रखे हुए हैं लालू यादव, बनारस से पहुंचे भगत संगम यादव ने वैदिक विधि-विधान और पारंपरिक रीति से संपन्न कराया अनुष्ठान
भागलपुर। बिहार के भागलपुर जिले के पीरपैंती प्रखंड अंतर्गत लकड़ाकोल गांव में रविवार को आस्था, विश्वास और सदियों पुरानी लोकपरंपरा का अनूठा संगम देखने को मिला। गांव निवासी लालू यादव के घर आयोजित श्री काशी दास पंथी पूजा में एक ऐसा धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुआ, जिसे देखने के लिए आसपास के गांवों से हजारों की संख्या में लोग जुटे। पूजा के दौरान गर्म दूध से जुड़े विशेष अनुष्ठान ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। कोई इस अनोखी परंपरा को श्रद्धा भाव से निहार रहा था तो कोई अपने मोबाइल में इस अद्भुत दृश्य को कैद करने में जुटा था। पूरे आयोजन के दौरान गांव का माहौल भक्तिमय बना रहा।
इस विशेष पूजा को संपन्न कराने के लिए उत्तर प्रदेश के बनारस से भगत संगम यादव पहुंचे थे। उन्होंने पारंपरिक रीति-रिवाज और धार्मिक विधि-विधान के साथ पूजा के सभी अनुष्ठानों को संपन्न कराया। इस दौरान काशी दास बाबा के प्रति श्रद्धा प्रकट करते हुए विशेष पूजा-अर्चना की गई। पूजा का सबसे चर्चित और आकर्षक हिस्सा गर्म दूध से जुड़ा अनुष्ठान रहा। इसी अनुष्ठान को देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण और आसपास के क्षेत्रों के लोग लकड़ाकोल पहुंचे थे।
सात समंदर नहीं, यूपी से बिहार तक पूर्वजों की परंपरा का सफर
इस पूजा की खास बात केवल इसका अनोखा अनुष्ठान नहीं, बल्कि इसके पीछे छिपी पारिवारिक आस्था और अपनी जड़ों से जुड़े रहने की कहानी भी है। दरअसल, लाल यादव मूल रूप से उत्तर प्रदेश के यादव समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। उनके पूर्वज उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में रहते थे। वहां उनके परिवार में श्री काशी दास पंथी पूजा की विशेष धार्मिक मान्यता और परंपरा रही है।
समय के साथ परिवार बिहार आकर बस गया, लेकिन लाल यादव ने अपने पूर्वजों की आस्था और परंपरा को पीछे नहीं छूटने दिया। उन्होंने तय किया कि भले ही रहने का ठिकाना बदल गया हो, लेकिन परिवार की पहचान, संस्कार और पूर्वजों से मिली धार्मिक परंपरा जीवित रहनी चाहिए। इसी सोच के साथ वह बिहार की धरती पर भी अपने पूर्वजों की पूजा-पद्धति को आगे बढ़ा रहे हैं।
लालू यादव के लिए यह आयोजन महज एक पूजा नहीं, बल्कि अपनी मिट्टी, अपने पूर्वजों और पारिवारिक विरासत से जुड़े रहने का माध्यम है। उनका प्रयास है कि आने वाली पीढ़ियां भी इस लोकपरंपरा को जानें, समझें और इसे आगे बढ़ाएं।
गर्म दूध का अनुष्ठान बना आकर्षण का केंद्र
श्री काशी दास पंथी पूजा में गर्म दूध से जुड़ा अनुष्ठान सबसे अधिक चर्चा का विषय रहता है। लकड़ाकोल में भी इस अनुष्ठान को लेकर लोगों में खास उत्सुकता देखने को मिली। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इसे पंथी महाराज की साधना, तपस्या और बाबा काशी दास के प्रति अटूट आस्था से जोड़कर देखा जाता है। श्रद्धालुओं के बीच ऐसी मान्यता है कि पंथी महाराज अपनी साधना और तपोबल के माध्यम से इस कठिन अनुष्ठान को संपन्न करते हैं।
उत्तर प्रदेश के गाजीपुर, मऊ और बिहार के कैमूर जैसे क्षेत्रों में भी काशी दास बाबा की पूजा की परंपरा प्रचलित है। अलग-अलग क्षेत्रों में पूजा की विधियों और अनुष्ठानों में कुछ अंतर हो सकता है, लेकिन बाबा के प्रति श्रद्धा और लोकविश्वास इस परंपरा का मूल आधार है।
पूजा में छिपा है परिवार और समाज को जोड़ने का संदेश
श्री काशी दास पंथी पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है। इससे जुड़ी लोकमान्यताओं में माता-पिता की सेवा, बड़ों का सम्मान, सत्य के मार्ग पर चलने, सदाचार अपनाने और समाज में प्रेम व भाईचारा बनाए रखने का संदेश भी दिया जाता है। श्रद्धालु बाबा काशी दास से परिवार की सुख-समृद्धि, संतान की उन्नति, घर में शांति और जीवन की परेशानियों से मुक्ति की कामना करते हैं।
ग्रामीण परिवेश में ऐसी लोकपरंपराएं केवल पूजा-पाठ का माध्यम नहीं होतीं, बल्कि पीढ़ियों को एक-दूसरे से जोड़ने और अपनी सांस्कृतिक विरासत को बचाए रखने का भी काम करती हैं। लकड़ाकोल में आयोजित इस पूजा ने भी यही संदेश दिया कि आधुनिकता और बदलते समय के बीच भी लोग अपनी पुरानी परंपराओं को सहेजकर रखे हुए हैं।
आस्था अपनी जगह, सुरक्षा भी जरूरी
गर्म दूध से जुड़े इस अनुष्ठान को लेकर धार्मिक मान्यताएं भले ही गहरी हों, लेकिन वैज्ञानिक दृष्टिकोण से खौलता या अत्यधिक गर्म दूध त्वचा को गंभीर रूप से जला सकता है। दूध के शरीर पर पड़ते ही ठंडा हो जाने अथवा उससे किसी प्रकार की क्षति नहीं होने के दावों की वैज्ञानिक पुष्टि नहीं है। इसलिए ऐसे अनुष्ठानों को देखकर आम लोगों को उनका अनुकरण नहीं करना चाहिए। धार्मिक आयोजनों में श्रद्धा के साथ सुरक्षा का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है।
फिलहाल, पीरपैंती के लकड़ाकोल में आयोजित श्री काशी दास पंथी पूजा ने न केवल लोगों को एक अनूठी लोकपरंपरा से रूबरू कराया, बल्कि यह भी दिखाया कि इंसान चाहे कहीं भी बस जाए, अपने पूर्वजों की विरासत और संस्कारों से उसका रिश्ता कितना गहरा हो सकता है। लाल यादव ने बिहार की धरती पर अपने पूर्वजों की परंपरा को जीवंत रखकर यह संदेश दिया कि जगह बदल सकती है, पीढ़ियां बदल सकती हैं, लेकिन आस्था और सांस्कृतिक विरासत को संजोने का संकल्प नहीं बदलना चाहिए।
    user_Ajant Kumar
    Ajant Kumar
    Photographer कहलगाँव, भागलपुर, बिहार•
    8 hrs ago
  • राष्ट्रीय एकता दिवस के parade के मौके पर, सलामी लेते हुए
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    राष्ट्रीय एकता दिवस के parade के मौके पर, सलामी लेते हुए
    user_CAppu NEWS
    CAppu NEWS
    Advertising Photographer महागामा, गोड्डा, झारखंड•
    9 hrs ago
  • बिहार में SIR के जरिए वोट चोरी का पहला प्रयोग हुआ। फिर इसे पूरे देश में BJP विरोधी वोटरों को डिलीट करने के लिए लागू किया गया। हम मृतकों को वोटर लिस्ट में बनाए रखने की पैरवी नहीं कर रहे हैं, उन्हें जरूर लिस्ट से हटाया जाना चाहिए। लेकिन मोदी सरकार बार-बार घुसपैठियों का बहाना देकर अपनी गलतियों को छिपाने का काम कर रही है। यानी- जो खुद ही चोर हैं, वो ही Democracy की हिफाजत करने वालों को डांट रहे हैं। हमने ECI तक मार्च किया। फिर राष्ट्रपति से मिले, मेमोरेंडम दिया। हम सुप्रीम कोर्ट भी गए और पिटीशन दी। हम कोशिश कर रहे हैं कि लोकतंत्र और चुनाव प्रणाली को बचाया जा सके और इसके लिए हमें सड़क पर भी आना पड़ा। : CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जन-महाभियोग में कांग्रेस अध्यक्ष श्री खरगे जी 📍 दिल्ली
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    बिहार में SIR के जरिए वोट चोरी का पहला प्रयोग हुआ। फिर इसे पूरे देश में BJP विरोधी वोटरों को डिलीट करने के लिए लागू किया गया।

हम मृतकों को वोटर लिस्ट में बनाए रखने की पैरवी नहीं कर रहे हैं, उन्हें जरूर लिस्ट से हटाया जाना चाहिए।

लेकिन मोदी सरकार बार-बार घुसपैठियों का बहाना देकर अपनी गलतियों को छिपाने का काम कर रही है।

यानी- जो खुद ही चोर हैं, वो ही Democracy की हिफाजत करने वालों को डांट रहे हैं। 

हमने ECI तक मार्च किया। फिर राष्ट्रपति से मिले, मेमोरेंडम दिया। हम सुप्रीम कोर्ट भी गए और पिटीशन दी। 

हम कोशिश कर रहे हैं कि लोकतंत्र और चुनाव प्रणाली को बचाया जा सके और इसके लिए हमें सड़क पर भी आना पड़ा।

: CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जन-महाभियोग में कांग्रेस अध्यक्ष श्री खरगे जी


📍 दिल्ली
    user_Abhishek ranjan
    Abhishek ranjan
    Court reporter कहलगाँव, भागलपुर, बिहार•
    11 hrs ago
  • खेसारी लाल यादव ने सरकार से लगाई बड़ी गुहार! आखिर क्यों मदद मांगने पहुंचे भोजपुरी सुपरस्टार?
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    खेसारी लाल यादव ने सरकार से लगाई बड़ी गुहार! आखिर क्यों मदद मांगने पहुंचे भोजपुरी सुपरस्टार?
    user_BHOLA KUMAR
    BHOLA KUMAR
    Local News Reporter Kahalgaon, Jamālpur•
    22 hrs ago
  • जरूरी नहीं कि महादेव का नाम संकट में ही लिया जाए, हो सकता है महादेव नाम लेने से जिदंगी में संकट ही न आए । हर हर महादेव जरूरी नहीं कि महादेव का नाम संकट में ही लिया जाए, हो सकता है महादेव नाम लेने से जिदंगी में संकट ही न आए । हर हर महादेव🙏🌷🌸
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    जरूरी नहीं कि महादेव का नाम संकट में ही लिया जाए, हो सकता है महादेव नाम लेने से जिदंगी में संकट ही न आए । हर हर महादेव
जरूरी नहीं कि महादेव का नाम संकट में ही लिया जाए, हो सकता है महादेव नाम लेने से जिदंगी में संकट ही न आए । हर हर महादेव🙏🌷🌸
    user_Usha
    Usha
    पीरपैंती, भागलपुर, बिहार•
    5 hrs ago
  • भागलपुर जिले के सन्हौला थाना क्षेत्र के करहरिया गांव में चांदनी कुमारी की मौत का मामला सामने आया है। मृतका के मायके पक्ष ने पति सन्नी मंडल पर गला दबाकर हत्या करने का गंभीर आरोप लगाया है। भागलपुर जिले के सन्हौला थाना क्षेत्र के करहरिया गांव में चांदनी कुमारी की मौत का मामला सामने आया है। मृतका के मायके पक्ष ने पति सन्नी मंडल पर गला दबाकर हत्या करने का गंभीर आरोप लगाया है। मृतका की मां सावित्री देवी का दावा है कि उनकी पांच वर्षीय नतनी ने पूछने पर बताया कि उसके पिता ने उसकी मां का गला दबाया था। इस घटना के बाद कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आखिर चांदनी की मौत कैसे हुई? क्या पुलिस इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करेगी? फिलहाल पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही सच्चाई स्पष्ट हो सकेगी। ⚖️ मृतका को न्याय मिले, मामले की निष्पक्ष जांच हो! 📍 स्थान: करहरिया गांव, सन्हौला, भागलपुर (बिहार)
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    भागलपुर जिले के सन्हौला थाना क्षेत्र के करहरिया गांव में चांदनी कुमारी की मौत का मामला सामने आया है। मृतका के मायके पक्ष ने पति सन्नी मंडल पर गला दबाकर हत्या करने का गंभीर आरोप लगाया है।
भागलपुर जिले के सन्हौला थाना क्षेत्र के करहरिया गांव में चांदनी कुमारी की मौत का मामला सामने आया है। मृतका के मायके पक्ष ने पति सन्नी मंडल पर गला दबाकर हत्या करने का गंभीर आरोप लगाया है।
मृतका की मां सावित्री देवी का दावा है कि उनकी पांच वर्षीय नतनी ने पूछने पर बताया कि उसके पिता ने उसकी मां का गला दबाया था।
इस घटना के बाद कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आखिर चांदनी की मौत कैसे हुई? क्या पुलिस इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करेगी?
फिलहाल पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही सच्चाई स्पष्ट हो सकेगी।
⚖️ मृतका को न्याय मिले, मामले की निष्पक्ष जांच हो!
📍 स्थान: करहरिया गांव, सन्हौला, भागलपुर (बिहार)
    user_Amar Kumar
    Amar Kumar
    Voice of people कहलगाँव, भागलपुर, बिहार•
    9 hrs ago
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