पीलीभीत जिले में रविवार को 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिला। शहर से लेकर गांवों तक, विभिन्न सरकारी कार्यालयों, शिक्षण संस्थानों, सामाजिक संगठनों और सार्वजनिक स्थलों पर सामूहिक योग कार्यक्रम आयोजित किए गए। सुबह से ही बच्चों, युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों ने इन कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर भाग लिया। जिला मुख्यालय, ब्लॉक परिसरों, विद्यालयों, पंचायत भवनों, पार्कों और अन्य संस्थानों में प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में प्रतिभागियों ने प्राणायाम, ताड़ासन, वृक्षासन, भुजंगासन, अनुलोम-विलोम और ध्यान सहित कई योग क्रियाओं का अभ्यास किया। इस दौरान योग के शारीरिक और मानसिक लाभों के बारे में भी विस्तृत जानकारी दी गई। कार्यक्रमों में वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि योग भारत की प्राचीन संस्कृति की एक अमूल्य धरोहर है, जिसे आज पूरा विश्व अपना रहा है। उन्होंने बताया कि नियमित योगाभ्यास न केवल शरीर को स्वस्थ और निरोग रखता है, बल्कि मानसिक तनाव को भी दूर कर व्यक्ति को सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है। वक्ताओं ने लोगों से अपील की कि वे योग को केवल एक दिन तक सीमित न रखकर इसे अपनी दैनिक दिनचर्या का अनिवार्य हिस्सा बनाएं। कार्यक्रमों में शामिल बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ विभिन्न योगासन किए, वहीं युवाओं ने फिटनेस और स्वस्थ जीवनशैली के लिए योग को अपनाने का दृढ़ संकल्प लिया। बुजुर्गों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाते हुए अपने अनुभव साझा किए, जिसमें उन्होंने बताया कि नियमित योग से उन्हें शारीरिक स्फूर्ति और मानसिक शांति मिलती है। पूरे जिले में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य, अनुशासन और सकारात्मक जीवनशैली का सशक्त संदेश गूंजा, जिसके माध्यम से लोगों ने स्वस्थ और निरोग समाज के निर्माण का सामूहिक संकल्प लिया।
पीलीभीत जिले में रविवार को 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिला। शहर से लेकर गांवों तक, विभिन्न सरकारी कार्यालयों, शिक्षण संस्थानों, सामाजिक संगठनों और सार्वजनिक स्थलों पर सामूहिक योग कार्यक्रम आयोजित किए गए। सुबह से ही बच्चों, युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों ने इन कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर भाग लिया। जिला मुख्यालय, ब्लॉक परिसरों, विद्यालयों, पंचायत भवनों, पार्कों और अन्य संस्थानों में प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में प्रतिभागियों ने प्राणायाम, ताड़ासन, वृक्षासन, भुजंगासन, अनुलोम-विलोम और ध्यान सहित कई योग क्रियाओं का अभ्यास किया। इस दौरान योग के शारीरिक और मानसिक लाभों के बारे में भी विस्तृत जानकारी दी गई। कार्यक्रमों में वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि योग भारत की प्राचीन संस्कृति की एक अमूल्य धरोहर है, जिसे आज पूरा विश्व अपना रहा है। उन्होंने बताया कि नियमित योगाभ्यास न केवल शरीर को स्वस्थ और निरोग रखता है, बल्कि मानसिक तनाव को भी दूर कर व्यक्ति को सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है। वक्ताओं ने लोगों से अपील की कि वे योग को केवल एक दिन तक सीमित न रखकर इसे अपनी दैनिक दिनचर्या का अनिवार्य हिस्सा बनाएं। कार्यक्रमों में शामिल बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ विभिन्न योगासन किए, वहीं युवाओं ने फिटनेस और स्वस्थ जीवनशैली के लिए योग को अपनाने का दृढ़ संकल्प लिया। बुजुर्गों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाते हुए अपने अनुभव साझा किए, जिसमें उन्होंने बताया कि नियमित योग से उन्हें शारीरिक स्फूर्ति और मानसिक शांति मिलती है। पूरे जिले में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य, अनुशासन और सकारात्मक जीवनशैली का सशक्त संदेश गूंजा, जिसके माध्यम से लोगों ने स्वस्थ और निरोग समाज के निर्माण का सामूहिक संकल्प लिया।
- लखीमपुर खीरी के सदर कोतवाली के मालखाने से एक करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के सोने के गहने गायब होने का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इस संबंध में पुलिस ने अदालत में जो दलील पेश की, उसने सभी को अचंभित कर दिया। पुलिस ने कोर्ट को बताया कि कुछ सोने के गहने बारिश के कारण खराब हो गए, जबकि शेष बचे हुए गहनों को बंदर उठा ले गए। पुलिस के इस असाधारण स्पष्टीकरण पर अदालत ने गहरी हैरानी व्यक्त की है और इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया है। करोड़ों के गहनों के इस तरह गायब होने को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, और यह पूरा मामला स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।1
- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अवैध घुसपैठ और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कहा है कि "भारत कोई धर्मशाला नहीं है, जहां कोई भी आकर बस जाए।" यह महत्वपूर्ण बयान रोहिंग्या और अन्य अवैध घुसपैठियों के संदर्भ में दिया गया है, जिस पर सरकार का मानना है कि देश की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि अवैध रूप से देश में रहने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकार की योजना है कि भारत में आने वाले सभी विदेशी नागरिकों की पहचान और उनके रिकॉर्ड सुनिश्चित किए जाएं। राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए, घुसपैठ के मामलों पर लगातार और कड़ी निगरानी रखी जाएगी ताकि ऐसी किसी भी गतिविधि को रोका जा सके। इस पूरे मामले में सरकार का मुख्य संदेश स्पष्ट है: अवैध घुसपैठ किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी, राष्ट्रीय सुरक्षा देश की सर्वोच्च प्राथमिकता है, और घुसपैठ के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।1
- पीलीभीत में 'नारी शक्ति' का रौद्र रूप देखने को मिला, जहाँ महिलाओं ने एक शराब के ठेके के विरोध में सड़क पर शराब की बोतलें बहा दीं। यह प्रदर्शन शराब पर चल रहे संग्राम का हिस्सा था, जिसमें महिलाओं ने इस ठेके को बंद करने की मांग को लेकर अपना कड़ा विरोध जताया। महिलाओं का कहना है कि इस शराब के ठेके के कारण गाँव के कई हंसते-खेलते परिवार पूरी तरह से बर्बाद हो चुके हैं और घरों की आर्थिक स्थिति भी चरमरा गई है। इस मामले में महिला प्रधान ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि यह शराब का ठेका बंद नहीं हुआ, तो एक बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा।1
- पीलीभीत में एक हिंदू परिवार के घर के ठीक पीछे अवैध रूप से एक मजार का निर्माण किया गया था। इस मामले को लेकर शिकायत मिलने के बाद प्रशासन ने जांच के आदेश जारी किए थे। प्रशासन के आदेशों के बाद, वहीं के ग्रामीणों ने मिलकर उस अवैध मजार को ध्वस्त कर दिया।1
- Post by Sudheer Kumar1
- ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष परवेज हनीफ और मुख्य कार्यकारी अधिकारी मोहम्मद यूनुस ने पसमांदा मुस्लिम समाज को मुख्य धारा में लाने के विषय पर विस्तृत और सटीक चर्चा की है। इस चर्चा का मुख्य केंद्र पसमांदा मुस्लिम समुदाय के उत्थान और उन्हें समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के तरीकों पर रहा।1
- मुंगेर के सीताकुंड डीह गंगा घाट पर एक हैरतअंगेज घटना सामने आई है, जहां एक स्कॉर्पियो गाड़ी सड़क से सीधे गंगा नदी में उतर गई। हैरत की बात यह रही कि गाड़ी नदी में डूबने के बजाय नाव की तरह घंटों तक पानी पर तैरती रही। इस अनोखे नजारे और घटना का वीडियो देखने के लिए घाट पर लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। बताया जा रहा है कि यह घटना चालक की लापरवाही के कारण हुई, जो गाड़ी का हैंडब्रेक लगाना भूल गया था; इसी छोटी सी चूक के चलते यह बड़ी घटना में बदल गई।1
- सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें श्रमिक बंद गेट या बैरिकेड पार करके अपने कार्यस्थल पर पहुंचने की कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं। यह स्थिति रोजगार की मजबूरी और समय पर ड्यूटी पहुंचने के दबाव के कारण उत्पन्न हुई है। लोगों का कहना है कि देर से पहुंचने पर वेतन कटौती के डर से कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डालने को विवश हैं। श्रमिकों की इस जोखिम भरी कोशिश ने एक बहस छेड़ दी है कि इसकी जिम्मेदारी प्रबंधन की है, सुरक्षा व्यवस्था की है या फिर परिस्थितियों से जूझ रहे स्वयं श्रमिकों की। इस पूरे मामले को लेकर श्रमिक हितों और कार्यस्थल सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।1