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मुंगेर के सीताकुंड डीह गंगा घाट पर एक हैरतअंगेज घटना सामने आई है, जहां एक स्कॉर्पियो गाड़ी सड़क से सीधे गंगा नदी में उतर गई। हैरत की बात यह रही कि गाड़ी नदी में डूबने के बजाय नाव की तरह घंटों तक पानी पर तैरती रही। इस अनोखे नजारे और घटना का वीडियो देखने के लिए घाट पर लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। बताया जा रहा है कि यह घटना चालक की लापरवाही के कारण हुई, जो गाड़ी का हैंडब्रेक लगाना भूल गया था; इसी छोटी सी चूक के चलते यह बड़ी घटना में बदल गई।
Mandeep Singh
मुंगेर के सीताकुंड डीह गंगा घाट पर एक हैरतअंगेज घटना सामने आई है, जहां एक स्कॉर्पियो गाड़ी सड़क से सीधे गंगा नदी में उतर गई। हैरत की बात यह रही कि गाड़ी नदी में डूबने के बजाय नाव की तरह घंटों तक पानी पर तैरती रही। इस अनोखे नजारे और घटना का वीडियो देखने के लिए घाट पर लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। बताया जा रहा है कि यह घटना चालक की लापरवाही के कारण हुई, जो गाड़ी का हैंडब्रेक लगाना भूल गया था; इसी छोटी सी चूक के चलते यह बड़ी घटना में बदल गई।
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- मुंगेर के सीताकुंड डीह गंगा घाट पर एक हैरतअंगेज घटना सामने आई है, जहां एक स्कॉर्पियो गाड़ी सड़क से सीधे गंगा नदी में उतर गई। हैरत की बात यह रही कि गाड़ी नदी में डूबने के बजाय नाव की तरह घंटों तक पानी पर तैरती रही। इस अनोखे नजारे और घटना का वीडियो देखने के लिए घाट पर लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। बताया जा रहा है कि यह घटना चालक की लापरवाही के कारण हुई, जो गाड़ी का हैंडब्रेक लगाना भूल गया था; इसी छोटी सी चूक के चलते यह बड़ी घटना में बदल गई।1
- उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में पड़ रही भीषण गर्मी और रिकॉर्डतोड़ तापमान ने केवल इंसानों को ही नहीं, बल्कि दुधवा नेशनल पार्क के बाघों को भी बेहाल कर दिया है। चिलचिलाती धूप और उमस से राहत पाने के लिए जंगल के राजा दुधवा पार्क में बने कृत्रिम तालाबों (वाटर होल्स) का सहारा ले रहे हैं। वन विभाग के सूत्रों के अनुसार, दोपहर में तापमान बढ़ने के साथ ही अमूमन शांत रहने वाले बाघ पानी के स्रोतों के आसपास जमावड़ा लगा लेते हैं। दुधवा के अलग-अलग इलाकों से ऐसी कई तस्वीरें सामने आई हैं, जिनमें बाघ घंटों पानी में डुबकी लगाकर अपने शरीर का तापमान नियंत्रित कर रहे हैं। पार्क प्रशासन वन्यजीवों को पीने के पानी और ठंडक की कमी न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए मुस्तैद है। सभी वाटर होल्स को टैंकरों और पंपिंग सेट के जरिए लगातार भरा रखने के निर्देश दिए गए हैं। यह नजारा पर्यटकों के लिए भी रोमांचक अनुभव से कम नहीं है।1
- उत्तर प्रदेश समेत पूरा देश इन दिनों भीषण गर्मी और लू की जानलेवा चपेट में है, जिसका असर अब जंगलों तक भी पहुँच गया है। लखीमपुर खीरी स्थित दुधवा नेशनल पार्क के घने जंगल भी बढ़ते तापमान से अछूते नहीं हैं। इस भयंकर गर्मी के कारण जंगल के राजा बाघ और अन्य वन्यजीव भी इंसानों की तरह ही गर्मी से राहत पाने के लिए जद्दोजहद करते नजर आ रहे हैं।1
- लखीमपुर खीरी के निघासन क्षेत्र स्थित दुबहा गाँव में दशकों पुरानी प्रमुख सिंचाई नहर की हालत बदहाल है, जहाँ समुचित देखभाल के अभाव में यह नहर झाड़ियों, खरपतवार और जमा गंदगी से अटी पड़ी है। स्थानीय लोगों के अनुसार, पहले जिस नहर में पानी का सुचारु प्रवाह रहता था, वह अब जंगली घास, वनस्पतियों, प्लास्टिक और घरेलू कचरे से इस कदर भर गई है कि इसका बहाव नलियों जैसा दिख रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित विभाग समय-समय पर नहर की सफाई के दावे तो करता रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों के विपरीत है, क्योंकि नियमित सफाई न होने के कारण नहर की क्षमता घट गई है। इस स्थिति से बारिश के समय जलभराव और जलस्रोतों के दूषित होने जैसी चिंताएँ बढ़ गई हैं। किसानों ने विशेष चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सिंचाई के लिए नहरों का सुचारु संचालन बेहद आवश्यक है, और यदि इसकी अभी सफाई नहीं की गई तो आने वाले सीजन में खेतों तक पानी पहुंचाने में बाधा आ सकती है, जिससे रबी और खरीफ दोनों फसलें प्रभावित हो सकती हैं। स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन से तुरंत नहर की सफाई कराने, उचित निकासी सुनिश्चित करने और एक नियमित निगरानी व्यवस्था लागू करने की मांग की है। उनका कहना है कि नहरों की उपेक्षा से न केवल जल प्रबंधन पर नकारात्मक असर पड़ेगा, बल्कि आसपास के पर्यावरण और ग्रामीण स्वच्छता भी प्रभावित होगी। गाँव के बुजुर्गों ने पिछली बार सफाई के वादों पर भरोसा जताने का जिक्र करते हुए कहा कि तब भी कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए थे। निगरानी में तैनात कुछ स्थानीय स्वयंसेवकों ने भी सुझाव दिया है कि सफाई केवल अनौपचारिक निरीक्षणों तक सीमित न रहे, बल्कि बाकायदा मशीनों और जनशक्ति का उपयोग किया जाए। उन्होंने नहर के किनारे कूड़ा जलाने और फेंकने पर रोक लगाने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर हेल्पडेस्क बनाकर शिकायतों का नियमित निस्तारण करने की भी सिफारिश की है। फिलहाल, इस मुद्दे पर अधिकारी स्तर से कोई समेकित टिप्पणी नहीं मिली है, हालांकि प्रशासन ने पहले नहरों की सफाई को योजनानुसार जारी रखने की बात कही थी। ग्रामीण अब प्रशासन की वास्तविक कार्रवाई का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं ताकि सिंचाई व्यवस्था और स्थानीय पर्यावरण दोनों को सुरक्षित किया जा सके।1
- बरेली के हाफिजगंज थाना क्षेत्र में मोहर्रम से पहले सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक कथित 'पाकिस्तान जिंदाबाद' नारे के वीडियो के मामले में पुलिस जांच ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। जांच में यह सामने आया कि जिन ताजियेदारों पर भड़काऊ नारे लगाने का आरोप लगाया गया था, उन्होंने वास्तव में ऐसे कोई नारे नहीं लगाए थे। इसके बजाय, वीडियो को वायरल करने वाले व्यक्ति ने खुद ही ये नारे लगाए और फिर उसे एक भ्रामक दावे के साथ सोशल मीडिया पर प्रसारित कर दिया।1
- उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी स्थित तराई क्षेत्र में पड़ रही रिकॉर्डतोड़ गर्मी का असर दुधवा टाइगर रिजर्व के वन्यजीवों पर स्पष्ट रूप से दिख रहा है। 44 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचे पारे ने 'जंगल के राजा' बाघों को भी वाटर होल्स में शरण लेने पर मजबूर कर दिया है, जहाँ वे दिनभर गोते लगाते दिख रहे हैं। वनकर्मियों के अनुसार, बाघ अब शिकार छोड़कर वाटर होल्स और तालाबों का रुख कर रहे हैं, घंटों पानी में बैठकर अपने शरीर का तापमान नियंत्रित कर रहे हैं। भीषण गर्मी से बेहाल बाघों का यह अनोखा नज़ारा पर्यटकों के लिए किसी तोहफे से कम नहीं है।1
- बेंगलुरु में आयोजित NEET-UG 2026 की री-एग्जाम के दौरान शहर में उत्पन्न हुई भीषण ट्रैफिक जाम की स्थिति पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि कांग्रेस की एक विशाल रैली के कारण कई प्रमुख मार्गों पर यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ, जिससे परीक्षा में शामिल होने जा रहे छात्रों और उनके अभिभावकों को गंभीर असुविधा का सामना करना पड़ा। इस अव्यवस्था के चलते कुछ अभ्यर्थियों के परीक्षा केंद्र तक समय पर न पहुंच पाने के दावे भी सामने आए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में कई अभिभावकों ने अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि राजनीतिक आयोजनों की वजह से छात्रों के भविष्य को दांव पर नहीं लगाया जाना चाहिए। रिपोर्टों के अनुसार, बेंगलुरु के पैलेस ग्राउंड में कांग्रेस के कार्यक्रम के कारण शहर के कई इलाकों में ट्रैफिक का भारी दबाव बढ़ गया। इस मामले को लेकर भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने कांग्रेस पर सीधा निशाना साधा है, जबकि कांग्रेस के नेताओं ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि परीक्षा के प्रभावित होने के पीछे अन्य कारण भी हो सकते हैं। इस घटना ने एक बार फिर यह अहम सवाल खड़ा कर दिया है कि राष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण परीक्षाओं के दौरान प्रशासन और राजनीतिक दलों को बेहतर समन्वय सुनिश्चित करना चाहिए। जैसा कि कहा गया है, "छात्रों का भविष्य राजनीति से ऊपर है। परीक्षा के दिनों में किसी भी तरह के बड़े आयोजन से बचना सभी दलों और प्रशासन की जिम्मेदारी है।" यह आवश्यक है ताकि छात्रों को किसी भी प्रकार की अनावश्यक असुविधा का सामना न करना पड़े।1
- मिली जानकारी के अनुसार, कुछ समय पहले ही भरत तिवारी जी से मुलाकात हुई थी। अब यह दुखद समाचार मिला है कि उन्होंने देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान देते हुए शहादत प्राप्त की है।1