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राजस्थान के डूंगरपुर में भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा ने सरकार के सामने एक अलग 'भील प्रदेश' राज्य के गठन की सबसे बड़ी मांग उठाते हुए बड़ा अल्टीमेटम दिया है। मोर्चा का साफ तौर पर कहना है कि भील आदिवासियों की संस्कृति, न्याय और स्वाभिमान की रक्षा के लिए अब अलग राज्य बनाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है। इसके साथ ही, देश की सुरक्षा के लिए राजपूत रेजिमेंट की तर्ज पर 'भील रेजिमेंट' का गठन करने की मांग भी बेहद पुरजोर तरीके से उठाई गई है। मोर्चा ने वागड़ और उसके आसपास के क्षेत्रों के लिए भी कई महत्वपूर्ण मांगें सामने रखी हैं। इसमें पहली मांग है कि पवित्र बेणेश्वर धाम टापू की 80 फीसदी ज़मीन को आदिवासियों के नाम पर दर्ज किया जाए। इसके अलावा, अनास नदी को प्रदूषित करने वाली फैक्ट्रियों पर तत्काल ताला लगाने की मांग की गई है, और बांसवाड़ा के भूकिया-जगपुरा में सोने की खदानों की होने वाली नीलामी को भी तुरंत प्रभाव से रद्द करने के लिए कहा गया है। इस आंदोलन के तहत 9 अगस्त को राष्ट्रीय अवकाश घोषित करने और भीली भाषा को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल करने जैसी प्रमुख मांगें भी सरकार के सामने रखी गई हैं। इस विस्तृत मांग पत्र के सामने आने के बाद से क्षेत्र की सियासत में हलचल काफी तेज हो गई है।

13 hrs ago
user_Bharat Pandya भरत पंड्या
Bharat Pandya भरत पंड्या
डूंगरपुर, डूंगरपुर, राजस्थान•
13 hrs ago

राजस्थान के डूंगरपुर में भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा ने सरकार के सामने एक अलग 'भील प्रदेश' राज्य के गठन की सबसे बड़ी मांग उठाते हुए बड़ा अल्टीमेटम दिया है। मोर्चा का साफ तौर पर कहना है कि भील आदिवासियों की संस्कृति, न्याय और स्वाभिमान की रक्षा के लिए अब अलग राज्य बनाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है। इसके साथ ही, देश की सुरक्षा के लिए राजपूत रेजिमेंट की तर्ज पर 'भील रेजिमेंट' का गठन करने की मांग भी बेहद पुरजोर तरीके से उठाई गई है। मोर्चा ने वागड़ और उसके आसपास के क्षेत्रों के लिए भी कई महत्वपूर्ण मांगें सामने रखी हैं। इसमें पहली मांग है कि

पवित्र बेणेश्वर धाम टापू की 80 फीसदी ज़मीन को आदिवासियों के नाम पर दर्ज किया जाए। इसके अलावा, अनास नदी को प्रदूषित करने वाली फैक्ट्रियों पर तत्काल ताला लगाने की मांग की गई है, और बांसवाड़ा के भूकिया-जगपुरा में सोने की खदानों की होने वाली नीलामी को भी तुरंत प्रभाव से रद्द करने के लिए कहा गया है। इस आंदोलन के तहत 9 अगस्त को राष्ट्रीय अवकाश घोषित करने और भीली भाषा को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल करने जैसी प्रमुख मांगें भी सरकार के सामने रखी गई हैं। इस विस्तृत मांग पत्र के सामने आने के बाद से क्षेत्र की सियासत में हलचल काफी तेज हो गई है।

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  • राजस्थान के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में 'CSR-22 स्टाफ नर्स राजमेस भर्ती 2025' के तहत नवनियुक्त संविदा स्टाफ नर्स ग्रेड-2 (नर्सिंग ऑफिसर्स) ने अपने गृह जिलों में रिलोकेशन (समायोजन) की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया है। डूंगरपुर प्रवास के दौरान इन नवनियुक्त नर्सिंग कर्मियों ने प्रदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर को एक ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि भर्ती की वेटिंग सूची जारी करने से पहले वर्तमान में कार्यरत कर्मियों को उनके गृह जिलों या नजदीकी मेडिकल कॉलेजों में समायोजित किया जाए। नर्सिंग कर्मियों ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में युवाओं को रोजगार देने के कार्य की सराहना करते हुए पदस्थापन नीति में व्यावहारिक सुधार की आवश्यकता जताई है। ज्ञापन में बताया गया है कि इस भर्ती के तहत नवनियुक्त कर्मियों को मात्र ₹18,900 मासिक मानदेय मिल रहा है, जिसमें गृह जिले से सैकड़ों किलोमीटर दूर सेवाएं देना बेहद चुनौतीपूर्ण है। इससे महिला, विवाहित, एकल, विधवा और आर्थिक रूप से कमजोर अभ्यर्थियों को भारी आर्थिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। नर्सेज नेताओं का तर्क है कि रिक्त सीटों पर पहले समायोजन करने और उसके बाद बची सीटों पर वेटिंग सूची जारी करने से भर्ती किसी भी कानूनी या सामाजिक विवाद में फंसने से बच जाएगी। इससे पूर्व, बांसवाड़ा जाते समय डूंगरपुर के उदय बिलास पैलेस में रुके स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने विभाग के आला अधिकारियों के साथ बैठक कर क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा की। उन्होंने अस्पतालों को पूरी तरह संक्रमण मुक्त रखने तथा मरीजों व प्रसूताओं को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं देने के सख्त निर्देश दिए। इसी दौरान राजस्थान नर्सेज संयुक्त संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल ने भी मंत्री से मुलाकात कर अपनी मांगों का एक अन्य ज्ञापन सौंपा, जिसमें मुख्य रूप से 10, 20 और 30 बोनस अंकों के आधार पर नर्सिंग ऑफिसर और एएनएम की नई भर्ती जल्द आयोजित करने, टीएसपी क्षेत्र के लिए अलग पद स्वीकृत करने तथा CSR भर्ती से प्रभावित रहे नर्स ग्रेड-द्वितीय कार्मिकों की तत्काल सेवा बहाल करने की मांग की गई है। स्वास्थ्य मंत्री ने दोनों ज्ञापनों पर गंभीरतापूर्वक विचार करने और सहानुभूतिपूर्वक उचित कदम उठाने का आश्वासन दिया है।
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    राजस्थान के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में 'CSR-22 स्टाफ नर्स राजमेस भर्ती 2025' के तहत नवनियुक्त संविदा स्टाफ नर्स ग्रेड-2 (नर्सिंग ऑफिसर्स) ने अपने गृह जिलों में रिलोकेशन (समायोजन) की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया है। डूंगरपुर प्रवास के दौरान इन नवनियुक्त नर्सिंग कर्मियों ने प्रदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर को एक ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि भर्ती की वेटिंग सूची जारी करने से पहले वर्तमान में कार्यरत कर्मियों को उनके गृह जिलों या नजदीकी मेडिकल कॉलेजों में समायोजित किया जाए।

नर्सिंग कर्मियों ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में युवाओं को रोजगार देने के कार्य की सराहना करते हुए पदस्थापन नीति में व्यावहारिक सुधार की आवश्यकता जताई है। ज्ञापन में बताया गया है कि इस भर्ती के तहत नवनियुक्त कर्मियों को मात्र ₹18,900 मासिक मानदेय मिल रहा है, जिसमें गृह जिले से सैकड़ों किलोमीटर दूर सेवाएं देना बेहद चुनौतीपूर्ण है। इससे महिला, विवाहित, एकल, विधवा और आर्थिक रूप से कमजोर अभ्यर्थियों को भारी आर्थिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। नर्सेज नेताओं का तर्क है कि रिक्त सीटों पर पहले समायोजन करने और उसके बाद बची सीटों पर वेटिंग सूची जारी करने से भर्ती किसी भी कानूनी या सामाजिक विवाद में फंसने से बच जाएगी।

इससे पूर्व, बांसवाड़ा जाते समय डूंगरपुर के उदय बिलास पैलेस में रुके स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने विभाग के आला अधिकारियों के साथ बैठक कर क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा की। उन्होंने अस्पतालों को पूरी तरह संक्रमण मुक्त रखने तथा मरीजों व प्रसूताओं को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं देने के सख्त निर्देश दिए। इसी दौरान राजस्थान नर्सेज संयुक्त संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल ने भी मंत्री से मुलाकात कर अपनी मांगों का एक अन्य ज्ञापन सौंपा, जिसमें मुख्य रूप से 10, 20 और 30 बोनस अंकों के आधार पर नर्सिंग ऑफिसर और एएनएम की नई भर्ती जल्द आयोजित करने, टीएसपी क्षेत्र के लिए अलग पद स्वीकृत करने तथा CSR भर्ती से प्रभावित रहे नर्स ग्रेड-द्वितीय कार्मिकों की तत्काल सेवा बहाल करने की मांग की गई है। स्वास्थ्य मंत्री ने दोनों ज्ञापनों पर गंभीरतापूर्वक विचार करने और सहानुभूतिपूर्वक उचित कदम उठाने का आश्वासन दिया है।
    user_Santosh Vyas
    Santosh Vyas
    Court reporter डूंगरपुर, डूंगरपुर, राजस्थान•
    5 hrs ago
  • राजस्थान के डूंगरपुर स्थित उदय विलास पैलेस में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के दौरे के दौरान नवनियुक्त संविदा नर्सिंग कर्मियों ने मुलाकात कर उन्हें एक ज्ञापन सौंपा। 'CSR-22 स्टाफ नर्स राजमेस भर्ती 2025' के तहत नवनियुक्त संविदा स्टाफ नर्स ग्रेड-2 (नर्सिंग ऑफिसर्स) ने मांग की है कि इस भर्ती की वेटिंग सूची जारी करने से पहले उन्हें उनके गृह जिलों या नजदीकी मेडिकल कॉलेजों में रिलोकेट (समायोजित) किया जाए। नर्सिंग कर्मियों का कहना है कि मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार रोजगार और जनकल्याण के क्षेत्र में सराहनीय कार्य कर रही है, लेकिन दूर-दराज के जिलों में पदस्थापन मिलने से उनके सामने कई व्यावहारिक कठिनाइयां खड़ी हो गई हैं। अभ्यर्थियों को इस भर्ती में लगभग ₹18,900 का अल्प मासिक मानदेय मिल रहा है। कम मानदेय और गृह जिले से अत्यधिक दूरी पर पोस्टिंग होने से महिला कर्मियों, विवाहित महिलाओं, एकल व विधवा महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर अभ्यर्थियों को गंभीर पारिवारिक, सामाजिक और आर्थिक समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। नर्सिंग कर्मियों ने मांग उठाई है कि वर्तमान में विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में रिक्त पड़े पदों पर, वेटिंग सूची जारी होने से पहले, बाहर कार्यरत संविदा स्टाफ नर्सों को उनके गृह जिले में समायोजित कर राहत प्रदान की जाए।
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    राजस्थान के डूंगरपुर स्थित उदय विलास पैलेस में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के दौरे के दौरान नवनियुक्त संविदा नर्सिंग कर्मियों ने मुलाकात कर उन्हें एक ज्ञापन सौंपा। 'CSR-22 स्टाफ नर्स राजमेस भर्ती 2025' के तहत नवनियुक्त संविदा स्टाफ नर्स ग्रेड-2 (नर्सिंग ऑफिसर्स) ने मांग की है कि इस भर्ती की वेटिंग सूची जारी करने से पहले उन्हें उनके गृह जिलों या नजदीकी मेडिकल कॉलेजों में रिलोकेट (समायोजित) किया जाए।

नर्सिंग कर्मियों का कहना है कि मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार रोजगार और जनकल्याण के क्षेत्र में सराहनीय कार्य कर रही है, लेकिन दूर-दराज के जिलों में पदस्थापन मिलने से उनके सामने कई व्यावहारिक कठिनाइयां खड़ी हो गई हैं। अभ्यर्थियों को इस भर्ती में लगभग ₹18,900 का अल्प मासिक मानदेय मिल रहा है। कम मानदेय और गृह जिले से अत्यधिक दूरी पर पोस्टिंग होने से महिला कर्मियों, विवाहित महिलाओं, एकल व विधवा महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर अभ्यर्थियों को गंभीर पारिवारिक, सामाजिक और आर्थिक समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। नर्सिंग कर्मियों ने मांग उठाई है कि वर्तमान में विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में रिक्त पड़े पदों पर, वेटिंग सूची जारी होने से पहले, बाहर कार्यरत संविदा स्टाफ नर्सों को उनके गृह जिले में समायोजित कर राहत प्रदान की जाए।
    user_Maheshwar choubisa
    Maheshwar choubisa
    Graphic designer डूंगरपुर, डूंगरपुर, राजस्थान•
    13 hrs ago
  • राजस्थान के डूंगरपुर में भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा ने सरकार के सामने एक अलग 'भील प्रदेश' राज्य के गठन की सबसे बड़ी मांग उठाते हुए बड़ा अल्टीमेटम दिया है। मोर्चा का साफ तौर पर कहना है कि भील आदिवासियों की संस्कृति, न्याय और स्वाभिमान की रक्षा के लिए अब अलग राज्य बनाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है। इसके साथ ही, देश की सुरक्षा के लिए राजपूत रेजिमेंट की तर्ज पर 'भील रेजिमेंट' का गठन करने की मांग भी बेहद पुरजोर तरीके से उठाई गई है। मोर्चा ने वागड़ और उसके आसपास के क्षेत्रों के लिए भी कई महत्वपूर्ण मांगें सामने रखी हैं। इसमें पहली मांग है कि पवित्र बेणेश्वर धाम टापू की 80 फीसदी ज़मीन को आदिवासियों के नाम पर दर्ज किया जाए। इसके अलावा, अनास नदी को प्रदूषित करने वाली फैक्ट्रियों पर तत्काल ताला लगाने की मांग की गई है, और बांसवाड़ा के भूकिया-जगपुरा में सोने की खदानों की होने वाली नीलामी को भी तुरंत प्रभाव से रद्द करने के लिए कहा गया है। इस आंदोलन के तहत 9 अगस्त को राष्ट्रीय अवकाश घोषित करने और भीली भाषा को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल करने जैसी प्रमुख मांगें भी सरकार के सामने रखी गई हैं। इस विस्तृत मांग पत्र के सामने आने के बाद से क्षेत्र की सियासत में हलचल काफी तेज हो गई है।
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    राजस्थान के डूंगरपुर में भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा ने सरकार के सामने एक अलग 'भील प्रदेश' राज्य के गठन की सबसे बड़ी मांग उठाते हुए बड़ा अल्टीमेटम दिया है। मोर्चा का साफ तौर पर कहना है कि भील आदिवासियों की संस्कृति, न्याय और स्वाभिमान की रक्षा के लिए अब अलग राज्य बनाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है। इसके साथ ही, देश की सुरक्षा के लिए राजपूत रेजिमेंट की तर्ज पर 'भील रेजिमेंट' का गठन करने की मांग भी बेहद पुरजोर तरीके से उठाई गई है।

मोर्चा ने वागड़ और उसके आसपास के क्षेत्रों के लिए भी कई महत्वपूर्ण मांगें सामने रखी हैं। इसमें पहली मांग है कि पवित्र बेणेश्वर धाम टापू की 80 फीसदी ज़मीन को आदिवासियों के नाम पर दर्ज किया जाए। इसके अलावा, अनास नदी को प्रदूषित करने वाली फैक्ट्रियों पर तत्काल ताला लगाने की मांग की गई है, और बांसवाड़ा के भूकिया-जगपुरा में सोने की खदानों की होने वाली नीलामी को भी तुरंत प्रभाव से रद्द करने के लिए कहा गया है।

इस आंदोलन के तहत 9 अगस्त को राष्ट्रीय अवकाश घोषित करने और भीली भाषा को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल करने जैसी प्रमुख मांगें भी सरकार के सामने रखी गई हैं। इस विस्तृत मांग पत्र के सामने आने के बाद से क्षेत्र की सियासत में हलचल काफी तेज हो गई है।
    user_Bharat Pandya भरत पंड्या
    Bharat Pandya भरत पंड्या
    डूंगरपुर, डूंगरपुर, राजस्थान•
    13 hrs ago
  • राजस्थान के चौरासी विधानसभा क्षेत्र से विधायक अनिल कटारा ने भील प्रदेश संदेश यात्रा को लेकर एक जरूरी और महत्वपूर्ण संदेश जारी किया है।
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    राजस्थान के चौरासी विधानसभा क्षेत्र से विधायक अनिल कटारा ने भील प्रदेश संदेश यात्रा को लेकर एक जरूरी और महत्वपूर्ण संदेश जारी किया है।
    user_मुकेश कुमार आर. पंड्या
    मुकेश कुमार आर. पंड्या
    Local News Reporter सीमलवाड़ा, डूंगरपुर, राजस्थान•
    7 hrs ago
  • डूंगरपुर जिले के सीमलवाड़ा पंचायत समिति क्षेत्र की ग्राम पंचायत निठाउवा में बुधवार को राज्य सरकार के निर्देशानुसार ग्रामीण सेवा शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने शिरकत कर ग्रामीणों की समस्याओं को सुना और मौके पर ही उनका त्वरित समाधान किया। इसके साथ ही शिविर के माध्यम से आम लोगों को सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी प्रदान की गई, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने हिस्सा लेकर लाभ उठाया। शिविर के प्रभारी और नायब तहसीलदार भूमल चौहान ने इस कार्यक्रम के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राज्य सरकार का मुख्य उद्देश्य प्रशासन को गांव की चौपाल तक पहुंचाकर आमजन की समस्याओं का तुरंत निवारण करना है। उन्होंने बताया कि इस शिविर के जरिए राजस्व विभाग से जुड़े नामांतरण, सीमाज्ञान, रिकॉर्ड शुद्धिकरण और भूमि संबंधी मामलों के निस्तारण को प्राथमिकता देकर त्वरित रूप से पूरा किया जा रहा है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए चौरासी विधानसभा क्षेत्र के विधायक प्रत्याशी कारीलाल ननोमा ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली राज्य सरकार की मंशा को सामने रखा। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि किसी भी ग्रामीण को अपनी छोटी-छोटी समस्याओं के लिए सरकारी दफ्तरों के बार-बार चक्कर न काटने पड़ें, इसीलिए एक ही जगह पर विभिन्न विभागों की सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके साथ ही भाजपा जिला महामंत्री ईश्वर लबाना ने इसे सरकार की कल्याणकारी सोच का परिणाम बताया और ग्रामीणों से शिविर में सक्रिय भागीदारी करके अधिक से अधिक लाभ उठाने का आह्वान किया। इस अवसर पर मंडल महामंत्री रत्न सिंह चौहान, मंडल उपाध्यक्ष महिपाल सिंह राठौड़, सरपंच सूर्या देवी डामोर, पंचायत समिति सदस्य प्रताप सिंह डामोर, पूर्व सरपंच लक्ष्मण सिंह, रमेश, निवर्तमान नगर मंत्री पुष्पेंद्र डामोर, बूथ अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह डामोर, विशाल लबाना, केसर सिंह डामोर, मुलचंद लबाना, श्यामलाल डामोर और प्रवीण डामोर सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। शिविर में पहुंचे अधिकारियों ने पात्र हितग्राहियों के आवेदन स्वीकार कर कई महत्वपूर्ण मामलों का मौके पर ही निस्तारण किया।
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    डूंगरपुर जिले के सीमलवाड़ा पंचायत समिति क्षेत्र की ग्राम पंचायत निठाउवा में बुधवार को राज्य सरकार के निर्देशानुसार ग्रामीण सेवा शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने शिरकत कर ग्रामीणों की समस्याओं को सुना और मौके पर ही उनका त्वरित समाधान किया। इसके साथ ही शिविर के माध्यम से आम लोगों को सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी प्रदान की गई, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने हिस्सा लेकर लाभ उठाया।

शिविर के प्रभारी और नायब तहसीलदार भूमल चौहान ने इस कार्यक्रम के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राज्य सरकार का मुख्य उद्देश्य प्रशासन को गांव की चौपाल तक पहुंचाकर आमजन की समस्याओं का तुरंत निवारण करना है। उन्होंने बताया कि इस शिविर के जरिए राजस्व विभाग से जुड़े नामांतरण, सीमाज्ञान, रिकॉर्ड शुद्धिकरण और भूमि संबंधी मामलों के निस्तारण को प्राथमिकता देकर त्वरित रूप से पूरा किया जा रहा है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए चौरासी विधानसभा क्षेत्र के विधायक प्रत्याशी कारीलाल ननोमा ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली राज्य सरकार की मंशा को सामने रखा। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि किसी भी ग्रामीण को अपनी छोटी-छोटी समस्याओं के लिए सरकारी दफ्तरों के बार-बार चक्कर न काटने पड़ें, इसीलिए एक ही जगह पर विभिन्न विभागों की सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके साथ ही भाजपा जिला महामंत्री ईश्वर लबाना ने इसे सरकार की कल्याणकारी सोच का परिणाम बताया और ग्रामीणों से शिविर में सक्रिय भागीदारी करके अधिक से अधिक लाभ उठाने का आह्वान किया।

इस अवसर पर मंडल महामंत्री रत्न सिंह चौहान, मंडल उपाध्यक्ष महिपाल सिंह राठौड़, सरपंच सूर्या देवी डामोर, पंचायत समिति सदस्य प्रताप सिंह डामोर, पूर्व सरपंच लक्ष्मण सिंह, रमेश, निवर्तमान नगर मंत्री पुष्पेंद्र डामोर, बूथ अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह डामोर, विशाल लबाना, केसर सिंह डामोर, मुलचंद लबाना, श्यामलाल डामोर और प्रवीण डामोर सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। शिविर में पहुंचे अधिकारियों ने पात्र हितग्राहियों के आवेदन स्वीकार कर कई महत्वपूर्ण मामलों का मौके पर ही निस्तारण किया।
    user_Gunwant kalal
    Gunwant kalal
    Local News Reporter सीमलवाड़ा, डूंगरपुर, राजस्थान•
    8 hrs ago
  • राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट के डूंगरपुर जिले के दौरे के दौरान भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। पायलट ने अपने दौरे की शुरुआत बेणेश्वर धाम में श्री हरि मंदिर, राधा-कृष्ण मंदिर, शिव मंदिर और ब्रह्मा मंदिर में दर्शन-पूजन के साथ की, जहां उन्होंने बेणेश्वर पीठाधीश्वर महंत अच्युतानंद महाराज से भेंट कर उनका आशीर्वाद लिया। इसके बाद साबला पहुंचने पर पूर्व ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह सिसोदिया के नेतृत्व में उनका भव्य स्वागत किया गया, जिसमें सिसोदिया ने आसमान में ड्रोन उड़ाकर पुष्प वर्षा की और पायलट को पगड़ी पहनाकर व तलवार भेंट कर सम्मानित किया। साबला में सिसोदिया कार्यालय और आसपुर सर्किट हाउस में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए सचिन पायलट ने केंद्र व प्रदेश की भाजपा सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि ढाई साल के कार्यकाल में राज्य सरकार ने जनता का विश्वास पूरी तरह खो दिया है और डबल इंजन में केवल धुआं बचा है। पायलट ने तीखा आरोप लगाते हुए कहा कि चंपत मंदिर के चढ़ावे को चपत लगा गया और सरकार इस पर लीपापोती करने में जुटी है। उन्होंने दावा किया कि चिकित्सा और शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है और सरकार पंचायत चुनाव कराने में आनाकानी कर रही है, लेकिन यदि आज चुनाव करा दिए जाएं तो कांग्रेस पूर्ण बहुमत से सरकार बनाएगी। सभा स्थल पर मौजूद महिलाओं से बातचीत के दौरान महिलाओं ने रोजगार न मिलने, महंगाई की मार, पानी-बिजली कटौती और गैस सिलेंडर की बढ़ती दरों की शिकायत की, जिससे उन्हें जंगलों से लकड़ी लाकर खाना पकाना पड़ रहा है। पायलट ने कहा कि सरकार गरीबों के रोजगार पर संकट पैदा करने और नरेगा को पूरी तरह बंद करने की मंशा से एक अलग योजना लेकर आई है। इस दौरान स्थानीय लोगों ने सोम कमला बांध का पानी सागवाड़ा न ले जाने की मांग रखी, वहीं कई दावेदारों ने गाड़ियों में कार्यकर्ताओं को लाकर पायलट के सामने अपनी दावेदारी का प्रदर्शन किया। इस अवसर पर पूर्व सांसद ताराचंद भगोरा, रघुवीर सिंह मीणा, प्रेम कुमार पाटीदार, जिलाध्यक्ष गणेश घोघरा, पूर्व जिलाध्यक्ष भानुप्रताप सिंह, शंकर यादव और पूर्व विधायक पुजीलाल परमार सहित कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता भारी संख्या में उपस्थित रहे।
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    राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट के डूंगरपुर जिले के दौरे के दौरान भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। पायलट ने अपने दौरे की शुरुआत बेणेश्वर धाम में श्री हरि मंदिर, राधा-कृष्ण मंदिर, शिव मंदिर और ब्रह्मा मंदिर में दर्शन-पूजन के साथ की, जहां उन्होंने बेणेश्वर पीठाधीश्वर महंत अच्युतानंद महाराज से भेंट कर उनका आशीर्वाद लिया। इसके बाद साबला पहुंचने पर पूर्व ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह सिसोदिया के नेतृत्व में उनका भव्य स्वागत किया गया, जिसमें सिसोदिया ने आसमान में ड्रोन उड़ाकर पुष्प वर्षा की और पायलट को पगड़ी पहनाकर व तलवार भेंट कर सम्मानित किया।

साबला में सिसोदिया कार्यालय और आसपुर सर्किट हाउस में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए सचिन पायलट ने केंद्र व प्रदेश की भाजपा सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि ढाई साल के कार्यकाल में राज्य सरकार ने जनता का विश्वास पूरी तरह खो दिया है और डबल इंजन में केवल धुआं बचा है। पायलट ने तीखा आरोप लगाते हुए कहा कि चंपत मंदिर के चढ़ावे को चपत लगा गया और सरकार इस पर लीपापोती करने में जुटी है। उन्होंने दावा किया कि चिकित्सा और शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है और सरकार पंचायत चुनाव कराने में आनाकानी कर रही है, लेकिन यदि आज चुनाव करा दिए जाएं तो कांग्रेस पूर्ण बहुमत से सरकार बनाएगी।

सभा स्थल पर मौजूद महिलाओं से बातचीत के दौरान महिलाओं ने रोजगार न मिलने, महंगाई की मार, पानी-बिजली कटौती और गैस सिलेंडर की बढ़ती दरों की शिकायत की, जिससे उन्हें जंगलों से लकड़ी लाकर खाना पकाना पड़ रहा है। पायलट ने कहा कि सरकार गरीबों के रोजगार पर संकट पैदा करने और नरेगा को पूरी तरह बंद करने की मंशा से एक अलग योजना लेकर आई है। इस दौरान स्थानीय लोगों ने सोम कमला बांध का पानी सागवाड़ा न ले जाने की मांग रखी, वहीं कई दावेदारों ने गाड़ियों में कार्यकर्ताओं को लाकर पायलट के सामने अपनी दावेदारी का प्रदर्शन किया। इस अवसर पर पूर्व सांसद ताराचंद भगोरा, रघुवीर सिंह मीणा, प्रेम कुमार पाटीदार, जिलाध्यक्ष गणेश घोघरा, पूर्व जिलाध्यक्ष भानुप्रताप सिंह, शंकर यादव और पूर्व विधायक पुजीलाल परमार सहित कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता भारी संख्या में उपस्थित रहे।
    user_Pravin Kothari
    Pravin Kothari
    पत्रकार आसपुर-विधानसभा आसपुर, डूंगरपुर, राजस्थान•
    13 hrs ago
  • राजस्थान के डूंगरपुर जिले के सीमलवाड़ा ब्लॉक में भील प्रदेश की मांग को लेकर भीली संस्कृति और परंपरा के अनुसार प्रदर्शन किया गया। इस पारंपरिक प्रदर्शन के बाद महामहिम राष्ट्रपति महोदया के नाम एक ज्ञापन सौंपा गया है, जिसमें भील प्रदेश की मांग की गई है।
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    राजस्थान के डूंगरपुर जिले के सीमलवाड़ा ब्लॉक में भील प्रदेश की मांग को लेकर भीली संस्कृति और परंपरा के अनुसार प्रदर्शन किया गया। इस पारंपरिक प्रदर्शन के बाद महामहिम राष्ट्रपति महोदया के नाम एक ज्ञापन सौंपा गया है, जिसमें भील प्रदेश की मांग की गई है।
    user_Adivasi Mohan
    Adivasi Mohan
    Farmer सीमलवाड़ा, डूंगरपुर, राजस्थान•
    15 hrs ago
  • राजस्थान शिक्षक संघ (एसटीएफआई) जिला कमेटी डूंगरपुर ने जिला अध्यक्ष मणीलाल मालीवाड़ के नेतृत्व में शिक्षकों के स्थानांतरण में व्याप्त अव्यवस्थाओं और अमानवीय दृष्टिकोण के विरोध में उग्र प्रदर्शन किया। आक्रोशित शिक्षकों ने इस दौरान शिक्षा मंत्री का पुतला फूंका और मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर व मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर सभी अन्यायपूर्ण और बदले की भावना से किए गए तबादलों को तत्काल निरस्त करने की मांग की। शिक्षक नेताओं का आरोप है कि वर्तमान स्थानांतरण प्रक्रिया ने प्रदेश के शैक्षिक वातावरण को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है, जिससे सत्र की शुरुआत में ही नामांकन अभियान और विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित हो रही है। संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष हेमंत कुमार खराड़ी और जिला अध्यक्ष मणीलाल मालीवाड़ ने कहा कि उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों के साथ-साथ असाध्य रोग से पीड़ित, विधवा और दिव्यांग शिक्षकों तक को दूर-दराज के क्षेत्रों में भेजकर मानवीय संवेदनाओं की पूरी तरह उपेक्षा की गई है। स्थिति यह बन गई है कि शिक्षक स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने के बजाय अपने तबादले रुकवाने के लिए अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। जिला मंत्री धनराज खराड़ी और प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य देवीलाल गौड ने सरकार से इन विसंगतिपूर्ण तबादलों को तुरंत रद्द करने और पूर्व वादे के अनुसार सभी संवर्गों के लिए एक पारदर्शी, न्यायसंगत व स्थायी स्थानांतरण नीति लागू करने की मांग की है। वहीं, संघर्ष समिति के संयोजक जीवन लाल बरांडा और जिला उपाध्यक्ष नारायण लाल कोटेड ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने शीघ्र कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया तो शिक्षक संगठन प्रदेशभर में चरणबद्ध तरीके से आंदोलन को और तेज करेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और शिक्षा विभाग की होगी। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान कांतिलाल खराड़ी, रामलाल भगोरा, सतीश अहारी, केशव कोटेड, मानशंकर खराड़ी, गोपाल पाटीदार, नारायण लाल डामोर सहित बड़ी संख्या में शिक्षक और पदाधिकारी उपस्थित रहे।
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    राजस्थान शिक्षक संघ (एसटीएफआई) जिला कमेटी डूंगरपुर ने जिला अध्यक्ष मणीलाल मालीवाड़ के नेतृत्व में शिक्षकों के स्थानांतरण में व्याप्त अव्यवस्थाओं और अमानवीय दृष्टिकोण के विरोध में उग्र प्रदर्शन किया। आक्रोशित शिक्षकों ने इस दौरान शिक्षा मंत्री का पुतला फूंका और मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर व मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर सभी अन्यायपूर्ण और बदले की भावना से किए गए तबादलों को तत्काल निरस्त करने की मांग की। शिक्षक नेताओं का आरोप है कि वर्तमान स्थानांतरण प्रक्रिया ने प्रदेश के शैक्षिक वातावरण को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है, जिससे सत्र की शुरुआत में ही नामांकन अभियान और विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित हो रही है।

संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष हेमंत कुमार खराड़ी और जिला अध्यक्ष मणीलाल मालीवाड़ ने कहा कि उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों के साथ-साथ असाध्य रोग से पीड़ित, विधवा और दिव्यांग शिक्षकों तक को दूर-दराज के क्षेत्रों में भेजकर मानवीय संवेदनाओं की पूरी तरह उपेक्षा की गई है। स्थिति यह बन गई है कि शिक्षक स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने के बजाय अपने तबादले रुकवाने के लिए अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। जिला मंत्री धनराज खराड़ी और प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य देवीलाल गौड ने सरकार से इन विसंगतिपूर्ण तबादलों को तुरंत रद्द करने और पूर्व वादे के अनुसार सभी संवर्गों के लिए एक पारदर्शी, न्यायसंगत व स्थायी स्थानांतरण नीति लागू करने की मांग की है।

वहीं, संघर्ष समिति के संयोजक जीवन लाल बरांडा और जिला उपाध्यक्ष नारायण लाल कोटेड ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने शीघ्र कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया तो शिक्षक संगठन प्रदेशभर में चरणबद्ध तरीके से आंदोलन को और तेज करेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और शिक्षा विभाग की होगी। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान कांतिलाल खराड़ी, रामलाल भगोरा, सतीश अहारी, केशव कोटेड, मानशंकर खराड़ी, गोपाल पाटीदार, नारायण लाल डामोर सहित बड़ी संख्या में शिक्षक और पदाधिकारी उपस्थित रहे।
    user_Santosh Vyas
    Santosh Vyas
    Court reporter डूंगरपुर, डूंगरपुर, राजस्थान•
    9 hrs ago
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