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सोमवार को आबूरोड के लुनियापुरा स्थित डीएफसी रेलवे ट्रैक के पास अचानक भीषण आग लग गई, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। आग की ऊंची-ऊंची लपटें उठती देख रेलवे विभाग में हड़कंप मच गया और तुरंत नगर पालिका फायर ब्रिगेड को सूचित किया गया। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और आग बुझाने का अभियान शुरू किया। करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद दमकल कर्मियों ने आग पर काबू पा लिया। समय रहते आग पर नियंत्रण होने से एक बड़ा हादसा टल गया। इस अभियान में फायर कर्मी मोहम्मद युनुस, चिराग परिहार, अरुण चांवरिया, कमलेश मारू और नवीन कुमार की अहम भूमिका रही, जिनकी तत्परता और मेहनत से आग को फैलने से रोका जा सका। फिलहाल, आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है।
Narendra Singh Bhati
सोमवार को आबूरोड के लुनियापुरा स्थित डीएफसी रेलवे ट्रैक के पास अचानक भीषण आग लग गई, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। आग की ऊंची-ऊंची लपटें उठती देख रेलवे विभाग में हड़कंप मच गया और तुरंत नगर पालिका फायर ब्रिगेड को सूचित किया गया। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और आग बुझाने का अभियान शुरू किया। करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद दमकल कर्मियों ने आग पर काबू पा लिया। समय रहते आग पर नियंत्रण होने से एक बड़ा हादसा टल गया। इस अभियान में फायर कर्मी मोहम्मद युनुस, चिराग परिहार, अरुण चांवरिया, कमलेश मारू और नवीन कुमार की अहम भूमिका रही, जिनकी तत्परता और मेहनत से आग को फैलने से रोका जा सका। फिलहाल, आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है।
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- सोमवार को सिरोही जिले के सरूपगंज थाना क्षेत्र में एक बड़ा सड़क हादसा होते-होते टल गया। आबूरोड से पिंडवाड़ा की ओर जा रही एक कार और ट्रक के बीच चलते दौरान जोरदार टक्कर हो गई। यह भिड़ंत इतनी भीषण थी कि कार का आगे का हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। इस हादसे में कार में सवार दो लोग बाल-बाल बच गए, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया और नेशनल हाईवे पर कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टक्कर के बाद हाईवे पर वाहनों की लंबी कतारें लग गई थीं। सूचना मिलते ही सरूपगंज थाना पुलिस और नेशनल हाईवे की टीम घटनास्थल पर पहुंची। पुलिस ने क्षतिग्रस्त वाहनों को सड़क किनारे हटवाकर यातायात को सुचारु कराया। पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है।1
- राज्य सरकार और जिला प्रशासन के निर्देशानुसार, मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान के तहत गंगा दशमी के पावन अवसर पर सोमवार, 25 मई को सुमेरपुर में “वंदे गंगा जल संरक्षण जन-अभियान 2026” का विधिवत शुभारंभ किया गया। इस अभियान के तहत 25 मई से 5 जून तक विभिन्न जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएँगे, जिनका उद्देश्य आमजन को जल संरक्षण के प्रति प्रेरित करना है। अभियान के पहले दिन सुबह प्रभात फेरी निकाली गई, जबकि शाम को कस्बे के मुख्य तालाब सिंपल पर तालाब पूजन, दीप प्रज्वलन, श्रमदान और पौधारोपण जैसे कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में नगर पालिका कर्मियों, विभिन्न विभागों के अधिकारियों, कर्मचारियों और बड़ी संख्या में नगरवासियों ने हिस्सा लिया। इसके अतिरिक्त, नगर के विभिन्न स्थानों पर रंगोली बनाकर भी जल बचाने का संदेश दिया गया। उपखंड अधिकारी कालूराम कुम्हार ने इस अवसर पर “जल ही जीवन है” के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि जल संरक्षण को जन-आंदोलन बनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने लोगों से वर्षा जल संचयन अपनाने, पानी का आवश्यकतानुसार उपयोग करने और जल स्रोतों के संरक्षण में सहयोग देने की अपील की। कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संतुलन, जल के सदुपयोग और आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों को सुरक्षित रखने का संदेश दिया गया। इस दौरान ईओ नरपत सिंह राजपुरोहित, विकास अधिकारी प्रमोद दवे सहित स्थानीय नागरिक और नगर पालिका कर्मचारी भी उपस्थित रहे। प्रशासन इस अभियान के माध्यम से जल संरक्षण के प्रति व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा है।4
- पादरू सिवान मार्ग पर स्थित टांडा बेरा रोड का निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यह सड़क एक नई डामर रोड के रूप में बनाई जा रही थी, जिसका काम अभी चल रहा था, लेकिन अब यह बीच में ही रुक गया है। इसकी घोषणा भी डामर रोड तक हुई थी। काम अधूरा होने के कारण लोग अनिश्चितता में हैं कि यह आगे बढ़ेगा या नहीं, और इसकी जानकारी किसी को नहीं है। इस अधूरी सड़क पर आवाजाही बेहद खतरनाक हो गई है, खासकर बाइक सवारों के लिए। उन्हें लगातार यह डर सताता है कि पास से गुजरने वाली बड़ी गाड़ियों के टायर के नीचे से पत्थर निकलकर उनके सिर पर न लग जाए। इसके अलावा, बाइक फिसलने का भी खतरा बना रहता है, जिससे किसी भी वक्त गंभीर हादसा होने की आशंका है। इस स्थिति में सड़क पर बाइक चलाना भी बेहद मुश्किल हो गया है।1
- राजसमंद में दो दिवसीय मध्य प्रदेश राजस्थान केसरी कुश्ती दंगल की शुरुआत हुई है। इस उद्घाटन समारोह में राजसमंद विधायक दिप्ती माहेश्वरी, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता देवकीनंदन गुर्जर सहित खेल जगत से जुड़ी प्रमुख हस्तियाँ, प्रतियोगिता में भाग लेने आए पहलवान और स्थानीय खेल प्रेमी उपस्थित रहे। केसरी कुश्ती दंगल के आयोजनकर्ता शिवा जाट ने बताया कि यह प्रतियोगिता प्रतिवर्ष आयोजित की जाती है और इस वर्ष के लिए सभी आवश्यक तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं। उन्होंने आगे जानकारी दी कि इस दंगल में राजस्थान और मध्य प्रदेश के नामी गिरामी पहलवान अपना खेल कौशल दिखाने के लिए राजसमंद पहुँचे हैं।1
- नांदोली, राजसमंद, राजस्थान से न्यू द्वारकेश न्यूज़ चैनल और नंदलाल पुरबिया ने गंगा दशहरा के पावन अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएँ प्रेषित की हैं। इस संदेश में चारभुजा नाथ, सांवरिया सेठ और भगवान भोलेनाथ के जयकारे लगाते हुए 'बम बम भोले' का उद्घोष भी किया गया है। यह शुभकामना संदेश जनहित में प्रसारित किया गया है।4
- अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो अपने परिवार के साथ जयपुर पहुँचे, जहाँ उनका पारंपरिक राजस्थानी अंदाज़ में भव्य स्वागत किया गया। पिंकसिटी की संस्कृति, विरासत और मेहमाननवाज़ी ने विदेशी मेहमानों और उनके परिवार का विशेष ध्यान आकर्षित किया, जिससे वे यहाँ की शाही पहचान से बेहद प्रभावित हुए। एयरपोर्ट से उनका काफिला शहर के प्रसिद्ध स्थलों जैसे सिटी पैलेस, हवा महल और आमेर फोर्ट की ओर रवाना हुआ। इस हाई-प्रोफाइल दौरे ने जयपुर में एक अंतरराष्ट्रीय माहौल बना दिया, जिसने एक बार फिर दुनिया के सामने राजस्थान की शाही पहचान और समृद्ध संस्कृति को उजागर किया।1
- सोमवार को आबूरोड के लुनियापुरा स्थित डीएफसी रेलवे ट्रैक के पास अचानक भीषण आग लग गई, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। आग की ऊंची-ऊंची लपटें उठती देख रेलवे विभाग में हड़कंप मच गया और तुरंत नगर पालिका फायर ब्रिगेड को सूचित किया गया। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और आग बुझाने का अभियान शुरू किया। करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद दमकल कर्मियों ने आग पर काबू पा लिया। समय रहते आग पर नियंत्रण होने से एक बड़ा हादसा टल गया। इस अभियान में फायर कर्मी मोहम्मद युनुस, चिराग परिहार, अरुण चांवरिया, कमलेश मारू और नवीन कुमार की अहम भूमिका रही, जिनकी तत्परता और मेहनत से आग को फैलने से रोका जा सका। फिलहाल, आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है।1
- गंगा दशमी के अवसर पर सोमवार, 25 मई को राज्य सरकार एवं जिला प्रशासन के निर्देशानुसार मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान के तहत तखतगढ़ में “वंदे गंगा जल संरक्षण जन-अभियान 2026” का विधिवत शुभारंभ किया गया। इस अभियान के अंतर्गत 25 मई से 5 जून तक विभिन्न जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। नगर पालिका प्रशासन की ओर से यह विशेष कार्यक्रम गंवाई तालाब स्थित रावण चौक के घाट संख्या-1 पर आयोजित हुआ। कार्यक्रम में नगर पालिका के निवर्तमान अध्यक्ष ललित रांकावत, निवर्तमान उपाध्यक्ष मनोज नामा, अधिशासी अधिकारी मगराज चौधरी, कार्यालय सहायक रतनलाल सांखला और कनिष्ठ अभियंता आकाश गोमतीवाल सहित कई जनप्रतिनिधि, कर्मचारी तथा नरेगा श्रमिक उपस्थित थे। आयोजन की शुरुआत तालाब घाट पर जल देवता की पूजा-अर्चना एवं दीप प्रज्वलन से हुई, जिसके बाद उपस्थित लोगों ने नारियल चढ़ाकर सरोवर की आरती की और जल संरक्षण एवं पर्यावरण सुरक्षा का संकल्प लिया। अभियान के तहत अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों ने सभी को जल संरक्षण, स्वच्छता एवं पर्यावरण बचाने की शपथ भी दिलाई। इस दौरान घाट परिसर में साफ-सफाई कर श्रमदान किया गया और झाड़ू लगाकर स्वच्छता का संदेश दिया गया। बाद में, जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने नाव के माध्यम से पवित्र सरोवर का भ्रमण किया और जल संरक्षण के महत्व पर चर्चा की। कार्यक्रम में “जल है तो कल है” का संदेश देते हुए आमजन से वर्षा जल संचयन एवं जल बचत में सक्रिय सहभागिता की अपील की गई।4
- सकल जैन समाज ने आज राजसमंद में मध्य प्रदेश के रीवा जिले में जैन संतों के साथ हुई घटना के विरोध में एक मौन रैली निकालकर प्रदर्शन किया। कांकरोली महावीर मंच के तत्वावधान में गांधी सेवा सदन से कलेक्ट्री तक निकाली गई इस रैली के बाद प्रधानमंत्री महोदय के नाम जिला कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में बताया गया कि 20 मई को मध्य प्रदेश के रीवा जिले में जैन संत विद्यासागर जी महाराज के प्रवास के दौरान उनकी दो शिष्याओं, श्रुति माताजी और उपशममति माताजी का दर्दनाक निधन हो गया था। इस मामले में आरोपी राशिद अली शाह को गिरफ्तार कर लिया गया है। हालांकि, मध्य प्रदेश के रीवा जिले में 5 दिन पूर्व हुई जैन संत की संदिग्ध मौत के बाद सकल जैन समाज में जोरदार आक्रोश है। जैन समाज ने सरकार से यह मांग की है कि जैन संतों के प्रवास के दौरान आए दिन ऐसी घटनाएं पेश आ रही हैं, जिसके लिए एक कड़ा कानून बनाया जाए। समाज का कहना है कि यह कानून संतों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकेगा। पूर्व में भी ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं और इन्हीं कारणों से समाज में गहरा आक्रोश व्याप्त है।3